सुरों की अमर विरासत थम गई : स्वर सम्राज्ञी आशा भोसले के निधन से संगीत जगत को अपूरणीय क्षति, अंतिम संस्कार आज 

हिंदी सिनेमा और भारतीय संगीत जगत की स्वर सम्राज्ञी आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से एक ऐसा युग समाप्त हो गया, जिसने दशकों तक संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। शनिवार शाम उन्हें सीने में संक्रमण और कमजोरी के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। संगीत प्रेमियों की आंखें नम हो गईं और उनके मुंबई स्थित निवास ‘प्रभा कुंज’ में सन्नाटा पसर गया। उनके घर के बाहर प्रशंसकों का तांता लग गया, जो अपनी प्रिय गायिका को अंतिम विदाई देने पहुंचे। 

आशा भोसले ने केवल गीत नहीं गाए, बल्कि हर दौर की भावनाओं को अपनी आवाज दी। उनकी गायकी में विविधता, गहराई और एक अलग ही जादू था, जिसने उन्हें बाकी गायकों से अलग पहचान दिलाई। ‘अभी न जाओ छोड़ कर’, ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दिल चीज क्या है’, ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘जरा सा झूम लूं मैं’ जैसे गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं। आशा जी का जन्म 8 सितंबर 1935 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उन्हें संगीत की शिक्षा उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर से मिली। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर भी संगीत जगत की महान हस्ती रहीं। कम उम्र से ही उन्होंने संघर्षों का सामना करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने सात दशकों से अधिक लंबे करियर में 12,000 से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए और कई भारतीय व विदेशी भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण समेत कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली, जो उनके अद्वितीय योगदान का प्रमाण है।

 बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने आशा भोसले के निधन पर श्रद्धांजलि दी

आशा भोसले के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी। अमिताभ बच्चन, जैकी श्रॉफ, शाहरुख खान, हेमा मालिनी समेत कई फिल्मी सितारों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि यह संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। कई युवा कलाकारों ने भी सोशल मीडिया के जरिए उन्हें अपनी प्रेरणा बताया और उनके गीतों को अमर धरोहर करार दिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा कि आशा भोसले का जाना संगीत के स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज ने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 

आशा भोसले की आवाज सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं थी, बल्कि इंटरनेशनल म्यूजिक वर्ल्ड में भी उनका उतना ही सम्मान था। मार्च 2026 में रिलीज हुई मशहूर ब्रिटिश वर्चुअल बैंड ‘गोरिल्लाज’ की नौवीं एल्बम ‘द माउंटेन’ (पर्वत) में उनका गाना शामिल है। “द शैडोई लाइट” नाम के इस ट्रैक को अब उनके शानदार करियर के आखिरी अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इसमें उन्होंने ब्रिटिश आर्टिस्ट ग्रफ राइस और सरोद उस्ताद अमान-अयान अली बंगश के साथ काम किया था।आशा भोसले केवल एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक शानदार कुक भी थीं। वह अक्सर कहती थीं कि अगर वह सिंगर न होतीं, तो एक रसोइया होतीं। उनके हाथ के बने ‘कढ़ाई गोश्त’ और ‘बिरयानी’ के मुरीद राज कपूर से लेकर ऋषि कपूर तक रहे। अपने इसी शौक को उन्होंने बिजनेस में बदला। उन्होंने ‘Asha’s’ नाम से रेस्तरां की एक ग्लोबल चैन शुरू की। उनका पहला रेस्तरां दुबई में खुला, जिसके बाद कुवैत, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और अबू धाबी जैसे शहरों में भी इसे विस्तार मिला। वह अपने रेस्तरां के शेफ्स को खुद ट्रेनिंग देती थीं।

अंतिम विदाई में उमड़ेगा जनसैलाब, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। लोग आज 11 बजे लोअर परेल स्थित कासा ग्रांडे में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं। इसके बाद शाम चार बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार होगा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले प्रशंसकों को किसी तरह की असुविधा न हो। व्यक्तिगत जीवन में भी उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे। 16 वर्ष की आयु में उन्होंने गणपतराव भोसले से विवाह किया और बाद में मशहूर संगीतकार आर डी बर्मन से शादी की। उनके परिवार में बेटे आनंद और पोते-पोतियां हैं। 

आशा भोसले की सबसे बड़ी पहचान उनकी वर्सटाइल आवाज रही। उन्होंने कैबरे, गजल, भजन, पॉप और शास्त्रीय संगीत हर शैली में अपनी अलग छाप छोड़ी। यही कारण है कि उनकी आवाज हर पीढ़ी के साथ जुड़ी रही और आगे भी जुड़ी रहेगी। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत, उनकी आवाज और उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी। आशा भोसले सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की आत्मा थीं और हमेशा रहेंगी।

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