देशभर में बदला मौसम का मिजाज : 11 राज्यों में तेज बारिश का अलर्ट, कई जगह ओलावृष्टि की चेतावनी 

देशभर में गर्मी की शुरुआत होते ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। दिल्ली, पंजाब सहित करीब 11 राज्यों में शनिवार को तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में ओलावृष्टि और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत से लेकर मध्य और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अगले दो दिनों तक मौसम अस्थिर बना रहेगा। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को मौसम ने अचानक पलटी मारी और 36 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर तेज हवाएं चलीं, जबकि कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने शनिवार को भी प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि की आशंका जताई है। किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि गेहूं और चने की कटाई का समय चल रहा है।

राजस्थान में भी मौसम का असर देखने को मिला। रेगिस्तानी जिले जैसलमेर और बीकानेर में शुक्रवार को जमकर ओले गिरे। कई जगह खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा। 

अजमेर और ब्यावर में तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गए और टीनशेड उड़ गए। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने का अनुमान जताया है। उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने परेशानी बढ़ा दी है। मथुरा के कोसीकला अनाज मंडी में बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ। यहां करीब 10 हजार बोरियों में रखा लगभग 5 हजार क्विंटल गेहूं भीग गया। मंडी में पानी भर जाने से व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। इससे पहले राज्य के अलग-अलग जिलों में बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत की खबर सामने आई है। 

प्रशासन ने लोगों से खुले स्थानों में जाने से बचने की अपील की है। हिमाचल प्रदेश में राजधानी शिमला में तेज तूफान के साथ हल्की बारिश हुई, जबकि लाहौल-स्पीति के ऊंचे पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट आई है। वहीं उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में भी शनिवार सुबह ताजा बर्फबारी हुई, जिससे ठंड फिर बढ़ गई है।

अगले दो दिन कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार 5 और 6 अप्रैल को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश की संभावना है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि हो सकती है। तमिलनाडु के कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश में शनिवार को लखनऊ और कानपुर समेत 35 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं करीब 55 जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि खराब मौसम के कारण अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाएगा।

हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अप्रैल महीने में भी बर्फबारी जारी है। बीती रात अटल टनल, दारचा, रोहतांग दर्रा, शिंकुला दर्रा और स्पीति घाटी में ताजा बर्फ गिरी। इससे पर्यटकों के लिए मार्ग फिसलन भरे हो गए हैं और प्रशासन ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। शनिवार के लिए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में ओले गिरने और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, खुले मैदानों से दूर रहने और बिजली गिरने की आशंका के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी है। किसानों को भी फसल की कटाई में सावधानी बरतने और तैयार अनाज को सुरक्षित स्थानों पर रखने को कहा गया है। अगले दो दिनों तक देश के कई हिस्सों में मौसम का यही बदला हुआ मिजाज जारी रहने की संभावना है।

अली अब्बास जफर की फिल्म में अहान पांडे का नया अवतार, ‘सैयारा’ के बाद एक्शन रोल में मचाने को तैयार धमाल

साल 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘सैयारा’ से डेब्यू करने वाले अहान पांडे ने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों का दिल जीत लिया था। इस मूवी में उनके साथ अनीत पड्डा नजर आई थीं और दोनों की केमिस्ट्री को खूब पसंद किया गया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने शानदार कमाई की और इसके बाद अहान पांडे रातों-रात सुर्खियों में आ गए। अब ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस बार उनका अंदाज पूरी तरह बदला हुआ होगा। फिल्ममेकर अली अब्बास जफर की अगली फिल्म में अहान पांडे एक्शन अवतार में दिखाई देंगे, जिसकी शूटिंग भी शुरू हो चुकी है। अली अब्बास जफर ने खुद सोशल मीडिया पर फिल्म की शुरुआत का एलान किया है। उन्होंने “एंड इट बिगिन्स” लिखते हुए क्लैपबोर्ड की तस्वीर और अहान पांडे की आंखों का क्लोज-अप शेयर किया। यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। फैंस को अहान का इंटेंस लुक काफी पसंद आ रहा है और लोग उनकी नई फिल्म को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में शरवरी वाघ भी अहम भूमिका निभाती दिखाई देंगी।

बताया जा रहा है कि यह फिल्म अहान पांडे के करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें वह अपने रोमांटिक इमेज से बाहर निकलकर पूरी तरह एक्शन-ओरिएंटेड किरदार निभाते नजर आएंगे। ‘सैयारा’ में जहां उन्होंने एक संवेदनशील और रोमांटिक किरदार निभाया था, वहीं इस नई फिल्म में उनका अंदाज ज्यादा रफ-टफ और दमदार होगा। अली अब्बास जफर अपने बड़े पैमाने की फिल्मों और हाई-ऑक्टेन एक्शन के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में अहान को उनके निर्देशन में देखना फैंस के लिए खास होने वाला है।

फिल्म की शूटिंग का पहला शेड्यूल मुंबई में शुरू हो चुका है। इसके बाद टीम मई 2026 में लंदन रवाना होगी, जहां एक बड़े एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग की जाएगी। खबर है कि लंदन में पांच दिनों तक लगातार एक्शन सीन्स फिल्माए जाएंगे, जिनमें अहान पांडे खुद कई स्टंट करते नजर आएंगे। फिल्म का शेड्यूल काफी टाइट रखा गया है और मेकर्स इसे बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना बना रहे हैं।

एक्शन अवतार के साथ बदलती इमेज, फैंस को बड़ी उम्मीदें

इससे पहले फरवरी 2026 में भी अली अब्बास जफर ने शूटिंग लोकेशन से अहान पांडे की एक झलक साझा की थी। उस फोटो के साथ उन्होंने लिखा था, “पावर दी नहीं जाती… ली जाती है… रोल करने को तैयार अहान पांडे।” इस कैप्शन ने ही साफ कर दिया था कि फिल्म में अहान का किरदार दमदार और एक्शन से भरपूर होने वाला है। अब शूटिंग शुरू होने की आधिकारिक घोषणा के बाद फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है। ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान पांडे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म में उनकी और अनीत पड्डा की जोड़ी को खूब सराहा गया था। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी पसंद की गई कि ऑफ-स्क्रीन भी उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। हालांकि, दोनों कलाकारों ने हमेशा इन खबरों को अफवाह बताया और कहा कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं।

फिल्म ‘सैयारा’ ने अहान पांडे को युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग तेजी से बढ़ी और उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे। ऐसे में अली अब्बास जफर की फिल्म को उनके करियर का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। इंडस्ट्री में भी इस फिल्म को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि अली अब्बास जफर बड़े कैनवास और दमदार कहानी के लिए जाने जाते हैं।

मेकर्स की योजना इस फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने की है। फिल्म में एक्शन, ड्रामा और इमोशन का मिश्रण देखने को मिलेगा। अहान पांडे की तैयारी भी काफी समय से चल रही थी और उन्होंने अपने किरदार के लिए फिजिकल ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया है। फैंस को उम्मीद है कि ‘सैयारा’ के बाद यह फिल्म उनके करियर को नई ऊंचाई दे सकती है। फिलहाल शूटिंग शुरू होने की खबर ने ही दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है और अब सभी को फिल्म की पहली झलक का इंतजार है।

बीसीसीआई ने आईपीएल के दूसरे चरण का कार्यक्रम जारी किया, 13 अप्रैल से होंगे मुकाबले

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दूसरे चरण के कार्यक्रम का आधिकारिक एलान कर दिया है। बोर्ड के मुताबिक लीग के बाकी बचे 50 मुकाबले 13 अप्रैल से 24 मई के बीच खेले जाएंगे। दूसरे चरण के मैच देश के 12 अलग-अलग शहरों में आयोजित किए जाएंगे, जिससे क्रिकेट प्रशंसकों को कई स्थानों पर मुकाबलों का रोमांच देखने को मिलेगा। इन वेन्यू में बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, जयपुर, धर्मशाला, रायपुर और न्यू चंडीगढ़ शामिल हैं। 

बीसीसीआई ने कार्यक्रम जारी करते हुए बताया कि टूर्नामेंट का आगाज 28 मार्च को मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबले से हुआ था। शुरुआती चरण के मुकाबलों के बाद अब दूसरे चरण में लीग और अधिक रोमांचक मोड़ लेती नजर आएगी, क्योंकि टीमें प्लेऑफ की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी। 13 अप्रैल से शुरू होने वाले मुकाबलों में कई अहम भिड़ंत देखने को मिलेंगी, जिन पर अंक तालिका की तस्वीर काफी हद तक निर्भर करेगी। दूसरे चरण में बड़े शहरों के साथ-साथ धर्मशाला, रायपुर और न्यू चंडीगढ़ जैसे वेन्यू को भी शामिल किया गया है। इससे न सिर्फ दर्शकों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि टीमों को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका भी मिलेगा। पहाड़ी इलाके धर्मशाला में होने वाले मैचों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना रहती है, जबकि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे पारंपरिक मैदानों पर स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। इस तरह दूसरे चरण में पिच और परिस्थितियों का असर भी टीमों की रणनीति पर साफ दिखाई देगा।

लीग चरण का आखिरी मुकाबला 24 मई को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जाएगा

बीसीसीआई के कार्यक्रम के अनुसार लीग चरण का आखिरी मुकाबला 24 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जाएगा। इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला प्लेऑफ की तस्वीर तय करने में बेहद अहम हो सकता है, क्योंकि लीग के अंतिम दौर में कई टीमें अंतिम चार में जगह बनाने की दौड़ में होती हैं। इसलिए आखिरी दिन तक रोमांच बरकरार रहने की उम्मीद है। इस सीजन के लीग चरण में कुल 70 मुकाबले खेले जाएंगे। पहले चरण के मैचों के बाद दूसरे चरण में बची टीमों के बीच मुकाबले और कड़े होने की संभावना है। कई फ्रेंचाइजी ने अपने संयोजन में बदलाव किए हैं और चोटिल खिलाड़ियों की वापसी भी दूसरे चरण में देखने को मिल सकती है। इससे मुकाबलों का स्तर और ऊंचा होगा। 

टीम प्रबंधन अंक तालिका में बेहतर स्थान पाने के लिए रणनीतिक बदलाव करने पर भी जोर दे रहे हैं। बीसीसीआई ने फिलहाल प्लेऑफ मुकाबलों के कार्यक्रम का एलान नहीं किया है। बोर्ड ने कहा है कि लीग चरण समाप्त होने के बाद प्लेऑफ के चार मुकाबलों की तारीख और वेन्यू की घोषणा अलग से की जाएगी। आमतौर पर प्लेऑफ में क्वालीफायर-1, एलिमिनेटर, क्वालीफायर-2 और फाइनल मुकाबला शामिल होता है। माना जा रहा है कि प्लेऑफ मुकाबले भी बड़े शहरों में आयोजित किए जा सकते हैं, हालांकि इस पर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा। दूसरे चरण के कार्यक्रम के एलान के साथ ही फ्रेंचाइजी टीमों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। खिलाड़ियों के यात्रा कार्यक्रम, अभ्यास सत्र और टीम संयोजन को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। कई टीमें घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेंगी, जबकि कुछ टीमें लगातार जीत हासिल कर अंक तालिका में छलांग लगाने पर ध्यान देंगी। प्रशंसकों को भी दूसरे चरण में रोमांचक मुकाबलों की उम्मीद है, क्योंकि हर मैच प्लेऑफ की दौड़ को प्रभावित कर सकता है। इस तरह 13 अप्रैल से शुरू होने वाला आईपीएल का दूसरा चरण टूर्नामेंट को निर्णायक दिशा देगा। 24 मई तक चलने वाले इन मुकाबलों के बाद शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में जगह बनाएंगी। 

भारतीय नौसेना में शामिल हुआ अत्याधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’, दुश्मनों पर रखेगा नजर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे 

भारतीय नौसेना को शुक्रवार को एक बड़ी सामरिक मजबूती मिली, जब नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत ‘तारागिरी’ को विशाखापत्तनम में नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। 3 अप्रैल की दोपहर आयोजित कमीशनिंग समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अत्याधुनिक तकनीक और घातक हथियारों से लैस यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

‘तारागिरी’ सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस है, जो दुश्मन के जहाजों और ठिकानों को दूर से निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी लगाई गई है, जो हवाई खतरों से जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

जहाज में आधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली, उन्नत सेंसर और अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली भी शामिल है, जिससे यह बहु-आयामी समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘तारागिरी’ को “स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप” करार देते हुए कहा कि इसकी कमीशनिंग भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना देश के मूल्यों, प्रतिबद्धता और सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है और यह नया युद्धपोत नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा। 

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना सिर्फ युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि मानवीय संकट और आपदा राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाती रही है। आईएनएस तारागिरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उच्च-तीव्रता वाले युद्ध अभियानों के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों में भी प्रभावी रूप से काम कर सके। समुद्र में राहत सामग्री पहुंचाने, चिकित्सा सहायता देने और संकटग्रस्त क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में यह जहाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया

इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। इसे स्वदेशी तकनीक के साथ तैयार किया गया है और इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती जहाजों की तुलना में तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और कम रडार सिग्नेचर वाला है, जिससे दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता बढ़ जाती है। राजनाथ सिंह ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की सराहना करते हुए कहा कि दशकों से यह संस्थान देश के लिए आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। 

कुशल कार्यबल, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने इसे विश्वसनीय शिपबिल्डिंग संस्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने से भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि रक्षा निर्यात में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। 

इस दौरान हथियार प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, युद्धपोत निर्माण और अन्य सैन्य उपकरणों पर बड़ा निवेश किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, आधुनिक मिसाइल सिस्टम और विशेष नौसैनिक जहाजों जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। ‘तारागिरी’ की कमीशनिंग के साथ भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, रक्षा और आक्रामक क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी मानी जा रही है। जब यह युद्धपोत समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत रक्षा संकल्प का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाएगा।

राज्यसभा से उपनेता पद से हटाए गए आप सांसद राघव चड्ढा का बड़ा संदेश, कहा- ‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं’

आम आदमी पार्टी ने गुरुवार को अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया। आम आदमी पार्टी ने उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया उपनेता नियुक्त किया है। पार्टी के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वहीं, राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दे उठाने पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। राघव चड्ढा ने अपने एक्स हैंडल पर करीब 2 मिनट 45 सेकेंड का वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने कई जनहित के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि वे लगातार आम लोगों से जुड़े विषय संसद में उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास पर बढ़ते टैक्स का बोझ, बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने, मोबाइल कंपनियों के 28 दिन वाले रिचार्ज को लेकर शिकायतें, एयरपोर्ट पर महंगे खाने की समस्या, हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाला जीएसटी, एयर पॉल्यूशन, पेपर लीक जैसे मुद्दे वे लगातार उठाते रहे हैं।

उन्होंने वीडियो में कहा कि देश के मध्यम वर्ग की परेशानियां बढ़ रही हैं, लेकिन इन मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने मोबाइल सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनकमिंग कॉल चार्ज, डेटा एक्सपायरी और 28 दिन के रिचार्ज जैसे मामले लोगों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने फूड एडल्टरेशन, एयरलाइन कंपनियों द्वारा एक्सेस बैगेज चार्ज, पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्चों का भी मुद्दा उठाया।

राघव चड्ढा ने कहा कि वे संसद के अंदर और बाहर लगातार इन मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” इसके साथ ही उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष निशाने के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के इस फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से इस बदलाव को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि संगठनात्मक संतुलन और संसदीय रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया है। अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाए जाने के बाद पार्टी की संसदीय टीम में बदलाव का संकेत भी मिला है।

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर और पार्टी में भूमिका

राघव चड्ढा लंबे समय से आम आदमी पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल रहे हैं। राज्यसभा पहुंचने से पहले वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे। फरवरी 2020 से मार्च 2022 तक वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे और इस दौरान कई मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई। विधानसभा में उन्होंने वित्त, शहरी सेवाओं और प्रशासनिक मामलों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। राज्यसभा में भेजे जाने से पहले वे दिल्ली जल बोर्ड से भी जुड़े रहे और पानी से संबंधित परियोजनाओं पर काम किया। 

अप्रैल 2022 में उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया, जिसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की प्रमुख आवाज बने। उच्च सदन में वे आर्थिक मुद्दों, मिडिल क्लास की समस्याओं और उपभोक्ता हितों से जुड़े विषयों को उठाते रहे हैं। पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आने से यह मामला और चर्चा में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान आने वाले समय में पार्टी के भीतर समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, राघव चड्ढा ने अपने संदेश में साफ किया है कि वे जनता के मुद्दे उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश भले हो, लेकिन वे “आम आदमी” की लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, पार्टी द्वारा अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की रणनीति किस तरह बदलती है, इस पर भी नजर रहेगी।

हवाई यात्रियों को मुफ्त सीट चयन पर फिलहाल रोक, सरकार ने 60% सीटें बिना शुल्क देने का फैसला टाला

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत देने की दिशा में सरकार द्वारा प्रस्तावित बड़ा फैसला फिलहाल टल गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइनों को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चुनने की सुविधा देने के निर्देश को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह नियम 20 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन एयरलाइंस कंपनियों की आपत्तियों और व्यावसायिक चिंताओं को देखते हुए मंत्रालय ने इस पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है। दरअसल, हवाई टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों से पसंदीदा सीट चुनने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। विंडो सीट, आगे की सीट या अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटों के लिए यात्रियों को अलग से भुगतान करना पड़ता है। इसे लेकर लंबे समय से यात्रियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के मद्देनजर सरकार ने मार्च में यह प्रस्ताव रखा था कि एयरलाइंस को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त में चुनने की सुविधा देनी होगी, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम किया जा सके। 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 18 मार्च को इस संबंध में घोषणा करते हुए बताया था कि उसने महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (डीजीसीए) को निर्देश जारी किए हैं कि सभी एयरलाइनों को इस नियम को लागू करने के लिए कहा जाए। मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया था कि यह फैसला यात्रियों के हित में लिया जा रहा है और इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि, इस घोषणा के बाद एयरलाइंस कंपनियों की ओर से आपत्तियां सामने आईं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर सहित कुछ एयरलाइनों ने मंत्रालय को आवेदन देकर कहा कि इस फैसले का परिचालन और व्यावसायिक असर गंभीर हो सकता है। 

एयरलाइंस का कहना था कि सीट चयन शुल्क उनके राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसे हटाने से किराया संरचना प्रभावित हो सकती है। एयरलाइंस कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा अनियंत्रित किराया व्यवस्था में सीट चयन शुल्क हटाने से टिकट कीमतों में बदलाव करना पड़ेगा, जिसका असर अंततः यात्रियों पर ही पड़ सकता है। कंपनियों का कहना था कि यदि सीट चयन मुफ्त किया जाता है तो टिकट बेस फेयर बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे कम किराए में यात्रा करने वाले यात्रियों पर बोझ बढ़ जाएगा।

जांच पूरी होने तक लागू नहीं होगा नियम

एयरलाइंस से मिले इन आवेदनों के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पूरे मामले की समीक्षा की। मंत्रालय ने माना कि प्रस्तावित नियम का किराया संरचना, परिचालन लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा पर व्यापक असर पड़ सकता है। साथ ही यह भी देखा गया कि अलग-अलग एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति अलग होती है, ऐसे में एक समान नियम लागू करना व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने फैसला किया है कि 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क देने का प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया जाए। मंत्रालय ने कहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत अध्ययन और हितधारकों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तब तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी और एयरलाइंस अपनी नीतियों के अनुसार सीट चयन शुल्क लेती रहेंगी।

 सरकार यात्रियों को राहत देने और एयरलाइंस के व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। यदि भविष्य में संशोधित नियम लागू होते हैं, तो संभव है कि कुछ श्रेणी की सीटें मुफ्त हों और कुछ प्रीमियम सीटों पर शुल्क जारी रहे। फिलहाल इस फैसले के टलने से यात्रियों को मुफ्त सीट चयन की सुविधा के लिए इंतजार करना होगा। हालांकि मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि मामले की पूरी जांच के बाद संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे यात्रियों को राहत भी मिले और एयरलाइंस के कारोबार पर भी प्रतिकूल असर न पड़े।

विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों पर सख्ती, बिना अनुमति भंडारा-कथा पर लगाई गई रोक

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अब धाम क्षेत्र में किसी भी प्रकार का भंडारा, भागवत कथा, कीर्तन या अन्य विशेष धार्मिक कार्यक्रम बिना पूर्व अनुमति के आयोजित नहीं किया जा सकेगा। नगर पंचायत ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और धाम की व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद आयोजकों को कार्यक्रम से पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। नगर पंचायत के अनुसार, यात्रा सीजन के दौरान बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई स्थानों पर बिना योजना के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे यातायात, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा पर असर पड़ता है। कई बार भंडारों के कारण सड़क और पैदल मार्ग बाधित हो जाते हैं, जिससे दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नियम लागू किया गया है। 

प्रशासन का कहना है कि धाम में धार्मिक कार्यक्रमों की परंपरा बनी रहेगी, लेकिन उन्हें व्यवस्थित ढंग से आयोजित करना जरूरी है। आयोजकों को कार्यक्रम की तिथि, स्थान, अनुमानित भीड़, भोजन व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़ी जानकारी पहले से देनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही आयोजन किया जा सकेगा। 

नगर पंचायत ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्थानों पर ही कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार बिना अनुमति लगाए गए भंडारों में साफ-सफाई की कमी देखी जाती है, जिससे कूड़ा-कचरा फैल जाता है। इससे न केवल धाम की पवित्रता प्रभावित होती है बल्कि पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। नए नियमों के तहत आयोजकों को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद स्थान को साफ करना अनिवार्य होगा।

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था के लिए लिया गया है। यदि सभी कार्यक्रम अनुमति लेकर होंगे तो भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं बेहतर तरीके से संचालित की जा सकेंगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर अग्निशमन, चिकित्सा सहायता और पुलिस व्यवस्था की जरूरत होती है। बिना सूचना के कार्यक्रम होने से अचानक भीड़ बढ़ जाती है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। अब अनुमति प्रक्रिया के माध्यम से प्रशासन पहले से तैयारी कर सकेगा। 

नगर पंचायत ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति आयोजन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है और कार्यक्रम को बीच में ही बंद भी कराया जा सकता है। साथ ही, धाम क्षेत्र में पोस्टर, बैनर या अस्थायी ढांचे लगाने के लिए भी अनुमति आवश्यक होगी। इस फैसले को लेकर कई स्थानीय लोगों ने समर्थन जताया है। उनका कहना है कि इससे धाम में व्यवस्था बेहतर होगी और श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिलेगी। वहीं कुछ आयोजकों ने अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है, ताकि धार्मिक गतिविधियां बाधित न हों।

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा। निर्धारित नियमों के तहत आवेदन करने पर समय पर अनुमति दी जाएगी। यात्रा सीजन को देखते हुए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। नए नियम लागू होने के बाद अब बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और धाम की व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू बनी रहेगी। 

सांसद राघव चड्ढा पर उनकी ही पार्टी की सख्ती, आप ने राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल को मिलेगी जिम्मेदारी 

आम आदमी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद के खिलाफ बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है और इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है। पार्टी ने पत्र में अनुरोध किया है कि चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब उन्हें सदन में पार्टी कोटे से बोलने का समय भी आवंटित न किया जाए। जानकारी के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने सांसद अशोक मित्तलको नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। पार्टी के इस फैसले को अंदरूनी रणनीतिक बदलाव और संसदीय नेतृत्व में फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है। अप्रैल 2022 से राज्यसभा सांसद रहे राघव चड्ढा संसद में सक्रिय और मुखर नेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। उन्होंने कई बार जनहित के मुद्दे उठाकर सुर्खियां भी बटोरी थीं, लेकिन हाल के महीनों में उनकी सक्रियता कम दिखाई दे रही थी। 

पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चड्ढा को पार्टी की ओर से सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। यह कदम संकेत देता है कि पार्टी संसदीय रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। वर्तमान में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य हैं, जिनमें सात पंजाब से और तीन दिल्ली से हैं। ऐसे में उपनेता पद का महत्व काफी बढ़ जाता है, क्योंकि वही सदन में पार्टी की लाइन तय करने और समन्वय का काम करता है। यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि पिछले कुछ समय से चल रहे आंतरिक मूल्यांकन के बाद यह कदम उठाया गया है। हाल ही में विधानसभा चुनाव के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची में भी राघव चड्ढा का नाम शामिल नहीं किया गया था। इसे भी नेतृत्व स्तर पर बदलाव के संकेत के रूप में देखा गया था।

स्टार प्रचारक सूची से बाहर, गतिविधियों से दूरी ने बढ़ाई चर्चा

राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक गतिविधियों से भी दूर नजर आ रहे थे। पार्टी की प्रमुख बैठकों में उनकी मौजूदगी कम रही और मीडिया ब्रीफिंग में भी वे शामिल नहीं हुए। यहां तक कि दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंदकेजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को राहत मिलने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस चुप्पी ने भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।

हालांकि, संसदीय गतिविधियों में राघव चड्ढा की भूमिका पहले काफी सक्रिय रही है। उन्होंने हाल ही में गिग वर्कर्स के मुद्दे को राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठाया था और उनके सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने का मुद्दा भी उठाया था। उनका कहना था कि बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल मां की नहीं बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनके इन बयानों को व्यापक समर्थन भी मिला था।

इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने संसदीय रणनीति में बदलाव करते हुए उन्हें उपनेता पद से हटाने का फैसला लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण का हिस्सा हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे संगठनात्मक अनुशासन और सक्रियता से जोड़कर भी देख रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्यसभा सचिवालय इस पत्र पर क्या कार्रवाई करता है और अशोक मित्तल को उपनेता की जिम्मेदारी कब तक सौंपी जाती है। यह फैसला आम आदमी पार्टी की संसदीय रणनीति और नेतृत्व संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे पार्टी की राजनीतिक दिशा और सक्रियता पर भी असर पड़ सकता है।

50 साल बाद चांद की ओर फिर बढ़े इंसानी कदम, आर्टेमिस-2 के साथ अंतरिक्ष में रवाना हुए चार यात्री

अमेरिका ने एक बार फिर मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में बड़ा अध्याय जोड़ते हुए चांद की दिशा में नई शुरुआत कर दी है। NASA के Artemis II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री बुधवार को चंद्रमा की ओर रवाना हुए। यह 50 से अधिक वर्षों बाद चंद्रमा की दिशा में भेजा गया पहला मानवयुक्त मिशन है और आने वाले वर्षों में चांद पर दोबारा मानव उतारने की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मौजूदगी बनाने की दिशा में बड़ी छलांग है। 32 मंजिला विशाल रॉकेट ने Kennedy Space Center से उड़ान भरी। लॉन्च को देखने के लिए हजारों लोग तटों, सड़कों और खुले मैदानों में जुटे। वातावरण में उत्साह और रोमांच का वही माहौल देखने को मिला, जैसा 1960 और 70 के दशक के अपोलो मिशनों के दौरान हुआ करता था। कई लोगों ने इसे मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के नए युग की शुरुआत बताया।

इस मिशन में अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। कमांडर रीड वाइजमैन के साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन उड़ान पर रवाना हुए। यह दल कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार किसी महिला, किसी गैर-श्वेत अंतरिक्ष यात्री और किसी गैर-अमेरिकी नागरिक को एक साथ चंद्र मिशन पर भेजा गया है। चारों अंतरिक्ष यात्री Orion spacecraft में सवार होकर चंद्रमा की दिशा में बढ़े। उड़ान से पहले भावुक पल भी देखने को मिले। अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने परिवारों को अलविदा कहा, हाथों से दिल का आकार बनाकर शुभकामनाएं लीं और विशेष एस्ट्रोवैन में बैठकर प्रक्षेपण स्थल तक पहुंचे। वहां उनका इंतजार कर रहा था Space Launch System, जो अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जा रहा है। यही रॉकेट ओरियन कैप्सूल को पृथ्वी की कक्षा से बाहर ले गया।

यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा

मिशन के अनुसार, यह उड़ान करीब 10 दिनों की परीक्षण यात्रा है। उड़ान के शुरुआती 25 घंटे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के पास ही रहेंगे और कैप्सूल के सभी सिस्टम की जांच करेंगे। इसके बाद मुख्य इंजन को सक्रिय किया जाएगा, जो उन्हें चंद्रमा की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ाएगा। यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है। हालांकि इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं। वे चंद्रमा के पास से गुजरेंगे और उसकी सतह से हजारों किलोमीटर दूर तक जाएंगे। इसके बाद कैप्सूल यू-टर्न लेकर पृथ्वी की ओर लौटेगा और अंत में प्रशांत महासागर में उतरेगा।

इस दौरान वे मानव इतिहास में सबसे दूर तक जाने वाले अंतरिक्ष यात्री बन जाएंगे‌ इस उड़ान की तुलना अक्सर Apollo 8 से की जा रही है, जिसने 1968 में पहली बार इंसानों को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचाया था। हालांकि आर्टेमिस-2 मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा नहीं करेंगे, लेकिन यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण डेटा जुटाएगा। नासा का लक्ष्य आने वाले वर्षों में आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर मानव को फिर से उतारना है। इसके बाद चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक शोध स्टेशन स्थापित करने और मंगल मिशन की तैयारी का रास्ता भी खुलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टेमिस-2 मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की नींव रखेगा और आने वाले दशकों में चंद्रमा वैज्ञानिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

ईरान पर अमेरिका का कड़ा रुख, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ने कहा- लक्ष्य पूरा होने तक जारी रहेगा अभियान

ईरान के खिलाफ जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने रुख को और सख्त कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सभी रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, तब तक अमेरिका की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ट्रम्प ने इसे सिर्फ मौजूदा संघर्ष नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दुश्मन को पूरी तरह तबाह कर सकता है। अपने संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना आधुनिक हथियारों के साथ लगातार कार्रवाई कर रही है और अत्याधुनिक बमवर्षक विमानों ने ईरान में प्रभावी भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल क्षमता को निशाना बनाया जा रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान बड़े पैमाने पर मिसाइलें तैयार कर रहा था और अमेरिका उसे किसी भी कीमत पर परमाणु ताकत नहीं बनने देगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वहां के शासन को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह कार्रवाई अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी थी। उन्होंने अपने फैसलों की तुलना पिछले प्रशासन से करते हुए कहा कि किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने वह नहीं किया जो उन्होंने किया है। ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान को बड़ी आर्थिक मदद दी थी, जबकि उनकी सरकार ने उस नीति को समाप्त कर दिया।

ट्रम्प ने दावा किया कि युद्ध के बाद अमेरिका को भारी निवेश मिला है। ऊर्जा संकट को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि तेल की कोई कमी नहीं होगी क्योंकि वैकल्पिक आपूर्ति के इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास सभी विकल्प मौजूद हैं और वह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े संघर्ष लंबा समय लेते हैं, लेकिन अमेरिका अपने लक्ष्य तक पहुंचकर ही रुकेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समझौते पर दो से तीन सप्ताह में फैसला

भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह दिए गए संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जाकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उनके अनुसार, संघर्ष समाप्त होने के बाद यह मार्ग खुल जाएगा और वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी और आने वाले दो से तीन सप्ताह में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और अमेरिका का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रम्प ने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में समझौते की संभावना भी है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका और आक्रामक रणनीति अपना सकता है। 

उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ अहम पुलों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान वार्ता की मेज पर आता है, तो यह बेहतर विकल्प होगा। हालांकि उन्होंने दोहराया कि अमेरिका को रोकना मुश्किल है और कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। उनके बयान के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है, खासकर ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि स्थिति पर अमेरिका की नजर बनी हुई है और जल्द राहत मिल सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो कार्रवाई और तेज होगी। ट्रम्प के इस कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी और बढ़ सकता है और आने वाले सप्ताह इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।