डेडलाइन, धमकी और बढ़ता तनाव : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को फिर दी तबाही की चेतावनी, चार घंटे में ढांचे मिटाने का दावा

पूरी दुनिया हर सुबह सोचती है अमेरिका ईरान के बीच जारी युद्ध थम जाएगा लेकिन उसे कोई अभी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रुकने के लिए तैयार नहीं है वहीं ईरान भी अमेरिका को लगातार धमकी दे रहा है। इसी बीच सोमवार को ट्रंप ने एक बार फिर तीखा बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान मंगलवार रात तक समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका चार घंटे के भीतर ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना के पास ऐसी योजना है जिसके तहत ईरान के अहम ढांचे, पुलों, बिजली संयंत्रों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ताकत के दम पर ईरान के हर पुल को ध्वस्त किया जा सकता है और उसके बिजली संयंत्रों को पूरी तरह निष्क्रिय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “हमारे पास योजना तैयार है। 

अगर हम चाहें तो मंगलवार रात 12 बजे तक ईरान के हर पुल को खत्म कर सकते हैं। बिजली संयंत्रों को बंद कर दिया जाएगा, जला दिया जाएगा और फिर कभी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यह सब चार घंटे के भीतर भी संभव है।” ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी मानी जा रही है। ट्रंप ने ईरान को पूर्वी समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे तक समझौते के लिए तैयार होने की समयसीमा भी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलता है, तो अमेरिका बातचीत के रास्ते आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते की स्थिति में अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करने को तैयार है। ट्रंप ने कहा, “अगर वे समझौता करते हैं, तो हम उनके राष्ट्र के पुनर्निर्माण में भी शामिल हो सकते हैं।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक ढांचे पर हमले की स्थिति में क्या यह युद्ध अपराध माना जाएगा, तो ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी कार्रवाई को युद्ध अपराध नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर लोग “आजादी के लिए तकलीफ सहने को तैयार हैं” और वे चाहते हैं कि अमेरिका और दबाव बनाए।

इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी ट्रंप के साथ खड़े होकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब तक जो हमले हुए हैं, वे सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले समय में हमले और तेज हो सकते हैं। हेगसेथ ने कहा, कल आज से भी ज्यादा हमले होंगे। उसके बाद ईरान के पास फैसला लेने का विकल्प होगा। उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति ढिलाई नहीं बरतते।

ईरान ने 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराया, तनाव और बढ़ा

तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने कहा कि वह अस्थायी समाधान नहीं चाहता बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दबाव और धमकियों के बीच कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस रुख ने दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया है। अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का दबाव भी बढ़ा दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। 

अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने तेल की आवाजाही में रुकावट जारी रखी, तो नागरिक ठिकानों समेत बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि अब ईरान को स्पष्ट विकल्प दिया गया है या तो समझौता करे या फिर व्यापक सैन्य कार्रवाई का सामना करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीति चरणबद्ध तरीके से दबाव बढ़ाने की है। 

उनके मुताबिक, “आज के हमले सिर्फ शुरुआत हैं, आगे इससे कहीं ज्यादा तीव्र कार्रवाई हो सकती है।” ट्रंप प्रशासन का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कई देशों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। इसके बावजूद दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है, जिससे हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं।

प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आए IITian बाबा अभय सिंह ने रचाई शादी, पत्नी प्रतीका संग लिए सात फेरे

प्रयागराज महाकुंभ-2025 के दौरान चर्चा में आए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह आध्यात्म नहीं बल्कि उनका निजी जीवन है। लंबे समय तक साधु वेश में रहने और वैराग्य की बातें करने वाले अभय सिंह ने शादी कर ली है। इस बात का खुलासा खुद उन्होंने सोमवार को किया, जब वह हरियाणा के झज्जर में भगवा वस्त्र पहने पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रतीका भी मौजूद थीं। अचानक सामने आई इस खबर ने उनके अनुयायियों और स्थानीय लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। अभय सिंह को लोग IITian बाबा के नाम से जानते हैं। महाकुंभ के दौरान उनका अंदाज, शिक्षा और आध्यात्मिक विचारों का मिश्रण लोगों को आकर्षित कर गया था। बताया जाता है कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और फिर साधु जीवन की ओर मुड़ गए। महाकुंभ में उनके प्रवचन और जीवन शैली सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी। इसके बाद से ही वह लगातार चर्चा में बने रहे।

सोमवार को जब अभय सिंह हरियाणा के झज्जर पहुंचे तो उनके साथ एक महिला भी थीं, जिन्हें उन्होंने अपनी पत्नी प्रतीका बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में आध्यात्म और गृहस्थ दोनों का संतुलन जरूरी है और उन्होंने सोच-समझकर विवाह का निर्णय लिया है। भगवा वस्त्रों में ही पत्नी के साथ उनकी मौजूदगी ने लोगों को चौंका दिया। कई लोगों ने इसे आध्यात्मिक जीवन की नई परिभाषा के तौर पर देखा, तो कुछ ने इसे उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत बताया।

अभय सिंह ने बातचीत में कहा कि विवाह का निर्णय अचानक नहीं बल्कि लंबे विचार के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन भी साधना का एक रूप हो सकता है और समाज में रहकर आध्यात्मिक संदेश देना अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी प्रतीका उनके विचारों को समझती हैं और दोनों मिलकर आध्यात्मिक व सामाजिक कार्य करेंगे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, झज्जर पहुंचने के बाद कई लोग उनसे मिलने आए। लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके नए जीवन की शुरुआत को लेकर शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर भी इस खबर के सामने आने के बाद प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताया तो कुछ ने सवाल उठाए कि साधु जीवन के बाद शादी का फैसला क्यों लिया गया।

गृहस्थ जीवन और आध्यात्म का संतुलन बनाने की बात

अभय सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संन्यास नहीं लिया था, बल्कि आध्यात्मिक जीवन अपनाया था। इसलिए विवाह उनके सिद्धांतों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में कई संतों ने गृहस्थ रहते हुए भी आध्यात्मिक ऊंचाइयों को हासिल किया है। उनका मानना है कि आज के समय में लोगों को जीवन के हर पहलू में संतुलन की जरूरत है और वही संदेश वह देना चाहते हैं।

पत्नी प्रतीका भी उनके साथ शांत मुद्रा में नजर आईं। हालांकि उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन बताया जा रहा है कि वह भी आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। अभय सिंह ने कहा कि दोनों मिलकर समाज सेवा, शिक्षा और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम चलाने की योजना बना रहे हैं। 

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में वह देश के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे और लोगों से संवाद करेंगे। महाकुंभ-2025 के दौरान IITian बाबा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी थी। उनके विचार, सादगी और पढ़े-लिखे साधु की छवि ने युवाओं को खास तौर पर आकर्षित किया था। अब शादी की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर वह चर्चा में हैं। उनके इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन यह तय है कि अभय सिंह ने अपने जीवन का नया अध्याय शुरू कर दिया है।

झज्जर में उनकी मौजूदगी और पत्नी के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आना इस बात का संकेत है कि वह अपने निजी जीवन को लेकर खुलकर सामने आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आगे भी वह भगवा वस्त्रों में ही रहेंगे और आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हुए गृहस्थ जीवन निभाएंगे। इस घोषणा के साथ ही IITian बाबा अभय सिंह की कहानी ने नया मोड़ ले लिया है, जो आने वाले दिनों में और चर्चाओं का विषय बन सकती है।

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी : इसी सप्ताह शुरू होगी केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग, इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता पर खास फोकस

चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा की बुकिंग प्रक्रिया को लेकर अहम घोषणा की है। यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि इस बार हेली सेवा की ऑनलाइन बुकिंग 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू कर दी जाएगी। बुकिंग शुरू होते ही श्रद्धालु अधिकृत पोर्टल के माध्यम से टिकट आरक्षित कर सकेंगे।

अधिकारियों के अनुसार, इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई नए प्रावधान लागू किए जा रहे हैं। पिछले वर्षों में बुकिंग के दौरान तकनीकी दिक्कतें, दलालों की सक्रियता और फर्जी टिकट की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से मजबूत किया गया है। बुकिंग के दौरान यात्रियों को आधार आधारित सत्यापन और सीमित टिकट प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे एक व्यक्ति द्वारा अधिक टिकट बुक करने पर रोक लगाई जा सके। यूकाडा ने यह भी स्पष्ट किया है कि हेलीकॉप्टर सेवा केवल अधिकृत कंपनियों के माध्यम से ही संचालित की जाएगी और टिकट भी केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही उपलब्ध होंगे। 

किसी भी एजेंट या थर्ड पार्टी वेबसाइट से टिकट खरीदने पर यात्रियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक माध्यम से ही बुकिंग करें। इस बार मौसम, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए उड़ानों की संख्या भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जाएगी। शुरुआती दिनों में सीमित उड़ानें संचालित होंगी, जबकि यात्रियों की संख्या बढ़ने पर कंपनियों को अतिरिक्त स्लॉट दिए जाएंगे। हेलीकॉप्टर सेवाएं फाटा, गुप्तकाशी और सिरसी से संचालित की जाएंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए समय सारिणी भी बुकिंग के साथ ही जारी की जाएगी।

डॉ. चौहान ने बताया कि यात्रियों को समय से पहले रिपोर्टिंग करनी होगी और वजन सीमा का पालन अनिवार्य होगा। साथ ही, मौसम खराब होने की स्थिति में टिकट स्वतः अगले उपलब्ध स्लॉट में समायोजित किए जाएंगे या निर्धारित नियमों के अनुसार रिफंड दिया जाएगा। सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी ऑपरेटरों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नया सिस्टम, दलालों पर रहेगी नजर

इस बार बुकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। इससे यूकाडा मुख्यालय से ही टिकट बुकिंग, उड़ान संचालन और यात्रियों की संख्या पर नजर रखी जा सकेगी। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा बुकिंग पोर्टल पर ही यात्रियों को हेलीकॉप्टर कंपनियों का किराया, समय और सीट उपलब्धता की पूरी जानकारी मिलेगी, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी। प्राधिकरण ने यह भी बताया कि यात्रियों को बुकिंग के बाद क्यूआर कोड आधारित टिकट जारी किए जाएंगे, जिन्हें हेलीपैड पर स्कैन किया जाएगा। इससे फर्जी टिकट पर पूरी तरह रोक लगेगी। साथ ही पहचान पत्र की जांच भी अनिवार्य रहेगी। प्रशासन ने जिला स्तर पर भी निगरानी टीम गठित करने की तैयारी की है, जो बुकिंग से लेकर हेलीपैड तक व्यवस्था पर नजर रखेगी।

चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ हेली सेवा की मांग सबसे अधिक रहती है। बुजुर्ग, दिव्यांग और कम समय वाले श्रद्धालु विशेष रूप से इस सेवा का उपयोग करते हैं। इसी कारण हर साल बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही समय में टिकट फुल हो जाते हैं। इस बार मांग को देखते हुए अतिरिक्त स्लॉट और बैकअप हेलीकॉप्टर रखने की योजना भी बनाई गई है।

यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर और शिकायत निवारण तंत्र भी सक्रिय रहेगा। किसी भी तकनीकी समस्या या बुकिंग संबंधी परेशानी होने पर श्रद्धालु सीधे यूकाडा से संपर्क कर सकेंगे। प्रशासन ने यह भी कहा है कि यात्रा से पहले श्रद्धालु मौसम अपडेट जरूर देखें और निर्धारित समय पर ही हेलीपैड पहुंचे।

यूकाडा के अनुसार, यात्रा को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण को लेकर संयुक्त योजना तैयार की गई है। प्राधिकरण का दावा है कि इस बार हेली सेवा पहले से अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी होगी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बिजली बिल पर बड़ी राहत, हिमाचल में 126-300 यूनिट उपभोक्ताओं की सब्सिडी फिर से लागू, आठ लाख से अधिक लोगों को होगा फायदा

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बिजली सब्सिडी को लेकर अहम फैसला लिया है। सरकार ने 126 से 300 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की सब्सिडी बहाल कर दी है। इस निर्णय से प्रदेश के 8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। इससे पहले जारी आदेशों में इस श्रेणी के उपभोक्ताओं की सब्सिडी खत्म कर दी गई थी, जिसके बाद बिजली बिलों में बढ़ोतरी होने लगी थी और लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही थी। अब सरकार ने इस फैसले को वापस लेते हुए फिर से राहत देने का निर्णय लिया है।

सरकार के इस फैसले के बाद 126 से 300 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह रियायती दरों का लाभ मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे मध्यम वर्गीय परिवारों और सीमित आय वाले उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा। हाल के महीनों में बढ़ते बिजली बिलों को लेकर कई जिलों से शिकायतें सामने आ रही थीं। उपभोक्ताओं का कहना था कि सब्सिडी खत्म होने के बाद बिलों में अचानक बढ़ोतरी हो गई है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सब्सिडी बहाल करने का निर्णय उपभोक्ताओं की समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। सरकार का मानना है कि सीमित खपत करने वाले उपभोक्ताओं को राहत देना जरूरी है, ताकि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है।

बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली कंपनियां संशोधित बिल जारी करेंगी। जिन उपभोक्ताओं के बिल पहले बढ़े हुए आए हैं, उन्हें भी आगामी बिलों में समायोजन का लाभ दिया जा सकता है। इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं में राहत की भावना देखी जा रही है और इसे आम जनता के हित में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

बढ़ते बिलों के बाद सुखविंदर सरकार ने लिया यू-टर्न

दरअसल, पूर्व में जारी आदेशों के तहत 126 से 300 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं की सब्सिडी समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद इस श्रेणी के उपभोक्ताओं को पूरी दर से बिजली का भुगतान करना पड़ रहा था। इससे कई परिवारों के बिजली बिल में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। खासतौर पर गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ बिजली खपत बढ़ने लगी, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया।

विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया था और सरकार से सब्सिडी बहाल करने की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और अब सब्सिडी को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है और आगे भी उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

ऊर्जा विभाग का कहना है कि सब्सिडी बहाल होने से बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम होगा। इससे घरेलू खर्च संतुलित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, सरकार बिजली उपभोग को नियंत्रित रखने और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के लिए भी जागरूकता अभियान चलाने पर विचार कर रही है। यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से अहम है। इससे सरकार को आम लोगों के बीच सकारात्मक संदेश देने में मदद मिलेगी। आने वाले महीनों में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह राहत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सब्सिडी का लाभ पात्र उपभोक्ताओं को ही मिलेगा और इसके लिए पहले से लागू मानकों का पालन किया जाएगा। साथ ही विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी भी की जाएगी, ताकि योजना का लाभ सही उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

युद्ध टालने की आखिरी कोशिश, 45 दिन के सीजफायर पर बातचीत तेज, ट्रम्प की बढ़ी डेडलाइन से बढ़ी उम्मीद, समझौता हुआ तो दुनिया को मिलेगी राहत 

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अगर अमेरिका और ईरान के बीच 45 दिनों का प्रस्तावित युद्धविराम लागू हो जाता है, तो यह सिर्फ दो देशों के बीच टकराव कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी राहत का कारण बन सकता है। तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडरा रहे खतरे कम हो सकते हैं। इसी उम्मीद के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  द्वारा दी गई समयसीमा समाप्त होने से पहले अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच समझौते की आखिरी कोशिशें तेज हो गई हैं। इन मध्यस्थों में पाकिस्तान, इजिप्ट और तुर्की शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को समझौते का एक और मौका देने के लिए अपनी डेडलाइन 20 घंटे बढ़ा दी है। पहले यह समयसीमा सोमवार शाम तक थी, जिसे बढ़ाकर अब मंगलवार रात 8 बजे तक कर दिया गया है। 

यह विस्तार इसलिए किया गया है ताकि दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सके। माना जा रहा है कि यह समयसीमा तय करेगी कि तनाव कम होगा या क्षेत्र में हालात और बिगड़ेंगे। मध्यस्थ दो चरणों वाले समझौते पर काम कर रहे हैं। पहले चरण में 45 दिनों का युद्धविराम लागू किया जाएगा। इस दौरान स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत जारी रहेगी। अगर वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो युद्धविराम की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। इस प्रस्ताव को फिलहाल सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इससे तत्काल तनाव कम करने का मौका मिलेगा। दूसरे चरण में स्थायी शांति समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश होगी। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की बहाली और परमाणु गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। मध्यस्थों का मानना है कि पहले चरण में भरोसा बनाने के बाद ही स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

दो चरणों में समझौते की कोशिश, होर्मुज और यूरेनियम पर फंसा पेंच

मध्यस्थों द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुसार, दूसरे चरण में Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलने और ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर ठोस कदम उठाने पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम को या तो देश से बाहर भेजे या उसे कमजोर करने की प्रक्रिया अपनाए। इन दोनों मुद्दों को समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि ईरान ने संकेत दिया है कि वह केवल 45 दिनों के युद्धविराम के बदले अपने इन दोनों प्रमुख रणनीतिक विकल्पों को पूरी तरह छोड़ने को तैयार नहीं होगा। यही कारण है कि मध्यस्थ पहले चरण में आंशिक कदमों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे कि सीमित स्तर पर समुद्री मार्ग खोलना या यूरेनियम भंडार पर पारदर्शिता बढ़ाना। 

मध्यस्थों ने ईरानी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब बातचीत के लिए समय बहुत कम बचा है। उन्हें बताया गया है कि अगले 48 घंटे समझौते के लिए निर्णायक हो सकते हैं। अगर इस दौरान सहमति नहीं बनती, तो क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ सकती है। गौरतलब है कि ईरान को पहले 10 दिनों की समयसीमा दी गई थी, जो सोमवार को समाप्त होने वाली थी। लेकिन ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर इसे 20 घंटे के लिए बढ़ा दिया। सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार आखिरी मौका माना जा रहा है ताकि दोनों पक्ष युद्ध के बजाय बातचीत का रास्ता चुन सकें।

अगर 45 दिन का युद्धविराम लागू हो जाता है, तो इससे वैश्विक बाजारों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, समुद्री व्यापार सुरक्षित होगा और क्षेत्रीय तनाव कम होगा। यही वजह है कि दुनिया भर की नजरें इस संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच राहत रणनीतिक मार्ग से गुजरा भारतीय एलपीजी टैंकर, दो और जहाज जल्द पहुंचेंगे भारत

पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह संवेदनशील समुद्री मार्ग को सुरक्षित पार करने वाला सातवां भारतीय पोत है। इस पारगमन को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर उस समय जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, ‘ग्रीन सान्वी’ ईरान के समुद्री इलाके से तय मार्ग का उपयोग करते हुए इस संवेदनशील जलक्षेत्र से गुजरा। अनुमान है कि टैंकर में करीब 44 हजार टन एलपीजी लदा हुआ है। यह मात्रा भारत की लगभग आधे दिन की खपत के बराबर बताई जा रही है। ऐसे में टैंकर का सुरक्षित पारगमन ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की आवाजाही निर्बाध बनी रहती है तो भारत को एलपीजी आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

‘ग्रीन सान्वी’ ने तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नियंत्रित मार्ग से यात्रा की। इस दौरान जहाज ने उच्च सतर्कता के साथ नेविगेशन किया। क्षेत्र में बढ़े जोखिम को देखते हुए जहाजों की गति, मार्ग और संचार प्रणाली पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और इसमें खाड़ी क्षेत्र की भूमिका अहम है। ‘ग्रीन सान्वी’ का सफल पारगमन यह संकेत देता है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति मार्ग पूरी तरह बाधित नहीं हुए हैं। हालांकि, जोखिम अब भी बना हुआ है और हर जहाज को सतर्कता के साथ गुजरना पड़ रहा है। यही कारण है कि भारत समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

जल्द दो और टैंकर पार करेंगे रणनीतिक मार्ग

समुद्री विशेषज्ञों के मुताबिक, जल्द ही भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा और जग विक्रम भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच सकते हैं। इन जहाजों की आवाजाही पर भी करीबी नजर रखी जा रही है। यदि ये टैंकर भी सुरक्षित पार हो जाते हैं तो भारत की एलपीजी आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी। इससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसी संभावित आपूर्ति संकट की आशंका कम होगी। ‘ग्रीन सान्वी’ के गुजरने के साथ ही फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इनमें एलपीजी टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर, एलएनजी टैंकर, केमिकल टैंकर, कंटेनर जहाज और बल्क कैरियर शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जहाजों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति गतिविधियां इस क्षेत्र से कितनी जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन जहाजों की सुरक्षा भारत के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।

भारत अपने व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। ईरान के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। हालात को देखते हुए ईरान ने गैर-दुश्मन देशों के जहाजों को समन्वय के साथ इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। इस फैसले से भारत समेत कई देशों को राहत मिली है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पुष्टि की है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। इस कूटनीतिक समन्वय ने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकता है। मौजूदा हालात में ‘ग्रीन सान्वी’ का सुरक्षित पारगमन इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए कूटनीतिक और समुद्री दोनों स्तरों पर सक्रिय रणनीति अपनाए हुए है। यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच भी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब मोबाइल से मिनटों में मिलेगा लोन : RBIH ला रहा नया डिजिटल ऐप, एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे कई बैंक विकल्प

देश में लोन लेने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) एक नया डिजिटल ऐप तैयार कर रहा है, जिसके जरिए लोग सीधे अपने मोबाइल फोन से औपचारिक कर्ज के लिए आवेदन कर सकेंगे। यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) नाम का यह प्लेटफॉर्म उधार लेने वालों और कर्ज देने वाले संस्थानों को एक ही जगह पर जोड़ने का काम करेगा, जिससे लोन लेने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल हो जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, इस ऐप की शुरुआत छोटे कर्ज और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोन से की जाएगी। इसमें डिजिटल किसान क्रेडिट, खेती के लिए ऋण और ग्रामीण जरूरतों से जुड़े फाइनेंस विकल्प शामिल होंगे। आगे चलकर सोना, डेयरी, हाउसिंग, पर्सनल और वाहन लोन जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा कॉमन प्लेटफॉर्म तैयार करना है जहां उधार लेने वाले व्यक्ति को अलग-अलग बैंकों या ऐप्स पर जाने की जरूरत न पड़े। ULI के जरिए पहचान सत्यापन से लेकर लोन स्वीकृति और राशि ट्रांसफर तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल और तेज हो सकेगी। ULI एक डिजिटल इंटरफेस के रूप में काम करेगा, जो डेटा सेवा देने वाली संस्थाओं और बैंकों या अन्य लेंडर्स के बीच सेतु बनेगा। 

इससे लोन लेने की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और कागजी औपचारिकताओं में भी कमी आएगी। फिलहाल यह ऐप शुरुआती चरण में है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में इससे लोन लेने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। ULI की शुरुआत किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण से की जाएगी। इससे एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बैंकों के लोन विकल्प उपलब्ध होंगे। उधार लेने वाला व्यक्ति अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सबसे बेहतर ऑफर चुन सकेगा।

इस सिस्टम से जुड़ने के लिए सभी रेगुलेटेड संस्थानों को ULI के मुख्य ढांचे से तकनीकी रूप से कनेक्ट होना होगा। साथ ही हर बैंक या लेंडर को लोन मंजूरी से पहले अपनी तय क्रेडिट पॉलिसी का पालन करना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह परियोजना शुरुआती दौर में है और इसे पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा।

UPI मॉडल की तरह काम करेगा ULI, एक ही जगह पर मिलेगा पूरा डेटा 

ULI का ग्राहक वाला हिस्सा देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल पर आधारित होगा। इसमें मुख्य सिस्टम के साथ एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिसे रेगुलेटर का समर्थन मिलेगा। इसी तरह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने UPI सिस्टम के साथ BHIM ऐप को जोड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, ULI प्लेटफॉर्म से अब तक 89 से अधिक लेंडर और 53 से ज्यादा डेटा सर्विस देने वाली संस्थाएं जुड़ चुकी हैं। ये संस्थाएं मिलकर 141 तरह की जानकारी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे लोन प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी है। यह प्लेटफॉर्म लेंडिंग सेक्टर की कई बड़ी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखता है। अब तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अलग-अलग एपीआई से जुड़ना पड़ता था और वैकल्पिक डेटा का सही उपयोग करना मुश्किल होता था। ULI इन सभी दिक्कतों का एक साथ समाधान देता है। 

इसे एक कॉमन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां जमीन के रिकॉर्ड, क्रेडिट स्कोर, आय सत्यापन और डेयरी जैसी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी। RBIH इन डेटा सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर उनकी सेवाओं को प्लेटफॉर्म से जोड़ रहा है, जिससे लेंडर्स को अलग-अलग सिस्टम से जुड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टैंडर्ड एपीआई और रियल टाइम डेटा की सुविधा मिलने से लोन प्रोसेसिंग तेज और सस्ती हो सकेगी। अनुमान है कि इस सिस्टम से लेंडिंग लागत में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इससे छोटे उधारकर्ताओं, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार का बड़ा प्लान, गैस निर्भरता घटाने को इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ेगा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सप्लाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने कुकिंग गैस पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े कुकिंग उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि एलपीजी की खपत कम की जा सके और संभावित सप्लाई संकट से निपटा जा सके। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय के महानिदेशक सहित कई शीर्ष अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे दबाव और ऊर्जा आयात से जुड़े जोखिमों का आकलन किया गया। खासतौर पर ईरान से जुड़े युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण गैस और तेल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई गई। 

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो घरेलू स्तर पर वैकल्पिक कुकिंग व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा। इसी के तहत इंडक्शन कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए उनके उत्पादन को बढ़ाने पर चर्चा की गई। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर, इलेक्ट्रिक कुकटॉप और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उत्पादों की मांग में तेजी आई है। कई उपभोक्ता गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि इन उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और इनके आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। इससे न केवल गैस की खपत कम होगी बल्कि इलेक्ट्रिक कुकिंग को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में यह भी विचार किया गया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए उद्योगों को किस तरह प्रोत्साहन दिया जाए। इसमें स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात शुल्क संरचना में बदलाव, और जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि अगर इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ता है, तो यह ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी फायदेमंद होगा और उपभोक्ताओं को विकल्प भी मिलेंगे।

पश्चिम एशिया तनाव से ऊर्जा सप्लाई पर खतरा, सरकार ने बढ़ाई तैयारी

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए आयात पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति में संभावित बाधा को लेकर चिंता जताई गई है। सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि घरेलू बाजार में सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके। सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है। ऊर्जा क्षेत्र में जोखिम बढ़ने के कारण वैकल्पिक स्रोतों और घरेलू समाधान पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में इंडक्शन कुकिंग को गैस के विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जा रही है। उधर, कतर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट को नुकसान पहुंचने की खबर के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में बताया जा रहा है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। 

इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है और भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए जोखिम भी बढ़ गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। अब भारत रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से अधिक कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं, ताकि सप्लाई में व्यवधान की स्थिति में विकल्प मौजूद रहें। इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर बेहद कड़ा प्रहार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को “स्टोन एजेज” यानी पाषाण युग में पहुंचा देगा। इसके कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था। ट्रंप की चेतावनी ऐसे समय आई है जब यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां जारी हैं। वहीं ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे एकतरफा और अव्यवहारिक बताया है। बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू विकल्पों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, जिसमें इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ाना अहम रणनीति के रूप में सामने आया है।

देशभर में बदला मौसम का मिजाज : 11 राज्यों में तेज बारिश का अलर्ट, कई जगह ओलावृष्टि की चेतावनी 

देशभर में गर्मी की शुरुआत होते ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। दिल्ली, पंजाब सहित करीब 11 राज्यों में शनिवार को तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में ओलावृष्टि और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत से लेकर मध्य और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अगले दो दिनों तक मौसम अस्थिर बना रहेगा। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को मौसम ने अचानक पलटी मारी और 36 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर तेज हवाएं चलीं, जबकि कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने शनिवार को भी प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि की आशंका जताई है। किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि गेहूं और चने की कटाई का समय चल रहा है।

राजस्थान में भी मौसम का असर देखने को मिला। रेगिस्तानी जिले जैसलमेर और बीकानेर में शुक्रवार को जमकर ओले गिरे। कई जगह खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा। 

अजमेर और ब्यावर में तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गए और टीनशेड उड़ गए। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने का अनुमान जताया है। उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने परेशानी बढ़ा दी है। मथुरा के कोसीकला अनाज मंडी में बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ। यहां करीब 10 हजार बोरियों में रखा लगभग 5 हजार क्विंटल गेहूं भीग गया। मंडी में पानी भर जाने से व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। इससे पहले राज्य के अलग-अलग जिलों में बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत की खबर सामने आई है। 

प्रशासन ने लोगों से खुले स्थानों में जाने से बचने की अपील की है। हिमाचल प्रदेश में राजधानी शिमला में तेज तूफान के साथ हल्की बारिश हुई, जबकि लाहौल-स्पीति के ऊंचे पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट आई है। वहीं उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में भी शनिवार सुबह ताजा बर्फबारी हुई, जिससे ठंड फिर बढ़ गई है।

अगले दो दिन कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार 5 और 6 अप्रैल को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश की संभावना है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि हो सकती है। तमिलनाडु के कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश में शनिवार को लखनऊ और कानपुर समेत 35 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं करीब 55 जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि खराब मौसम के कारण अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाएगा।

हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अप्रैल महीने में भी बर्फबारी जारी है। बीती रात अटल टनल, दारचा, रोहतांग दर्रा, शिंकुला दर्रा और स्पीति घाटी में ताजा बर्फ गिरी। इससे पर्यटकों के लिए मार्ग फिसलन भरे हो गए हैं और प्रशासन ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। शनिवार के लिए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में ओले गिरने और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, खुले मैदानों से दूर रहने और बिजली गिरने की आशंका के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी है। किसानों को भी फसल की कटाई में सावधानी बरतने और तैयार अनाज को सुरक्षित स्थानों पर रखने को कहा गया है। अगले दो दिनों तक देश के कई हिस्सों में मौसम का यही बदला हुआ मिजाज जारी रहने की संभावना है।

अली अब्बास जफर की फिल्म में अहान पांडे का नया अवतार, ‘सैयारा’ के बाद एक्शन रोल में मचाने को तैयार धमाल

साल 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘सैयारा’ से डेब्यू करने वाले अहान पांडे ने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों का दिल जीत लिया था। इस मूवी में उनके साथ अनीत पड्डा नजर आई थीं और दोनों की केमिस्ट्री को खूब पसंद किया गया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने शानदार कमाई की और इसके बाद अहान पांडे रातों-रात सुर्खियों में आ गए। अब ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस बार उनका अंदाज पूरी तरह बदला हुआ होगा। फिल्ममेकर अली अब्बास जफर की अगली फिल्म में अहान पांडे एक्शन अवतार में दिखाई देंगे, जिसकी शूटिंग भी शुरू हो चुकी है। अली अब्बास जफर ने खुद सोशल मीडिया पर फिल्म की शुरुआत का एलान किया है। उन्होंने “एंड इट बिगिन्स” लिखते हुए क्लैपबोर्ड की तस्वीर और अहान पांडे की आंखों का क्लोज-अप शेयर किया। यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। फैंस को अहान का इंटेंस लुक काफी पसंद आ रहा है और लोग उनकी नई फिल्म को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में शरवरी वाघ भी अहम भूमिका निभाती दिखाई देंगी।

बताया जा रहा है कि यह फिल्म अहान पांडे के करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें वह अपने रोमांटिक इमेज से बाहर निकलकर पूरी तरह एक्शन-ओरिएंटेड किरदार निभाते नजर आएंगे। ‘सैयारा’ में जहां उन्होंने एक संवेदनशील और रोमांटिक किरदार निभाया था, वहीं इस नई फिल्म में उनका अंदाज ज्यादा रफ-टफ और दमदार होगा। अली अब्बास जफर अपने बड़े पैमाने की फिल्मों और हाई-ऑक्टेन एक्शन के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में अहान को उनके निर्देशन में देखना फैंस के लिए खास होने वाला है।

फिल्म की शूटिंग का पहला शेड्यूल मुंबई में शुरू हो चुका है। इसके बाद टीम मई 2026 में लंदन रवाना होगी, जहां एक बड़े एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग की जाएगी। खबर है कि लंदन में पांच दिनों तक लगातार एक्शन सीन्स फिल्माए जाएंगे, जिनमें अहान पांडे खुद कई स्टंट करते नजर आएंगे। फिल्म का शेड्यूल काफी टाइट रखा गया है और मेकर्स इसे बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना बना रहे हैं।

एक्शन अवतार के साथ बदलती इमेज, फैंस को बड़ी उम्मीदें

इससे पहले फरवरी 2026 में भी अली अब्बास जफर ने शूटिंग लोकेशन से अहान पांडे की एक झलक साझा की थी। उस फोटो के साथ उन्होंने लिखा था, “पावर दी नहीं जाती… ली जाती है… रोल करने को तैयार अहान पांडे।” इस कैप्शन ने ही साफ कर दिया था कि फिल्म में अहान का किरदार दमदार और एक्शन से भरपूर होने वाला है। अब शूटिंग शुरू होने की आधिकारिक घोषणा के बाद फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है। ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान पांडे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म में उनकी और अनीत पड्डा की जोड़ी को खूब सराहा गया था। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी पसंद की गई कि ऑफ-स्क्रीन भी उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। हालांकि, दोनों कलाकारों ने हमेशा इन खबरों को अफवाह बताया और कहा कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं।

फिल्म ‘सैयारा’ ने अहान पांडे को युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग तेजी से बढ़ी और उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे। ऐसे में अली अब्बास जफर की फिल्म को उनके करियर का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। इंडस्ट्री में भी इस फिल्म को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि अली अब्बास जफर बड़े कैनवास और दमदार कहानी के लिए जाने जाते हैं।

मेकर्स की योजना इस फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने की है। फिल्म में एक्शन, ड्रामा और इमोशन का मिश्रण देखने को मिलेगा। अहान पांडे की तैयारी भी काफी समय से चल रही थी और उन्होंने अपने किरदार के लिए फिजिकल ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया है। फैंस को उम्मीद है कि ‘सैयारा’ के बाद यह फिल्म उनके करियर को नई ऊंचाई दे सकती है। फिलहाल शूटिंग शुरू होने की खबर ने ही दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है और अब सभी को फिल्म की पहली झलक का इंतजार है।