हिमाचल में शहरी चुनाव का बजा बिगुल : 17 मई को 51 निकायों में होगी वोटिंग, निगमों पर सियासी संग्राम, प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज

हिमाचल प्रदेश में शहरी राजनीति का बड़ा मंच सज चुका है। राज्य चुनाव आयोग ने 17 मई को 51 नगर निकायों में चुनाव कराने की घोषणा कर दी है, जिससे पूरे प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य चुनाव आयुक्त अनिल खाची ने शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव कार्यक्रम का विस्तार से ऐलान किया। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, जिसने प्रशासनिक गतिविधियों पर तुरंत असर डालना शुरू कर दिया है।

इस बार जिन निकायों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें चार नगर निगम मंडी, सोलन, धर्मशाला और पालमपुर सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इनके अलावा 25 नगर परिषद और 22 नगर पंचायतों में भी मतदान कराया जाएगा। खास बात यह है कि केवल नगर निगमों के चुनाव ही राजनीतिक दलों के पार्टी चिन्हों पर होंगे, जबकि नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनाव गैर-पार्टी आधार पर कराए जाएंगे। ऐसे में नगर निगम चुनाव सीधे तौर पर सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बनते दिख रहे हैं। 

चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए आयोग ने विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। उम्मीदवार 29, 30 अप्रैल और 2 मई को नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद 4 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 6 मई तक नाम वापसी की अंतिम तिथि तय की गई है। चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराई जाएगी।

मतदान 17 मई को होगा, लेकिन मतगणना को लेकर अलग-अलग व्यवस्था बनाई गई है। नगर परिषद और नगर पंचायतों के परिणाम उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे, जबकि चारों नगर निगमों के वोटों की गिनती 31 मई को संबंधित निगम मुख्यालयों में होगी। इससे साफ है कि निगम चुनावों को लेकर उत्सुकता और राजनीतिक तापमान लंबे समय तक बना रहेगा। इन चुनावों में लगभग 3.59 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें करीब 1.80 लाख पुरुष और 1.79 लाख महिला मतदाता शामिल हैं।

मतदान के लिए कुल 589 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि हर मतदाता को सुविधा के साथ मतदान का अवसर मिल सके। आयोग ने सभी जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा, पारदर्शिता और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अगले साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह एक तरह की सेमीफाइनल परीक्षा है, जिसमें दोनों प्रमुख दल अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेंगे। नगर निगमों में जीत न केवल स्थानीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाएगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए माहौल भी तैयार करेगी। इस बीच, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनावों की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन अगले एक सप्ताह के भीतर उसका कार्यक्रम भी जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि चारों नगर निगमों का कार्यकाल 12 अप्रैल को समाप्त हो चुका है, जिसके बाद अब नए प्रतिनिधियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई है।

आचार संहिता लागू, प्रशासन पर सख्ती चुनावी माहौल में विकास कार्यों पर ब्रेक

चुनाव की घोषणा के साथ ही हिमाचल प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके लागू होते ही सरकार और प्रशासन के कामकाज पर कई तरह की पाबंदियां लग गई हैं। अब कोई भी नई विकास योजना, परियोजना या वित्तीय घोषणा बिना चुनाव आयोग की अनुमति के नहीं की जा सकेगी। इसका सीधा असर उन योजनाओं पर पड़ेगा जो अभी प्रस्तावित थीं या शुरू होने की प्रक्रिया में थीं। आचार संहिता के तहत सरकारी मशीनरी को पूरी तरह निष्पक्ष रहना होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग न लें और न ही किसी दल या उम्मीदवार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाएं। साथ ही सरकारी संसाधनों जैसे वाहन, भवन या कर्मचारियों का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। 

चुनावी माहौल को देखते हुए प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संवेदनशील, अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान की जा रही है, जहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा निगरानी टीमों का गठन किया गया है, जो आचार संहिता के उल्लंघन पर नजर रखेंगी और तुरंत कार्रवाई करेंगी।राजनीतिक दलों ने भी चुनावी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कांग्रेस जहां सत्ता में रहते हुए अपने कामकाज को जनता के सामने रखेगी, वहीं भाजपा सरकार की नीतियों और फैसलों को मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतरेगी। नगर निगम चुनावों में पार्टी चिन्ह होने के कारण मुकाबला सीधा और तीखा होने की पूरी संभावना है। हिमाचल प्रदेश में 17 मई को होने जा रहे ये नगर निकाय चुनाव न केवल स्थानीय निकायों के गठन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश की भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करने वाले साबित हो सकते हैं। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनता किसे अपना समर्थन देती है और किसके हाथ में शहरी सत्ता की कमान सौंपती है।

विदेशों में सिख संस्थाओं में बढ़ता टकराव : कनाडा से जर्मनी तक गुरुद्वारों में विवाद ने लिया हिंसक रूप, वीडियो 

विदेशों में बसे सिख समुदाय के बीच धार्मिक और प्रबंधन से जुड़े विवाद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। हाल के दिनों में कनाडा में गुरुद्वारों के भीतर बढ़ते टकराव और गुटबाजी ने चिंता बढ़ा दी है। अलग-अलग शहरों में गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों को लेकर विवाद लगातार उभर रहे हैं, जहां संगत के भीतर ही दो धड़े आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। कई मामलों में ये मतभेद केवल बहस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि हाथापाई और हिंसा तक पहुंच गए हैं। कनाडा के कुछ गुरुद्वारों में हाल ही में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां प्रबंधन को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि धार्मिक मर्यादाओं की भी अनदेखी की गई। संगत के बीच धक्का-मुक्की, नारेबाजी और यहां तक कि सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विदेशों में धार्मिक संस्थाओं का संचालन अब केवल आस्था का विषय नहीं रह गया, बल्कि सत्ता और नियंत्रण की लड़ाई भी बनता जा रहा है। 

गुरुद्वारों के फंड, संपत्ति और प्रभाव को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा इन विवादों की जड़ में है। कई जगहों पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। कुछ संगठनों पर यह आरोप भी लगे हैं कि वे अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए संगत के भीतर ध्रुवीकरण कर रहे हैं। इन घटनाओं का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक सिख समुदाय की छवि पर भी पड़ रहा है। धार्मिक स्थल, जो शांति, सेवा और एकता का प्रतीक माने जाते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। कनाडा में हुई इन घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसी बीच, अब ऐसा ही एक गंभीर मामला जर्मनी से सामने आया है, जिसने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। जर्मनी के मोर्स शहर के डुइसबर्ग इलाके में स्थित एक गुरुद्वारे में हुई हिंसक झड़प ने यह दिखा दिया कि यह समस्या अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुकी है।

जर्मनी में गुरुद्वारे के भीतर खूनी झड़प, 11 लोग घायल

जर्मनी के मोर्स शहर के डुइसबर्ग इलाके में स्थित गुरुद्वारे में सोमवार को दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें 11 लोग घायल हो गए। इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। हालांकि, इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इनमें गुरुद्वारे के अंदर ही दो पक्षों के बीच मारपीट और अफरा-तफरी साफ देखी जा सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस झड़प में करीब 40 लोग शामिल थे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को बड़े पैमाने पर कार्रवाई करनी पड़ी। हालात को काबू में करने के लिए विशेष पुलिस सामरिक इकाइयों को भी मौके पर तैनात किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झड़प के दौरान चाकू और कृपाण जैसे धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा पेपर स्प्रे और कथित तौर पर एक बंदूक का भी उपयोग हुआ। 

एक प्रत्यक्षदर्शी, जो करीब 56 वर्षीय संगत सदस्य हैं, ने बताया कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि पहले से सोचा-समझा लग रहा था। उन्होंने कहा कि सेवा शुरू होने से ठीक पहले कुछ लोगों ने पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और उसके बाद हिंसा भड़क गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक व्यक्ति ने पिस्तौल से गोली चलाई, हालांकि बाद में जांच में यह सामने आया कि वह ‘ब्लैंक-फायरिंग’ पिस्तौल थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यह विवाद गुरुद्वारे के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चुनाव को लेकर शुरू हुआ हो सकता है। बताया जा रहा है कि गुरुद्वारे के फंड और उसके प्रबंधन को लेकर पुराने और नए सदस्यों के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। यही मतभेद धीरे-धीरे गहराते गए और अंततः हिंसक झड़प में बदल गए। घटना के दौरान अफरा-तफरी मच गई और कई लोग डर के कारण गुरुद्वारे से बाहर भागने लगे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई। 

घायलों का इलाज मौके पर ही पैरामेडिक्स और एक आपातकालीन डॉक्टर द्वारा किया गया। पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच जारी है। घटनास्थल से मिले कारतूसों के खोखे के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि असली गोली नहीं चलाई गई थी, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण थे और स्थिति कभी भी और गंभीर हो सकती थी। यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि विदेशों में धार्मिक संस्थाओं के भीतर बढ़ती गुटबाजी और सत्ता संघर्ष किस हद तक पहुंच चुका है। कनाडा से लेकर जर्मनी तक सामने आ रहे ऐसे मामले यह संकेत दे रहे हैं कि अगर समय रहते इन विवादों का शांतिपूर्ण समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

दो दिन बाद खुलेंगे बाबा केदार के कपाट : फूलों से सजा केदारनाथ धाम, आस्था से सराबोर हुई पूरी केदारपुरी, भक्तों में छाया उत्साह 

हिमालय की गोद में बसे पवित्र केदारनाथ मंदिर धाम के कपाट खुलने में अब महज दो दिन शेष रह गए हैं। जैसे-जैसे तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे केदारनगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ और प्रशासनिक तैयारियां तेज होती जा रही हैं। चारधाम यात्रा 2026 के प्रमुख पड़ावों में से एक केदारनाथ धाम इस समय भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से पूरी तरह ओत-प्रोत नजर आ रहा है। मंदिर परिसर में इन दिनों भव्य सजावट का कार्य अंतिम चरण में है। बाबा केदार के स्वागत के लिए पूरे मंदिर को करीब 51 क्विंटल ताजे और सुगंधित फूलों से सजाया जा रहा है। 

विशेष रूप से गेंदे के रंग-बिरंगे फूलों से मंदिर परिसर को आकर्षक रूप दिया गया है। दूर-दूर से पहुंचे कारीगर और स्थानीय लोग मिलकर इस सजावट को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह के बाहरी हिस्सों तक फूलों की झालरें और आकर्षक डिजाइन बनाए जा रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं। केदारनाथ धाम के आसपास का पूरा क्षेत्र इस समय आध्यात्मिक वातावरण में डूबा हुआ है। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच फूलों से सजा मंदिर और गूंजते ‘हर हर महादेव’ के जयकारे एक अलौकिक अनुभूति प्रदान कर रहे हैं। श्रद्धालु भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह चिकित्सा शिविर, सुरक्षा बलों की तैनाती और यात्रा मार्गों की मरम्मत का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है।

चारधाम यात्रा के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मौसम की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। हेलीकॉप्टर सेवाओं से लेकर पैदल मार्गों तक हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। यात्रियों को सुरक्षित और सुगम दर्शन कराने के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। इस बीच बाबा केदार की पवित्र डोली भी अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, डोली अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए केदारनाथ धाम पहुंचती है। इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं और पूरे मार्ग में भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिलता है।

कल गौरीकुंड से केदारनाथ पहुंचेगी डोली, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुलेंगे कपाट

धार्मिक परंपरा के अनुसार, बाबा केदार की पवित्र डोली आज द्वितीय रात्रि प्रवास के लिए गौरीकुंड पहुंचेगी। इसके बाद मंगलवार को डोली केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी और शाम तक मंदिर परिसर में पहुंच जाएगी। इस दौरान मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालु डोली का स्वागत करेंगे और पूजा-अर्चना करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बुधवार सुबह ठीक 8 बजे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल होंगे। 

कपाट खुलने के साथ ही छह महीने तक चलने वाली केदारनाथ यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। गौरतलब है कि चार धाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हो चुकी है। इसके तहत यमुनोत्री मंदिर और गंगोत्री के कपाट पहले ही श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। बाबा केदार के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से उनकी पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली पहले ही केदारनाथ के लिए रवाना हो चुकी है। इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है।

हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में भक्तों के आने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति ने इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। साफ-सफाई, पेयजल, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केदारनाथ धाम में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कपाट खुलने के इस पावन अवसर को लेकर हर कोई उत्साहित है और बाबा केदार के दर्शन के लिए आतुर नजर आ रहा है।

आखिरकार आज बजेगा चुनावी बिगुल : कुछ देर बाद हिमाचल में पंचायत और नगर निकाय चुनाव की तारीखों पर लगेगी मुहर, प्रदेश में सियासी हलचल तेज

हिमाचल प्रदेश की सियासत में लंबे समय से जिस एलान का इंतजार किया जा रहा था, वह घड़ी अब आ चुकी है। आज मंगलवार को राज्य में पंचायत और नगर निकाय चुनावों की तारीखों का औपचारिक एलान किया जाएगा। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो जाएगा और राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सक्रिय उम्मीदवारों की हलचल तेज हो जाएगी। पिछले कई हफ्तों से चुनाव की संभावित तारीखों को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब इन अटकलों पर विराम लगने वाला है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दोपहर बाद 3:30 बजे शिमला स्थित सचिवालय में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इस प्रेस वार्ता में पंचायत और नगर निकाय चुनावों की पूरी रूपरेखा सामने रखी जाएगी, जिसमें मतदान की तारीखें, नामांकन प्रक्रिया और आचार संहिता से जुड़ी अहम जानकारियां शामिल होंगी।
चुनाव आयोग की इस घोषणा के बाद प्रदेश में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो सकती है, जिससे सरकारी कामकाज और नई घोषणाओं पर तत्काल प्रभाव पड़ेगा। यही वजह है कि सरकार और प्रशासन भी इस ऐलान को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं।

गौरतलब है कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। ये चुनाव न केवल स्थानीय नेतृत्व तय करते हैं, बल्कि प्रदेश की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए राजनीतिक दल इन चुनावों को लेकर पहले से ही रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। पिछले चुनावों के अनुभवों को देखते हुए इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है। कई जगहों पर पुराने चेहरों के सामने नए उम्मीदवार चुनौती पेश कर सकते हैं। वहीं, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी इस बार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इन चुनावों के नतीजे आने वाले समय में प्रदेश की बड़ी राजनीति पर असर डाल सकते हैं। यही कारण है कि छोटे स्तर के ये चुनाव भी बड़े सियासी संकेत देने की क्षमता रखते हैं।

चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की संख्या और ईवीएम या बैलेट पेपर के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट जानकारी दी जा सकती है। इसके अलावा कोरोना या अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा संभव है, यदि आवश्यक हुआ। प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रशासन ने पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी भी अलर्ट मोड पर है। चुनाव की घोषणा के साथ ही उम्मीदवारों की सक्रियता और जनसंपर्क अभियान भी तेज हो जाएंगे। गांव-गांव और शहर-शहर में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ेंगी और जनता के बीच विकास, रोजगार और स्थानीय मुद्दों को लेकर बहस तेज होगी। यह भी माना जा रहा है कि इस बार चुनावों में स्थानीय मुद्दे प्रमुख भूमिका निभाएंगे। पानी, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार जैसे विषय चुनावी एजेंडे के केंद्र में रह सकते हैं।

हिमाचल में आज से शुरू हो जाएंगी राजनीतिक दलों की तैयारियां

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जैसे ही चुनावी तारीखों का एलान होगा, प्रदेश में राजनीतिक हलचल और तेज हो जाएगी। सभी दल अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करने और प्रचार अभियान को अंतिम रूप देने में जुट जाएंगे। टिकट वितरण को लेकर भी अंदरूनी खींचतान देखने को मिल सकती है। चुनाव आयोग द्वारा जारी शेड्यूल में नामांकन की अंतिम तारीख, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी की प्रक्रिया और मतदान की तिथि का विस्तृत विवरण शामिल होगा। इसके साथ ही मतगणना की तारीख भी घोषित की जाएगी, जो चुनावी प्रक्रिया का अंतिम और सबसे अहम चरण होता है। प्रदेश में इस बार चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की जा सकती है।

संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान पहले ही की जा चुकी है, जहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। इस बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है और जमीनी स्तर पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं। सोशल मीडिया के जरिए भी प्रचार अभियान को धार देने की कोशिश की जा रही है। इस बार मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनाव और शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव स्थानीय विकास की दिशा तय करेंगे। इसलिए मतदाता भी अपने वोट को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक नजर आ रहे हैं।

युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की संख्या भी इस बार निर्णायक साबित हो सकती है। यही वजह है कि सभी दल युवाओं को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रहे हैं। आज होने वाला यह एलान हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय खोलने वाला है। जैसे ही तारीखों का खुलासा होगा, चुनावी बिगुल पूरी तरह बज जाएगा और प्रदेश का सियासी तापमान चरम पर पहुंच जाएगा।