पीएम मोदी कल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का करेंगे उद्घाटन, प्रधानमंत्री के दौरे से पहले दून में सख्त ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को बहुप्रतीक्षित दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने जा रहे हैं। 210 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी आएगी। फिलहाल 5 से 6 घंटे में पूरा होने वाला यह सफर अब महज ढाई घंटे में तय किया जा सकेगा। उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सहारनपुर पुलिस ने रविवार शाम 6 बजे से 14 अप्रैल शाम 4 बजे तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू कर दिया है। इस दौरान दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड रूट पर कई स्थानों पर डायवर्जन प्रभावी रहेगा। अधिकारियों ने साफ किया है कि आम लोगों को असुविधा से बचाने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना अनिवार्य होगा। खासकर दिल्ली, सहारनपुर और रुड़की की ओर जाने वाले यात्रियों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है। देहरादून में भी प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। 

गणेशपुर क्षेत्र में सड़क मरम्मत कार्य और वीआईपी मूवमेंट के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू किया गया है। 12 अप्रैल से ही एक्सप्रेसवे को आम यातायात के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। एसपी ट्रैफिक लोकजीत सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का ही इस्तेमाल करें, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके। भारी वाहनों के लिए भी अलग से रूट तय किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। कार्यक्रम स्थल और आसपास के पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस लाइन में वरिष्ठ अधिकारियों एडीजी वी मुरुगेशन, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप और एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने सुरक्षा बलों को विस्तृत ब्रीफिंग दी। ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है और हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इधर, एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर यातायात नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। 

अक्षरधाम मंदिर से गीता कॉलोनी होते हुए बागपत के खेकड़ा तक एलिवेटेड सेक्शन पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। इसके साथ ही ऑटो, ट्रैक्टर और गैर-मोटर चालित वाहनों पर भी रोक लागू होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह एक्सप्रेसवे करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है और इसमें 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी शामिल है। यह कॉरिडोर वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

धामी सरकार की तैयारियां और विकास का रोडमैप

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धमी की सरकार ने प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, सड़क सुधार और सौंदर्यीकरण का काम तेजी से पूरा किया गया है। कार्यक्रम स्थल को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए पार्किंग और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं। धामी सरकार इस एक्सप्रेसवे को राज्य के विकास के लिए ‘गेम चेंजर’ मान रही है। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन, उद्योग और निवेश को नई गति मिलेगी। खासकर मसूरी, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होगा। 

इसके अलावा, राज्य सरकार ने एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी तैयार की है। लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और होटल इंडस्ट्री में निवेश आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं को भी मजबूत किया है। एक्सप्रेसवे पर एम्बुलेंस, फायर सर्विस और पेट्रोलिंग टीमों की तैनाती सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन न सिर्फ एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धि है, बल्कि यह उत्तराखंड के विकास की नई दिशा भी तय करने वाला साबित हो सकता है।

नोएडा में वेतन बढ़ोतरी की मांग ने लिया उग्र रूप, कर्मचारियों का सड़क पर फूटा गुस्सा, जाम-तोड़फोड़ और आगजनी से हालात तनावपूर्ण

नोएडा की सुबह सोमवार को सामान्य नहीं रही। शहर के औद्योगिक और आईटी हब माने जाने वाले सेक्टर-60 और 62 के आसपास उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे कर्मचारियों का गुस्सा अचानक सड़कों पर फूट पड़ा। शुरुआत शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हुई, लेकिन देखते ही देखते यह विरोध उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़कों को जाम कर दिया। ऑफिस जाने वाले हजारों लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। प्रदर्शन के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब कुछ कर्मचारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। सड़क पर खड़ी कई गाड़ियों को निशाना बनाया गया और कुछ वाहनों में आग भी लगा दी गई। इस दौरान क्षेत्र में धुएं के गुबार उठते नजर आए, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। 

स्थानीय लोग और राहगीर भयभीत हो गए और कई लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर भागना ही बेहतर समझा। वहीं, नोएडा के फेज-2 इलाके में भी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा देखने को मिला। यहां कर्मचारियों ने संपत्तियों में तोड़फोड़ की और कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी, जिससे स्थिति और भी नियंत्रण से बाहर होती दिखी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। भारी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया और हालात को काबू में करने के प्रयास शुरू किए गए। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और शांत कराने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती दौर में प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम होता नजर नहीं आया।

तनाव के बीच बातचीत की कोशिशें तेज, ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई

प्रदर्शन का सबसे ज्यादा असर सेक्टर-62 के आसपास देखने को मिला, जहां कर्मचारियों ने पूरी तरह सड़क जाम कर दी। यह इलाका नोएडा का एक प्रमुख कॉरपोरेट हब है, जहां सैकड़ों कंपनियों के दफ्तर हैं। ऐसे में अचानक हुए जाम ने हजारों कर्मचारियों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया। कई लोग घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहे, जबकि कुछ ने वैकल्पिक रास्तों का सहारा लिया। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए ट्रैफिक को डायवर्ट करना शुरू किया और लोगों से अपील की कि वे इस इलाके से गुजरने से बचें। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों के संपर्क में बने हुए हैं और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी लंबे समय से वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद उनकी सैलरी में कोई खास इजाफा नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 

कई कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखी थीं, लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता स्थिति को शांत करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी तरह की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, देर शाम तक हालात में आंशिक सुधार की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कर्मचारियों की मांगों को समय रहते हल करना कितना जरूरी है, ताकि हालात इस तरह बेकाबू न हों। अब सबकी नजर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हुई है, जिससे यह तय होगा कि यह विवाद शांतिपूर्ण तरीके से

सुरों की अमर विरासत थम गई : स्वर सम्राज्ञी आशा भोसले के निधन से संगीत जगत को अपूरणीय क्षति, अंतिम संस्कार आज 

हिंदी सिनेमा और भारतीय संगीत जगत की स्वर सम्राज्ञी आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से एक ऐसा युग समाप्त हो गया, जिसने दशकों तक संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। शनिवार शाम उन्हें सीने में संक्रमण और कमजोरी के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। संगीत प्रेमियों की आंखें नम हो गईं और उनके मुंबई स्थित निवास ‘प्रभा कुंज’ में सन्नाटा पसर गया। उनके घर के बाहर प्रशंसकों का तांता लग गया, जो अपनी प्रिय गायिका को अंतिम विदाई देने पहुंचे। 

आशा भोसले ने केवल गीत नहीं गाए, बल्कि हर दौर की भावनाओं को अपनी आवाज दी। उनकी गायकी में विविधता, गहराई और एक अलग ही जादू था, जिसने उन्हें बाकी गायकों से अलग पहचान दिलाई। ‘अभी न जाओ छोड़ कर’, ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दिल चीज क्या है’, ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘जरा सा झूम लूं मैं’ जैसे गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं। आशा जी का जन्म 8 सितंबर 1935 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उन्हें संगीत की शिक्षा उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर से मिली। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर भी संगीत जगत की महान हस्ती रहीं। कम उम्र से ही उन्होंने संघर्षों का सामना करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने सात दशकों से अधिक लंबे करियर में 12,000 से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए और कई भारतीय व विदेशी भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण समेत कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली, जो उनके अद्वितीय योगदान का प्रमाण है।

 बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने आशा भोसले के निधन पर श्रद्धांजलि दी

आशा भोसले के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी। अमिताभ बच्चन, जैकी श्रॉफ, शाहरुख खान, हेमा मालिनी समेत कई फिल्मी सितारों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि यह संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। कई युवा कलाकारों ने भी सोशल मीडिया के जरिए उन्हें अपनी प्रेरणा बताया और उनके गीतों को अमर धरोहर करार दिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा कि आशा भोसले का जाना संगीत के स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज ने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 

आशा भोसले की आवाज सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं थी, बल्कि इंटरनेशनल म्यूजिक वर्ल्ड में भी उनका उतना ही सम्मान था। मार्च 2026 में रिलीज हुई मशहूर ब्रिटिश वर्चुअल बैंड ‘गोरिल्लाज’ की नौवीं एल्बम ‘द माउंटेन’ (पर्वत) में उनका गाना शामिल है। “द शैडोई लाइट” नाम के इस ट्रैक को अब उनके शानदार करियर के आखिरी अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इसमें उन्होंने ब्रिटिश आर्टिस्ट ग्रफ राइस और सरोद उस्ताद अमान-अयान अली बंगश के साथ काम किया था।आशा भोसले केवल एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक शानदार कुक भी थीं। वह अक्सर कहती थीं कि अगर वह सिंगर न होतीं, तो एक रसोइया होतीं। उनके हाथ के बने ‘कढ़ाई गोश्त’ और ‘बिरयानी’ के मुरीद राज कपूर से लेकर ऋषि कपूर तक रहे। अपने इसी शौक को उन्होंने बिजनेस में बदला। उन्होंने ‘Asha’s’ नाम से रेस्तरां की एक ग्लोबल चैन शुरू की। उनका पहला रेस्तरां दुबई में खुला, जिसके बाद कुवैत, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और अबू धाबी जैसे शहरों में भी इसे विस्तार मिला। वह अपने रेस्तरां के शेफ्स को खुद ट्रेनिंग देती थीं।

अंतिम विदाई में उमड़ेगा जनसैलाब, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। लोग आज 11 बजे लोअर परेल स्थित कासा ग्रांडे में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं। इसके बाद शाम चार बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार होगा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले प्रशंसकों को किसी तरह की असुविधा न हो। व्यक्तिगत जीवन में भी उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे। 16 वर्ष की आयु में उन्होंने गणपतराव भोसले से विवाह किया और बाद में मशहूर संगीतकार आर डी बर्मन से शादी की। उनके परिवार में बेटे आनंद और पोते-पोतियां हैं। 

आशा भोसले की सबसे बड़ी पहचान उनकी वर्सटाइल आवाज रही। उन्होंने कैबरे, गजल, भजन, पॉप और शास्त्रीय संगीत हर शैली में अपनी अलग छाप छोड़ी। यही कारण है कि उनकी आवाज हर पीढ़ी के साथ जुड़ी रही और आगे भी जुड़ी रहेगी। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत, उनकी आवाज और उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी। आशा भोसले सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की आत्मा थीं और हमेशा रहेंगी।

अच्छी खबर : दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति, 30 लाख रुपए तक की इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स माफ का किया एलान 

दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 2026-2030 की नई ईवी नीति का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें कई बड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। प्रस्तावित नीति के तहत 30 लाख रुपये तक की कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट देने की योजना है। यह छूट 31 मार्च 2030 तक लागू रखने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से मिडिल और अपर मिडिल क्लास के लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित होंगे और पैसेंजर कार सेगमेंट में ईवी की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

ड्राफ्ट के मुताबिक 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को भी प्रोत्साहन देने के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे ऐसे उपभोक्ताओं को भी विकल्प मिलेगा जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने से पहले हाइब्रिड टेक्नोलॉजी की ओर जाना चाहते हैं।

नई नीति में चरणबद्ध तरीके से पारंपरिक ईंधन वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा पेट्रोल और डीजल वाहनों पर तत्काल कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। इसके बजाय धीरे-धीरे बदलाव लागू किया जाएगा, ताकि आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर अचानक आर्थिक दबाव न पड़े। नीति का एक अहम हिस्सा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार है। ड्राफ्ट में सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के चार्जिंग स्टेशनों को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क, फास्ट चार्जिंग हब और रेजिडेंशियल चार्जिंग सुविधाओं को भी बढ़ावा देने की योजना शामिल है। सरकार चाहती है कि ईवी अपनाने में सबसे बड़ी बाधा मानी जाने वाली चार्जिंग की समस्या को पहले ही दूर कर दिया जाए।

इसके साथ ही ईवी सप्लाई चेन विकसित करने पर भी फोकस किया गया है। नीति में बैटरी रिपेयर, रीसाइक्लिंग, सेकेंड-लाइफ बैटरी उपयोग और पुराने कंपोनेंट्स की रिकवरी के लिए व्यवस्थित तंत्र बनाने की बात कही गई है। इससे ईवी सेक्टर में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। सरकार सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि बैटरी कचरे से होने वाले पर्यावरणीय जोखिम को कम किया जा सके।

2027 से केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर रजिस्ट्रेशन का प्रस्ताव

ड्राफ्ट नीति के अनुसार 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए थ्री-व्हीलर रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ही मान्य होंगे। इसका असर ऑटो-रिक्शा और छोटे कमर्शियल वाहनों पर पड़ेगा, जो शहर में लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अहम हिस्सा हैं। सरकार का मानना है कि इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिफिकेशन से प्रदूषण में तेजी से कमी लाई जा सकती है। नीति में दोपहिया वाहनों को भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मॉडल की ओर ले जाने का संकेत दिया गया है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा पेट्रोल दोपहिया वाहनों को तुरंत बंद नहीं किया जाएगा। इसके बजाय प्रोत्साहन और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए लोगों को स्वैच्छिक रूप से ईवी अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। 

यह नीति राजधानी और एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लक्ष्य के साथ तैयार की गई है। ड्राफ्ट में आयोग फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के निष्कर्षों का हवाला दिया गया है, जिसमें वाहनों से निकलने वाले धुएं को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया है। खासकर दोपहिया और कमर्शियल वाहनों को बड़े प्रदूषण स्रोतों में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि अधिक उपयोग वाले इन वाहनों को तेजी से इलेक्ट्रिक में बदलने से लंबे समय में प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इसी वजह से नई नीति में इलेक्ट्रिफिकेशन को केंद्र में रखा गया है। 

यह नीति नागरिकों को स्वच्छ वातावरण देने के संवैधानिक अधिकार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों के अनुरूप तैयार की गई है। दिल्ली सरकार ने इस ड्राफ्ट नीति पर जनता से सुझाव भी मांगे हैं। अगले 30 दिनों तक लोग अपनी राय और आपत्तियां भेज सकते हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नीति लागू की जाएगी। यह नई नीति 2020 की दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति का विस्तार मानी जा रही है, जिसकी अवधि अगस्त 2023 में समाप्त हो चुकी थी और बाद में इसे कई बार बढ़ाया गया। नई नीति लागू होने के बाद 2030 तक राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ाने और प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।