Ganga Expressway : यूपी का सबसे लंबा 594 किलोमीटर गंगा एक्सप्रेसवे का आज पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 12 जिलों से होकर गुजरेगा

इंतजार खत्म । आखिरकार उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे आज शुरू होने जा रहा है। यूपी आज एक ऐतिहासिक बुनियादी ढांचा उपलब्धि का साक्षी बनने जा रहा है, जब नरेंद्र मोदी हरदोई में यूपी के सबसे लंबे और आधुनिक एक्सप्रेसवे में से एक गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना सिर्फ एक सड़क नहीं बल्कि प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास की नई धुरी मानी जा रही है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी हिस्सों से जोड़ते हुए एक हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण करता है, जो प्रदेश की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखता है। कार्यक्रम को लेकर हरदोई में व्यापक तैयारियां की गई हैं और जनसभा स्थल को भव्य रूप दिया गया है।

इस एक्सप्रेसवे का 99 किलोमीटर हिस्सा हरदोई जिले से होकर गुजरता है, जिससे यह क्षेत्र सीधे विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा। 

कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं एसपीजी के साथ हजारों पुलिसकर्मी तैनात हैं। बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है, जिससे आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। इस कार्यक्रम में करीब डेढ़ लाख लोगों के जुटने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सीधे हरदोई पहुंचेंगे, जहां वे इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। यह दौरा राजनीतिक और विकासात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया गंगा एक्सप्रेसवे 6-लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे है, जिसे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। 

यह मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी – जहां पहले 10 से 12 घंटे लगते थे, अब यह दूरी लगभग 6 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे यात्रियों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। परियोजना की एक खास विशेषता शाहजहांपुर में बनी 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी है, यह देश का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है जहां जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान भी उतर सकते हैं। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। गंगा एक्सप्रेसवे को एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है । इसके किनारे करीब 2,635 हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब बनाए जाएंगे, जिससे उद्योगों को नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

गंगा एक्सप्रेसवे से प्रदेश की बदलेगी विकास की तस्वीर

गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। यह परियोजना सिर्फ यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का काम करेगी। सबसे बड़ा फायदा लॉजिस्टिक्स सेक्टर को होगा । माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे प्रदेश में निवेश आकर्षित होगा और नए उद्योग स्थापित होंगे। किसानों के लिए भी यह एक्सप्रेसवे बेहद फायदेमंद साबित होगा । उन्हें अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में कम समय लगेगा और बेहतर कीमत मिलेगी। 

इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। पर्यटन के क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा । मेरठ से प्रयागराज तक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय कारोबार को फायदा मिलेगा। रोजगार के लिहाज से भी यह परियोजना अहम है, निर्माण के दौरान हजारों लोगों को काम मिला और आगे भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बनेंगे। 

यह एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार कॉरिडोर से जुड़कर एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बनेगा। इससे उत्तर प्रदेश में पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मजबूत होगी। गंगा एक्सप्रेसवे एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है । यह न केवल आवागमन को आसान बनाएगा बल्कि औद्योगिक विकास, कृषि उन्नति और क्षेत्रीय संतुलन को भी नई दिशा देगा। आने वाले समय में यह परियोजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ साबित हो सकती है।

गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होते ही यूपी में हो जाएंगे आठ बड़े एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और मजबूत हो गया है। इस नए कॉरिडोर के जुड़ने के बाद अब प्रदेश में कुल 8 प्रमुख एक्सप्रेसवे हो गए हैं, जो राज्य को देश के सबसे बेहतर सड़क नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल करते हैं। इनमें यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (आंशिक रूप से चालू), दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और अब गंगा एक्सप्रेसवे शामिल हैं। 

इन सभी परियोजनाओं ने मिलकर उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का मजबूत जाल तैयार किया है। जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी। साथ ही यह एक्सप्रेसवे पश्चिम, मध्य और पूर्वी यूपी को एक साथ जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा। इन एक्सप्रेसवे के जरिए औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। आने वाले समय में प्रस्तावित और निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे भी जुड़ने से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे हब बनता जा रहा है।

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