निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट का अनुमान : इस साल कमजोर रहेगा मानसून, खेती और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

देश में इस साल मानसून को लेकर पहली बड़ी भविष्यवाणी सामने आ गई है और शुरुआती संकेत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपना पहला अनुमान जारी करते हुए कहा है कि इस बार देश में कुल बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। एजेंसी के मुताबिक जून से सितंबर तक चलने वाले पूरे मानसून सीजन में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के करीब 94 प्रतिशत रह सकती है, जो सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम है। स्काइमेट ने अपने पूर्वानुमान में एल नीनो के संभावित प्रभाव को भी कमजोर मानसून की बड़ी वजह बताया है। एजेंसी के अनुसार चार महीनों के दौरान देशभर में औसतन लगभग 817 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है, हालांकि इसमें पांच प्रतिशत तक ऊपर या नीचे रहने की गुंजाइश भी जताई गई है। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस साल सूखे की आशंका करीब 30 प्रतिशत तक है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत संभावना सामान्य से कम बारिश की बनी हुई है। अब सबकी नजर भारत मौसम विभाग के आधिकारिक अनुमान पर है, जो इस महीने के आखिर तक जारी किया जा सकता है। मासिक पूर्वानुमान की बात करें तो स्काइमेट ने संकेत दिए हैं कि मानसून का पैटर्न असमान रह सकता है। जून में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद जताई गई है। इस महीने में एलपीए का करीब 101 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है। जून के सामान्य रहने की संभावना 40 प्रतिशत बताई गई है, जबकि 40 प्रतिशत संभावना सामान्य से कम रहने की भी है। जून का एलपीए 165.3 मिलीमीटर है, जिससे शुरुआती राहत मिल सकती है।

जुलाई में स्थिति थोड़ी कमजोर रहने की आशंका जताई गई है। स्काइमेट के मुताबिक इस महीने बारिश एलपीए के करीब 95 प्रतिशत तक रह सकती है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आती है। जुलाई के लिए सामान्य और कम बारिश दोनों की संभावना 40-40 प्रतिशत बताई गई है। यह महीना खरीफ फसलों की बुवाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में कमजोर बारिश चिंता बढ़ा सकती है। जुलाई का एलपीए 280.5 मिलीमीटर है।

अगस्त में भी राहत के संकेत नहीं हैं। एजेंसी के अनुसार इस महीने बारिश एलपीए के करीब 92 प्रतिशत तक रह सकती है।

अगस्त में कम बारिश की संभावना करीब 60 प्रतिशत बताई गई है। यह महीना भी खेती के लिए अहम होता है और इस दौरान बारिश में कमी फसलों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। अगस्त का एलपीए 254.9 मिलीमीटर है। सितंबर में भी मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। स्काइमेट के मुताबिक इस महीने औसत बारिश एलपीए के 89 प्रतिशत तक रह सकती है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है। सितंबर में कम बारिश की संभावना सबसे ज्यादा 79 प्रतिशत बताई गई है। सितंबर का एलपीए 167.9 मिलीमीटर है। इस तरह जून को छोड़कर बाकी तीन महीनों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई गई है। 

जुलाई और अगस्त महीने खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिए सबसे अहम 

कमजोर मानसून का असर खेती पर पड़ सकता है। जुलाई और अगस्त महीने खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिए सबसे अहम होते हैं। इन महीनों में बारिश कम रहने पर धान, दालें और तिलहन जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। खासकर मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कुल बारिश ही नहीं, बल्कि उसका समय और वितरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि मानसून कम होने के बावजूद समय पर और संतुलित तरीके से बारिश होती है तो नुकसान सीमित रह सकता है। लेकिन लंबे ब्रेक या असमान बारिश से जलाशयों, भूजल स्तर और कृषि उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर ग्रामीण मांग और महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है।

क्षेत्रीय पूर्वानुमान में स्काइमेट ने बताया है कि जून में इंडो-गंगेटिक मैदान और पश्चिमी घाट के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। जुलाई में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। अगस्त में उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में कम बारिश की आशंका जताई गई है। सितंबर में दक्षिण और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर बाकी अधिकांश क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

कुल मिलाकर स्काइमेट के शुरुआती अनुमान से संकेत मिलते हैं कि 2026 का मानसून संतुलित नहीं रह सकता। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो इसका असर खेती, जल संसाधनों और देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में मौसम विभाग के आधिकारिक अनुमान और मानसून की प्रगति पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

सीए फाइनल परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव : अब साल में सिर्फ दो बार होगी परीक्षा, मई 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था

चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) ने CA फाइनल परीक्षा के आयोजन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस निर्णय के तहत अब चार्टर्ड अकाउंटेंट फाइनल परीक्षाएं वर्ष में तीन बार के बजाय केवल दो बार आयोजित की जाएंगी। यह बदलाव मई 2026 परीक्षा सत्र से प्रभावी होगा। संस्थान का मानना है कि इस कदम से परीक्षा प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित होगी और छात्रों को तैयारी के लिए बेहतर समय मिल सकेगा। अब तक CA फाइनल परीक्षाएं जनवरी, मई और सितंबर महीने में आयोजित होती थीं। लेकिन नए फैसले के बाद मई 2026 से परीक्षाएं केवल मई और नवंबर माह में ही आयोजित की जाएंगी। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव हितधारकों से मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर किया गया है। लंबे समय से छात्र और शिक्षाविद परीक्षा के बीच कम अंतराल होने को लेकर चिंता जता रहे थे, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

संस्थान का कहना है कि बार-बार परीक्षा आयोजित होने से छात्रों पर लगातार तैयारी का दबाव बना रहता था। कई अभ्यर्थियों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल पाता था, जिससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ता था। इसके अलावा परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता था। ऐसे में वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित करने से न केवल छात्रों को तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा बल्कि संस्थान भी परीक्षा संचालन को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा कर सकेगा।

संयुक्त सचिव (परीक्षा) आनंद कुमार चतुर्वेदी द्वारा जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया है कि यह नई व्यवस्था मई 2026 से लागू होगी और भविष्य में भी इसी पैटर्न का पालन किया जाएगा। संस्थान ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक संतुलित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी बेहतर होगी। इस बदलाव से छात्रों को अपनी तैयारी की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। पहले कम अंतराल के कारण कई छात्र जल्दबाजी में परीक्षा देने के लिए मजबूर हो जाते थे, जबकि अब उन्हें विषयों की गहराई से तैयारी करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे परीक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है और सफल अभ्यर्थियों की दक्षता भी बेहतर होगी।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू 

इसी बीच संस्थान ने नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू कर दिया है। यह कार्यक्रम नए योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। भाग लेने वाली कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए समय-सीमा आधिकारिक पोर्टल पर जारी कर दी गई है। संस्थान ने सभी केंद्रों पर एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी शुरू किया है।

इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्लेसमेंट प्रक्रिया, करियर विकल्प, नियोक्ताओं की अपेक्षाएं, साक्षात्कार की तैयारी और व्यावहारिक मार्गदर्शन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप मार्गदर्शन देना है। संस्थान का मानना है कि इससे उम्मीदवारों की सफलता दर बढ़ेगी और उन्हें बेहतर कंपनियों में अवसर मिल सकेंगे।

इस बार कैंपस प्लेसमेंट में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित कंपनियों ने भागीदारी की है। भर्ती गतिविधियां देश के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और जयपुर में आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा लगभग 20 छोटे केंद्रों पर भी प्लेसमेंट प्रक्रिया संचालित की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।

संस्थान के अनुसार, साक्षात्कार 6 अप्रैल से 17 अप्रैल तक चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जा रहे हैं। अलग-अलग शहरों में अलग तिथियों पर इंटरव्यू होंगे, जिससे उम्मीदवार अपनी सुविधा के अनुसार भाग ले सकें। इस बार कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अग्रणी भारतीय कॉरपोरेट समूहों ने भर्ती में रुचि दिखाई है, जिससे प्लेसमेंट प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उत्साह देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, CA फाइनल परीक्षा पैटर्न में बदलाव और साथ ही कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम की शुरुआत को छात्रों के लिए दोहरी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर परीक्षा के बीच पर्याप्त अंतराल से तैयारी बेहतर होगी, वहीं दूसरी ओर प्लेसमेंट कार्यक्रम के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को करियर की नई दिशा मिलने की उम्मीद है। संस्थान का मानना है कि इन दोनों कदमों से चार्टर्ड अकाउंटेंसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य को मजबूती मिलेगी।

कनाडा के नए इमिग्रेशन नियम लागू, पासपोर्ट-नागरिकता शुल्क बढ़ा, सुपर वीजा में राहत, प्रांतों को मिले ज्यादा अधिकार 

कनाडा जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकार ने इमिग्रेशन से जुड़े कई नियमों में संशोधन करते हुए पासपोर्ट शुल्क बढ़ा दिया है, नागरिकता फीस में बदलाव किया है और सुपर वीजा कार्यक्रम को आसान बना दिया है। इन नए नियमों का असर वहां जाने वाले नागरिकों, स्थायी निवास के इच्छुक आवेदकों और परिवार के सदस्यों को बुलाने की योजना बना रहे लोगों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और आवेदनों के निपटारे में तेजी लाना है। नए प्रावधानों के तहत 10 साल की वैधता वाले वयस्क पासपोर्ट की कीमत बढ़ाकर 163.50 कैनेडियन डॉलर कर दी गई है, जो पहले 160 डॉलर थी। वहीं पांच साल के वयस्क पासपोर्ट की कीमत 122.50 कैनेडियन डॉलर तय की गई है। शुल्क में यह बढ़ोतरी मामूली जरूर है, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदकों को देखते हुए इसका असर व्यापक होगा। सरकार ने इस बढ़ोतरी के साथ एक नई सुविधा भी जोड़ी है, जिसके तहत पासपोर्ट आवेदन 30 दिनों के भीतर निपटाने की गारंटी दी गई है।

अगर तय समय के भीतर आवेदन का निपटारा नहीं होता है, तो आवेदक को जमा की गई पूरी फीस स्वतः वापस कर दी जाएगी। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं आवेदनों पर लागू होगी जिनमें सभी जरूरी दस्तावेज पूरे और सही तरीके से जमा किए गए हों। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रक्रिया में देरी कम होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

नागरिकता से जुड़ी फीस में भी बदलाव किया गया है। नागरिकता के अधिकार के लिए अब 123 कैनेडियन डॉलर की फीस तय की गई है। यह बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन इसे व्यापक प्रशासनिक सुधारों का हिस्सा बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकता प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए संसाधनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

सरकार ने परिवार आधारित यात्रा को आसान बनाने के उद्देश्य से सुपर वीजा कार्यक्रम में भी ढील दी है। नए नियमों के अनुसार, प्रायोजक अब पिछले दो कर वर्षों में से किसी एक वर्ष में आय की शर्त पूरी करके पात्र माने जाएंगे। इसके अलावा माता-पिता या दादा-दादी की आय को भी कुल आय में जोड़कर पात्रता पूरी की जा सकेगी। इससे परिवारों के लिए अपने बुजुर्ग सदस्यों को बुलाना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा। सुपर वीजा के तहत माता-पिता और दादा-दादी हर बार यात्रा पर कनाडा में पांच साल तक रह सकते हैं। यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए राहत मानी जा रही है जो लंबे समय तक अपने परिजनों के साथ रहना चाहते हैं। सरकार का कहना है कि इससे परिवारों का पुनर्मिलन आसान होगा और अस्थायी यात्राओं का दबाव भी कम होगा।

प्रांतों को अधिक अधिकार, विदेशी कर्मचारियों के नियम भी बदले

नए बदलावों के तहत प्रांतों और क्षेत्रों को इमिग्रेशन से जुड़े फैसलों में अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब प्रांतीय प्रशासन यह तय कर सकेंगे कि आवेदक वास्तव में स्थानीय स्तर पर बसने का इरादा रखते हैं या नहीं और क्या वे आर्थिक रूप से खुद को स्थापित कर सकते हैं। पहले इस तरह के आकलन में संघीय अधिकारियों की बड़ी भूमिका होती थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी काफी हद तक प्रांतों को सौंप दी गई है। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे क्योंकि प्रांत अपने श्रम बाजार और आर्थिक जरूरतों को बेहतर समझते हैं। इससे रोजगार आधारित इमिग्रेशन में भी संतुलन आने की उम्मीद जताई जा रही है।

आर्थिक आधार पर आने वाले प्रवासियों के लिए भी एक अहम बदलाव किया गया है। अब स्थायी निवास मिलने के बाद छह साल तक संघीय सहायता से मिलने वाली बसावट सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा। हालांकि अप्रैल 2027 से इस समय सीमा को घटाकर पांच साल कर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि शुरुआती वर्षों में सहायता देकर प्रवासियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कामगारों की कमी को देखते हुए विदेशी कर्मचारि

डेडलाइन, धमकी और बढ़ता तनाव : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को फिर दी तबाही की चेतावनी, चार घंटे में ढांचे मिटाने का दावा

पूरी दुनिया हर सुबह सोचती है अमेरिका ईरान के बीच जारी युद्ध थम जाएगा लेकिन उसे कोई अभी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रुकने के लिए तैयार नहीं है वहीं ईरान भी अमेरिका को लगातार धमकी दे रहा है। इसी बीच सोमवार को ट्रंप ने एक बार फिर तीखा बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान मंगलवार रात तक समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका चार घंटे के भीतर ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना के पास ऐसी योजना है जिसके तहत ईरान के अहम ढांचे, पुलों, बिजली संयंत्रों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ताकत के दम पर ईरान के हर पुल को ध्वस्त किया जा सकता है और उसके बिजली संयंत्रों को पूरी तरह निष्क्रिय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “हमारे पास योजना तैयार है। 

अगर हम चाहें तो मंगलवार रात 12 बजे तक ईरान के हर पुल को खत्म कर सकते हैं। बिजली संयंत्रों को बंद कर दिया जाएगा, जला दिया जाएगा और फिर कभी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यह सब चार घंटे के भीतर भी संभव है।” ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी मानी जा रही है। ट्रंप ने ईरान को पूर्वी समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे तक समझौते के लिए तैयार होने की समयसीमा भी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलता है, तो अमेरिका बातचीत के रास्ते आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते की स्थिति में अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करने को तैयार है। ट्रंप ने कहा, “अगर वे समझौता करते हैं, तो हम उनके राष्ट्र के पुनर्निर्माण में भी शामिल हो सकते हैं।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक ढांचे पर हमले की स्थिति में क्या यह युद्ध अपराध माना जाएगा, तो ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी कार्रवाई को युद्ध अपराध नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर लोग “आजादी के लिए तकलीफ सहने को तैयार हैं” और वे चाहते हैं कि अमेरिका और दबाव बनाए।

इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी ट्रंप के साथ खड़े होकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब तक जो हमले हुए हैं, वे सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले समय में हमले और तेज हो सकते हैं। हेगसेथ ने कहा, कल आज से भी ज्यादा हमले होंगे। उसके बाद ईरान के पास फैसला लेने का विकल्प होगा। उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति ढिलाई नहीं बरतते।

ईरान ने 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराया, तनाव और बढ़ा

तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने कहा कि वह अस्थायी समाधान नहीं चाहता बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दबाव और धमकियों के बीच कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस रुख ने दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया है। अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का दबाव भी बढ़ा दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। 

अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने तेल की आवाजाही में रुकावट जारी रखी, तो नागरिक ठिकानों समेत बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि अब ईरान को स्पष्ट विकल्प दिया गया है या तो समझौता करे या फिर व्यापक सैन्य कार्रवाई का सामना करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीति चरणबद्ध तरीके से दबाव बढ़ाने की है। 

उनके मुताबिक, “आज के हमले सिर्फ शुरुआत हैं, आगे इससे कहीं ज्यादा तीव्र कार्रवाई हो सकती है।” ट्रंप प्रशासन का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कई देशों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। इसके बावजूद दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है, जिससे हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं।