विदेशों में सिख संस्थाओं में बढ़ता टकराव : कनाडा से जर्मनी तक गुरुद्वारों में विवाद ने लिया हिंसक रूप, वीडियो 

विदेशों में बसे सिख समुदाय के बीच धार्मिक और प्रबंधन से जुड़े विवाद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। हाल के दिनों में कनाडा में गुरुद्वारों के भीतर बढ़ते टकराव और गुटबाजी ने चिंता बढ़ा दी है। अलग-अलग शहरों में गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों को लेकर विवाद लगातार उभर रहे हैं, जहां संगत के भीतर ही दो धड़े आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। कई मामलों में ये मतभेद केवल बहस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि हाथापाई और हिंसा तक पहुंच गए हैं। कनाडा के कुछ गुरुद्वारों में हाल ही में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां प्रबंधन को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि धार्मिक मर्यादाओं की भी अनदेखी की गई। संगत के बीच धक्का-मुक्की, नारेबाजी और यहां तक कि सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विदेशों में धार्मिक संस्थाओं का संचालन अब केवल आस्था का विषय नहीं रह गया, बल्कि सत्ता और नियंत्रण की लड़ाई भी बनता जा रहा है। 

गुरुद्वारों के फंड, संपत्ति और प्रभाव को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा इन विवादों की जड़ में है। कई जगहों पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। कुछ संगठनों पर यह आरोप भी लगे हैं कि वे अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए संगत के भीतर ध्रुवीकरण कर रहे हैं। इन घटनाओं का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक सिख समुदाय की छवि पर भी पड़ रहा है। धार्मिक स्थल, जो शांति, सेवा और एकता का प्रतीक माने जाते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। कनाडा में हुई इन घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसी बीच, अब ऐसा ही एक गंभीर मामला जर्मनी से सामने आया है, जिसने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। जर्मनी के मोर्स शहर के डुइसबर्ग इलाके में स्थित एक गुरुद्वारे में हुई हिंसक झड़प ने यह दिखा दिया कि यह समस्या अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुकी है।

जर्मनी में गुरुद्वारे के भीतर खूनी झड़प, 11 लोग घायल

जर्मनी के मोर्स शहर के डुइसबर्ग इलाके में स्थित गुरुद्वारे में सोमवार को दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें 11 लोग घायल हो गए। इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। हालांकि, इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इनमें गुरुद्वारे के अंदर ही दो पक्षों के बीच मारपीट और अफरा-तफरी साफ देखी जा सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस झड़प में करीब 40 लोग शामिल थे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को बड़े पैमाने पर कार्रवाई करनी पड़ी। हालात को काबू में करने के लिए विशेष पुलिस सामरिक इकाइयों को भी मौके पर तैनात किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झड़प के दौरान चाकू और कृपाण जैसे धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा पेपर स्प्रे और कथित तौर पर एक बंदूक का भी उपयोग हुआ। 

एक प्रत्यक्षदर्शी, जो करीब 56 वर्षीय संगत सदस्य हैं, ने बताया कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि पहले से सोचा-समझा लग रहा था। उन्होंने कहा कि सेवा शुरू होने से ठीक पहले कुछ लोगों ने पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और उसके बाद हिंसा भड़क गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक व्यक्ति ने पिस्तौल से गोली चलाई, हालांकि बाद में जांच में यह सामने आया कि वह ‘ब्लैंक-फायरिंग’ पिस्तौल थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यह विवाद गुरुद्वारे के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चुनाव को लेकर शुरू हुआ हो सकता है। बताया जा रहा है कि गुरुद्वारे के फंड और उसके प्रबंधन को लेकर पुराने और नए सदस्यों के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। यही मतभेद धीरे-धीरे गहराते गए और अंततः हिंसक झड़प में बदल गए। घटना के दौरान अफरा-तफरी मच गई और कई लोग डर के कारण गुरुद्वारे से बाहर भागने लगे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई। 

घायलों का इलाज मौके पर ही पैरामेडिक्स और एक आपातकालीन डॉक्टर द्वारा किया गया। पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच जारी है। घटनास्थल से मिले कारतूसों के खोखे के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि असली गोली नहीं चलाई गई थी, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण थे और स्थिति कभी भी और गंभीर हो सकती थी। यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि विदेशों में धार्मिक संस्थाओं के भीतर बढ़ती गुटबाजी और सत्ता संघर्ष किस हद तक पहुंच चुका है। कनाडा से लेकर जर्मनी तक सामने आ रहे ऐसे मामले यह संकेत दे रहे हैं कि अगर समय रहते इन विवादों का शांतिपूर्ण समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

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