‘धुरंधर’ विवाद पहुंचा बॉम्बे हाईकोर्ट : संतोष कुमार पर आरोप दोहराने से रोक, डायरेक्टर आदित्य धर को मिली अंतरिम राहत
फिल्म धुरंधर और उसके सीक्वल को लेकर उठे स्क्रिप्ट चोरी के विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्ममेकर संतोष कुमार के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए उन्हें फिल्म धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज की स्क्रिप्ट चोरी के आरोपों को दोहराने से अस्थायी रूप से रोक दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि वह फिल्म के निर्देशक आदित्य धर के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक बयान न दें। न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की एकल पीठ ने यह आदेश आदित्य धर द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संतोष कुमार को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई भी प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ। ऐसे में रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और याचिका में दी गई दलीलों के आधार पर अदालत ने सीमित अंतरिम राहत देना उचित समझा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक संतोष कुमार सार्वजनिक मंचों, प्रेस कॉन्फ्रेंस या सोशल मीडिया के माध्यम से फिल्म की कहानी को अपनी स्क्रिप्ट से चोरी बताने वाले आरोपों को दोहराने से परहेज करें। अदालत ने यह भी माना कि इस तरह की टिप्पणियां आदित्य धर की पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आदेश के अनुसार यह रोक फिलहाल 16 अप्रैल तक लागू रहेगी, जब मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल संतोष कुमार पर लागू होगा और अगली सुनवाई में उनके पक्ष को सुनने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।दरअसल, हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संतोष कुमार ने दावा किया था कि फिल्म धुरंधर और उसके सीक्वल की कहानी उनकी साल 2023 में रजिस्टर्ड स्क्रिप्ट ‘डी साहेब’ से ली गई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी कहानी का इस्तेमाल बिना अनुमति के किया गया और उन्हें कोई श्रेय नहीं दिया गया। इन आरोपों के बाद विवाद तेज हो गया और मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया। कुमार के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कई बिंदुओं पर समानता का दावा किया। इससे फिल्म के निर्देशक आदित्य धर और उनकी टीम की छवि पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। इसके बाद मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया।
नोटिस का जवाब नहीं मिला, कोर्ट पहुंचे आदित्य धर
आरोप सामने आने के बाद आदित्य धर ने संतोष कुमार को लीगल नोटिस भेजा था। नोटिस में स्क्रिप्ट चोरी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा गया कि फिल्म की कहानी स्वतंत्र रूप से विकसित की गई है। साथ ही कुमार को चेतावनी दी गई कि वे सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणी करने से बचें, क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि, नोटिस का कोई जवाब नहीं मिलने पर आदित्य धर ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और बयानबाजी पर रोक लगाने के साथ-साथ हर्जाने की मांग की। उनकी ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि संतोष कुमार के बयान निराधार और मानहानिकारक हैं, जो निर्देशक की पेशेवर छवि को प्रभावित कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने भी इस बात पर गौर किया कि कथित मानहानिकारक टिप्पणियां व्यापक रूप से साझा की गईं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला अंतरिम राहत देने योग्य है, ताकि अगली सुनवाई तक किसी भी पक्ष को अपूरणीय क्षति न हो। इसी आधार पर अदालत ने संतोष कुमार को आरोपों को दोहराने से रोकने का आदेश जारी किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी, जहां अदालत संतोष कुमार का पक्ष भी सुनेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि अंतरिम आदेश को आगे बढ़ाया जाए या मामले में कोई अन्य निर्देश जारी किए जाएं। फिलहाल अदालत के इस आदेश से आदित्य धर को अस्थायी राहत मिली है और धुरंधर को लेकर जारी विवाद कानूनी प्रक्रिया के दायरे में आ गया है।

