पश्चिम एशिया में तनाव के बीच राहत रणनीतिक मार्ग से गुजरा भारतीय एलपीजी टैंकर, दो और जहाज जल्द पहुंचेंगे भारत

पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह संवेदनशील समुद्री मार्ग को सुरक्षित पार करने वाला सातवां भारतीय पोत है। इस पारगमन को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर उस समय जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, ‘ग्रीन सान्वी’ ईरान के समुद्री इलाके से तय मार्ग का उपयोग करते हुए इस संवेदनशील जलक्षेत्र से गुजरा। अनुमान है कि टैंकर में करीब 44 हजार टन एलपीजी लदा हुआ है। यह मात्रा भारत की लगभग आधे दिन की खपत के बराबर बताई जा रही है। ऐसे में टैंकर का सुरक्षित पारगमन ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की आवाजाही निर्बाध बनी रहती है तो भारत को एलपीजी आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

‘ग्रीन सान्वी’ ने तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नियंत्रित मार्ग से यात्रा की। इस दौरान जहाज ने उच्च सतर्कता के साथ नेविगेशन किया। क्षेत्र में बढ़े जोखिम को देखते हुए जहाजों की गति, मार्ग और संचार प्रणाली पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और इसमें खाड़ी क्षेत्र की भूमिका अहम है। ‘ग्रीन सान्वी’ का सफल पारगमन यह संकेत देता है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति मार्ग पूरी तरह बाधित नहीं हुए हैं। हालांकि, जोखिम अब भी बना हुआ है और हर जहाज को सतर्कता के साथ गुजरना पड़ रहा है। यही कारण है कि भारत समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

जल्द दो और टैंकर पार करेंगे रणनीतिक मार्ग

समुद्री विशेषज्ञों के मुताबिक, जल्द ही भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा और जग विक्रम भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच सकते हैं। इन जहाजों की आवाजाही पर भी करीबी नजर रखी जा रही है। यदि ये टैंकर भी सुरक्षित पार हो जाते हैं तो भारत की एलपीजी आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी। इससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसी संभावित आपूर्ति संकट की आशंका कम होगी। ‘ग्रीन सान्वी’ के गुजरने के साथ ही फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इनमें एलपीजी टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर, एलएनजी टैंकर, केमिकल टैंकर, कंटेनर जहाज और बल्क कैरियर शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जहाजों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति गतिविधियां इस क्षेत्र से कितनी जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन जहाजों की सुरक्षा भारत के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।

भारत अपने व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। ईरान के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। हालात को देखते हुए ईरान ने गैर-दुश्मन देशों के जहाजों को समन्वय के साथ इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। इस फैसले से भारत समेत कई देशों को राहत मिली है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पुष्टि की है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। इस कूटनीतिक समन्वय ने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकता है। मौजूदा हालात में ‘ग्रीन सान्वी’ का सुरक्षित पारगमन इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए कूटनीतिक और समुद्री दोनों स्तरों पर सक्रिय रणनीति अपनाए हुए है। यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच भी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब मोबाइल से मिनटों में मिलेगा लोन : RBIH ला रहा नया डिजिटल ऐप, एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे कई बैंक विकल्प

देश में लोन लेने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) एक नया डिजिटल ऐप तैयार कर रहा है, जिसके जरिए लोग सीधे अपने मोबाइल फोन से औपचारिक कर्ज के लिए आवेदन कर सकेंगे। यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) नाम का यह प्लेटफॉर्म उधार लेने वालों और कर्ज देने वाले संस्थानों को एक ही जगह पर जोड़ने का काम करेगा, जिससे लोन लेने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल हो जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, इस ऐप की शुरुआत छोटे कर्ज और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोन से की जाएगी। इसमें डिजिटल किसान क्रेडिट, खेती के लिए ऋण और ग्रामीण जरूरतों से जुड़े फाइनेंस विकल्प शामिल होंगे। आगे चलकर सोना, डेयरी, हाउसिंग, पर्सनल और वाहन लोन जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा कॉमन प्लेटफॉर्म तैयार करना है जहां उधार लेने वाले व्यक्ति को अलग-अलग बैंकों या ऐप्स पर जाने की जरूरत न पड़े। ULI के जरिए पहचान सत्यापन से लेकर लोन स्वीकृति और राशि ट्रांसफर तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल और तेज हो सकेगी। ULI एक डिजिटल इंटरफेस के रूप में काम करेगा, जो डेटा सेवा देने वाली संस्थाओं और बैंकों या अन्य लेंडर्स के बीच सेतु बनेगा। 

इससे लोन लेने की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और कागजी औपचारिकताओं में भी कमी आएगी। फिलहाल यह ऐप शुरुआती चरण में है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में इससे लोन लेने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। ULI की शुरुआत किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण से की जाएगी। इससे एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बैंकों के लोन विकल्प उपलब्ध होंगे। उधार लेने वाला व्यक्ति अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सबसे बेहतर ऑफर चुन सकेगा।

इस सिस्टम से जुड़ने के लिए सभी रेगुलेटेड संस्थानों को ULI के मुख्य ढांचे से तकनीकी रूप से कनेक्ट होना होगा। साथ ही हर बैंक या लेंडर को लोन मंजूरी से पहले अपनी तय क्रेडिट पॉलिसी का पालन करना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह परियोजना शुरुआती दौर में है और इसे पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा।

UPI मॉडल की तरह काम करेगा ULI, एक ही जगह पर मिलेगा पूरा डेटा 

ULI का ग्राहक वाला हिस्सा देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल पर आधारित होगा। इसमें मुख्य सिस्टम के साथ एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिसे रेगुलेटर का समर्थन मिलेगा। इसी तरह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने UPI सिस्टम के साथ BHIM ऐप को जोड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, ULI प्लेटफॉर्म से अब तक 89 से अधिक लेंडर और 53 से ज्यादा डेटा सर्विस देने वाली संस्थाएं जुड़ चुकी हैं। ये संस्थाएं मिलकर 141 तरह की जानकारी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे लोन प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी है। यह प्लेटफॉर्म लेंडिंग सेक्टर की कई बड़ी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखता है। अब तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अलग-अलग एपीआई से जुड़ना पड़ता था और वैकल्पिक डेटा का सही उपयोग करना मुश्किल होता था। ULI इन सभी दिक्कतों का एक साथ समाधान देता है। 

इसे एक कॉमन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां जमीन के रिकॉर्ड, क्रेडिट स्कोर, आय सत्यापन और डेयरी जैसी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी। RBIH इन डेटा सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर उनकी सेवाओं को प्लेटफॉर्म से जोड़ रहा है, जिससे लेंडर्स को अलग-अलग सिस्टम से जुड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टैंडर्ड एपीआई और रियल टाइम डेटा की सुविधा मिलने से लोन प्रोसेसिंग तेज और सस्ती हो सकेगी। अनुमान है कि इस सिस्टम से लेंडिंग लागत में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इससे छोटे उधारकर्ताओं, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार का बड़ा प्लान, गैस निर्भरता घटाने को इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ेगा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सप्लाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने कुकिंग गैस पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े कुकिंग उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि एलपीजी की खपत कम की जा सके और संभावित सप्लाई संकट से निपटा जा सके। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय के महानिदेशक सहित कई शीर्ष अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे दबाव और ऊर्जा आयात से जुड़े जोखिमों का आकलन किया गया। खासतौर पर ईरान से जुड़े युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण गैस और तेल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई गई। 

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो घरेलू स्तर पर वैकल्पिक कुकिंग व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा। इसी के तहत इंडक्शन कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए उनके उत्पादन को बढ़ाने पर चर्चा की गई। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर, इलेक्ट्रिक कुकटॉप और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उत्पादों की मांग में तेजी आई है। कई उपभोक्ता गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि इन उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और इनके आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। इससे न केवल गैस की खपत कम होगी बल्कि इलेक्ट्रिक कुकिंग को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में यह भी विचार किया गया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए उद्योगों को किस तरह प्रोत्साहन दिया जाए। इसमें स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात शुल्क संरचना में बदलाव, और जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि अगर इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ता है, तो यह ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी फायदेमंद होगा और उपभोक्ताओं को विकल्प भी मिलेंगे।

पश्चिम एशिया तनाव से ऊर्जा सप्लाई पर खतरा, सरकार ने बढ़ाई तैयारी

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए आयात पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति में संभावित बाधा को लेकर चिंता जताई गई है। सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि घरेलू बाजार में सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके। सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है। ऊर्जा क्षेत्र में जोखिम बढ़ने के कारण वैकल्पिक स्रोतों और घरेलू समाधान पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में इंडक्शन कुकिंग को गैस के विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जा रही है। उधर, कतर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट को नुकसान पहुंचने की खबर के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में बताया जा रहा है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। 

इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है और भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए जोखिम भी बढ़ गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। अब भारत रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से अधिक कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं, ताकि सप्लाई में व्यवधान की स्थिति में विकल्प मौजूद रहें। इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर बेहद कड़ा प्रहार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को “स्टोन एजेज” यानी पाषाण युग में पहुंचा देगा। इसके कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था। ट्रंप की चेतावनी ऐसे समय आई है जब यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां जारी हैं। वहीं ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे एकतरफा और अव्यवहारिक बताया है। बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू विकल्पों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, जिसमें इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ाना अहम रणनीति के रूप में सामने आया है।

देशभर में बदला मौसम का मिजाज : 11 राज्यों में तेज बारिश का अलर्ट, कई जगह ओलावृष्टि की चेतावनी 

देशभर में गर्मी की शुरुआत होते ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। दिल्ली, पंजाब सहित करीब 11 राज्यों में शनिवार को तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में ओलावृष्टि और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत से लेकर मध्य और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अगले दो दिनों तक मौसम अस्थिर बना रहेगा। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को मौसम ने अचानक पलटी मारी और 36 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर तेज हवाएं चलीं, जबकि कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने शनिवार को भी प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि की आशंका जताई है। किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि गेहूं और चने की कटाई का समय चल रहा है।

राजस्थान में भी मौसम का असर देखने को मिला। रेगिस्तानी जिले जैसलमेर और बीकानेर में शुक्रवार को जमकर ओले गिरे। कई जगह खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा। 

अजमेर और ब्यावर में तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गए और टीनशेड उड़ गए। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने का अनुमान जताया है। उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने परेशानी बढ़ा दी है। मथुरा के कोसीकला अनाज मंडी में बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ। यहां करीब 10 हजार बोरियों में रखा लगभग 5 हजार क्विंटल गेहूं भीग गया। मंडी में पानी भर जाने से व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। इससे पहले राज्य के अलग-अलग जिलों में बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत की खबर सामने आई है। 

प्रशासन ने लोगों से खुले स्थानों में जाने से बचने की अपील की है। हिमाचल प्रदेश में राजधानी शिमला में तेज तूफान के साथ हल्की बारिश हुई, जबकि लाहौल-स्पीति के ऊंचे पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट आई है। वहीं उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में भी शनिवार सुबह ताजा बर्फबारी हुई, जिससे ठंड फिर बढ़ गई है।

अगले दो दिन कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार 5 और 6 अप्रैल को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश की संभावना है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि हो सकती है। तमिलनाडु के कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश में शनिवार को लखनऊ और कानपुर समेत 35 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं करीब 55 जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि खराब मौसम के कारण अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाएगा।

हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अप्रैल महीने में भी बर्फबारी जारी है। बीती रात अटल टनल, दारचा, रोहतांग दर्रा, शिंकुला दर्रा और स्पीति घाटी में ताजा बर्फ गिरी। इससे पर्यटकों के लिए मार्ग फिसलन भरे हो गए हैं और प्रशासन ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। शनिवार के लिए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में ओले गिरने और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, खुले मैदानों से दूर रहने और बिजली गिरने की आशंका के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी है। किसानों को भी फसल की कटाई में सावधानी बरतने और तैयार अनाज को सुरक्षित स्थानों पर रखने को कहा गया है। अगले दो दिनों तक देश के कई हिस्सों में मौसम का यही बदला हुआ मिजाज जारी रहने की संभावना है।