आईटी सेक्टर की दिग्गज Infosys बुरे दौर में : मार्केट कैप में भारी गिरावट, टॉप 10 से बाहर हुई कंपनी
कभी भारतीय आईटी सेक्टर की मजबूती का प्रतीक मानी जाने वाली Infosys इस समय कठिन दौर से गुजर रही है। कुछ ही समय पहले तक देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में मजबूती से बनी रहने वाली यह कंपनी अब उस सूची से बाहर हो चुकी है। हाल के दिनों में कंपनी के मार्केट कैप में करीब 2 लाख करोड़ रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इंफोसिस का मार्केट कैप अब घटकर लगभग 4,74,954 करोड़ रुपये रह गया है। यह गिरावट सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि उस भरोसे में आई कमी का संकेत है जो निवेशकों ने लंबे समय से इस कंपनी पर जताया था। इसके मुकाबले Reliance Industries 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है।
अन्य बड़ी कंपनियों की बात करें तो HDFC Bank, Bharti Airtel, State Bank of India और ICICI Bank लगातार टॉप पोजिशन पर बनी हुई हैं। वहीं आईटी सेक्टर की दूसरी बड़ी कंपनी Tata Consultancy Services अभी भी टॉप 10 में अपनी जगह बनाए हुए है, जो इस सेक्टर के भीतर भी असमान प्रदर्शन को दर्शाता है। इंफोसिस के शेयरों में आई गिरावट ने इस पूरी कहानी को और गंभीर बना दिया है। पिछले एक हफ्ते में कंपनी के शेयर करीब 11 प्रतिशत तक गिर चुके हैं। अगर थोड़ा लंबा समय देखें तो एक महीने में 8 प्रतिशत, तीन महीने में करीब 30 प्रतिशत और छह महीने में लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यही नहीं, एक साल के भीतर भी कंपनी के शेयर करीब 21 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं। साल 2026 की शुरुआत से अब तक यह गिरावट लगभग 28 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हालांकि, सोमवार को बाजार में हल्की राहत जरूर देखने को मिली। दोपहर करीब 1:45 बजे बीएसई पर इंफोसिस का शेयर 1,171.50 रुपये के आसपास ट्रेड करता दिखा, जिसमें करीब 1.48 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। लेकिन यह उछाल अभी उस बड़ी गिरावट की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण काम कर रहे हैं।
सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की मांग में आई सुस्ती है। अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में कंपनियां खर्च को लेकर सतर्क हो गई हैं, जिससे नए प्रोजेक्ट्स की संख्या कम हो रही है। इसके अलावा, आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के दबाव ने भी आईटी सेक्टर को प्रभावित किया है। निवेशकों की बदलती रणनीति भी इस गिरावट का एक अहम कारण मानी जा रही है। जहां पहले आईटी कंपनियों को स्थिर और सुरक्षित निवेश माना जाता था, वहीं अब निवेशक बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीकॉम जैसे सेक्टरों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं। यही वजह है कि Bajaj Finance, Larsen & Toubro, Hindustan Unilever और Life Insurance Corporation of India जैसी कंपनियां टॉप 10 में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं।
आईटी सेक्टर में दबाव के बीच क्या इंफोसिस वापसी कर पाएगी?
इंफोसिस की मौजूदा स्थिति भले ही चुनौतीपूर्ण नजर आ रही हो, लेकिन इसे पूरी तरह नकारात्मक संकेत के रूप में देखना जल्दबाजी हो सकती है। आईटी सेक्टर स्वभाव से चक्रीय होता है, यानी इसमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी, आईटी सेवाओं की मांग फिर से बढ़ सकती है। इंफोसिस के पास मजबूत क्लाइंट बेस, वैश्विक मौजूदगी और तकनीकी विशेषज्ञता जैसी कई बड़ी ताकतें हैं। कंपनी लगातार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रही है, जो भविष्य में इसकी ग्रोथ को नई दिशा दे सकते हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि वर्तमान गिरावट एक अस्थायी चरण भी साबित हो सकती है।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और Tata Consultancy Services जैसी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इसके अलावा, क्लाइंट्स की लागत घटाने की रणनीति और प्रोजेक्ट्स में देरी भी कंपनी के राजस्व पर असर डाल सकती है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता के साथ अवसर तलाशने का हो सकता है। जो निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से बाजार को देखते हैं, उनके लिए इंफोसिस जैसे मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनी में गिरावट के दौरान निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं, अल्पकालिक निवेशकों को बाजार की मौजूदा अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर फैसला लेना होगा।
इंफोसिस का टॉप 10 से बाहर होना निश्चित रूप से एक बड़ा घटनाक्रम है, लेकिन यह कहानी का अंत नहीं है। आईटी सेक्टर में बदलाव और वैश्विक परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाकर कंपनी दोबारा मजबूती के साथ वापसी कर सकती है। आने वाले महीनों में कंपनी की रणनीति और बाजार की दिशा तय करेगी कि इंफोसिस फिर से शीर्ष कंपनियों की सूची में अपनी जगह बना पाती है या नहीं।

