UP cabinet meeting लोक भवन में योगी कैबिनेट के 22 फैसले : शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाया, जनहित के कई प्रस्तावों को मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में राज्य के विकास, सामाजिक सरोकार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इस बैठक को नीतिगत दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक के बाद मंत्रियों ने मीडिया से बातचीत में फैसलों की जानकारी दी और विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि कैबिनेट में 20 से अधिक प्रस्तावों पर विचार किया गया और सभी को मंजूरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित भारतीय संविधान के निर्माताओं की प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेश भर में स्थापित प्रतिमाओं के ऊपर छत बनाई जाएगी, चबूतरे विकसित किए जाएंगे और जहां आवश्यक होगा वहां नवीनीकरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान 14 अप्रैल से शुरू किया जाएगा, ताकि संविधान निर्माता को सम्मान देने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों का भी बेहतर विकास हो सके।
बैठक के बाद सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मुद्दों पर भी बयान सामने आए। ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा की सरकार रही, तब कानून-व्यवस्था बिगड़ी और दंगे हुए। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता उस घटना को आज भी नहीं भूली है। उनके अनुसार सपा शासन में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर रही, जबकि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।
महिला आरक्षण को लेकर भी उपमुख्यमंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक उनके अधिकारों से वंचित रखा गया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि आधी आबादी को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार का कदम ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार भी कई योजनाएं चला रही है और आगे भी इस दिशा में काम जारी रहेगा।
इसी दौरान मदरसा कानून को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मदरसा बोर्ड से संबंधित कोई नया विधेयक नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस कानून को लेकर चर्चा हो रही है, वह 2016 में सपा सरकार के दौरान पारित किया गया था और बाद में कैबिनेट से उसे मंजूरी भी मिल चुकी थी। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।
शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह हुआ
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश के करीब दो लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और कार्यरत कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।
मंत्री जयवीर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ‘जंगलराज’ को नहीं भूली है और सपा शासनकाल के दौरान हुए अत्याचार लोगों की स्मृति में अभी भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी और अपराधियों के हौसले बुलंद थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में सुरक्षा और विकास का माहौल बनाया है, जिसे जनता समर्थन दे रही है।
जनहित के मुद्दों पर फैसलों का दावा
मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि कैबिनेट ने जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य विकास को गति देना और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करना है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बिना तथ्यों के भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े फैसलों पर विशेष ध्यान दिया है। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों को सरकार ने विकास और सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम बताया है। प्रतिमाओं के संरक्षण अभियान से लेकर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी तक कई निर्णय सीधे तौर पर समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित करेंगे। साथ ही सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अपनी नीतियों को जनहित में बताया है। आने वाले दिनों में इन फैसलों के क्रियान्वयन पर भी सरकार की नजर रहेगी, ताकि घोषित योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सके।

