ईरान में फंसे भारतीयों के लिए नई एडवाइजरी जारी : जल्द देश छोड़ने की सलाह, दूतावास ने कहा- बिना समन्वय सीमा तक न जाएं

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए बुधवार को नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद भारतीयों से अपील की है कि वे स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित रास्तों से देश छोड़ने की तैयारी करें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोशिश बिना दूतावास से सलाह-मशविरा और समन्वय के नहीं की जाए। यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी हुई है, जब अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ईरान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी पोस्ट में कहा कि सभी भारतीय नागरिक सतर्क रहें और दूतावास द्वारा सुझाए गए मार्गों का ही इस्तेमाल करें। पोस्ट में कहा गया, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास के साथ पहले से सलाह-मशविरा और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश न की जाए।” 

दूतावास ने यह भी कहा कि स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नागरिक लगातार आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद के लिए इमरजेंसी संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। इनमें +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359 शामिल हैं। इसके अलावा cons.tehran@mea.gov.in पर ईमेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। दूतावास ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अपने लोकेशन की जानकारी साझा करते रहें ताकि जरूरत पड़ने पर निकासी की व्यवस्था की जा सके। इससे पहले मंगलवार शाम को भी भारतीय दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें ईरान में मौजूद भारतीयों को अगले 48 घंटे तक जहां हैं, वहीं रहने की सलाह दी गई थी। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और संभावित हमलों की आशंका को देखते हुए लोगों को बाहर निकलने से बचने को कहा गया था। 

हालांकि, अब संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद दूतावास ने नई सलाह जारी करते हुए नियंत्रित तरीके से देश छोड़ने का विकल्प खुला रखा है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी समाप्त करने की समयसीमा का पालन नहीं करता, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिकी समयानुसार रात 8 बजे की डेडलाइन दी गई थी, जो भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे थी। इस चेतावनी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी थी।

संघर्ष के बीच कितने भारतीय और क्या है ताजा स्थिति

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद जब संघर्ष शुरू हुआ, उस समय ईरान में छात्रों समेत करीब 9,000 भारतीय मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या मेडिकल और तकनीकी शिक्षा ले रहे छात्रों की बताई जा रही है। इसके अलावा कुछ कारोबारी, पेशेवर और धार्मिक यात्राओं पर गए लोग भी शामिल हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने चरणबद्ध तरीके से अपने नागरिकों की वापसी शुरू की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक लगभग 1,800 भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। इनमें से कई को पड़ोसी देशों के रास्ते निकाला गया, जबकि कुछ को विशेष उड़ानों के जरिए वापस लाया गया। हालांकि बड़ी संख्या में भारतीय अभी भी ईरान के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं। इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के संपर्क में है।

इसी बीच अमेरिका और ईरान ने मंगलवार को दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई। यह समझौता अमेरिकी समयसीमा खत्म होने से करीब एक घंटे पहले हुआ। संघर्ष-विराम के बाद भी स्थिति को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में सैन्य तैयारियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यही वजह है कि भारत ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने और जल्द सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ने की सलाह दी है।

भारतीय दूतावास ने यह भी कहा है कि नागरिक अफवाहों से दूर रहें और किसी भी तरह की यात्रा से पहले आधिकारिक पुष्टि करें। साथ ही, पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज हमेशा तैयार रखें, ताकि निकासी की स्थिति में देरी न हो। दूतावास ने छात्रों को विशेष रूप से सलाह दी है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन और दूतावास दोनों के संपर्क में बने रहें।

सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त निकासी उड़ानों की भी व्यवस्था की जा सकती है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने, संपर्क में बने रहने और सुझाए गए मार्गों के जरिए जल्द देश छोड़ने की तैयारी करने को कहा है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर : उत्तर भारत में झमाझम बारिश जारी, पहाड़ों पर बर्फबारी, खराब मौसम से जनजीवन अस्त-व्यस्त

देश में एक साथ सक्रिय हुए दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण उत्तर भारत का मौसम बदल गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजधानी दिल्ली, उत्तराखंड पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और मध्य प्रदेश झमाझम बारिश जारी है। दक्षिण के राज्यों में भी मौसम बिगड़ा हुआ है। पहाड़ी राज्यों में जहां बर्फबारी हो रही है, वहीं मैदानी इलाकों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। उत्तराखंड के चारों धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में लगातार बर्फबारी दर्ज की जा रही है। ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फ की मोटी परत जमने से ठंड एक बार फिर बढ़ गई है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी है। उत्तराखंड के सभी जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। देहरादून में तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। दो दिन पहले जहां अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास था, वहीं अब यह घटकर 24 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत और ऊधम सिंह नगर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 

पहाड़ी मार्गों पर फिसलन बढ़ने और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं हिमाचल प्रदेश में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। नारकंडा, कुफरी और लाहौल-स्पीति में सुबह बर्फबारी हुई, जबकि इससे पहले रातभर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने राज्य के पांच जिलों में ओलावृष्टि और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने अचानक करवट ली है। लखनऊ, बाराबंकी, जौनपुर समेत कई जिलों में सुबह तेज बारिश हुई। मंगलवार रात लखनऊ में तेज आंधी के दौरान एक पेड़ कार पर गिर गया, जिससे नुकसान हुआ। मौसम विभाग ने राज्य के 47 जिलों में बारिश और 9 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

कई राज्यों में अलर्ट, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की आशंका

राजस्थान में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर साफ दिखाई दे रहा है। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर समेत कई जिलों में तूफानी बारिश के साथ ओले गिरे हैं। कुछ इलाकों में एक इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है। भरतपुर जिले में बिजली गिरने से एक मकान में रखे सिलेंडर में विस्फोट हो गया, जिससे स्थानीय स्तर पर नुकसान हुआ। लगातार बारिश के कारण तापमान में करीब 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है।उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर, गोंडा, जौनपुर, अलीगढ़ समेत करीब 20 जिलों में तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश जारी है। मौसम विभाग ने 9 जिलों में ओले गिरने की चेतावनी दी है। पिछले सप्ताह आंधी और बिजली गिरने की घटनाओं में 15 लोगों की मौत भी हो चुकी है, जिससे प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मध्य प्रदेश में तीन साइक्लोनिक सिस्टम सक्रिय होने के कारण मौसम अस्थिर बना हुआ है। भोपाल, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना और रीवा समेत 18 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। कई इलाकों में बादल छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट आई है।

उधर, जम्मू-कश्मीर में भी खराब मौसम का असर देखने को मिला है। रामबन इलाके में भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद हो गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने सड़क साफ करने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक उत्तर भारत में मौसम खराब बना रह सकता है। 8 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना है। इस दौरान 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश के साथ ओले गिरने की आशंका जताई गई है।

9 अप्रैल को पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बर्फबारी जारी रह सकती है। 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों में असम और मेघालय के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मध्य और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। लगातार बदलते मौसम के बीच प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने को कहा है।

भारत समेत दुनिया के लिए राहत : 40 दिन बाद रुकी जंग, अमेरिका-ईरान में 2 हफ्ते का युद्धविराम, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, बाजारों में लौटी तेजी

करीब 40 दिन से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण जंग के बाद दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों देशों ने दो हफ्तों के अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख की अपील के बाद लिया गया। इस बीच चीन की आखिरी समय की कूटनीतिक पहल ने भी समझौते का रास्ता साफ करने में अहम भूमिका निभाई। सीजफायर से पहले हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो अमेरिका ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। इस चेतावनी के बाद बातचीत तेज हुई और पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते के युद्धविराम का प्रस्ताव सामने आया, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया। समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल हमले रोकेंगे, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई बंद करेगा। 

इस अवधि में होर्मुज स्ट्रेट से तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। ईरानी सेना ‘कंट्रोल्ड ट्रांजिट’ व्यवस्था के तहत शिपिंग को सुरक्षा देगी। जंग के दौरान इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई थी। अब मार्ग खुलने से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। समझौते के अनुसार 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होगी। ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा है, जिस पर आगे चर्चा की जाएगी। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और इसे ईरान की शर्तों पर हुआ समझौता बताया है।

दोनों पक्ष इस युद्धविराम को आगे स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम मान रहे हैं। सीजफायर की खबर का असर तुरंत वैश्विक बाजारों में देखने को मिला। एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 4 प्रतिशत से अधिक चढ़ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया। निवेशकों का भरोसा लौटने से बाजारों ने राहत की सांस ली। मुद्रा बाजार में भी बदलाव दिखा और अमेरिकी डॉलर जापानी येन तथा दक्षिण कोरियाई वॉन के मुकाबले कमजोर हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक तेल की कीमतों में गिरावट और युद्धविराम की उम्मीद ने निवेशकों का जोखिम कम किया है।

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल में गिरावट, इजराइल ने लेबनान पर जारी रखी सख्ती

सीजफायर के तहत अगले दो हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस दौरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना की निगरानी में होगी। ईरान के प्रस्ताव के मुताबिक इस मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज से करीब 20 लाख डॉलर का शुल्क लिया जाएगा, जिसे ओमान के साथ साझा किया जाएगा। ट्रम्प पहले इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने की शर्त पर अड़े थे, जिसके बाद यह समझौता संभव हो सका।

होर्मुज स्ट्रेट खुलने के फैसले का असर तेल बाजार पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में 15 से 16 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। 

ऊर्जा बाजार में यह गिरावट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और सीजफायर की अवधि खत्म होने के बाद हालात फिर बदल सकते हैं। इस बीच इजराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि इजराइल ईरान के खिलाफ दो हफ्ते तक हमले रोकने पर सहमत है, लेकिन लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रह सकती है। 

इजराइल ने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु, मिसाइल और क्षेत्रीय गतिविधियों के मामले में संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इजराइल ने शर्त रखी है कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खोलना होगा और अमेरिका, इजराइल व अन्य देशों पर सभी हमले बंद करने होंगे। बयान में यह भी कहा गया कि फिलहाल ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन भविष्य में खतरे की आशंका को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। ऐसे में दो हफ्ते का यह सीजफायर भले ही राहत लेकर आया हो, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए आगे की बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है।

UP cabinet meeting लोक भवन में योगी कैबिनेट के 22 फैसले : शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाया, जनहित के कई प्रस्तावों को मंजूरी 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में राज्य के विकास, सामाजिक सरोकार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इस बैठक को नीतिगत दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक के बाद मंत्रियों ने मीडिया से बातचीत में फैसलों की जानकारी दी और विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि कैबिनेट में 20 से अधिक प्रस्तावों पर विचार किया गया और सभी को मंजूरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित भारतीय संविधान के निर्माताओं की प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेश भर में स्थापित प्रतिमाओं के ऊपर छत बनाई जाएगी, चबूतरे विकसित किए जाएंगे और जहां आवश्यक होगा वहां नवीनीकरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान 14 अप्रैल से शुरू किया जाएगा, ताकि संविधान निर्माता को सम्मान देने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों का भी बेहतर विकास हो सके।

बैठक के बाद सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मुद्दों पर भी बयान सामने आए। ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा की सरकार रही, तब कानून-व्यवस्था बिगड़ी और दंगे हुए। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता उस घटना को आज भी नहीं भूली है। उनके अनुसार सपा शासन में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर रही, जबकि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।

महिला आरक्षण को लेकर भी उपमुख्यमंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक उनके अधिकारों से वंचित रखा गया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि आधी आबादी को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार का कदम ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार भी कई योजनाएं चला रही है और आगे भी इस दिशा में काम जारी रहेगा।

इसी दौरान मदरसा कानून को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मदरसा बोर्ड से संबंधित कोई नया विधेयक नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस कानून को लेकर चर्चा हो रही है, वह 2016 में सपा सरकार के दौरान पारित किया गया था और बाद में कैबिनेट से उसे मंजूरी भी मिल चुकी थी। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।

शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह हुआ

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश के करीब दो लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और कार्यरत कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।

मंत्री जयवीर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ‘जंगलराज’ को नहीं भूली है और सपा शासनकाल के दौरान हुए अत्याचार लोगों की स्मृति में अभी भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी और अपराधियों के हौसले बुलंद थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में सुरक्षा और विकास का माहौल बनाया है, जिसे जनता समर्थन दे रही है।

जनहित के मुद्दों पर फैसलों का दावा

मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि कैबिनेट ने जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य विकास को गति देना और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करना है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बिना तथ्यों के भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े फैसलों पर विशेष ध्यान दिया है। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों को सरकार ने विकास और सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम बताया है। प्रतिमाओं के संरक्षण अभियान से लेकर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी तक कई निर्णय सीधे तौर पर समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित करेंगे। साथ ही सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अपनी नीतियों को जनहित में बताया है। आने वाले दिनों में इन फैसलों के क्रियान्वयन पर भी सरकार की नजर रहेगी, ताकि घोषित योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सके।