युद्ध टालने की आखिरी कोशिश, 45 दिन के सीजफायर पर बातचीत तेज, ट्रम्प की बढ़ी डेडलाइन से बढ़ी उम्मीद, समझौता हुआ तो दुनिया को मिलेगी राहत
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अगर अमेरिका और ईरान के बीच 45 दिनों का प्रस्तावित युद्धविराम लागू हो जाता है, तो यह सिर्फ दो देशों के बीच टकराव कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी राहत का कारण बन सकता है। तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडरा रहे खतरे कम हो सकते हैं। इसी उम्मीद के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दी गई समयसीमा समाप्त होने से पहले अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच समझौते की आखिरी कोशिशें तेज हो गई हैं। इन मध्यस्थों में पाकिस्तान, इजिप्ट और तुर्की शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को समझौते का एक और मौका देने के लिए अपनी डेडलाइन 20 घंटे बढ़ा दी है। पहले यह समयसीमा सोमवार शाम तक थी, जिसे बढ़ाकर अब मंगलवार रात 8 बजे तक कर दिया गया है।
यह विस्तार इसलिए किया गया है ताकि दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सके। माना जा रहा है कि यह समयसीमा तय करेगी कि तनाव कम होगा या क्षेत्र में हालात और बिगड़ेंगे। मध्यस्थ दो चरणों वाले समझौते पर काम कर रहे हैं। पहले चरण में 45 दिनों का युद्धविराम लागू किया जाएगा। इस दौरान स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत जारी रहेगी। अगर वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो युद्धविराम की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। इस प्रस्ताव को फिलहाल सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इससे तत्काल तनाव कम करने का मौका मिलेगा। दूसरे चरण में स्थायी शांति समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश होगी। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की बहाली और परमाणु गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। मध्यस्थों का मानना है कि पहले चरण में भरोसा बनाने के बाद ही स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
दो चरणों में समझौते की कोशिश, होर्मुज और यूरेनियम पर फंसा पेंच
मध्यस्थों द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुसार, दूसरे चरण में Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलने और ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर ठोस कदम उठाने पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम को या तो देश से बाहर भेजे या उसे कमजोर करने की प्रक्रिया अपनाए। इन दोनों मुद्दों को समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि ईरान ने संकेत दिया है कि वह केवल 45 दिनों के युद्धविराम के बदले अपने इन दोनों प्रमुख रणनीतिक विकल्पों को पूरी तरह छोड़ने को तैयार नहीं होगा। यही कारण है कि मध्यस्थ पहले चरण में आंशिक कदमों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे कि सीमित स्तर पर समुद्री मार्ग खोलना या यूरेनियम भंडार पर पारदर्शिता बढ़ाना।
मध्यस्थों ने ईरानी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब बातचीत के लिए समय बहुत कम बचा है। उन्हें बताया गया है कि अगले 48 घंटे समझौते के लिए निर्णायक हो सकते हैं। अगर इस दौरान सहमति नहीं बनती, तो क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ सकती है। गौरतलब है कि ईरान को पहले 10 दिनों की समयसीमा दी गई थी, जो सोमवार को समाप्त होने वाली थी। लेकिन ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर इसे 20 घंटे के लिए बढ़ा दिया। सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार आखिरी मौका माना जा रहा है ताकि दोनों पक्ष युद्ध के बजाय बातचीत का रास्ता चुन सकें।
अगर 45 दिन का युद्धविराम लागू हो जाता है, तो इससे वैश्विक बाजारों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, समुद्री व्यापार सुरक्षित होगा और क्षेत्रीय तनाव कम होगा। यही वजह है कि दुनिया भर की नजरें इस संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं।

