विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों पर सख्ती, बिना अनुमति भंडारा-कथा पर लगाई गई रोक

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अब धाम क्षेत्र में किसी भी प्रकार का भंडारा, भागवत कथा, कीर्तन या अन्य विशेष धार्मिक कार्यक्रम बिना पूर्व अनुमति के आयोजित नहीं किया जा सकेगा। नगर पंचायत ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और धाम की व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद आयोजकों को कार्यक्रम से पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। नगर पंचायत के अनुसार, यात्रा सीजन के दौरान बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई स्थानों पर बिना योजना के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे यातायात, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा पर असर पड़ता है। कई बार भंडारों के कारण सड़क और पैदल मार्ग बाधित हो जाते हैं, जिससे दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नियम लागू किया गया है। 

प्रशासन का कहना है कि धाम में धार्मिक कार्यक्रमों की परंपरा बनी रहेगी, लेकिन उन्हें व्यवस्थित ढंग से आयोजित करना जरूरी है। आयोजकों को कार्यक्रम की तिथि, स्थान, अनुमानित भीड़, भोजन व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़ी जानकारी पहले से देनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही आयोजन किया जा सकेगा। 

नगर पंचायत ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्थानों पर ही कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार बिना अनुमति लगाए गए भंडारों में साफ-सफाई की कमी देखी जाती है, जिससे कूड़ा-कचरा फैल जाता है। इससे न केवल धाम की पवित्रता प्रभावित होती है बल्कि पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। नए नियमों के तहत आयोजकों को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद स्थान को साफ करना अनिवार्य होगा।

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था के लिए लिया गया है। यदि सभी कार्यक्रम अनुमति लेकर होंगे तो भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं बेहतर तरीके से संचालित की जा सकेंगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर अग्निशमन, चिकित्सा सहायता और पुलिस व्यवस्था की जरूरत होती है। बिना सूचना के कार्यक्रम होने से अचानक भीड़ बढ़ जाती है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। अब अनुमति प्रक्रिया के माध्यम से प्रशासन पहले से तैयारी कर सकेगा। 

नगर पंचायत ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति आयोजन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है और कार्यक्रम को बीच में ही बंद भी कराया जा सकता है। साथ ही, धाम क्षेत्र में पोस्टर, बैनर या अस्थायी ढांचे लगाने के लिए भी अनुमति आवश्यक होगी। इस फैसले को लेकर कई स्थानीय लोगों ने समर्थन जताया है। उनका कहना है कि इससे धाम में व्यवस्था बेहतर होगी और श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिलेगी। वहीं कुछ आयोजकों ने अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है, ताकि धार्मिक गतिविधियां बाधित न हों।

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा। निर्धारित नियमों के तहत आवेदन करने पर समय पर अनुमति दी जाएगी। यात्रा सीजन को देखते हुए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। नए नियम लागू होने के बाद अब बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और धाम की व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू बनी रहेगी। 

सांसद राघव चड्ढा पर उनकी ही पार्टी की सख्ती, आप ने राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल को मिलेगी जिम्मेदारी 

आम आदमी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद के खिलाफ बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है और इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है। पार्टी ने पत्र में अनुरोध किया है कि चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब उन्हें सदन में पार्टी कोटे से बोलने का समय भी आवंटित न किया जाए। जानकारी के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने सांसद अशोक मित्तलको नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। पार्टी के इस फैसले को अंदरूनी रणनीतिक बदलाव और संसदीय नेतृत्व में फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है। अप्रैल 2022 से राज्यसभा सांसद रहे राघव चड्ढा संसद में सक्रिय और मुखर नेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। उन्होंने कई बार जनहित के मुद्दे उठाकर सुर्खियां भी बटोरी थीं, लेकिन हाल के महीनों में उनकी सक्रियता कम दिखाई दे रही थी। 

पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चड्ढा को पार्टी की ओर से सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। यह कदम संकेत देता है कि पार्टी संसदीय रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। वर्तमान में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य हैं, जिनमें सात पंजाब से और तीन दिल्ली से हैं। ऐसे में उपनेता पद का महत्व काफी बढ़ जाता है, क्योंकि वही सदन में पार्टी की लाइन तय करने और समन्वय का काम करता है। यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि पिछले कुछ समय से चल रहे आंतरिक मूल्यांकन के बाद यह कदम उठाया गया है। हाल ही में विधानसभा चुनाव के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची में भी राघव चड्ढा का नाम शामिल नहीं किया गया था। इसे भी नेतृत्व स्तर पर बदलाव के संकेत के रूप में देखा गया था।

स्टार प्रचारक सूची से बाहर, गतिविधियों से दूरी ने बढ़ाई चर्चा

राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक गतिविधियों से भी दूर नजर आ रहे थे। पार्टी की प्रमुख बैठकों में उनकी मौजूदगी कम रही और मीडिया ब्रीफिंग में भी वे शामिल नहीं हुए। यहां तक कि दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंदकेजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को राहत मिलने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस चुप्पी ने भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।

हालांकि, संसदीय गतिविधियों में राघव चड्ढा की भूमिका पहले काफी सक्रिय रही है। उन्होंने हाल ही में गिग वर्कर्स के मुद्दे को राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठाया था और उनके सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने का मुद्दा भी उठाया था। उनका कहना था कि बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल मां की नहीं बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनके इन बयानों को व्यापक समर्थन भी मिला था।

इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने संसदीय रणनीति में बदलाव करते हुए उन्हें उपनेता पद से हटाने का फैसला लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण का हिस्सा हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे संगठनात्मक अनुशासन और सक्रियता से जोड़कर भी देख रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्यसभा सचिवालय इस पत्र पर क्या कार्रवाई करता है और अशोक मित्तल को उपनेता की जिम्मेदारी कब तक सौंपी जाती है। यह फैसला आम आदमी पार्टी की संसदीय रणनीति और नेतृत्व संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे पार्टी की राजनीतिक दिशा और सक्रियता पर भी असर पड़ सकता है।

50 साल बाद चांद की ओर फिर बढ़े इंसानी कदम, आर्टेमिस-2 के साथ अंतरिक्ष में रवाना हुए चार यात्री

अमेरिका ने एक बार फिर मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में बड़ा अध्याय जोड़ते हुए चांद की दिशा में नई शुरुआत कर दी है। NASA के Artemis II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री बुधवार को चंद्रमा की ओर रवाना हुए। यह 50 से अधिक वर्षों बाद चंद्रमा की दिशा में भेजा गया पहला मानवयुक्त मिशन है और आने वाले वर्षों में चांद पर दोबारा मानव उतारने की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मौजूदगी बनाने की दिशा में बड़ी छलांग है। 32 मंजिला विशाल रॉकेट ने Kennedy Space Center से उड़ान भरी। लॉन्च को देखने के लिए हजारों लोग तटों, सड़कों और खुले मैदानों में जुटे। वातावरण में उत्साह और रोमांच का वही माहौल देखने को मिला, जैसा 1960 और 70 के दशक के अपोलो मिशनों के दौरान हुआ करता था। कई लोगों ने इसे मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के नए युग की शुरुआत बताया।

इस मिशन में अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। कमांडर रीड वाइजमैन के साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन उड़ान पर रवाना हुए। यह दल कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार किसी महिला, किसी गैर-श्वेत अंतरिक्ष यात्री और किसी गैर-अमेरिकी नागरिक को एक साथ चंद्र मिशन पर भेजा गया है। चारों अंतरिक्ष यात्री Orion spacecraft में सवार होकर चंद्रमा की दिशा में बढ़े। उड़ान से पहले भावुक पल भी देखने को मिले। अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने परिवारों को अलविदा कहा, हाथों से दिल का आकार बनाकर शुभकामनाएं लीं और विशेष एस्ट्रोवैन में बैठकर प्रक्षेपण स्थल तक पहुंचे। वहां उनका इंतजार कर रहा था Space Launch System, जो अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जा रहा है। यही रॉकेट ओरियन कैप्सूल को पृथ्वी की कक्षा से बाहर ले गया।

यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा

मिशन के अनुसार, यह उड़ान करीब 10 दिनों की परीक्षण यात्रा है। उड़ान के शुरुआती 25 घंटे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के पास ही रहेंगे और कैप्सूल के सभी सिस्टम की जांच करेंगे। इसके बाद मुख्य इंजन को सक्रिय किया जाएगा, जो उन्हें चंद्रमा की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ाएगा। यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है। हालांकि इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं। वे चंद्रमा के पास से गुजरेंगे और उसकी सतह से हजारों किलोमीटर दूर तक जाएंगे। इसके बाद कैप्सूल यू-टर्न लेकर पृथ्वी की ओर लौटेगा और अंत में प्रशांत महासागर में उतरेगा।

इस दौरान वे मानव इतिहास में सबसे दूर तक जाने वाले अंतरिक्ष यात्री बन जाएंगे‌ इस उड़ान की तुलना अक्सर Apollo 8 से की जा रही है, जिसने 1968 में पहली बार इंसानों को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचाया था। हालांकि आर्टेमिस-2 मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा नहीं करेंगे, लेकिन यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण डेटा जुटाएगा। नासा का लक्ष्य आने वाले वर्षों में आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर मानव को फिर से उतारना है। इसके बाद चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक शोध स्टेशन स्थापित करने और मंगल मिशन की तैयारी का रास्ता भी खुलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टेमिस-2 मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की नींव रखेगा और आने वाले दशकों में चंद्रमा वैज्ञानिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

ईरान पर अमेरिका का कड़ा रुख, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ने कहा- लक्ष्य पूरा होने तक जारी रहेगा अभियान

ईरान के खिलाफ जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने रुख को और सख्त कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सभी रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, तब तक अमेरिका की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ट्रम्प ने इसे सिर्फ मौजूदा संघर्ष नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दुश्मन को पूरी तरह तबाह कर सकता है। अपने संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना आधुनिक हथियारों के साथ लगातार कार्रवाई कर रही है और अत्याधुनिक बमवर्षक विमानों ने ईरान में प्रभावी भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल क्षमता को निशाना बनाया जा रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान बड़े पैमाने पर मिसाइलें तैयार कर रहा था और अमेरिका उसे किसी भी कीमत पर परमाणु ताकत नहीं बनने देगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वहां के शासन को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह कार्रवाई अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी थी। उन्होंने अपने फैसलों की तुलना पिछले प्रशासन से करते हुए कहा कि किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने वह नहीं किया जो उन्होंने किया है। ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान को बड़ी आर्थिक मदद दी थी, जबकि उनकी सरकार ने उस नीति को समाप्त कर दिया।

ट्रम्प ने दावा किया कि युद्ध के बाद अमेरिका को भारी निवेश मिला है। ऊर्जा संकट को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि तेल की कोई कमी नहीं होगी क्योंकि वैकल्पिक आपूर्ति के इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास सभी विकल्प मौजूद हैं और वह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े संघर्ष लंबा समय लेते हैं, लेकिन अमेरिका अपने लक्ष्य तक पहुंचकर ही रुकेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समझौते पर दो से तीन सप्ताह में फैसला

भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह दिए गए संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जाकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उनके अनुसार, संघर्ष समाप्त होने के बाद यह मार्ग खुल जाएगा और वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी और आने वाले दो से तीन सप्ताह में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और अमेरिका का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रम्प ने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में समझौते की संभावना भी है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका और आक्रामक रणनीति अपना सकता है। 

उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ अहम पुलों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान वार्ता की मेज पर आता है, तो यह बेहतर विकल्प होगा। हालांकि उन्होंने दोहराया कि अमेरिका को रोकना मुश्किल है और कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। उनके बयान के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है, खासकर ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि स्थिति पर अमेरिका की नजर बनी हुई है और जल्द राहत मिल सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो कार्रवाई और तेज होगी। ट्रम्प के इस कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी और बढ़ सकता है और आने वाले सप्ताह इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।