हिमाचल दिवस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह की किन्नौर को बड़ी सौगात : महिलाओं को 1500 रुपये मासिक सहायता देने का किया एलान

हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य सरकार ने बड़ा सामाजिक संदेश देते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में अहम घोषणा की है। बुधवार को किन्नौर जिले के रिकांग पियो में आयोजित राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने की योजना का ऐलान किया। इस घोषणा से प्रदेश की हजारों महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, खासकर दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को इससे राहत मिलेगी। हिमाचल प्रदेश हर साल 15 अप्रैल को अपना स्थापना दिवस मनाता है। वर्ष 1948 में 30 से अधिक रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ था। इस दिन को पूरे प्रदेश में गौरव और विकास के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस बार राज्य स्तरीय कार्यक्रम किन्नौर जिले के मुख्यालय रिकांग पियो में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं उपस्थित रहे। 

मुख्यमंत्री का किन्नौर दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने यहां से कई अहम घोषणाएं कीं। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। उन्होंने अपने संबोधन में प्रदेश के गठन से लेकर अब तक की विकास यात्रा का उल्लेख किया और कहा कि सरकार का लक्ष्य हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने लिखा, ‘देवभूमि हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। अपने अद्भुत सौंदर्य और गौरवशाली परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हिमाचल, ऐसे ही प्रगति और समृद्धि की राह पर अग्रसर रहे।’

हिमाचल प्रदेश सरकार की महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने की पहल

मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने संबोधन में सबसे अहम घोषणा करते हुए कहा कि किन्नौर जिले में उन परिवारों की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिनकी सालाना आय 2 लाख रुपये से कम है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को केवल सहायता देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर समाज में उनकी भूमिका को और सशक्त करना चाहती है। इस योजना से खासकर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं को बड़ा सहारा मिलेगा, जहां रोजगार के अवसर सीमित होते हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना को जल्द से जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि पात्र महिलाओं तक समय पर लाभ पहुंच सके।

जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष फोकस

किन्नौर जैसे दूरस्थ और जनजातीय जिले में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करना सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी इलाके को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि किन्नौर में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याएं अलग होती हैं, इसलिए उनके लिए विशेष योजनाएं बनाना जरूरी है। 

सरकार इन क्षेत्रों के लिए अलग से बजट और योजनाएं तैयार कर रही है। हिमाचल दिवस के इस आयोजन में प्रदेश की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली। स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत प्रस्तुत कर माहौल को उत्सवमय बना दिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। सरकार इस दिशा में भी लगातार प्रयास कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। हिमाचल दिवस के मौके पर किन्नौर से दिया गया यह संदेश न केवल प्रदेश के विकास की दिशा को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकार समावेशी विकास की नीति पर आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इस तरह की योजनाएं प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को और मजबूत करेंगी।

दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी की तैयारी, नमो भारत कॉरिडोर विस्तार का प्रस्ताव 

उत्तराखंड और दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए जल्द ही बड़ी राहत का रास्ता खुल सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के सामने एक अहम प्रस्ताव रखते हुए नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर को मेरठ के मोदिपुरम से आगे बढ़ाकर हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तार देने की मांग की है। इस प्रस्ताव के साथ देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच अलग मेट्रो कॉरिडोर विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। अगर यह योजना मंजूर होती है तो दिल्ली से उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन शहरों तक यात्रा समय में भारी कमी आएगी और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर इस परियोजना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश तक तेज रफ्तार रेल संपर्क बनने से चारधाम यात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और रोजाना यात्रा करने वालों को बड़ा लाभ होगा। साथ ही इससे सड़क यातायात पर दबाव भी कम होगा और सुरक्षित, तेज और पर्यावरण अनुकूल परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा।

फिलहाल नमो भारत ट्रेन दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदिपुरम तक संचालित हो रही है। प्रस्तावित योजना के तहत इस कॉरिडोर को मोदिपुरम से आगे बढ़ाकर हरिद्वार और ऋषिकेश तक ले जाने की बात कही गई है। यह विस्तार मुख्य रूप से नेशनल हाईवे-58 के समानांतर विकसित किया जा सकता है, जिससे निर्माण में सुविधा मिले और प्रमुख शहरों को सीधे जोड़ा जा सके।

प्रस्तावित रूट में कई महत्वपूर्ण शहर और कस्बे शामिल होंगे। इनमें मोदिपुरम, दौराला-सकौती, खतौली, पुरकाजी (उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा), रुड़की, ज्वालापुर (हरिद्वार) और ऋषिकेश शामिल हैं। इस कॉरिडोर से आईआईटी रुड़की जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान भी सीधे जुड़ जाएंगे। इससे छात्रों और कर्मचारियों के लिए आवागमन आसान हो जाएगा।

परियोजना के लागू होने पर दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी। अनुमान है कि यह सफर ढाई से तीन घंटे के भीतर पूरा हो सकता है। वर्तमान में सड़क मार्ग से यह यात्रा ट्रैफिक और मौसम के कारण अक्सर लंबी हो जाती है। तेज रफ्तार कॉरिडोर बनने से समय की बचत के साथ-साथ यात्रा अधिक आरामदायक होगी। इस परियोजना का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हरिद्वार और ऋषिकेश में होटल, हॉलिडे होम और सर्विस अपार्टमेंट की मांग बढ़ने की संभावना है। वहीं मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

पर्यावरणीय मंजूरी और लागत बड़ी चुनौती

हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। रुड़की से ऋषिकेश के बीच का हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क और अन्य पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए वन और पर्यावरण से जुड़ी सख्त मंजूरियां लेनी होंगी। यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है और परियोजना की लागत भी बढ़ा सकती है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। कई शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों से गुजरने के कारण भूमि की उपलब्धता और पुनर्वास की प्रक्रिया जटिल हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में ट्रैक बिछाने और स्टेशन विकसित करने की लागत भी सामान्य मैदान क्षेत्रों की तुलना में अधिक होगी। इस परियोजना को बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवहन योजना नहीं, बल्कि दिल्ली-मेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश बेल्ट के लिए एक आर्थिक कॉरिडोर साबित हो सकती है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।

देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर यातायात की समस्या कम होगी और तीनों शहरों के बीच यात्रा सुगम बनेगी। विशेष रूप से तीर्थ सीजन और पर्यटन सीजन में यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। अब इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों और एनसीआरटीसी द्वारा आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी और चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। उत्तराखंड और दिल्ली के बीच तेज रफ्तार रेल संपर्क बनने से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

सीजफायर के बाद फिर भड़का मिडिल ईस्ट, लेबनान पर इजरायली हमले, ईरान की जवाबी कार्रवाई से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर बढ़ा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि मिडिल ईस्ट में हालात फिर से विस्फोटक हो गए। सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान पर बड़ा हमला कर दिया, जिसके जवाब में ईरान ने मिसाइल दागते हुए क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया। इस घटनाक्रम ने युद्धविराम की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने आगे की रणनीति तय करना बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार को इजरायल ने लेबनान के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए करीब 100 मिसाइलों से हमला किया। हमले में 254 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू हुआ ही था और क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन अचानक हुए इस हमले ने स्थिति को फिर से अस्थिर कर दिया। हमले के जवाब में ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। 

ईरान की ओर से इजरायल और खाड़ी देशों की दिशा में मिसाइलें दागी गईं। साथ ही तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी फिर से शुरू करने का ऐलान किया। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ईरान का कहना है कि किसी भी युद्धविराम या समझौते में लेबनान की स्थिति को शामिल करना जरूरी है। तेहरान का आरोप है कि लेबनान में जारी हमलों को नजरअंदाज कर शांति कायम नहीं की जा सकती। दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल इसे अलग संघर्ष बताते हुए सीजफायर से सीधे तौर पर जोड़ने से बच रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि बेरूत और लेबनान में हुई झड़पें अलग घटनाएं हैं और उनका सीजफायर से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि लेबनान का मुद्दा बाद में सुलझाया जाएगा और फिलहाल मुख्य ध्यान ईरान से जुड़े समझौते पर रहेगा। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ संकेत दिया है कि उनका लक्ष्य ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को कमजोर करना और लेबनान में हिज्बुल्लाह को पूरी तरह खत्म करना है। इस बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। खाड़ी देशों ने भी सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिए हैं और कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदले जा रहे हैं। समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अगर यह टकराव जारी रहा तो युद्धविराम टिकना मुश्किल हो सकता है और संघर्ष कई मोर्चों पर फैल सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने तीन रास्ते, कूटनीति या टकराव?

बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अब तीन बड़े विकल्प माने जा रहे हैं। पहला विकल्प है कि अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाए और युद्धविराम को समाप्त मानकर दबाव बनाए। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। दूसरा विकल्प कूटनीति को आगे बढ़ाने का है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पाकिस्तान भेजने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जहां ईरान से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की शुरुआत हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान वेंस को बातचीत के लिए अपेक्षाकृत भरोसेमंद मानता है। इस पहल के जरिए अमेरिका तनाव कम करने की कोशिश कर सकता है। तीसरा विकल्प इजरायल पर दबाव बनाकर लेबनान पर हमले रोकने का है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सबसे कठिन रास्ता है, क्योंकि इजरायल अपने सुरक्षा हितों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। नेतन्याहू सरकार ने पहले ही संकेत दिया है कि वह हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी। ऐसे में अमेरिका के लिए इजरायल को रोकना आसान नहीं होगा। 

अगर अमेरिका कूटनीतिक रास्ता चुनता है तो उसे एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा। एक तरफ संभावित बातचीत के जरिए ईरान को शांत करना होगा, तो दूसरी तरफ इजरायल से हमले रोकने की अपील करनी होगी। ईरान की भी कई शर्तें बताई जा रही हैं, जिनमें अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था शामिल है। इन मुद्दों पर सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा। इस पूरे घटनाक्रम का असर तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। सीजफायर की घोषणा के बाद तेल कीमतों में थोड़ी नरमी आई थी और ब्रेंट क्रूड तथा डब्ल्यूटीआई 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहे। लेकिन नई सैन्य गतिविधियों के बाद कीमतों में फिर उछाल की आशंका बढ़ गई है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा बन सकती है। पहले ही महंगाई और आपूर्ति संकट से जूझ रही दुनिया पर इसका असर पड़ेगा। ऐसे में अब सबकी नजर अमेरिका की अगली रणनीति पर टिकी है। यदि कूटनीति सफल नहीं होती, तो मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

‘धुरंधर’ विवाद पहुंचा बॉम्बे हाईकोर्ट : संतोष कुमार पर आरोप दोहराने से रोक, डायरेक्टर आदित्य धर को मिली अंतरिम राहत

फिल्म धुरंधर और उसके सीक्वल को लेकर उठे स्क्रिप्ट चोरी के विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्ममेकर संतोष कुमार के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए उन्हें फिल्म धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज की स्क्रिप्ट चोरी के आरोपों को दोहराने से अस्थायी रूप से रोक दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि वह फिल्म के निर्देशक आदित्य धर के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक बयान न दें। न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की एकल पीठ ने यह आदेश आदित्य धर द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संतोष कुमार को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई भी प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ। ऐसे में रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और याचिका में दी गई दलीलों के आधार पर अदालत ने सीमित अंतरिम राहत देना उचित समझा। 

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक संतोष कुमार सार्वजनिक मंचों, प्रेस कॉन्फ्रेंस या सोशल मीडिया के माध्यम से फिल्म की कहानी को अपनी स्क्रिप्ट से चोरी बताने वाले आरोपों को दोहराने से परहेज करें। अदालत ने यह भी माना कि इस तरह की टिप्पणियां आदित्य धर की पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आदेश के अनुसार यह रोक फिलहाल 16 अप्रैल तक लागू रहेगी, जब मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल संतोष कुमार पर लागू होगा और अगली सुनवाई में उनके पक्ष को सुनने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।दरअसल, हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संतोष कुमार ने दावा किया था कि फिल्म धुरंधर और उसके सीक्वल की कहानी उनकी साल 2023 में रजिस्टर्ड स्क्रिप्ट ‘डी साहेब’ से ली गई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी कहानी का इस्तेमाल बिना अनुमति के किया गया और उन्हें कोई श्रेय नहीं दिया गया। इन आरोपों के बाद विवाद तेज हो गया और मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया। कुमार के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कई बिंदुओं पर समानता का दावा किया। इससे फिल्म के निर्देशक आदित्य धर और उनकी टीम की छवि पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। इसके बाद मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया।

नोटिस का जवाब नहीं मिला, कोर्ट पहुंचे आदित्य धर

आरोप सामने आने के बाद आदित्य धर ने संतोष कुमार को लीगल नोटिस भेजा था। नोटिस में स्क्रिप्ट चोरी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा गया कि फिल्म की कहानी स्वतंत्र रूप से विकसित की गई है। साथ ही कुमार को चेतावनी दी गई कि वे सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणी करने से बचें, क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि, नोटिस का कोई जवाब नहीं मिलने पर आदित्य धर ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और बयानबाजी पर रोक लगाने के साथ-साथ हर्जाने की मांग की। उनकी ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि संतोष कुमार के बयान निराधार और मानहानिकारक हैं, जो निर्देशक की पेशेवर छवि को प्रभावित कर रहे हैं। 

सुनवाई के दौरान अदालत ने भी इस बात पर गौर किया कि कथित मानहानिकारक टिप्पणियां व्यापक रूप से साझा की गईं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला अंतरिम राहत देने योग्य है, ताकि अगली सुनवाई तक किसी भी पक्ष को अपूरणीय क्षति न हो। इसी आधार पर अदालत ने संतोष कुमार को आरोपों को दोहराने से रोकने का आदेश जारी किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी, जहां अदालत संतोष कुमार का पक्ष भी सुनेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि अंतरिम आदेश को आगे बढ़ाया जाए या मामले में कोई अन्य निर्देश जारी किए जाएं। फिलहाल अदालत के इस आदेश से आदित्य धर को अस्थायी राहत मिली है और धुरंधर को लेकर जारी विवाद कानूनी प्रक्रिया के दायरे में आ गया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा गायब, असम पुलिस दिल्ली में सक्रिय, हिमंता सरमा परिवार पर आरोपों से बढ़ा सियासी घमासान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान देना भारी पड़ गया है। असम पुलिस पवन खेड़ा को लगातार दो दिनों से तलाश कर रही है। बुधवार को दिल्ली के पॉश निजामुद्दीन ईस्ट की शांत सड़कों पर अचानक सियासी हलचल तेज हो गई थी, जब डी-12 नंबर के बाहर पुलिस की मौजूदगी और नेताओं की आवाजाही ने माहौल को गर्मा दिया। यह वही पता है, जहां कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा रहते हैं। एक दिन पहले तक यहां राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। घर के बाहर सन्नाटा है, दरवाजे बंद हैं और सबसे बड़ा सवाल हवा में तैर रहा है आखिर पवन खेड़ा कहां हैं? असम पुलिस उन्हें तलाश रही है, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल पाया है।

असम पुलिस कथित तौर पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में पूछताछ करने के लिए दिल्ली पहुंची थी। पुलिस का कहना है कि खेड़ा से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाने थे, लेकिन जब टीम उनके आवास पर पहुंची तो वे वहां मौजूद नहीं मिले। अधिकारियों के अनुसार, परिसर की तलाशी के दौरान कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी मिलने का दावा किया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह उम्मीद जताई जा रही थी कि पवन खेड़ा उसी शाम मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे और आरोपों का जवाब देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस टल गई और समय बीतता गया। अब 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन खेड़ा का कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया। इससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

उधर, पुलिस की कार्रवाई ने कांग्रेस के भीतर एकजुटता को बढ़ावा दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक, सभी खेड़ा के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। दिल्ली स्थित असम भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जा रही है। पार्टी का कहना है कि असम सरकार पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए कर रही है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। 

पवन खेड़ा अपनी पत्नी कोटा नीलिमा के साथ हैदराबाद में हो सकते हैं। इसे कांग्रेस शासित राज्य में एक अस्थायी शरणस्थल के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच, खेड़ा ने गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। उन्होंने आपराधिक याचिका दायर कर असम पुलिस की संभावित कार्रवाई से राहत की मांग की है। बताया जा रहा है कि इस याचिका पर एक-दो दिन के भीतर न्यायमूर्ति के. सुजाना की पीठ के समक्ष सुनवाई हो सकती है। पुलिस का कहना है कि 58 वर्षीय पवन खेड़ा के खिलाफ मामला उस बयान के आधार पर दर्ज किया गया है, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक से अधिक पासपोर्ट होने का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया है कि यह टिप्पणी मानहानि करने वाली है और इससे प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी आधार पर पुलिस पूछताछ करना चाहती है।

असम के मख्यमंत्री हिमंता सरमा के परिवार पर आरोपों से बढ़ा विवाद

पवन खेड़ा लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1998 से 2013 तक दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विशेष अधिकारी और राजनीतिक सचिव के रूप में काम किया। इस दौरान वे प्रशासनिक और राजनीतिक रणनीति दोनों में अहम भूमिका निभाते रहे। बाद में वे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और जून 2022 में उन्हें पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग की कमान सौंपी गई। तीखे बयानों और आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण वे अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। 2022 में भी वे उस समय चर्चा में आए थे, जब राज्यसभा के लिए नामांकन न मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था “तपस्या में कमी रह गई।” 

इस बयान पर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। हालिया विवाद तब शुरू हुआ, जब खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुयान सरमा के पास संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और एंटीगुआ व बारबुडा से जुड़े कई पासपोर्ट हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार की अमेरिका के व्योमिंग में एक लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी है, जिसकी कथित कीमत लगभग 53,000 करोड़ रुपये बताई गई। खेड़ा ने यह भी कहा कि दुबई में दो संपत्तियों से जुड़े कथित खुलासे चुनावी दस्तावेजों में नहीं किए गए। इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और असम पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया। भाजपा की ओर से इन आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है, जबकि कांग्रेस लगातार इन दावों की जांच की मांग कर रही है। 

अब पूरा मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर पहुंच चुका है। एक तरफ असम पुलिस पवन खेड़ा की तलाश में जुटी है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक टकराव का मुद्दा बना रही है। सभी की नजरें अब तेलंगाना उच्च न्यायालय की सुनवाई और खेड़ा की अगली सार्वजनिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। जब तक वे सामने नहीं आते, तब तक यह सियासी रहस्य और गहराता ही जाएगा।

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में मोबाइल पर नियंत्रण, पढ़ाई पर फोकस बढ़ाने को शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, आदेश जारी

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में अब मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। बच्चों में तेजी से बढ़ रही मोबाइल की लत और इसके शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभावों को देखते हुए राज्य शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। नए निर्देशों के अनुसार, स्कूल परिसर में छात्र और शिक्षक मनमर्जी से मोबाइल का उपयोग नहीं कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, साथ ही उनकी एकाग्रता, व्यवहार और सामाजिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि छात्र स्कूल समय में मोबाइल फोन साथ नहीं लाएंगे। यदि किसी विशेष परिस्थिति में मोबाइल लाना जरूरी हो, तो उसे स्कूल प्रशासन के पास जमा कराना होगा और छुट्टी के समय वापस दिया जाएगा। कक्षा के दौरान मोबाइल का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। 

इसके साथ ही शिक्षकों को भी केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए ही मोबाइल इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। निजी कॉल, सोशल मीडिया या अन्य गैर-जरूरी उपयोग पर रोक रहेगी। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों को कम उम्र में स्मार्टफोन देने से बचें और पढ़ाई के दौरान मोबाइल उपयोग पर नजर रखें।

विभाग का कहना है कि मोबाइल की वजह से बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्याएं, नींद में कमी, चिड़चिड़ापन और ध्यान भटकने जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। कई मामलों में सोशल मीडिया के कारण अनुशासनहीनता और पढ़ाई से दूरी भी देखी गई है। ऐसे में स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

स्कूलों में डिजिटल अनुशासन बढ़ाने पर जोर

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं, बल्कि उसके नियंत्रित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। जरूरत पड़ने पर स्मार्ट क्लास, ऑनलाइन सामग्री या डिजिटल लर्निंग के लिए शिक्षकों को मोबाइल या अन्य उपकरणों का उपयोग करने की अनुमति रहेगी। हालांकि, इसका इस्तेमाल केवल पढ़ाई तक सीमित रहेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा, अनुशासन मजबूत होगा और स्कूलों का शैक्षणिक वातावरण बेहतर बनेगा।

इसके साथ ही विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों को डिजिटल उपकरणों के सही उपयोग के बारे में जागरूक करें। प्रार्थना सभा, विशेष कक्षाओं और कार्यशालाओं के माध्यम से बच्चों को बताया जाएगा कि मोबाइल का सीमित उपयोग किस तरह उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। शिक्षकों को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वे कक्षा के दौरान अनावश्यक मोबाइल उपयोग से बचें और छात्रों के सामने सकारात्मक उदाहरण पेश करें। अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। विभाग ने कहा है कि घर पर बच्चों के स्क्रीन टाइम पर निगरानी रखी जाए और उन्हें पढ़ाई के दौरान मोबाइल से दूर रहने की आदत डाली जाए। माना जा रहा है कि स्कूल और अभिभावकों के संयुक्त प्रयास से बच्चों में डिजिटल अनुशासन विकसित होगा और उनका पढ़ाई, खेलकूद तथा रचनात्मक गतिविधियों की ओर अधिक ध्यान लगेगा 

महेश बाबू और राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ की कहानी लीक, कॉस्मिक मिशन और दो भागों में रिलीज की चर्चा

साउथ सुपरस्टार महेश बाबू और निर्देशक राजमौली की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म को लेकर आए दिन नए अपडेट सामने आ रहे हैं, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ती जा रही है। हाल ही में फिल्म से महेश बाबू का पहला लुक सामने आया था, जिसे फैंस ने सोशल मीडिया पर हाथों-हाथ लिया। इस लुक में अभिनेता का अंदाज पहले से बिल्कुल अलग और दमदार दिखाई दिया, जिसके बाद से फिल्म को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं। अब ‘वाराणसी’ एक बार फिर चर्चा में है और इसकी वजह फिल्म की कथित कहानी का लीक होना बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म पर काम कर रही एक वीएफएक्स कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में प्रोजेक्ट का सिनॉप्सिस अपलोड कर दिया। हालांकि इसमें ज्यादा डिटेल्स साझा नहीं की गईं, लेकिन जो जानकारी सामने आई, उसने फैंस के बीच हलचल मचा दी। यह सिनॉप्सिस देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और फिल्म की कहानी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे।

वायरल हुए सिनॉप्सिस के अनुसार फिल्म की कहानी एक शिव भक्त के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समय की सीमाओं को पार करते हुए एक खतरनाक मिशन पर निकलता है। उसका लक्ष्य एक खोई हुई ब्रह्मांडीय शक्तिशाली वस्तु को ढूंढना है। इस यात्रा के दौरान वह सदियों से छिपे प्राचीन रहस्यों को जोड़ता है और धीरे-धीरे अपने मिशन की सच्चाई तक पहुंचता है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब उसे पता चलता है कि उसे इस रास्ते पर ले जाने वाली ताकत दरअसल एक चालाक मास्टरमाइंड है, जिसका उद्देश्य पूरी दुनिया पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करना है।

इस संभावित कहानी ने फैंस की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। फिल्म में आध्यात्म, पौराणिक तत्व, एडवेंचर और टाइम-ट्रैवल जैसे कई बड़े आयाम देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि दर्शक इसे राजामौली की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में से एक मान रहे हैं। 

वाराणसी’ अप्रैल 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के स्केल और कहानी की लंबाई को देखते हुए मेकर्स इसे दो भागों में रिलीज करने पर विचार कर रहे हैं। फिल्म की कहानी इतनी विस्तृत है कि तीन घंटे का रनटाइम भी कम पड़ सकता है। ऐसे में इसे दो हिस्सों में बांटने से कहानी को बेहतर तरीके से पेश किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि निर्देशक राजामौली और उनकी टीम बड़े कैनवास पर कहानी को विस्तार से दिखाना चाहते हैं। दो पार्ट में फिल्म रिलीज होने से उन्हें किरदारों को विकसित करने, पौराणिक संदर्भों को समझाने और विजुअल वर्ल्ड को स्थापित करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा। यह रणनीति पहले भी कई बड़ी फिल्मों में सफल रही है, इसलिए ‘वाराणसी’ को लेकर भी ऐसा ही प्रयोग किया जा सकता है। फिल्म की स्टार कास्ट भी इसे और खास बना रही है। महेश बाबू के साथ इस फिल्म में Priyanka Chopra और Prithviraj Sukumaran अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। तीनों कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को पैन-इंडिया अपील दे सकती है। माना जा रहा है कि हर किरदार का कहानी में मजबूत और रहस्यमय रोल होगा।

रिलीज डेट को लेकर भी चर्चा तेज है। खबरों के मुताबिक, ‘वाराणसी’ अप्रैल 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि मेकर्स की ओर से आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन फिल्म का प्रोडक्शन बड़े स्तर पर जारी बताया जा रहा है।

लगातार सामने आ रहे अपडेट्स से साफ है कि ‘वाराणसी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भव्य सिनेमाई अनुभव बनने जा रही है। कहानी लीक होने की खबर ने भले ही मेकर्स की मुश्किल बढ़ाई हो, लेकिन इससे दर्शकों की उत्सुकता कई गुना बढ़ गई है। अब फैंस को फिल्म के आधिकारिक टीज़र और ट्रेलर का इंतजार है, जो इस रहस्यमय कहानी की असली झलक पेश करेगा।

चारधाम यात्रा : हरिद्वार में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की तैयारियां अंतिम चरण में, अगले सप्ताह से शुरू होगी प्रक्रिया

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन और पर्यटन विभाग ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस यात्रा के सुचारू संचालन के लिए इस बार भी व्यवस्थाओं को पहले से अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन को लेकर हरिद्वार में व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। तीर्थ यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार भी हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में बड़े स्तर पर ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की जा रही है। यहां विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसके भीतर करीब 20 रजिस्ट्रेशन काउंटर स्थापित किए जाएंगे। यह व्यवस्था पिछले वर्ष की तर्ज पर बनाई जा रही है, लेकिन इस बार सुविधाओं को और बेहतर करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं। 

प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्था से बचाया जा सके। भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए महिलाओं और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए जा रहे हैं। इससे पंजीकरण प्रक्रिया तेज होगी और विशेष श्रेणी के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस बार काउंटरों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी, ताकि दस्तावेज जांच और पंजीकरण प्रक्रिया बिना देरी के पूरी हो सके। चारधाम यात्रा के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए रजिस्ट्रेशन केंद्र पर यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत बैठने के लिए पर्याप्त स्थान की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही साफ पीने के पानी की उपलब्धता, मोबाइल टॉयलेट और स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि यात्रियों को लंबा इंतजार भी करना पड़े तो उन्हें असुविधा न हो। इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने और पंजीकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती की जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी मौजूद रहेगा, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन केंद्र पर सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी पहले से मिल सके। जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सभी तैयारियां 10 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएंगी। 

17 अप्रैल से शुरू होगा ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन, सुरक्षित यात्रा पर प्रशासन का जोर

पर्यटन विभाग ने जानकारी दी है कि चारधाम यात्रा के लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 17 अप्रैल से शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर सीधे ऋषिकुल मैदान में अपना पंजीकरण करा सकेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ ऑफलाइन सुविधा भी उपलब्ध होने से उन यात्रियों को राहत मिलेगी, जो डिजिटल माध्यम का उपयोग नहीं कर पाते हैं। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और पर्यटन दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन का पूरा फोकस यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक तरीके से संचालित करने पर है। अधिकारियों के अनुसार, ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को मजबूत बनाना इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे अचानक बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और यात्रियों को तय संख्या के अनुसार यात्रा की अनुमति दी जा सकेगी। 

इसके साथ ही स्वास्थ्य, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को भी ध्यान में रखते हुए अन्य विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए हर स्तर पर तैयारी की जा रही है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाकर यात्रियों को राहत देने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें। इस बार की व्यवस्थाओं को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि चारधाम यात्रा पहले से अधिक

पीएम सूर्य घर योजना : सरकार दे रही सब्सिडी, बैंक दे रहे सस्ता लोन, घर पर सोलर लगाकर करें बिजली बिल जीरो, जानिए इस योजना के बारे में 

हर महीने बढ़ते बिजली बिल से परेशान लोगों के लिए केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना एक बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ लोगों को सस्ती या मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना भी है। सरकार चाहती है कि आम नागरिक अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगाकर खुद बिजली पैदा करें और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करें। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब सोलर पैनल लगवाने के लिए आपको एकमुश्त बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं है। सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी के साथ-साथ कई बैंक भी आसान और सस्ते लोन की सुविधा दे रहे हैं। इससे मध्यम वर्ग और आम परिवार भी आसानी से सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक इस योजना के तहत सोलर पैनल के लिए किफायती ब्याज दर पर लोन उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो जाता है।

योजना के तहत 3 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम पर सरकार की ओर से भारी सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा बैंकों से मिलने वाले लोन की ब्याज दर भी कम रखी गई है, जिससे ईएमआई भी ज्यादा नहीं बनती। कई मामलों में यह ईएमआई उतनी ही होती है जितना पहले आपका बिजली बिल आता था। ऐसे में उपभोक्ता धीरे-धीरे लोन चुकाते हुए मुफ्त बिजली का लाभ भी उठा सकते हैं।

इस योजना का फायदा यह भी है कि सोलर पैनल लगने के बाद बिजली बिल में भारी कमी आ सकती है। अगर सिस्टम सही क्षमता का लगाया जाए और बिजली खपत संतुलित रहे तो कई घरों का बिजली बिल लगभग शून्य तक पहुंच सकता है। इसके अलावा अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उपभोक्ता क्रेडिट भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भविष्य के बिल में और राहत मिलती है।

सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी सिस्टम की क्षमता के आधार पर तय की गई है। एक किलोवाट के सोलर सिस्टम पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। वहीं दो किलोवाट सिस्टम पर 60 हजार रुपये तक की सहायता मिलती है। अगर कोई तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता का सिस्टम लगवाता है तो उसे अधिकतम 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है, जिससे पारदर्शिता भी बनी रहती है।

योजना के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक करीब 2 लाख रुपये तक का सोलर लोन दे रहे हैं। इस लोन की ब्याज दर करीब 5.75 प्रतिशत सालाना बताई जा रही है, जो सामान्य पर्सनल लोन या अन्य वित्तीय विकल्पों से काफी कम है। खास बात यह है कि इस राशि तक के लोन के लिए किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं होती। कई मामलों में आय प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी आसान रखी गई है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। लोन चुकाने के लिए लंबी अवधि भी दी जा रही है। आमतौर पर उपभोक्ताओं को 10 साल यानी 120 महीने तक का समय दिया जाता है। इससे ईएमआई कम हो जाती है और उपभोक्ता पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ता। इस तरह सोलर सिस्टम लगवाना अब एक निवेश की तरह भी माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में बिजली खर्च को लगभग खत्म कर सकता है।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ और कैसे करें आवेदन

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहले आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके नाम पर खुद का मकान होना जरूरी है। इसके अलावा घर की छत सोलर पैनल लगाने के लिए उपयुक्त होनी चाहिए, यानी पर्याप्त जगह और धूप उपलब्ध होनी चाहिए। जिन घरों में पहले से वैध बिजली कनेक्शन है, वही इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि आवेदक ने सोलर पैनल के लिए किसी अन्य सरकारी सब्सिडी का लाभ पहले से नहीं लिया हो। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजना का लाभ नए उपभोक्ताओं तक पहुंचे। आवेदन के बाद संबंधित एजेंसियां साइट का निरीक्षण करती हैं और उपयुक्त पाए जाने पर सोलर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है।

सोलर पैनल लगने के बाद सिस्टम को बिजली ग्रिड से जोड़ा जाता है, जिसे नेट मीटरिंग कहा जाता है। इसके जरिए घर में इस्तेमाल की गई बिजली और ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली का हिसाब रखा जाता है। अगर आपकी खपत कम है और उत्पादन ज्यादा है तो अतिरिक्त यूनिट भविष्य के बिल में समायोजित हो जाती हैं। यही वजह है कि कई उपभोक्ताओं का बिजली बिल लगभग शून्य तक पहुंच जाता है।

यह योजना लंबे समय में न सिर्फ उपभोक्ताओं को राहत देगी बल्कि देश में स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा देगी। इससे कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों पर लोड कम होने से सप्लाई सिस्टम भी बेहतर हो सकता है।

अगर आप भी हर महीने आने वाले भारी बिजली बिल से परेशान हैं, तो पीएम सूर्य घर योजना आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। सब्सिडी, सस्ते लोन और लंबी अवधि की ईएमआई जैसी सुविधाएं इसे आम लोगों के लिए बेहद आकर्षक बनाती हैं। सही योजना और उपयुक्त क्षमता का सोलर सिस्टम चुनकर आप आने वाले कई सालों तक लगभग मुफ्त बिजली का लाभ उठा सकते हैं और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

ईरान में फंसे भारतीयों के लिए नई एडवाइजरी जारी : जल्द देश छोड़ने की सलाह, दूतावास ने कहा- बिना समन्वय सीमा तक न जाएं

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए बुधवार को नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद भारतीयों से अपील की है कि वे स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित रास्तों से देश छोड़ने की तैयारी करें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोशिश बिना दूतावास से सलाह-मशविरा और समन्वय के नहीं की जाए। यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी हुई है, जब अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ईरान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी पोस्ट में कहा कि सभी भारतीय नागरिक सतर्क रहें और दूतावास द्वारा सुझाए गए मार्गों का ही इस्तेमाल करें। पोस्ट में कहा गया, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास के साथ पहले से सलाह-मशविरा और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश न की जाए।” 

दूतावास ने यह भी कहा कि स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नागरिक लगातार आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद के लिए इमरजेंसी संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। इनमें +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359 शामिल हैं। इसके अलावा cons.tehran@mea.gov.in पर ईमेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। दूतावास ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अपने लोकेशन की जानकारी साझा करते रहें ताकि जरूरत पड़ने पर निकासी की व्यवस्था की जा सके। इससे पहले मंगलवार शाम को भी भारतीय दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें ईरान में मौजूद भारतीयों को अगले 48 घंटे तक जहां हैं, वहीं रहने की सलाह दी गई थी। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और संभावित हमलों की आशंका को देखते हुए लोगों को बाहर निकलने से बचने को कहा गया था। 

हालांकि, अब संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद दूतावास ने नई सलाह जारी करते हुए नियंत्रित तरीके से देश छोड़ने का विकल्प खुला रखा है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी समाप्त करने की समयसीमा का पालन नहीं करता, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिकी समयानुसार रात 8 बजे की डेडलाइन दी गई थी, जो भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे थी। इस चेतावनी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी थी।

संघर्ष के बीच कितने भारतीय और क्या है ताजा स्थिति

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद जब संघर्ष शुरू हुआ, उस समय ईरान में छात्रों समेत करीब 9,000 भारतीय मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या मेडिकल और तकनीकी शिक्षा ले रहे छात्रों की बताई जा रही है। इसके अलावा कुछ कारोबारी, पेशेवर और धार्मिक यात्राओं पर गए लोग भी शामिल हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने चरणबद्ध तरीके से अपने नागरिकों की वापसी शुरू की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक लगभग 1,800 भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। इनमें से कई को पड़ोसी देशों के रास्ते निकाला गया, जबकि कुछ को विशेष उड़ानों के जरिए वापस लाया गया। हालांकि बड़ी संख्या में भारतीय अभी भी ईरान के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं। इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के संपर्क में है।

इसी बीच अमेरिका और ईरान ने मंगलवार को दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई। यह समझौता अमेरिकी समयसीमा खत्म होने से करीब एक घंटे पहले हुआ। संघर्ष-विराम के बाद भी स्थिति को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में सैन्य तैयारियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यही वजह है कि भारत ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने और जल्द सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ने की सलाह दी है।

भारतीय दूतावास ने यह भी कहा है कि नागरिक अफवाहों से दूर रहें और किसी भी तरह की यात्रा से पहले आधिकारिक पुष्टि करें। साथ ही, पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज हमेशा तैयार रखें, ताकि निकासी की स्थिति में देरी न हो। दूतावास ने छात्रों को विशेष रूप से सलाह दी है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन और दूतावास दोनों के संपर्क में बने रहें।

सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त निकासी उड़ानों की भी व्यवस्था की जा सकती है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने, संपर्क में बने रहने और सुझाए गए मार्गों के जरिए जल्द देश छोड़ने की तैयारी करने को कहा है।