पीएम मोदी कल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का करेंगे उद्घाटन, प्रधानमंत्री के दौरे से पहले दून में सख्त ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को बहुप्रतीक्षित दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने जा रहे हैं। 210 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी आएगी। फिलहाल 5 से 6 घंटे में पूरा होने वाला यह सफर अब महज ढाई घंटे में तय किया जा सकेगा। उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सहारनपुर पुलिस ने रविवार शाम 6 बजे से 14 अप्रैल शाम 4 बजे तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू कर दिया है। इस दौरान दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड रूट पर कई स्थानों पर डायवर्जन प्रभावी रहेगा। अधिकारियों ने साफ किया है कि आम लोगों को असुविधा से बचाने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना अनिवार्य होगा। खासकर दिल्ली, सहारनपुर और रुड़की की ओर जाने वाले यात्रियों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है। देहरादून में भी प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं।
गणेशपुर क्षेत्र में सड़क मरम्मत कार्य और वीआईपी मूवमेंट के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू किया गया है। 12 अप्रैल से ही एक्सप्रेसवे को आम यातायात के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। एसपी ट्रैफिक लोकजीत सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का ही इस्तेमाल करें, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके। भारी वाहनों के लिए भी अलग से रूट तय किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। कार्यक्रम स्थल और आसपास के पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस लाइन में वरिष्ठ अधिकारियों एडीजी वी मुरुगेशन, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप और एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने सुरक्षा बलों को विस्तृत ब्रीफिंग दी। ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है और हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इधर, एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर यातायात नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है।
अक्षरधाम मंदिर से गीता कॉलोनी होते हुए बागपत के खेकड़ा तक एलिवेटेड सेक्शन पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। इसके साथ ही ऑटो, ट्रैक्टर और गैर-मोटर चालित वाहनों पर भी रोक लागू होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह एक्सप्रेसवे करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है और इसमें 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी शामिल है। यह कॉरिडोर वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
धामी सरकार की तैयारियां और विकास का रोडमैप
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धमी की सरकार ने प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, सड़क सुधार और सौंदर्यीकरण का काम तेजी से पूरा किया गया है। कार्यक्रम स्थल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए पार्किंग और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं। धामी सरकार इस एक्सप्रेसवे को राज्य के विकास के लिए ‘गेम चेंजर’ मान रही है। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन, उद्योग और निवेश को नई गति मिलेगी। खासकर मसूरी, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होगा।
इसके अलावा, राज्य सरकार ने एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी तैयार की है। लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और होटल इंडस्ट्री में निवेश आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं को भी मजबूत किया है। एक्सप्रेसवे पर एम्बुलेंस, फायर सर्विस और पेट्रोलिंग टीमों की तैनाती सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन न सिर्फ एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धि है, बल्कि यह उत्तराखंड के विकास की नई दिशा भी तय करने वाला साबित हो सकता है।

