शिमला में KNH को लेकर भ्रम पर विराम, मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- केवल गायनी ओपीडी शिफ्ट होगी, सेवाएं रहेंगी जारी
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (KNH) को लेकर इन दिनों विवाद और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। खासतौर पर गायनी ओपीडी को शिफ्ट करने की खबर के बाद लोगों में असमंजस और नाराजगी देखी जा रही है। इस मुद्दे पर अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि कमला नेहरू अस्पताल से मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल (MCH) को कहीं भी शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल गायनी ओपीडी को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने की योजना है, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जा सकें और अस्पताल की सेवाओं को और मजबूत बनाया जा सके। सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी तरह से स्वास्थ्य सेवाओं को कम करना नहीं है, बल्कि उन्हें और बेहतर बनाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले को लेकर जो अफवाहें फैल रही हैं, वे पूरी तरह से गलत हैं और लोगों को भ्रमित कर रही हैं। दरअसल, हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि KNH से जुड़े कुछ विभागों को शिफ्ट किया जा सकता है, जिसके बाद स्थानीय लोगों और मरीजों में चिंता बढ़ गई। खासतौर पर महिलाओं ने इस फैसले को लेकर अपनी नाराजगी जताई, क्योंकि KNH शिमला में महिलाओं के इलाज के लिए एक प्रमुख अस्पताल माना जाता है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि गायनी ओपीडी को शिफ्ट करने का निर्णय स्थायी नहीं है, बल्कि यह एक अस्थायी व्यवस्था हो सकती है, जिसे जरूरत और सुविधा के अनुसार लागू किया जाएगा। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें समय पर इलाज मिलता रहे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में बढ़ते मरीजों के दबाव और बेहतर प्रबंधन के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। इससे मरीजों की भीड़ को नियंत्रित करने और सुविधाओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
अफवाहों पर सख्ती, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर
सीएम सुक्खू ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर लगातार बेहतर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी भी फैसले से आम जनता को असुविधा होती है, तो सरकार उस पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार है। मरीजों की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सरकार की पहली प्राथमिकता है। वहीं, इस मामले को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं और इस फैसले को लेकर स्पष्टता की मांग की है। हालांकि सरकार ने दोहराया है कि किसी भी महत्वपूर्ण सेवा को बंद नहीं किया जा रहा है और सभी जरूरी सुविधाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
बड़े अस्पतालों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए समय-समय पर सेवाओं का पुनर्गठन जरूरी होता है। लेकिन इस दौरान यह भी जरूरी है कि लोगों को सही जानकारी समय पर दी जाए, ताकि किसी तरह का भ्रम या असंतोष पैदा न हो। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी कहा गया है कि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यदि गायनी ओपीडी को शिफ्ट किया जाता है, तो उसके लिए बेहतर स्थान और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। फिलहाल, मुख्यमंत्री के बयान के बाद स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हो गई है और लोगों में फैली आशंकाएं कम होने की उम्मीद है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए जाएंगे, जिससे प्रदेश के लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सके।

