शिक्षक सर्वोपरि’ के मंत्र के साथ शिक्षा सुधारों को नई गति दे रही योगी सरकार, एसीएस ने रखा व्यापक रोडमैप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। बुनियादी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए सरकार शिक्षक सशक्तीकरण, छात्र नामांकन, अधिगम सुधार, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण पर एक साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से संवाद करते हुए शिक्षा विभाग की आगामी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को साझा किया।

उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण बार-बार अवकाश बढ़ाने की स्थिति से बचने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि विद्यालय खुलने पर बच्चों का आत्मीय स्वागत किया जाए तथा गर्मी को देखते हुए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए।

संवाद के दौरान पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन का केंद्र कक्षा कक्ष है और शिक्षक उसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर बनाई गई योजनाओं की सफलता अंततः शिक्षक की प्रतिबद्धता और कक्षा में उसके कार्य से तय होती है। इसलिए शिक्षा सुधारों में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है।

उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान और नामांकन पर विशेष फोकस रहेगा। आशा कार्यकर्ताओं के जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की सूचनाओं की सहायता से ऐसे बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। साथ ही कक्षा 5 से कक्षा 6 में विद्यार्थियों के निर्बाध प्रवेश को सुनिश्चित कर ड्रॉपआउट दर कम करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा। नियमित उपस्थिति और सीखने में पीछे रह गए बच्चों के लिए कैच-अप शिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि निपुण भारत मिशन का दायरा अब कक्षा 5 तक विस्तारित किया जा रहा है। भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। आगामी 6 जुलाई को आयोजित होने वाली निपुण संकल्प कार्यशाला में अकादमिक और प्रशासनिक तंत्र मिलकर निपुण जनपद बनाने का संकल्प लेगा।

उन्होंने विद्यालयों में पुस्तकालयों, प्रिंट समृद्ध सामग्री और अभिभावक सहभागिता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट को और अधिक प्रभावी बनाते हुए उसे वर्ष में दो बार अभिभावकों के साथ साझा करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही विद्यालयों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (DEAR)’ अभियान जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही गई।

शिक्षकों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी पात्र लाभार्थियों से समयबद्ध पंजीकरण कराने की अपील की। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी भी दी।

संवाद के अंत में उन्होंने शिक्षकों से अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर अध्ययन ही बेहतर शिक्षण और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की निष्ठा, प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता और समाज की सहभागिता के बल पर उत्तर प्रदेश बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल स्थापित करेगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।

अयोध्या मामले में एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी

अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

सीएम योगी के निर्देश पर कोचिंग संस्थानों की जांच का महाअभियान

लखनऊ में हुए दुखद हत्याकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर सभी जनपदों में कोचिंग संस्थानों के निरीक्षण का महाअभियान शुरू कर दिया गया। पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन विभाग, प्राधिकरण और विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने संयुक्त टीमें बनाकर कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी का निरीक्षण किया। लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, आगरा आदि महानगरों के साथ अन्य जनपदों में भी यह कार्रवाई की गई। इस दौरान अनियमितताएं मिलने पर सौ से अधिक कोचिंग संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अभी जारी रहेगी।

अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य मानकों की जांच
लखनऊ में हुई दुःखद घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सभी जिलों में जांच के सख्त निर्देश दे थे। कुछ जिलों में देर शाम में ही जांच कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। मंगलवार को यह अभियान और तेज रहा। उन कोचिंग संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई जो गैर पंजीकृत थे। टीमों ने विशेष तौर पर अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य सुरक्षा मानकों की पड़ताल की। जांच का क्रम देर रात तक जारी था। प्रयागराज के मुख्य अग्नि शमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि नगर में 97 पंजीकृत संस्थानों में केवल 15 कोचिंग संस्थानों ने से एनओसी ली है। फायर विभाग ने दस टीमों का गठन किया है, जो लगातार जांच करेंगीं। इसी क्रम में प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने सिविल लाइंस स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग को सील कर दिया।

कानपुर में पार्किंग को बना दिया बच्चों का क्लासरूम, फायर एनओसी भी वैध नहीं
कानपुर विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन दस्ते और अग्निशमन अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों में मानकों के अनुपालन की जांच का काम सोमवार शाम से ही शुरू कर दिया था। मंगलवार शाम तक यहां के सबसे बड़े शैक्षणिक हब काकादेव में 30 से अधिक संस्थानों को सील कर दिया गया। इन सभी को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। सबसे गंभीर उल्लंघन भवनों के बेसमेंट में पाया गया, जिनका आवंटन सिर्फ पार्किंग के लिए था, लेकिन वहां अवैध रूप से सैकड़ों बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम बना दिए गए थे। मीरजापुर में भी लगभग एक दर्जन संस्थान सील किए गए।

वाराणसी में भी मिली अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी, जौनपुर और चंदौली में भी जांच
वाराणसी विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने बनारस में भी सोमवार से ही कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरियों की जांच शुरू कर दी। इस दौरान कई संस्थानों को सील किया गया है। कई संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन पाया गया है। जौनपुर और चंदौली में जांच की जा रही है। वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि कई कोचिंग सेंटर बिना मानचित्र स्वीकृति एवं निर्धारित भवन मानकों के विपरीत संचालित किए जा रहे थे, उन्हें सील किया गया।

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग में प्रवेश के प्रति बढ़ रहा है युवाओं का आकर्षण

प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग: विरासत के अध्ययन के साथ सुनहरे करियर की गारंटी:
प्रवेश प्रारम्भ
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग में प्रवेश के प्रति बढ़ रहा है युवाओं का आकर्षण
नई शिक्षा नीति, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुरातत्व के बढ़ते महत्व के बीच प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विषय युवाओं के लिए तेजी से उभरता हुआ करियर विकल्प बन रहा है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग न केवल ऐतिहासिक अध्ययन और शोध के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार और शोध के अवसर भी प्रदान कर रहा है।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रिया सक्सेना ने जानकारी दी है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इच्छुक विद्यार्थी ‘समर्थ पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण सुनिश्चित करें और अपना प्रवेश फॉर्म अनिवार्य रूप से विभाग में जमा करें।
विभाग के छात्र आज विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों, पुरातत्व संस्थानों, अभिलेखागारों, पर्यटन विभागों, सांस्कृतिक संस्थाओं तथा प्रशासनिक सेवाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विषय की बहुआयामी प्रकृति के कारण इसमें रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विषय को केवल अध्यापन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं व्यापक है। आज विरासत प्रबंधन, पुरातत्व, संग्रहालय अध्ययन, संरक्षण, पर्यटन प्रबंधन, सांस्कृतिक संसाधन प्रलेखन तथा ऐतिहासिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। भारत सरकार द्वारा विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक पर्यटन और पुरातात्विक स्थलों के विकास पर दिए जा रहे विशेष बल ने इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं।
शोध एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरो से
विभाग के विद्यार्थी देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), राष्ट्रीय अभिलेखागार, संग्रहालयों तथा विभिन्न शोध संस्थानों में कार्य कर रहे हैं। शोध के क्षेत्र में भी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, कार्यशालाओं तथा फेलोशिप कार्यक्रमों में सहभागिता का अवसर मिलता है। विभाग की फैकल्टी भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शोध कार्यों, प्रकाशनों तथा अकादमिक सहभागिता के लिए पहचान रखती है।
विरासत संरक्षण से राष्ट्र निर्माण तक
प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति केवल अतीत का अध्ययन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा विषय है। यह विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक दृष्टि, शोध कौशल, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और ऐतिहासिक चेतना का विकास करता है। यही कारण है कि यह विषय आज प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध करियर तथा सांस्कृतिक प्रशासन में भी उपयोगी सिद्ध हो रहा है।
प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति: करियर के प्रमुख प्लेटफॉर्म
🔸 उच्च शिक्षा एवं अध्यापन: प्रोफेसर, शोधार्थी, अकादमिक सलाहकार
🔸 पुरातत्व एवं विरासत संरक्षण: पुरातत्वविद्, विरासत अधिकारी, संरक्षण विशेषज्ञ (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, इनटैक)
🔸 संग्रहालय एवं अभिलेखागार: क्यूरेटर, पुरालेखपाल, प्रलेखन अधिकारी
🔸 प्रतियोगी परीक्षाएं: यूपीएससी, यूपीपीएससी, प्रशासनिक
विभाग की प्रमुख उपलब्धियां

  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों व वैश्विक मंचों पर सक्रिय सहभागिता और शोध प्रस्तुतियां।
  • पुरातत्व, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र में निरंतर शोध प्रकाशन।
  • संग्रहालय अध्ययन, अभिलेखीय शोध एवं फील्ड सर्वेक्षण का व्यावहारिक अनुभव।
  • विद्यार्थियों को नेट/जेआरएफ, शोध एवं उच्च शिक्षा हेतु विशेष मार्गदर्शन।
    प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग
    “अतीत की समझ, भविष्य की दिशा”