प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आए IITian बाबा अभय सिंह ने रचाई शादी, पत्नी प्रतीका संग लिए सात फेरे
प्रयागराज महाकुंभ-2025 के दौरान चर्चा में आए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह आध्यात्म नहीं बल्कि उनका निजी जीवन है। लंबे समय तक साधु वेश में रहने और वैराग्य की बातें करने वाले अभय सिंह ने शादी कर ली है। इस बात का खुलासा खुद उन्होंने सोमवार को किया, जब वह हरियाणा के झज्जर में भगवा वस्त्र पहने पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रतीका भी मौजूद थीं। अचानक सामने आई इस खबर ने उनके अनुयायियों और स्थानीय लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। अभय सिंह को लोग IITian बाबा के नाम से जानते हैं। महाकुंभ के दौरान उनका अंदाज, शिक्षा और आध्यात्मिक विचारों का मिश्रण लोगों को आकर्षित कर गया था। बताया जाता है कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और फिर साधु जीवन की ओर मुड़ गए। महाकुंभ में उनके प्रवचन और जीवन शैली सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी। इसके बाद से ही वह लगातार चर्चा में बने रहे।
सोमवार को जब अभय सिंह हरियाणा के झज्जर पहुंचे तो उनके साथ एक महिला भी थीं, जिन्हें उन्होंने अपनी पत्नी प्रतीका बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में आध्यात्म और गृहस्थ दोनों का संतुलन जरूरी है और उन्होंने सोच-समझकर विवाह का निर्णय लिया है। भगवा वस्त्रों में ही पत्नी के साथ उनकी मौजूदगी ने लोगों को चौंका दिया। कई लोगों ने इसे आध्यात्मिक जीवन की नई परिभाषा के तौर पर देखा, तो कुछ ने इसे उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत बताया।
अभय सिंह ने बातचीत में कहा कि विवाह का निर्णय अचानक नहीं बल्कि लंबे विचार के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन भी साधना का एक रूप हो सकता है और समाज में रहकर आध्यात्मिक संदेश देना अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी प्रतीका उनके विचारों को समझती हैं और दोनों मिलकर आध्यात्मिक व सामाजिक कार्य करेंगे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, झज्जर पहुंचने के बाद कई लोग उनसे मिलने आए। लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके नए जीवन की शुरुआत को लेकर शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर भी इस खबर के सामने आने के बाद प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताया तो कुछ ने सवाल उठाए कि साधु जीवन के बाद शादी का फैसला क्यों लिया गया।
गृहस्थ जीवन और आध्यात्म का संतुलन बनाने की बात
अभय सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संन्यास नहीं लिया था, बल्कि आध्यात्मिक जीवन अपनाया था। इसलिए विवाह उनके सिद्धांतों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में कई संतों ने गृहस्थ रहते हुए भी आध्यात्मिक ऊंचाइयों को हासिल किया है। उनका मानना है कि आज के समय में लोगों को जीवन के हर पहलू में संतुलन की जरूरत है और वही संदेश वह देना चाहते हैं।
पत्नी प्रतीका भी उनके साथ शांत मुद्रा में नजर आईं। हालांकि उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन बताया जा रहा है कि वह भी आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। अभय सिंह ने कहा कि दोनों मिलकर समाज सेवा, शिक्षा और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम चलाने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में वह देश के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे और लोगों से संवाद करेंगे। महाकुंभ-2025 के दौरान IITian बाबा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी थी। उनके विचार, सादगी और पढ़े-लिखे साधु की छवि ने युवाओं को खास तौर पर आकर्षित किया था। अब शादी की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर वह चर्चा में हैं। उनके इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन यह तय है कि अभय सिंह ने अपने जीवन का नया अध्याय शुरू कर दिया है।
झज्जर में उनकी मौजूदगी और पत्नी के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आना इस बात का संकेत है कि वह अपने निजी जीवन को लेकर खुलकर सामने आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आगे भी वह भगवा वस्त्रों में ही रहेंगे और आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हुए गृहस्थ जीवन निभाएंगे। इस घोषणा के साथ ही IITian बाबा अभय सिंह की कहानी ने नया मोड़ ले लिया है, जो आने वाले दिनों में और चर्चाओं का विषय बन सकती है।

