क्या WhatsApp सुरक्षित नहीं? एलन मस्क और टेलीग्राम सीईओ पावेल डुरोव ने प्राइवेसी पर उठाए सवाल, Meta ने कहा- सब गलत

दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के मालिक Elon Musk एलन मस्क और Telegram टेलीग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Pavel Durov पावेल डुरोव ने व्हाट्सएप पर भरोसा न करने की सलाह दी है। दोनों का दावा है कि ऐप की प्राइवेसी उतनी सुरक्षित नहीं है, जितना कंपनी बताती है। यह विवाद अमेरिका में व्हाट्सएप के खिलाफ दायर एक क्लास-एक्शन मुकदमे के बाद और बढ़ गया। यह मुकदमा जनवरी में दो यूजर्स ब्रायन वाई. शीराजी और निदा सैमसन ने कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि व्हाट्सएप यूजर्स के मैसेज को बीच में ही इंटरसेप्ट करता है और उन्हें तीसरी कंपनियों के साथ साझा किया जाता है। इस मामले में Meta Platforms और Accenture को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से ज्यूरी ट्रायल और हर्जाने की मांग की है। उनका कहना है कि कंपनी “एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन” का दावा करती है, लेकिन असल में मैसेज पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। 

इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए एलॉन मस्क ने X पर पोस्ट कर लोगों से व्हाट्सएप की जगह X चैट का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि X चैट में “असली प्राइवेसी” मिलती है। मस्क का कहना था कि यूजर्स को अपने निजी संदेशों की सुरक्षा के लिए ज्यादा सावधान रहना चाहिए। दूसरी तरफ पावेल डुरोव ने भी व्हाट्सएप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐप अरबों यूजर्स को गुमराह कर रहा है। उनके मुताबिक व्हाट्सएप का एन्क्रिप्शन मॉडल पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। डुरोव ने यह भी कहा कि टेलीग्राम ने कभी ऐसा दावा नहीं किया जिसे वह पूरा न कर सके।

हालांकि, इन आरोपों पर Meta ने तुरंत जवाब दिया। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि मुकदमे में लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत और बेतुके हैं। Meta का कहना है कि व्हाट्सएप पिछले कई सालों से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है, जो दुनिया के सबसे सुरक्षित एन्क्रिप्शन सिस्टम में से एक माना जाता है। कंपनी के मुताबिक यूजर के मैसेज सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले तक ही सीमित रहते हैं। कंपनी खुद भी इन संदेशों को नहीं पढ़ सकती। Meta ने यह भी कहा कि यूजर्स की प्राइवेसी उनकी प्राथमिकता है और इस तरह के दावे भ्रामक हैं।

एलन मस्क और जुकरबर्ग की पुरानी टक्कर, अब फिर बढ़ा विवाद

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब एलन मस्क और Meta के CEO Mark Zuckerberg आमने-सामने आए हों। दोनों के बीच लंबे समय से प्रतिस्पर्धा चल रही है। मस्क द्वारा ट्विटर खरीदने के बाद जब उसे X में बदला गया, तब Meta ने जवाब में Threads लॉन्च किया था। इसके बाद भी दोनों के बीच कई बार बयानबाजी हुई। मस्क ने अपने AI चैटबॉट Grok को Meta AI से बेहतर बताया था। वहीं 2023 में मस्क ने जुकरबर्ग को “केज फाइट” की चुनौती भी दी थी, जिसने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब व्हाट्सएप की प्राइवेसी को लेकर नया विवाद सामने आने से दोनों कंपनियों के बीच टकराव फिर चर्चा में है। खास बात यह है कि भारत जैसे देशों में व्हाट्सएप सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ऐप है। करोड़ों लोग रोजाना निजी बातचीत, फोटो, वीडियो और दस्तावेज इसी के जरिए भेजते हैं। इसलिए प्राइवेसी से जुड़ी ऐसी खबरें यूजर्स को चिंतित कर सकती हैं।

लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ आरोप लगने से किसी ऐप को असुरक्षित नहीं माना जा सकता। कोर्ट में मामला चलने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल Meta अपने दावों पर कायम है और कह रहा है कि व्हाट्सएप सुरक्षित है।

आखिर क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन?

सरल शब्दों में समझें तो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है, जिसमें आपका मैसेज भेजते समय एक गुप्त कोड में बदल जाता है। यह कोड सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले के फोन पर ही खुलता है। बीच में कोई भी चाहे इंटरनेट कंपनी हो, हैकर हो या ऐप देने वाली कंपनी उसे नहीं पढ़ सकती। यही वजह है कि व्हाट्सएप लंबे समय से दावा करता रहा है कि उसके मैसेज पूरी तरह सुरक्षित हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत में चल रहे इस मुकदमे में क्या निकलकर सामने आता है। फिलहाल यूजर्स के लिए जरूरी है कि वे किसी भी प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतें और ऐप की सिक्योरिटी सेटिंग्स को अपडेट रखें।

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