आज से नया वित्त वर्ष शुरू : 1 अप्रैल से बदले कई नियम, FASTag महंगा, टिकट कैंसिलेशन सख्त, टैक्स सिस्टम बदला

नए महीने के साथ नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत हो गई है और 1 अप्रैल से देशभर में कई अहम नियम बदल गए हैं। ये बदलाव सीधे तौर पर आम लोगों की जेब, यात्रा, डिजिटल पेमेंट और टैक्स सिस्टम को प्रभावित करेंगे। रेलवे टिकट कैंसिलेशन से लेकर FASTag, पैन कार्ड, डिजिटल पेमेंट और आयकर व्यवस्था तक कई ऐसे फैसले लागू हुए हैं जिनका असर रोजमर्रा के खर्च और बचत पर पड़ेगा। आइए जानते हैं आज से लागू हुए प्रमुख बदलावों के बारे में।

FASTag हुआ महंगा, कैश पेमेंट खत्म

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए FASTag का वार्षिक पास महंगा हो गया है। अब इसकी कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर कैश भुगतान की सुविधा पूरी तरह खत्म कर दी गई है। अब वाहन चालकों को टोल देने के लिए FASTag, यूपीआई या क्यूआर कोड जैसे डिजिटल माध्यमों का ही इस्तेमाल करना होगा। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन नकद भुगतान करने वालों को बदलाव अपनाना पड़ेगा।

UPI से ATM निकासी भी गिनी जाएगी फ्री लिमिट में

बैंकिंग से जुड़ा एक अहम बदलाव भी आज से लागू हो गया है। अब बिना कार्ड के यूपीआई के जरिए एटीएम से कैश निकालने पर यह ट्रांजैक्शन भी आपके मासिक फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन में शामिल किया जाएगा। यानी यदि आपकी तय फ्री लिमिट खत्म हो जाती है, तो यूपीआई के माध्यम से कैश निकालने पर भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

रेलवे टिकट कैंसिलेशन नियम सख्त

रेलवे यात्रियों के लिए टिकट कैंसिलेशन नियमों में बदलाव किया गया है। अब कंफर्म टिकट पर रिफंड पाने के लिए ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना होगा। पहले यह सीमा 4 घंटे थी। इस बदलाव से यात्रियों को यात्रा योजनाएं पहले तय करनी होंगी, नहीं तो रिफंड मिलना मुश्किल हो सकता है।

बोर्डिंग स्टेशन बदलने की समय सीमा तय

रेलवे ने बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियम भी अपडेट किए हैं। अब यात्री ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से केवल 30 मिनट पहले तक ही ऑनलाइन बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा चार्ट तैयार होने तक उपलब्ध रहती थी। इस बदलाव का मकसद अंतिम समय में होने वाले बदलावों को सीमित करना है।

पैन कार्ड के लिए बढ़ी दस्तावेजों की जरूरत

पैन कार्ड बनवाने के नियम भी बदल गए हैं। अब सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड बनवाना संभव नहीं होगा। आवेदन के समय अतिरिक्त पहचान दस्तावेज जैसे वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य वैध पहचान पत्र देना पड़ सकता है। यह कदम पहचान सत्यापन को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

डिजिटल पेमेंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाया गया है। अब सभी डिजिटल पेमेंट के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। यानी ओटीपी के साथ-साथ पिन, बायोमेट्रिक या फेस आईडी जैसी अतिरिक्त सुरक्षा का इस्तेमाल करना होगा। यूपीआई में यह व्यवस्था पहले से मौजूद थी, लेकिन अब इसे अन्य डिजिटल वॉलेट और पेमेंट गेटवे पर भी लागू किया गया है।

नया आयकर सिस्टम लागू, टैक्स ईयर की नई व्यवस्था

आज से नया आयकर कानून भी प्रभावी हो गया है। इसमें पुराने फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जटिल व्यवस्था को हटाकर एक ही “टैक्स ईयर” का प्रावधान किया गया है। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है।

स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें बरकरार

वित्त मंत्रालय ने अप्रैल से जून तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स योजनाओं की ब्याज दरें जारी कर दी हैं। पब्लिक प्रोविडेंट फंड, सुकन्या समृद्धि योजना और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट जैसी योजनाओं की दरों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।1 अप्रैल से लागू ये बदलाव आम लोगों के दैनिक खर्च, यात्रा और वित्तीय लेन-देन को प्रभावित करेंगे। ऐसे में इन नए नियमों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि अनावश्यक शुल्क और असुविधा से बचा जा सके।

वेस्ट एशिया तनाव का असर : कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़े, एयर टरबाइन फ्यूल भी महंगा; होटल और हवाई यात्रा पर पड़ेगा असर

वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। राजधानी दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर 195.50 रुपये महंगा होकर 2,078.50 रुपये का हो गया है। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत में 218 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो हाल के महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 1 मार्च को भी 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 114.50 रुपये की वृद्धि की गई थी।

 लगातार हो रही बढ़ोतरी से छोटे कारोबारियों और सेवा क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ गया है। खासकर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस और बेकरी जैसे कारोबार कमर्शियल गैस पर निर्भर होते हैं, इसलिए इनकी लागत में सीधा असर पड़ेगा। कमर्शियल गैस महंगी होने से खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। चाय, नाश्ता, थाली, फास्ट फूड और होम डिलीवरी सेवाओं की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत

कमर्शियल गैस महंगी होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ न बढ़ाने का फैसला किया है।

सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, एलपीजी की लागत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।

अगर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में घरेलू सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर ही बिक रहा है। पिछले साल मार्च में केंद्र सरकार द्वारा 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती किए जाने के बाद से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

विमान ईंधन ATF में भी बड़ा उछाल

कमर्शियल गैस के साथ-साथ विमान ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। 1 अप्रैल से दिल्ली में ATF की कीमत बढ़कर करीब 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। पिछले महीने इसकी कीमत 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर थी। इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों की लागत में अचानक इजाफा कर दिया है।

एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में ATF का हिस्सा 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस के लिए संचालन लागत बढ़ना तय है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में हवाई किरायों पर पड़ सकता है। गर्मियों की छुट्टियों के सीजन में यात्रा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

कमर्शियल गैस और ATF दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। एक ओर होटल और रेस्टोरेंट महंगे होंगे, तो दूसरी ओर हवाई यात्रा भी महंगी हो सकती है। इससे सेवा क्षेत्र में लागत बढ़ेगी और इसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी रहने से ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।