विश्व बौद्ध महासंघ में भारत महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष नियुक्त हुईं डॉ. अनुभा पुंडीर चौहान

ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय, देहरादून की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुभा पुंडीर चौहान को विश्व बौद्ध महासंघ (World Buddhist Federation) के भारत महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष (Vice President – Women’s Wing, India) नियुक्त किया गया है। उन्हें वर्ल्ड पीस इंस्टीट्यूट–संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से इस दायित्व के लिए नियुक्त होने वाली प्रथम प्रतिनिधि के रूप में भी माना जाता है।

अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित “झोलाप्रेन्योर” डॉ. चौहान “भारतीय झोला वुमन” के नाम से विख्यात हैं। उन्होंने एकल-उपयोग प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े के झोले को अपनाने हेतु एक अनूठा जन-जागरूकता अभियान चलाया है। उनके इस अभियान ने भारतीय हथकरघा, स्वदेशी कला, सांस्कृतिक विरासत तथा पर्यावरण संरक्षण को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया है।

डॉ. चौहान एक प्रशिक्षित शास्त्रीय कलाकार एवं सांस्कृतिक दूत भी हैं। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कला और भारतीय परंपराओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सांस्कृतिक मूल्यों का प्रभावी संदेश दिया है।

अपने नवीन दायित्व में डॉ. अनुभा पुंडीर चौहान महिला सशक्तिकरण, शांति, करुणा, सांस्कृतिक समरसता तथा मानवीय सेवा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का नेतृत्व करेंगी तथा भारत एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विश्व बौद्ध महासंघ का प्रतिनिधित्व करेंगी

ब्रिटिश स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूशन ने जोखिम प्रबंधन के लिए आरईसी की ISO 31000:2018 मान्यता का नवीनीकरण किया

REC लिमिटेड, विद्युत मंत्रालय के अधीन महारत्न सीपीएसई और अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग एबीएफसी, ने ब्रिटिश स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूशन (बीएसआई) द्वारा किए गए व्यापक पुनर्मूल्यांकन के बाद जोखिम प्रबंधन दिशानिर्देशों (Risk Management Guidelines) के लिए अपने ISO 31000:2018 मान्यता पत्र को सफलतापूर्वक नवीनीकृत कर लिया है। यह नवीनीकृत मान्यता, बदलते व्यावसायिक परिवेश में वैश्विक स्तर के जोखिम प्रबंधन अभ्यासों को बनाए रखने और संगठनात्मक लचीलेपन को मजबूत करने के प्रति आरईसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।

आरईसी के जोखिम प्रबंधन प्रभाग ने बदलते विनियामक आवश्यकताओं, उभरते व्यावसायिक जोखिमों, उद्योग की सर्वोत्तम प्रथाओं और बदलती बाजार गतिशीलता के अनुरूप संगठन के एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट (ERM) ढांचे का मूल्यांकन और उसे बढ़ाने के लिए पुनर्मूल्यांकन अभ्यास किया। एक व्यापक ऑडिट और मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद, BSI ने ISO 31000:2018 के तहत निर्धारित सिद्धांतों और दिशानिर्देशों के अनुपालन के लिए आरईसी के मान्यता पत्र (Letter of Recognition) को नवीनीकृत किया।

सद्गुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के अवतरण दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सागर, 51 साधकों को मिली शक्तिपात-दीक्षा

साकेत स्थित माँ मनोकामना देवी मंदिर सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम का साक्षी बना। अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के 89वें अवतरण दिवस तथा माँ मनोकामना देवी की प्राण-प्रतिष्ठा वर्षगाँठ पर आयोजित समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों इस्सयोगियों ने गुरुचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। अखंड संकीर्तन, मंत्रोच्चार, आरती और साधना से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। सद्गुरू देव महात्मा सुशील कुमार जी के
महाअवतरण समारोह को संबोधित करते हुए संस्था की अध्यक्ष एवं ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरुमाता माँ विजया ने अपने आर्शीबचन में कहा कि ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महात्मा सुशील कुमार ने माँ मनोकामना देवी की स्थापना मानव की भौतिक कामनाओं की पूर्ति के लिए की थी। श्रद्धा और विश्वास से यहाँ की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती, किंतु मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य केवल इच्छापूर्ति नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और परम शांति की प्राप्ति है। यह मार्ग साधना, सद्गुरु-कृपा और आत्मसमर्पण से ही प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रत्येक क्षण परिवर्तनशील है। शरीर की कोशिकाएँ बदलती रहती हैं,परिस्थितियाँ बदलती हैं और जीवन की चुनौतियाँ भी बदलती रहती हैं। इन सबके बीच जो साधक गुरु से जुड़कर इस्सयोग की साधना करता है,वह मानसिक विकारों,भय,तनाव और मोह से ऊपर उठकर आंतरिक शांति का अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि इस्सयोग केवल साधना-पद्धति नहीं, बल्कि मानवता को सद्गुरुदेव का अनुपम आध्यात्मिक उपहार है।
संस्था के संयुक्त सचिव डॉ. अनिल सुलभ ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे संयुक्त सचिव-सह-कोषाध्यक्ष ई. उमेश कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा ने सद्गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण किया। पंडित प्रभात झा के सस्वर ‘गुरु शतनाम स्तोत्र’ पाठ के साथ वातावरण पूर्णतः गुरुमय हो उठा। इसके बाद एक घंटे का अखंड संकीर्तन, आह्वान साधना, सद्गुरुदेव की आरती तथा माँ मनोकामना देवी का विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक एकाग्रता का अनूठा वातावरण बना रहा।इस अवसर पर लंदन से आए अभिषेक आनंद, लुधियाना के सुधांशु सुमन,ओडिशा के दुर्गादास पंडा, भुवनेश्वर की डॉ. गीता जेना,लखनऊ के दुष्यंत यादव, बोकारो के कैलाश सुहासरिया, बेंगलुरु के हरि पंडा, फरीदाबाद की वंदना कर्ण, बिहार की शैल कुमारी एवं ऋतुबाला, हरियाणा के श्रीकांत कुमार,मनीषा अग्रवाल, अल्पना श्रीवास्तव तथा सविता कुमारी सहित अनेक साधकों ने सद्गुरुदेव की कृपा और इस्सयोग साधना से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा ने माँ मनोकामना मंदिर की स्थापना का संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह मंदिर केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, साधना और आत्मबोध का आध्यात्मिक केंद्र है। उन्होंने सद्गुरुदेव एवं गुरुमाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
समारोह का प्रमुख आकर्षण शक्तिपात-दीक्षा रहा। माँ विजया ने 51 नव-जिज्ञासुओं को इस्सयोग की आंतरिक साधना के लिए शक्तिपात-दीक्षा प्रदान की। दीक्षा के इस आध्यात्मिक क्षण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन की अमूल्य आध्यात्मिक उपलब्धि बताया।कार्यक्रम में संयुक्त सचिव लक्ष्मी प्रसाद साहू, संगीता झा, शिवम झा,सरोज गुटगुटिया, दीनानाथ शास्त्री, सी.एल. प्रसाद, वंदना वर्मा, डॉ. जेठानंद सोलंकी, डॉ. दार्शनिका पटेल, माया साहू,विजय मालिनी, योगेंद्र प्रसाद, राधेश्याम पांडेय, गिरिजेश गुप्ता, वीरेंद्र राय, ललन प्रसाद, आर.सी. तिवारी, विजय रंजन,ममता जमुआर, मंजिता अंजलि तथा वरिष्ठ पत्रकार विनोद तकियावाला सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों इस्सयोगियों ने इस महामहोत्सव में शामिल हुए ।

भारत की प्राइवेट स्पेस रेस का सबसे बड़ा इम्तिहान

स्काई रूट एयरोस्पेस ने आज घोषणा की कि उसके विक्रम-1 लॉन्च वाहन की पहली परीक्षण उड़ान के लिए लॉन्च विंडो खोल दी गई है। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिट श्रेणी का रॉकेट है। टेस्ट फ्लाइट-1 का लक्ष्य 12 जुलाई से पहले नहीं रखा गया है और यह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार) में असेंबली और परीक्षण कार्यों की पूर्णता के साथ-साथ मौसम, सुरक्षा और रेंज क्लीयरेंस पर निर्भर करेगा। लॉन्च विंडो 4 अगस्त तक खुली रहेगी। स्काई रूट के विक्रम-1 के सभी चरणों का सफलतापूर्वक एकीकरण कर उन्हें लॉन्च पैड पर स्थापित कर दिया गया है। यह मिशन प्रणोदन, स्टेज पृथक्करण, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण और समग्र वाहन प्रदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करेगा, जिससे स्काई रूट को पूर्ण रूप से व्यावसायिक लॉन्च कंपनी बनने में मदद मिलेगी।

पवन कुमार चंदाना, सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्काई रूट एयरोस्पेस ने कहा,“मिशन आगमन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विक्रम-1 के प्रत्येक सिस्टम के वास्तविक उड़ान प्रदर्शन से डेटा प्राप्त करना है। हम जानना चाहते हैं कि रॉकेट उड़ान भरने से लेकर आरोहण के हर चरण में कैसा प्रदर्शन करता है। इस प्रकार के डेटा को पूरी तरह से जमीनी परीक्षणों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। इससे हमें अपने डिजाइनों को सत्यापित करने और भविष्य के रॉकेट विकास में मदद मिलेगी। जिस क्षण विक्रम-1 उड़ान भरेगा, भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग एक ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएगा, जिसे उसने पहले कभी नहीं छुआ है।”

नागा भरत डाका, सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी, स्काई रूट एयरोस्पेस ने कहा,“भारत में लॉन्च वाहन बनाने के सपने से लेकर अब ऑर्बिट उड़ान का प्रयास करने तक की यात्रा बेहद असाधारण रही है। वर्ष 2022 में विक्रम-एस के माध्यम से हमने अपनी तकनीकी क्षमताओं की नींव को स्थापित किया था। अब विक्रम-1 के साथ हम भारत में निर्मित, भारत और दुनिया के लिए विश्वसनीय तथा उच्च आवृत्ति वाले लॉन्च कार्यक्रम की दिशा में अपना सबसे बड़ा कदम उठा रहे हैं।”

विक्रम-1 सात मंजिला ऊंचाई वाला बहु-चरणीय ऑर्बिटल लॉन्च वाहन है, जिसे पूर्ण कार्बन-कंपोजिट संरचना के साथ विकसित किया गया है। इसमें कंपनी द्वारा विकसित प्रणोदन प्रणालियाँ, थ्री-डी प्रिंटेड इंजन और उच्च क्षमता वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट – एलइओ) में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। उनकी पहली उड़ान का लक्ष्य 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60 डिग्री की कक्षीय झुकाव वाली कक्षा प्राप्त करना है। इस उड़ान के लिए तैयार रॉकेट का अनावरण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में स्काई रूट के इन्फिनिटी परिसर के उद्घाटन के दौरान किया था।

आर्थिक दृष्टि से भी यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्तमान लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। स्वदेशी लॉन्च क्षमता इस वृद्धि का प्रमुख आधार बनेगी और भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगी।

कोमल जैन ने बदली गोल्ड-लुक ज्वेलरी की दुनिया

झारखंड के हज़ारीबाग से निकलकर रानी कोमल जैन ने प्रीमियम गोल्ड-लुक ज्वेलरी ब्रांड स्मार्स ज्वेलरी की स्थापना कर नई मिसाल कायम की है। ज्वेलरी डिज़ाइन और जीआईए मुंबई से जेमोलॉजी की पढ़ाई के बाद उन्होंने महसूस किया कि असली सोने के गहने महंगे होने और सुरक्षा कारणों से अक्सर बैंक लॉकर तक सीमित रह जाते हैं। इसी सोच के साथ दिसंबर 2022 में उन्होंने स्मार्स की शुरुआत की, जो प्रीमियम 22 कैरेट गोल्ड माइक्रोन प्लेटिंग वाली ब्रास ज्वेलरी किफायती कीमत पर उपलब्ध कराती है। मात्र साढ़े तीन वर्षों में कंपनी ने 100 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की है और देशभर की 3 लाख से ज्यादा महिलाओं का भरोसा जीता है। रानी का लक्ष्य हर महिला को हर दिन आत्मविश्वास और खूबसूरती का एहसास कराना है।