ऑफिस का तनाव बन रहा सिरदर्द की वजह ! समय रहते संभल जाइए, नहीं तो शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ेगा असर

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। सुबह ऑफिस की भागदौड़, दिनभर मीटिंग्स, लगातार स्क्रीन पर काम और देर रात तक टारगेट पूरा करने की चिंता इन सबने लोगों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। खासकर कॉर्पोरेट कल्चर में काम करने वाले लोग लगातार तनाव, चिंता और थकान से जूझ रहे हैं। यही वजह है कि अब कम उम्र में भी लोग सिरदर्द, माइग्रेन, नींद की कमी और एंग्जायटी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार होने वाला सिरदर्द शरीर का संकेत हो सकता है कि आपका दिमाग और नर्वस सिस्टम लगातार दबाव में काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जब इंसान लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर का नर्वस सिस्टम ‘फाइट या फ्लाइट मोड’ में चला जाता है। 

इस स्थिति में शरीर हर समय अलर्ट रहता है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है और दिमाग लगातार तनाव महसूस करता है। यही तनाव धीरे-धीरे सिरदर्द का कारण बन जाता है। वर्क स्ट्रेस से होने वाला सिरदर्द केवल काम के समय ही नहीं, बल्कि घर लौटने के बाद भी परेशान करता है। कई लोग शाम तक इतना थक जाते हैं कि परिवार के साथ समय बिताने या आराम करने का मन भी नहीं करता। लगातार सिर भारी रहना, आंखों में दर्द, गर्दन में अकड़न और चिड़चिड़ापन इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक थकान जैसी गंभीर परेशानियों में बदल सकती है।

लगातार स्क्रीन पर काम करना भी सिरदर्द की एक बड़ी वजह है। कंप्यूटर और मोबाइल की तेज रोशनी आंखों और दिमाग पर दबाव डालती है। कई लोग घंटों बिना ब्रेक लिए काम करते रहते हैं, जिससे शरीर को आराम नहीं मिल पाता। यही कारण है कि काम खत्म होने के बाद भी दिमाग शांत नहीं हो पाता और व्यक्ति तनाव महसूस करता रहता है। तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन शरीर को अलर्ट मोड में रखते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका स्तर बढ़ा रहना नुकसानदायक साबित होता है। इससे शरीर का पेन थ्रेशहोल्ड यानी दर्द सहने की क्षमता कम हो जाती है। नतीजतन, हल्का तनाव भी तेज सिरदर्द में बदल जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्क स्ट्रेस को पूरी तरह खत्म करना शायद संभव न हो, लेकिन सही लाइफस्टाइल और छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे जरूरी है कि लोग अपने शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए समय निकालें। काम के बीच लगातार बिना रुके बैठे रहना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। 

ऑफिस में काम करते समय हर एक से डेढ़ घंटे में छोटा ब्रेक लेना बेहद जरूरी है। एक मीटिंग खत्म होने के तुरंत बाद दूसरी मीटिंग में जाने के बजाय 5 से 10 मिनट का गैप लेना शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इस दौरान गहरी सांस लेना, हल्की वॉक करना या आंखें बंद करके कुछ मिनट शांत बैठना तनाव को कम करने में मदद करता है। डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि काम के दौरान पानी पीने की आदत बनाए रखें। शरीर में पानी की कमी भी सिरदर्द को बढ़ा सकती है। इसके अलावा कैफीन का जरूरत से ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह शरीर को कुछ समय के लिए एक्टिव जरूर बनाता है, लेकिन बाद में थकान और सिरदर्द को बढ़ा सकता है।

वर्क स्ट्रेस और सिरदर्द से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

तनाव और सिरदर्द से राहत पाने के लिए सबसे पहले अपनी दिनचर्या को संतुलित बनाना जरूरी है। अच्छी नींद सबसे बड़ा इलाज मानी जाती है। रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेने से दिमाग को आराम मिलता है और स्ट्रेस कम होता है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दिमाग लगातार एक्टिव रहता है और नींद प्रभावित होती है। योग और मेडिटेशन भी तनाव कम करने का बेहद असरदार तरीका माना जाता है। रोजाना 15 से 20 मिनट ध्यान लगाने या प्राणायाम करने से दिमाग शांत होता है और शरीर रिलैक्स महसूस करता है। 

खासकर गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करती है। इसके अलावा अपनी डाइट पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। ज्यादा जंक फूड, तला-भुना खाना और अनियमित भोजन शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करता है। हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन से भरपूर भोजन दिमाग और शरीर दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। काम के दौरान सही पोस्चर में बैठना भी जरूरी है। गलत तरीके से बैठने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जो सिरदर्द की वजह बन सकता है। इसलिए कुर्सी और कंप्यूटर स्क्रीन की सही ऊंचाई बनाए रखना जरूरी है। मानसिक तनाव कम करने के लिए काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना भी बेहद जरूरी है। 

ऑफिस का तनाव घर तक न लाएं। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, पसंदीदा संगीत सुनना या अपनी हॉबी को समय देना दिमाग को रिलैक्स करता है। अगर लगातार सिरदर्द की समस्या बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार दर्द निवारक दवाइयां लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है। कई बार लगातार सिरदर्द शरीर में किसी दूसरी समस्या का संकेत भी हो सकता है। आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का। काम जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी आपका स्वास्थ्य है। अगर शरीर और दिमाग स्वस्थ रहेंगे, तभी व्यक्ति बेहतर तरीके से काम कर पाएगा और जिंदगी का आनंद ले सकेगा।

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