हिमाचल में पंचायत चुनाव का हुआ एलान, तीन चरणों में होंगे मतदान, गांव-गांव में लोकतंत्र का महापर्व शुरू
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही पूरे प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा करते हुए आचार संहिता लागू कर दी, जिससे अब शासन-प्रशासन पूरी तरह चुनावी मोड में आ गया है। मंगलवार को राज्य चुनाव आयुक्त अनिल कांची ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस बार प्रदेश की 3,754 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराए जाएंगे। मतदान तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को संपन्न होगा।
मतदान का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक तय किया गया है, ताकि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मतदाताओं को भी सुविधा मिल सके। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आयोग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पंचायत स्तर के पदों की मतगणना मतदान समाप्त होते ही संबंधित पंचायत मुख्यालयों में की जाएगी, जिससे परिणाम जल्द सामने आ सकें। वहीं, बीडीसी और जिला परिषद सदस्यों के मतों की गिनती 31 मई को सुबह 9 बजे से ब्लॉक मुख्यालयों में होगी। चुनाव की निगरानी को सख्त बनाने के लिए हर मतगणना केंद्र पर वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है।
इसके अलावा संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इससे चुनावी पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सबसे मजबूत आधार गांव को सशक्त करने का अवसर है। इस बार आयोग की तैयारियां और सख्ती यह संकेत देती हैं कि चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। गांव-गांव में अब चुनावी हलचल तेज होगी और आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की पूरी संभावना है।
हिमाचल में आदर्श आचार संहिता लागू, सरकारी कामकाज पर सख्ती
हिमाचल में पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके लागू होते ही सरकार और प्रशासन के कामकाज पर कई तरह की पाबंदियां लग गई हैं। अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक कोई भी नई योजना की घोषणा, शिलान्यास या सरकारी संसाधनों का राजनीतिक उपयोग नहीं किया जा सकेगा। अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे निष्पक्षता बनाए रखें और किसी भी तरह के दबाव में न आएं। चुनाव प्रक्रिया का पूरा शेड्यूल भी विस्तार से तय कर दिया गया है। नामांकन प्रक्रिया 7, 8 और 11 मई को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगी। इसके बाद 12 मई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जिसमें उम्मीदवारों के दस्तावेजों की पड़ताल होगी। 14 और 15 मई को नाम वापसी का समय रखा गया है, जबकि 15 मई को ही अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी और चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। मतदान केंद्रों की सूची 7 मई या उससे पहले सार्वजनिक कर दी जाएगी, जिससे मतदाताओं को समय रहते जानकारी मिल सके।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश के 51 शहरी निकायों के चुनाव पहले ही घोषित किए जा चुके हैं और उनके लिए 17 मई को मतदान होगा।मतदाताओं की भागीदारी इस बार काफी अहम रहने वाली है। राज्य में कुल 50 लाख 79 हजार 48 मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 25 लाख 67 हजार 777 पुरुष और 25 लाख 11 हजार 249 महिलाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि इस बार करीब 52 हजार युवा पहली बार मतदान करेंगे, जिनमें लगभग 23 हजार महिलाएं हैं। यह आंकड़ा बताता है कि युवा वर्ग इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। पूरे प्रदेश में 21,678 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। लाहौल-स्पीति के काजा क्षेत्र के लांगजा स्थित कामो पाठशाला में 4,587 मीटर की ऊंचाई पर सबसे ऊंचा मतदान केंद्र बनाया गया है, जो इस चुनाव की खास पहचान बनेगा।वहीं, मतदाताओं की संख्या के लिहाज से भी काफी विविधता देखने को मिलती है। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब क्षेत्र की एक पंचायत में सबसे अधिक मतदाता हैं, जबकि किन्नौर के पूह क्षेत्र के सुमरा गांव में मात्र 178 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इन चुनावों में कुल 31,182 पदों पर मतदान होगा, जिनमें 3,754 प्रधान, 3,754 उपप्रधान, 21,654 वार्ड सदस्य, 1,769 बीडीसी सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। हर पद के लिए अलग-अलग बैलेट पेपर की व्यवस्था की गई है, जिससे मतदान प्रक्रिया स्पष्ट और व्यवस्थित रहे।
मतदाताओं को इस बार पांच अलग-अलग रंगों के मतपत्र दिए जाएंगे वार्ड सदस्य के लिए सफेद, उपप्रधान के लिए पीला, प्रधान के लिए हल्का हरा, बीडीसी सदस्य के लिए गुलाबी और जिला परिषद सदस्य के लिए हल्का नीला रंग निर्धारित किया गया है। इससे मतदाताओं को मतदान के दौरान किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होगी। डिजिटल सुविधा को बढ़ावा देते हुए आयोग ने मतदाताओं को ‘वोटर सारथी’ ऐप और निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के जरिए अपना नाम जांचने की सुविधा भी दी है। इससे मतदाता घर बैठे ही अपनी जानकारी सत्यापित कर सकते हैं और मतदान के दिन किसी परेशानी से बच सकते हैं।

