महिलाओं को राजनीतिक ताकत देने की तैयारी, संसद में आज महिला आरक्षण संसोधन समेत पेश होंगे तीन अहम बिल
देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। संसद के विशेष सत्र में आज महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किए जाने वाले हैं, जिनका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है। सरकार इस व्यवस्था को वर्ष 2029 से लागू करने की योजना बना रही है, जिससे अगले लोकसभा चुनाव में यह पहली बार प्रभावी हो सके।
तीन दिनों के इस विशेष सत्र (16, 17 और 18 अप्रैल) को लेकर संसद का माहौल पहले से ही गर्म है। इन विधेयकों पर लोकसभा में कुल 18 घंटे और राज्यसभा में लगभग 10 घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। भाजपा, कांग्रेस सहित लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस संशोधन का सबसे बड़ा पहलू लोकसभा सीटों की संख्या में भारी वृद्धि का प्रस्ताव है।
मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने की योजना है, जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जाएंगी। इस विस्तार के साथ ही लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का तर्क है कि सीटों की संख्या बढ़ाने से किसी भी राज्य की मौजूदा राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित नहीं होगी और आरक्षण लागू करना आसान होगा। इसके साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया भी इस योजना का अहम हिस्सा है। नए विधेयक के तहत जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए एक परिसीमन आयोग गठित करने का प्रस्ताव है, जो नई सीटों का निर्धारण करेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य की वर्तमान आनुपातिक ताकत कम नहीं होगी, बल्कि कुल सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के साथ सभी राज्यों को लाभ मिलेगा।
हालांकि, विपक्ष ने परिसीमन के मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। कई विपक्षी दलों का कहना है कि परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है और कुछ राज्यों को नुकसान हो सकता है। इस कारण संसद में इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान हंगामे की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार के लिए इन विधेयकों को पारित कराना आसान नहीं होगा, क्योंकि ये संविधान संशोधन विधेयक हैं और इन्हें पास करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में कम से कम 360 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। विपक्ष के विरोध को देखते हुए यह एक चुनौतीपूर्ण गणित बन सकता है, लेकिन सरकार को भरोसा है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक समर्थन मिलेगा।
2023 के कानून को लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम
मोदी सरकार द्वारा लाया गया यह संशोधन दरअसल 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। उस समय पारित कानून में महिला आरक्षण को परिसीमन और नई जनगणना से जोड़ा गया था, जिससे इसके लागू होने में अनिश्चितता बनी हुई थी। अब नए संशोधन के जरिए इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए 2029 के चुनावों से इसे लागू करने का स्पष्ट रास्ता तैयार किया जा रहा है। आज पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों में ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ शामिल है, जिसे कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किए जाने की संभावना है। इस विधेयक के जरिए लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या को 850 तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना है, बिना मौजूदा सीटों में कटौती किए। दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ है, जिसके तहत नई जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए उप-आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे सामाजिक न्याय के साथ-साथ लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह मुद्दा बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए। महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी और उनकी निर्णायक भूमिका को ध्यान में रखते हुए सभी दल इस विषय पर सतर्क नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि किसी भी बड़े राजनीतिक दल ने खुले तौर पर महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया है, भले ही परिसीमन को लेकर मतभेद सामने आ रहे हों।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और सरकार का पक्ष मजबूती से रखेंगे। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह के शुक्रवार को जवाब देने की संभावना जताई जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को व्यापक समर्थन मिलेगा और यह आसानी से पारित हो जाएगा। अगर ये विधेयक संसद से पारित हो जाते हैं, तो 31 मार्च 2029 से यह कानून लागू हो जाएगा और उसी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। यह भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

