दून पुस्तक महोत्सव में दिग्गजों के संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम बने आकर्षण का केंद्र, कल होगा समापन
देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा आयोजित दून पुस्तक महोत्सव 2026 इन दिनों साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और युवाओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 4 अप्रैल से परेड ग्राउंड में शुरू हुआ यह नौ दिवसीय आयोजन 12 अप्रैल तक चलेगा और शनिवार, 11 अप्रैल तक महोत्सव में लगातार बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। पुस्तक महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तकें समाज को दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम हैं और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि नई पीढ़ी को विचारशील बनाने में पुस्तकों की भूमिका और अधिक बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दून पुस्तक महोत्सव जैसे आयोजन ज्ञान, संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किताबों से जुड़ें, पढ़ने की आदत विकसित करें और अपने व्यक्तित्व के विकास में साहित्य को शामिल करें।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा बेहद समृद्ध रही है और ऐसे आयोजन इस विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने आयोजन में लगे विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण भी किया और प्रकाशकों, लेखकों तथा विद्यार्थियों से बातचीत की। महोत्सव में देशभर के प्रकाशकों के सैकड़ों पुस्तक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां साहित्य, इतिहास, विज्ञान, तकनीक, अध्यात्म, बच्चों की किताबें, प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें और क्षेत्रीय साहित्य की बड़ी श्रृंखला उपलब्ध है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी और अभिभावक यहां पहुंचकर किताबों की खरीदारी कर रहे हैं। कई प्रकाशकों ने विशेष छूट भी दी है, जिससे पाठकों की रुचि और बढ़ी है। महोत्सव के दौरान साहित्य, सिनेमा, खोजी पत्रकारिता, पटकथा लेखन, अध्यात्म, नेतृत्व, क्षेत्रीय साहित्य और रक्षा जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न मंचों पर लेखकों और वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए और दर्शकों से संवाद किया। जुपिंदर सिंह ने खोजी पत्रकारिता पर अपने अनुभव साझा करते हुए मीडिया की जिम्मेदारी पर विस्तार से चर्चा की। अद्वैता काला ने लेखन प्रक्रिया, कहानी कहने की कला और महिलाओं की भूमिका पर बात की। आचार्य प्रशांत ने अध्यात्म और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन पर विचार रखे। फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने पटकथा लेखन और सिनेमा की रचनात्मक प्रक्रिया पर युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि कहानी वहीं से जन्म लेती है जहां संवेदनाएं और अनुभव मिलते हैं। शुभांशु शुक्ला ने नेतृत्व और युवा सोच पर अपने विचार रखे, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रेरक अनुभवों को साझा किया। इन सत्रों में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया और सवाल-जवाब के माध्यम से वक्ताओं से संवाद किया।
महोत्सव में बच्चों के लिए विशेष गतिविधियां भी आयोजित की गईं। कहानी सुनाने के सत्र, चित्रकला प्रतियोगिता, क्विज कार्यक्रम और इंटरैक्टिव कार्यशालाएं बच्चों के आकर्षण का केंद्र बनीं। वहीं क्षेत्रीय साहित्य को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड के लेखकों और लोक साहित्य पर आधारित सत्र आयोजित किए गए। पुस्तक विमोचन कार्यक्रमों में कई नई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी महोत्सव को जीवंत बनाए रखा। लोक नृत्य, संगीत प्रस्तुतियां और युवा कलाकारों के कार्यक्रम दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। शाम के समय बड़ी संख्या में लोग सांस्कृतिक मंच के सामने जुट रहे हैं। आयोजन स्थल पर सेल्फी प्वाइंट, पठन कोना और इंटरैक्टिव जोन भी बनाए गए हैं, जहां लोग समय बिता रहे हैं। महोत्सव में लगातार भीड़ बढ़ती देखी जा रही है। सप्ताहांत से पहले ही विद्यार्थियों और परिवारों की बड़ी संख्या पहुंच रही है। आयोजकों के अनुसार समापन दिवस तक और अधिक लोगों के आने की संभावना है।
उत्तराखंड की लोक परंपरा, संस्कृति और इतिहास से जुड़ी पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया
महोत्सव के मध्य दिनों में कई महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें साहित्य और समाज के बदलते स्वरूप पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि पढ़ने की आदत समाज को अधिक जागरूक और संवेदनशील बनाती है। तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में भी किताबों की प्रासंगिकता पर जोर दिया गया। युवा पाठकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और लेखकों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। आयोजन में क्षेत्रीय साहित्य को विशेष स्थान दिया गया है। उत्तराखंड की लोक परंपरा, संस्कृति और इतिहास से जुड़ी पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। स्थानीय लेखकों ने अपने अनुभव साझा किए और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए विशेष मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए गए। महोत्सव में डिजिटल प्रकाशन और ई-बुक्स पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लेखन और पढ़ने के नए अवसर खोले हैं, लेकिन मुद्रित पुस्तकों का महत्व अभी भी कायम है। कई तकनीकी सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंटेंट निर्माण पर भी चर्चा की गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं। युवाओं ने संगीत और नृत्य के कार्यक्रम पेश किए। शाम के समय साहित्यिक पाठ और कवि सम्मेलन ने माहौल को और जीवंत बनाया।
आयोजन स्थल पर परिवारों के लिए भी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे लोग आराम से कार्यक्रमों में भाग ले सकें। आयोजकों के अनुसार महोत्सव का उद्देश्य पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना और पाठकों को लेखकों से जोड़ना है। इस वर्ष बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेजों के छात्रों ने समूहों में भाग लिया। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। समापन दिवस से पहले शनिवार, 11 अप्रैल तक आयोजित कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक देखी गई। इंटरैक्टिव सत्रों में छात्रों ने लेखन, पत्रकारिता और सिनेमा से जुड़े सवाल पूछे। कई प्रतिभागियों ने इसे प्रेरणादायक अनुभव बताया। दून पुस्तक महोत्सव के अंतिम दिनों में और पुस्तक विमोचन, लेखक संवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं।
समापन दिवस पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें कलाकारों की प्रस्तुति के साथ महोत्सव का समापन होगा। मेहर सिंह समापन समारोह में प्रस्तुति देंगे, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। दून पुस्तक महोत्सव 2026 ने देहरादून को एक बार फिर साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया है। लगातार बढ़ती भीड़, दिग्गज वक्ताओं के संवाद और विविध कार्यक्रमों ने इसे यादगार आयोजन बना दिया है। आयोजकों को उम्मीद है कि अंतिम दिन तक यह महोत्सव पाठकों और युवाओं के लिए ज्ञान, प्रेरणा और संवाद का बड़ा मंच साबित होगा।

