अली अब्बास जफर की फिल्म में अहान पांडे का नया अवतार, ‘सैयारा’ के बाद एक्शन रोल में मचाने को तैयार धमाल

साल 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘सैयारा’ से डेब्यू करने वाले अहान पांडे ने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों का दिल जीत लिया था। इस मूवी में उनके साथ अनीत पड्डा नजर आई थीं और दोनों की केमिस्ट्री को खूब पसंद किया गया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने शानदार कमाई की और इसके बाद अहान पांडे रातों-रात सुर्खियों में आ गए। अब ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस बार उनका अंदाज पूरी तरह बदला हुआ होगा। फिल्ममेकर अली अब्बास जफर की अगली फिल्म में अहान पांडे एक्शन अवतार में दिखाई देंगे, जिसकी शूटिंग भी शुरू हो चुकी है। अली अब्बास जफर ने खुद सोशल मीडिया पर फिल्म की शुरुआत का एलान किया है। उन्होंने “एंड इट बिगिन्स” लिखते हुए क्लैपबोर्ड की तस्वीर और अहान पांडे की आंखों का क्लोज-अप शेयर किया। यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। फैंस को अहान का इंटेंस लुक काफी पसंद आ रहा है और लोग उनकी नई फिल्म को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में शरवरी वाघ भी अहम भूमिका निभाती दिखाई देंगी।

बताया जा रहा है कि यह फिल्म अहान पांडे के करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें वह अपने रोमांटिक इमेज से बाहर निकलकर पूरी तरह एक्शन-ओरिएंटेड किरदार निभाते नजर आएंगे। ‘सैयारा’ में जहां उन्होंने एक संवेदनशील और रोमांटिक किरदार निभाया था, वहीं इस नई फिल्म में उनका अंदाज ज्यादा रफ-टफ और दमदार होगा। अली अब्बास जफर अपने बड़े पैमाने की फिल्मों और हाई-ऑक्टेन एक्शन के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में अहान को उनके निर्देशन में देखना फैंस के लिए खास होने वाला है।

फिल्म की शूटिंग का पहला शेड्यूल मुंबई में शुरू हो चुका है। इसके बाद टीम मई 2026 में लंदन रवाना होगी, जहां एक बड़े एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग की जाएगी। खबर है कि लंदन में पांच दिनों तक लगातार एक्शन सीन्स फिल्माए जाएंगे, जिनमें अहान पांडे खुद कई स्टंट करते नजर आएंगे। फिल्म का शेड्यूल काफी टाइट रखा गया है और मेकर्स इसे बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना बना रहे हैं।

एक्शन अवतार के साथ बदलती इमेज, फैंस को बड़ी उम्मीदें

इससे पहले फरवरी 2026 में भी अली अब्बास जफर ने शूटिंग लोकेशन से अहान पांडे की एक झलक साझा की थी। उस फोटो के साथ उन्होंने लिखा था, “पावर दी नहीं जाती… ली जाती है… रोल करने को तैयार अहान पांडे।” इस कैप्शन ने ही साफ कर दिया था कि फिल्म में अहान का किरदार दमदार और एक्शन से भरपूर होने वाला है। अब शूटिंग शुरू होने की आधिकारिक घोषणा के बाद फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है। ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान पांडे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म में उनकी और अनीत पड्डा की जोड़ी को खूब सराहा गया था। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी पसंद की गई कि ऑफ-स्क्रीन भी उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। हालांकि, दोनों कलाकारों ने हमेशा इन खबरों को अफवाह बताया और कहा कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं।

फिल्म ‘सैयारा’ ने अहान पांडे को युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग तेजी से बढ़ी और उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे। ऐसे में अली अब्बास जफर की फिल्म को उनके करियर का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। इंडस्ट्री में भी इस फिल्म को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि अली अब्बास जफर बड़े कैनवास और दमदार कहानी के लिए जाने जाते हैं।

मेकर्स की योजना इस फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने की है। फिल्म में एक्शन, ड्रामा और इमोशन का मिश्रण देखने को मिलेगा। अहान पांडे की तैयारी भी काफी समय से चल रही थी और उन्होंने अपने किरदार के लिए फिजिकल ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया है। फैंस को उम्मीद है कि ‘सैयारा’ के बाद यह फिल्म उनके करियर को नई ऊंचाई दे सकती है। फिलहाल शूटिंग शुरू होने की खबर ने ही दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है और अब सभी को फिल्म की पहली झलक का इंतजार है।

बीसीसीआई ने आईपीएल के दूसरे चरण का कार्यक्रम जारी किया, 13 अप्रैल से होंगे मुकाबले

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दूसरे चरण के कार्यक्रम का आधिकारिक एलान कर दिया है। बोर्ड के मुताबिक लीग के बाकी बचे 50 मुकाबले 13 अप्रैल से 24 मई के बीच खेले जाएंगे। दूसरे चरण के मैच देश के 12 अलग-अलग शहरों में आयोजित किए जाएंगे, जिससे क्रिकेट प्रशंसकों को कई स्थानों पर मुकाबलों का रोमांच देखने को मिलेगा। इन वेन्यू में बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, जयपुर, धर्मशाला, रायपुर और न्यू चंडीगढ़ शामिल हैं। 

बीसीसीआई ने कार्यक्रम जारी करते हुए बताया कि टूर्नामेंट का आगाज 28 मार्च को मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबले से हुआ था। शुरुआती चरण के मुकाबलों के बाद अब दूसरे चरण में लीग और अधिक रोमांचक मोड़ लेती नजर आएगी, क्योंकि टीमें प्लेऑफ की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी। 13 अप्रैल से शुरू होने वाले मुकाबलों में कई अहम भिड़ंत देखने को मिलेंगी, जिन पर अंक तालिका की तस्वीर काफी हद तक निर्भर करेगी। दूसरे चरण में बड़े शहरों के साथ-साथ धर्मशाला, रायपुर और न्यू चंडीगढ़ जैसे वेन्यू को भी शामिल किया गया है। इससे न सिर्फ दर्शकों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि टीमों को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका भी मिलेगा। पहाड़ी इलाके धर्मशाला में होने वाले मैचों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना रहती है, जबकि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे पारंपरिक मैदानों पर स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। इस तरह दूसरे चरण में पिच और परिस्थितियों का असर भी टीमों की रणनीति पर साफ दिखाई देगा।

लीग चरण का आखिरी मुकाबला 24 मई को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जाएगा

बीसीसीआई के कार्यक्रम के अनुसार लीग चरण का आखिरी मुकाबला 24 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जाएगा। इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला प्लेऑफ की तस्वीर तय करने में बेहद अहम हो सकता है, क्योंकि लीग के अंतिम दौर में कई टीमें अंतिम चार में जगह बनाने की दौड़ में होती हैं। इसलिए आखिरी दिन तक रोमांच बरकरार रहने की उम्मीद है। इस सीजन के लीग चरण में कुल 70 मुकाबले खेले जाएंगे। पहले चरण के मैचों के बाद दूसरे चरण में बची टीमों के बीच मुकाबले और कड़े होने की संभावना है। कई फ्रेंचाइजी ने अपने संयोजन में बदलाव किए हैं और चोटिल खिलाड़ियों की वापसी भी दूसरे चरण में देखने को मिल सकती है। इससे मुकाबलों का स्तर और ऊंचा होगा। 

टीम प्रबंधन अंक तालिका में बेहतर स्थान पाने के लिए रणनीतिक बदलाव करने पर भी जोर दे रहे हैं। बीसीसीआई ने फिलहाल प्लेऑफ मुकाबलों के कार्यक्रम का एलान नहीं किया है। बोर्ड ने कहा है कि लीग चरण समाप्त होने के बाद प्लेऑफ के चार मुकाबलों की तारीख और वेन्यू की घोषणा अलग से की जाएगी। आमतौर पर प्लेऑफ में क्वालीफायर-1, एलिमिनेटर, क्वालीफायर-2 और फाइनल मुकाबला शामिल होता है। माना जा रहा है कि प्लेऑफ मुकाबले भी बड़े शहरों में आयोजित किए जा सकते हैं, हालांकि इस पर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा। दूसरे चरण के कार्यक्रम के एलान के साथ ही फ्रेंचाइजी टीमों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। खिलाड़ियों के यात्रा कार्यक्रम, अभ्यास सत्र और टीम संयोजन को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। कई टीमें घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेंगी, जबकि कुछ टीमें लगातार जीत हासिल कर अंक तालिका में छलांग लगाने पर ध्यान देंगी। प्रशंसकों को भी दूसरे चरण में रोमांचक मुकाबलों की उम्मीद है, क्योंकि हर मैच प्लेऑफ की दौड़ को प्रभावित कर सकता है। इस तरह 13 अप्रैल से शुरू होने वाला आईपीएल का दूसरा चरण टूर्नामेंट को निर्णायक दिशा देगा। 24 मई तक चलने वाले इन मुकाबलों के बाद शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में जगह बनाएंगी। 

भारतीय नौसेना में शामिल हुआ अत्याधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’, दुश्मनों पर रखेगा नजर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे 

भारतीय नौसेना को शुक्रवार को एक बड़ी सामरिक मजबूती मिली, जब नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत ‘तारागिरी’ को विशाखापत्तनम में नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। 3 अप्रैल की दोपहर आयोजित कमीशनिंग समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अत्याधुनिक तकनीक और घातक हथियारों से लैस यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

‘तारागिरी’ सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस है, जो दुश्मन के जहाजों और ठिकानों को दूर से निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी लगाई गई है, जो हवाई खतरों से जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

जहाज में आधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली, उन्नत सेंसर और अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली भी शामिल है, जिससे यह बहु-आयामी समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘तारागिरी’ को “स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप” करार देते हुए कहा कि इसकी कमीशनिंग भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना देश के मूल्यों, प्रतिबद्धता और सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है और यह नया युद्धपोत नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा। 

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना सिर्फ युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि मानवीय संकट और आपदा राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाती रही है। आईएनएस तारागिरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उच्च-तीव्रता वाले युद्ध अभियानों के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों में भी प्रभावी रूप से काम कर सके। समुद्र में राहत सामग्री पहुंचाने, चिकित्सा सहायता देने और संकटग्रस्त क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में यह जहाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया

इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। इसे स्वदेशी तकनीक के साथ तैयार किया गया है और इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती जहाजों की तुलना में तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और कम रडार सिग्नेचर वाला है, जिससे दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता बढ़ जाती है। राजनाथ सिंह ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की सराहना करते हुए कहा कि दशकों से यह संस्थान देश के लिए आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। 

कुशल कार्यबल, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने इसे विश्वसनीय शिपबिल्डिंग संस्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने से भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि रक्षा निर्यात में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। 

इस दौरान हथियार प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, युद्धपोत निर्माण और अन्य सैन्य उपकरणों पर बड़ा निवेश किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, आधुनिक मिसाइल सिस्टम और विशेष नौसैनिक जहाजों जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। ‘तारागिरी’ की कमीशनिंग के साथ भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, रक्षा और आक्रामक क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी मानी जा रही है। जब यह युद्धपोत समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत रक्षा संकल्प का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाएगा।

राज्यसभा से उपनेता पद से हटाए गए आप सांसद राघव चड्ढा का बड़ा संदेश, कहा- ‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं’

आम आदमी पार्टी ने गुरुवार को अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया। आम आदमी पार्टी ने उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया उपनेता नियुक्त किया है। पार्टी के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वहीं, राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दे उठाने पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। राघव चड्ढा ने अपने एक्स हैंडल पर करीब 2 मिनट 45 सेकेंड का वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने कई जनहित के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि वे लगातार आम लोगों से जुड़े विषय संसद में उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास पर बढ़ते टैक्स का बोझ, बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने, मोबाइल कंपनियों के 28 दिन वाले रिचार्ज को लेकर शिकायतें, एयरपोर्ट पर महंगे खाने की समस्या, हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाला जीएसटी, एयर पॉल्यूशन, पेपर लीक जैसे मुद्दे वे लगातार उठाते रहे हैं।

उन्होंने वीडियो में कहा कि देश के मध्यम वर्ग की परेशानियां बढ़ रही हैं, लेकिन इन मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने मोबाइल सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनकमिंग कॉल चार्ज, डेटा एक्सपायरी और 28 दिन के रिचार्ज जैसे मामले लोगों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने फूड एडल्टरेशन, एयरलाइन कंपनियों द्वारा एक्सेस बैगेज चार्ज, पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्चों का भी मुद्दा उठाया।

राघव चड्ढा ने कहा कि वे संसद के अंदर और बाहर लगातार इन मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” इसके साथ ही उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष निशाने के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के इस फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से इस बदलाव को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि संगठनात्मक संतुलन और संसदीय रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया है। अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाए जाने के बाद पार्टी की संसदीय टीम में बदलाव का संकेत भी मिला है।

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर और पार्टी में भूमिका

राघव चड्ढा लंबे समय से आम आदमी पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल रहे हैं। राज्यसभा पहुंचने से पहले वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे। फरवरी 2020 से मार्च 2022 तक वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे और इस दौरान कई मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई। विधानसभा में उन्होंने वित्त, शहरी सेवाओं और प्रशासनिक मामलों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। राज्यसभा में भेजे जाने से पहले वे दिल्ली जल बोर्ड से भी जुड़े रहे और पानी से संबंधित परियोजनाओं पर काम किया। 

अप्रैल 2022 में उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया, जिसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की प्रमुख आवाज बने। उच्च सदन में वे आर्थिक मुद्दों, मिडिल क्लास की समस्याओं और उपभोक्ता हितों से जुड़े विषयों को उठाते रहे हैं। पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आने से यह मामला और चर्चा में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान आने वाले समय में पार्टी के भीतर समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, राघव चड्ढा ने अपने संदेश में साफ किया है कि वे जनता के मुद्दे उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश भले हो, लेकिन वे “आम आदमी” की लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, पार्टी द्वारा अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की रणनीति किस तरह बदलती है, इस पर भी नजर रहेगी।

हवाई यात्रियों को मुफ्त सीट चयन पर फिलहाल रोक, सरकार ने 60% सीटें बिना शुल्क देने का फैसला टाला

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत देने की दिशा में सरकार द्वारा प्रस्तावित बड़ा फैसला फिलहाल टल गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइनों को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चुनने की सुविधा देने के निर्देश को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह नियम 20 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन एयरलाइंस कंपनियों की आपत्तियों और व्यावसायिक चिंताओं को देखते हुए मंत्रालय ने इस पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है। दरअसल, हवाई टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों से पसंदीदा सीट चुनने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। विंडो सीट, आगे की सीट या अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटों के लिए यात्रियों को अलग से भुगतान करना पड़ता है। इसे लेकर लंबे समय से यात्रियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के मद्देनजर सरकार ने मार्च में यह प्रस्ताव रखा था कि एयरलाइंस को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त में चुनने की सुविधा देनी होगी, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम किया जा सके। 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 18 मार्च को इस संबंध में घोषणा करते हुए बताया था कि उसने महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (डीजीसीए) को निर्देश जारी किए हैं कि सभी एयरलाइनों को इस नियम को लागू करने के लिए कहा जाए। मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया था कि यह फैसला यात्रियों के हित में लिया जा रहा है और इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि, इस घोषणा के बाद एयरलाइंस कंपनियों की ओर से आपत्तियां सामने आईं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर सहित कुछ एयरलाइनों ने मंत्रालय को आवेदन देकर कहा कि इस फैसले का परिचालन और व्यावसायिक असर गंभीर हो सकता है। 

एयरलाइंस का कहना था कि सीट चयन शुल्क उनके राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसे हटाने से किराया संरचना प्रभावित हो सकती है। एयरलाइंस कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा अनियंत्रित किराया व्यवस्था में सीट चयन शुल्क हटाने से टिकट कीमतों में बदलाव करना पड़ेगा, जिसका असर अंततः यात्रियों पर ही पड़ सकता है। कंपनियों का कहना था कि यदि सीट चयन मुफ्त किया जाता है तो टिकट बेस फेयर बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे कम किराए में यात्रा करने वाले यात्रियों पर बोझ बढ़ जाएगा।

जांच पूरी होने तक लागू नहीं होगा नियम

एयरलाइंस से मिले इन आवेदनों के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पूरे मामले की समीक्षा की। मंत्रालय ने माना कि प्रस्तावित नियम का किराया संरचना, परिचालन लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा पर व्यापक असर पड़ सकता है। साथ ही यह भी देखा गया कि अलग-अलग एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति अलग होती है, ऐसे में एक समान नियम लागू करना व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने फैसला किया है कि 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क देने का प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया जाए। मंत्रालय ने कहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत अध्ययन और हितधारकों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तब तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी और एयरलाइंस अपनी नीतियों के अनुसार सीट चयन शुल्क लेती रहेंगी।

 सरकार यात्रियों को राहत देने और एयरलाइंस के व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। यदि भविष्य में संशोधित नियम लागू होते हैं, तो संभव है कि कुछ श्रेणी की सीटें मुफ्त हों और कुछ प्रीमियम सीटों पर शुल्क जारी रहे। फिलहाल इस फैसले के टलने से यात्रियों को मुफ्त सीट चयन की सुविधा के लिए इंतजार करना होगा। हालांकि मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि मामले की पूरी जांच के बाद संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे यात्रियों को राहत भी मिले और एयरलाइंस के कारोबार पर भी प्रतिकूल असर न पड़े।