महेश बाबू और राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ की कहानी लीक, कॉस्मिक मिशन और दो भागों में रिलीज की चर्चा

साउथ सुपरस्टार महेश बाबू और निर्देशक राजमौली की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म को लेकर आए दिन नए अपडेट सामने आ रहे हैं, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ती जा रही है। हाल ही में फिल्म से महेश बाबू का पहला लुक सामने आया था, जिसे फैंस ने सोशल मीडिया पर हाथों-हाथ लिया। इस लुक में अभिनेता का अंदाज पहले से बिल्कुल अलग और दमदार दिखाई दिया, जिसके बाद से फिल्म को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं। अब ‘वाराणसी’ एक बार फिर चर्चा में है और इसकी वजह फिल्म की कथित कहानी का लीक होना बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म पर काम कर रही एक वीएफएक्स कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में प्रोजेक्ट का सिनॉप्सिस अपलोड कर दिया। हालांकि इसमें ज्यादा डिटेल्स साझा नहीं की गईं, लेकिन जो जानकारी सामने आई, उसने फैंस के बीच हलचल मचा दी। यह सिनॉप्सिस देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और फिल्म की कहानी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे।

वायरल हुए सिनॉप्सिस के अनुसार फिल्म की कहानी एक शिव भक्त के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समय की सीमाओं को पार करते हुए एक खतरनाक मिशन पर निकलता है। उसका लक्ष्य एक खोई हुई ब्रह्मांडीय शक्तिशाली वस्तु को ढूंढना है। इस यात्रा के दौरान वह सदियों से छिपे प्राचीन रहस्यों को जोड़ता है और धीरे-धीरे अपने मिशन की सच्चाई तक पहुंचता है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब उसे पता चलता है कि उसे इस रास्ते पर ले जाने वाली ताकत दरअसल एक चालाक मास्टरमाइंड है, जिसका उद्देश्य पूरी दुनिया पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करना है।

इस संभावित कहानी ने फैंस की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। फिल्म में आध्यात्म, पौराणिक तत्व, एडवेंचर और टाइम-ट्रैवल जैसे कई बड़े आयाम देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि दर्शक इसे राजामौली की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में से एक मान रहे हैं। 

वाराणसी’ अप्रैल 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के स्केल और कहानी की लंबाई को देखते हुए मेकर्स इसे दो भागों में रिलीज करने पर विचार कर रहे हैं। फिल्म की कहानी इतनी विस्तृत है कि तीन घंटे का रनटाइम भी कम पड़ सकता है। ऐसे में इसे दो हिस्सों में बांटने से कहानी को बेहतर तरीके से पेश किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि निर्देशक राजामौली और उनकी टीम बड़े कैनवास पर कहानी को विस्तार से दिखाना चाहते हैं। दो पार्ट में फिल्म रिलीज होने से उन्हें किरदारों को विकसित करने, पौराणिक संदर्भों को समझाने और विजुअल वर्ल्ड को स्थापित करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा। यह रणनीति पहले भी कई बड़ी फिल्मों में सफल रही है, इसलिए ‘वाराणसी’ को लेकर भी ऐसा ही प्रयोग किया जा सकता है। फिल्म की स्टार कास्ट भी इसे और खास बना रही है। महेश बाबू के साथ इस फिल्म में Priyanka Chopra और Prithviraj Sukumaran अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। तीनों कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को पैन-इंडिया अपील दे सकती है। माना जा रहा है कि हर किरदार का कहानी में मजबूत और रहस्यमय रोल होगा।

रिलीज डेट को लेकर भी चर्चा तेज है। खबरों के मुताबिक, ‘वाराणसी’ अप्रैल 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि मेकर्स की ओर से आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन फिल्म का प्रोडक्शन बड़े स्तर पर जारी बताया जा रहा है।

लगातार सामने आ रहे अपडेट्स से साफ है कि ‘वाराणसी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भव्य सिनेमाई अनुभव बनने जा रही है। कहानी लीक होने की खबर ने भले ही मेकर्स की मुश्किल बढ़ाई हो, लेकिन इससे दर्शकों की उत्सुकता कई गुना बढ़ गई है। अब फैंस को फिल्म के आधिकारिक टीज़र और ट्रेलर का इंतजार है, जो इस रहस्यमय कहानी की असली झलक पेश करेगा।

चारधाम यात्रा : हरिद्वार में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की तैयारियां अंतिम चरण में, अगले सप्ताह से शुरू होगी प्रक्रिया

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन और पर्यटन विभाग ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस यात्रा के सुचारू संचालन के लिए इस बार भी व्यवस्थाओं को पहले से अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन को लेकर हरिद्वार में व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। तीर्थ यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार भी हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में बड़े स्तर पर ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की जा रही है। यहां विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसके भीतर करीब 20 रजिस्ट्रेशन काउंटर स्थापित किए जाएंगे। यह व्यवस्था पिछले वर्ष की तर्ज पर बनाई जा रही है, लेकिन इस बार सुविधाओं को और बेहतर करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं। 

प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्था से बचाया जा सके। भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए महिलाओं और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए जा रहे हैं। इससे पंजीकरण प्रक्रिया तेज होगी और विशेष श्रेणी के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस बार काउंटरों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी, ताकि दस्तावेज जांच और पंजीकरण प्रक्रिया बिना देरी के पूरी हो सके। चारधाम यात्रा के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए रजिस्ट्रेशन केंद्र पर यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत बैठने के लिए पर्याप्त स्थान की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही साफ पीने के पानी की उपलब्धता, मोबाइल टॉयलेट और स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि यात्रियों को लंबा इंतजार भी करना पड़े तो उन्हें असुविधा न हो। इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने और पंजीकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती की जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी मौजूद रहेगा, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन केंद्र पर सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी पहले से मिल सके। जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सभी तैयारियां 10 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएंगी। 

17 अप्रैल से शुरू होगा ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन, सुरक्षित यात्रा पर प्रशासन का जोर

पर्यटन विभाग ने जानकारी दी है कि चारधाम यात्रा के लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 17 अप्रैल से शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर सीधे ऋषिकुल मैदान में अपना पंजीकरण करा सकेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ ऑफलाइन सुविधा भी उपलब्ध होने से उन यात्रियों को राहत मिलेगी, जो डिजिटल माध्यम का उपयोग नहीं कर पाते हैं। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था और पर्यटन दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन का पूरा फोकस यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक तरीके से संचालित करने पर है। अधिकारियों के अनुसार, ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को मजबूत बनाना इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे अचानक बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और यात्रियों को तय संख्या के अनुसार यात्रा की अनुमति दी जा सकेगी। 

इसके साथ ही स्वास्थ्य, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को भी ध्यान में रखते हुए अन्य विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए हर स्तर पर तैयारी की जा रही है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाकर यात्रियों को राहत देने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें। इस बार की व्यवस्थाओं को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि चारधाम यात्रा पहले से अधिक

पीएम सूर्य घर योजना : सरकार दे रही सब्सिडी, बैंक दे रहे सस्ता लोन, घर पर सोलर लगाकर करें बिजली बिल जीरो, जानिए इस योजना के बारे में 

हर महीने बढ़ते बिजली बिल से परेशान लोगों के लिए केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना एक बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ लोगों को सस्ती या मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना भी है। सरकार चाहती है कि आम नागरिक अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगाकर खुद बिजली पैदा करें और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करें। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब सोलर पैनल लगवाने के लिए आपको एकमुश्त बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं है। सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी के साथ-साथ कई बैंक भी आसान और सस्ते लोन की सुविधा दे रहे हैं। इससे मध्यम वर्ग और आम परिवार भी आसानी से सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक इस योजना के तहत सोलर पैनल के लिए किफायती ब्याज दर पर लोन उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो जाता है।

योजना के तहत 3 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम पर सरकार की ओर से भारी सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा बैंकों से मिलने वाले लोन की ब्याज दर भी कम रखी गई है, जिससे ईएमआई भी ज्यादा नहीं बनती। कई मामलों में यह ईएमआई उतनी ही होती है जितना पहले आपका बिजली बिल आता था। ऐसे में उपभोक्ता धीरे-धीरे लोन चुकाते हुए मुफ्त बिजली का लाभ भी उठा सकते हैं।

इस योजना का फायदा यह भी है कि सोलर पैनल लगने के बाद बिजली बिल में भारी कमी आ सकती है। अगर सिस्टम सही क्षमता का लगाया जाए और बिजली खपत संतुलित रहे तो कई घरों का बिजली बिल लगभग शून्य तक पहुंच सकता है। इसके अलावा अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उपभोक्ता क्रेडिट भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भविष्य के बिल में और राहत मिलती है।

सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी सिस्टम की क्षमता के आधार पर तय की गई है। एक किलोवाट के सोलर सिस्टम पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। वहीं दो किलोवाट सिस्टम पर 60 हजार रुपये तक की सहायता मिलती है। अगर कोई तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता का सिस्टम लगवाता है तो उसे अधिकतम 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है, जिससे पारदर्शिता भी बनी रहती है।

योजना के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक करीब 2 लाख रुपये तक का सोलर लोन दे रहे हैं। इस लोन की ब्याज दर करीब 5.75 प्रतिशत सालाना बताई जा रही है, जो सामान्य पर्सनल लोन या अन्य वित्तीय विकल्पों से काफी कम है। खास बात यह है कि इस राशि तक के लोन के लिए किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं होती। कई मामलों में आय प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी आसान रखी गई है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। लोन चुकाने के लिए लंबी अवधि भी दी जा रही है। आमतौर पर उपभोक्ताओं को 10 साल यानी 120 महीने तक का समय दिया जाता है। इससे ईएमआई कम हो जाती है और उपभोक्ता पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ता। इस तरह सोलर सिस्टम लगवाना अब एक निवेश की तरह भी माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में बिजली खर्च को लगभग खत्म कर सकता है।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ और कैसे करें आवेदन

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहले आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके नाम पर खुद का मकान होना जरूरी है। इसके अलावा घर की छत सोलर पैनल लगाने के लिए उपयुक्त होनी चाहिए, यानी पर्याप्त जगह और धूप उपलब्ध होनी चाहिए। जिन घरों में पहले से वैध बिजली कनेक्शन है, वही इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि आवेदक ने सोलर पैनल के लिए किसी अन्य सरकारी सब्सिडी का लाभ पहले से नहीं लिया हो। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजना का लाभ नए उपभोक्ताओं तक पहुंचे। आवेदन के बाद संबंधित एजेंसियां साइट का निरीक्षण करती हैं और उपयुक्त पाए जाने पर सोलर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है।

सोलर पैनल लगने के बाद सिस्टम को बिजली ग्रिड से जोड़ा जाता है, जिसे नेट मीटरिंग कहा जाता है। इसके जरिए घर में इस्तेमाल की गई बिजली और ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली का हिसाब रखा जाता है। अगर आपकी खपत कम है और उत्पादन ज्यादा है तो अतिरिक्त यूनिट भविष्य के बिल में समायोजित हो जाती हैं। यही वजह है कि कई उपभोक्ताओं का बिजली बिल लगभग शून्य तक पहुंच जाता है।

यह योजना लंबे समय में न सिर्फ उपभोक्ताओं को राहत देगी बल्कि देश में स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा देगी। इससे कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों पर लोड कम होने से सप्लाई सिस्टम भी बेहतर हो सकता है।

अगर आप भी हर महीने आने वाले भारी बिजली बिल से परेशान हैं, तो पीएम सूर्य घर योजना आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। सब्सिडी, सस्ते लोन और लंबी अवधि की ईएमआई जैसी सुविधाएं इसे आम लोगों के लिए बेहद आकर्षक बनाती हैं। सही योजना और उपयुक्त क्षमता का सोलर सिस्टम चुनकर आप आने वाले कई सालों तक लगभग मुफ्त बिजली का लाभ उठा सकते हैं और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

ईरान में फंसे भारतीयों के लिए नई एडवाइजरी जारी : जल्द देश छोड़ने की सलाह, दूतावास ने कहा- बिना समन्वय सीमा तक न जाएं

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए बुधवार को नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद भारतीयों से अपील की है कि वे स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित रास्तों से देश छोड़ने की तैयारी करें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोशिश बिना दूतावास से सलाह-मशविरा और समन्वय के नहीं की जाए। यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी हुई है, जब अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ईरान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी पोस्ट में कहा कि सभी भारतीय नागरिक सतर्क रहें और दूतावास द्वारा सुझाए गए मार्गों का ही इस्तेमाल करें। पोस्ट में कहा गया, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास के साथ पहले से सलाह-मशविरा और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश न की जाए।” 

दूतावास ने यह भी कहा कि स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नागरिक लगातार आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद के लिए इमरजेंसी संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। इनमें +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359 शामिल हैं। इसके अलावा cons.tehran@mea.gov.in पर ईमेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। दूतावास ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अपने लोकेशन की जानकारी साझा करते रहें ताकि जरूरत पड़ने पर निकासी की व्यवस्था की जा सके। इससे पहले मंगलवार शाम को भी भारतीय दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें ईरान में मौजूद भारतीयों को अगले 48 घंटे तक जहां हैं, वहीं रहने की सलाह दी गई थी। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और संभावित हमलों की आशंका को देखते हुए लोगों को बाहर निकलने से बचने को कहा गया था। 

हालांकि, अब संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद दूतावास ने नई सलाह जारी करते हुए नियंत्रित तरीके से देश छोड़ने का विकल्प खुला रखा है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी समाप्त करने की समयसीमा का पालन नहीं करता, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिकी समयानुसार रात 8 बजे की डेडलाइन दी गई थी, जो भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे थी। इस चेतावनी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी थी।

संघर्ष के बीच कितने भारतीय और क्या है ताजा स्थिति

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद जब संघर्ष शुरू हुआ, उस समय ईरान में छात्रों समेत करीब 9,000 भारतीय मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या मेडिकल और तकनीकी शिक्षा ले रहे छात्रों की बताई जा रही है। इसके अलावा कुछ कारोबारी, पेशेवर और धार्मिक यात्राओं पर गए लोग भी शामिल हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने चरणबद्ध तरीके से अपने नागरिकों की वापसी शुरू की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक लगभग 1,800 भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। इनमें से कई को पड़ोसी देशों के रास्ते निकाला गया, जबकि कुछ को विशेष उड़ानों के जरिए वापस लाया गया। हालांकि बड़ी संख्या में भारतीय अभी भी ईरान के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं। इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के संपर्क में है।

इसी बीच अमेरिका और ईरान ने मंगलवार को दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई। यह समझौता अमेरिकी समयसीमा खत्म होने से करीब एक घंटे पहले हुआ। संघर्ष-विराम के बाद भी स्थिति को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में सैन्य तैयारियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यही वजह है कि भारत ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने और जल्द सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ने की सलाह दी है।

भारतीय दूतावास ने यह भी कहा है कि नागरिक अफवाहों से दूर रहें और किसी भी तरह की यात्रा से पहले आधिकारिक पुष्टि करें। साथ ही, पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज हमेशा तैयार रखें, ताकि निकासी की स्थिति में देरी न हो। दूतावास ने छात्रों को विशेष रूप से सलाह दी है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन और दूतावास दोनों के संपर्क में बने रहें।

सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त निकासी उड़ानों की भी व्यवस्था की जा सकती है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने, संपर्क में बने रहने और सुझाए गए मार्गों के जरिए जल्द देश छोड़ने की तैयारी करने को कहा है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर : उत्तर भारत में झमाझम बारिश जारी, पहाड़ों पर बर्फबारी, खराब मौसम से जनजीवन अस्त-व्यस्त

देश में एक साथ सक्रिय हुए दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण उत्तर भारत का मौसम बदल गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजधानी दिल्ली, उत्तराखंड पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और मध्य प्रदेश झमाझम बारिश जारी है। दक्षिण के राज्यों में भी मौसम बिगड़ा हुआ है। पहाड़ी राज्यों में जहां बर्फबारी हो रही है, वहीं मैदानी इलाकों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। उत्तराखंड के चारों धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में लगातार बर्फबारी दर्ज की जा रही है। ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फ की मोटी परत जमने से ठंड एक बार फिर बढ़ गई है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी है। उत्तराखंड के सभी जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। देहरादून में तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। दो दिन पहले जहां अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास था, वहीं अब यह घटकर 24 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत और ऊधम सिंह नगर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 

पहाड़ी मार्गों पर फिसलन बढ़ने और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं हिमाचल प्रदेश में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। नारकंडा, कुफरी और लाहौल-स्पीति में सुबह बर्फबारी हुई, जबकि इससे पहले रातभर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने राज्य के पांच जिलों में ओलावृष्टि और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने अचानक करवट ली है। लखनऊ, बाराबंकी, जौनपुर समेत कई जिलों में सुबह तेज बारिश हुई। मंगलवार रात लखनऊ में तेज आंधी के दौरान एक पेड़ कार पर गिर गया, जिससे नुकसान हुआ। मौसम विभाग ने राज्य के 47 जिलों में बारिश और 9 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

कई राज्यों में अलर्ट, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की आशंका

राजस्थान में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर साफ दिखाई दे रहा है। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर समेत कई जिलों में तूफानी बारिश के साथ ओले गिरे हैं। कुछ इलाकों में एक इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है। भरतपुर जिले में बिजली गिरने से एक मकान में रखे सिलेंडर में विस्फोट हो गया, जिससे स्थानीय स्तर पर नुकसान हुआ। लगातार बारिश के कारण तापमान में करीब 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है।उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर, गोंडा, जौनपुर, अलीगढ़ समेत करीब 20 जिलों में तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश जारी है। मौसम विभाग ने 9 जिलों में ओले गिरने की चेतावनी दी है। पिछले सप्ताह आंधी और बिजली गिरने की घटनाओं में 15 लोगों की मौत भी हो चुकी है, जिससे प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मध्य प्रदेश में तीन साइक्लोनिक सिस्टम सक्रिय होने के कारण मौसम अस्थिर बना हुआ है। भोपाल, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना और रीवा समेत 18 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। कई इलाकों में बादल छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट आई है।

उधर, जम्मू-कश्मीर में भी खराब मौसम का असर देखने को मिला है। रामबन इलाके में भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद हो गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने सड़क साफ करने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक उत्तर भारत में मौसम खराब बना रह सकता है। 8 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना है। इस दौरान 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश के साथ ओले गिरने की आशंका जताई गई है।

9 अप्रैल को पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बर्फबारी जारी रह सकती है। 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों में असम और मेघालय के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मध्य और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। लगातार बदलते मौसम के बीच प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने को कहा है।

भारत समेत दुनिया के लिए राहत : 40 दिन बाद रुकी जंग, अमेरिका-ईरान में 2 हफ्ते का युद्धविराम, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, बाजारों में लौटी तेजी

करीब 40 दिन से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण जंग के बाद दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों देशों ने दो हफ्तों के अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख की अपील के बाद लिया गया। इस बीच चीन की आखिरी समय की कूटनीतिक पहल ने भी समझौते का रास्ता साफ करने में अहम भूमिका निभाई। सीजफायर से पहले हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो अमेरिका ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। इस चेतावनी के बाद बातचीत तेज हुई और पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते के युद्धविराम का प्रस्ताव सामने आया, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया। समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल हमले रोकेंगे, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई बंद करेगा। 

इस अवधि में होर्मुज स्ट्रेट से तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। ईरानी सेना ‘कंट्रोल्ड ट्रांजिट’ व्यवस्था के तहत शिपिंग को सुरक्षा देगी। जंग के दौरान इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई थी। अब मार्ग खुलने से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। समझौते के अनुसार 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होगी। ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा है, जिस पर आगे चर्चा की जाएगी। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और इसे ईरान की शर्तों पर हुआ समझौता बताया है।

दोनों पक्ष इस युद्धविराम को आगे स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम मान रहे हैं। सीजफायर की खबर का असर तुरंत वैश्विक बाजारों में देखने को मिला। एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 4 प्रतिशत से अधिक चढ़ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया। निवेशकों का भरोसा लौटने से बाजारों ने राहत की सांस ली। मुद्रा बाजार में भी बदलाव दिखा और अमेरिकी डॉलर जापानी येन तथा दक्षिण कोरियाई वॉन के मुकाबले कमजोर हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक तेल की कीमतों में गिरावट और युद्धविराम की उम्मीद ने निवेशकों का जोखिम कम किया है।

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल में गिरावट, इजराइल ने लेबनान पर जारी रखी सख्ती

सीजफायर के तहत अगले दो हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस दौरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना की निगरानी में होगी। ईरान के प्रस्ताव के मुताबिक इस मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज से करीब 20 लाख डॉलर का शुल्क लिया जाएगा, जिसे ओमान के साथ साझा किया जाएगा। ट्रम्प पहले इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने की शर्त पर अड़े थे, जिसके बाद यह समझौता संभव हो सका।

होर्मुज स्ट्रेट खुलने के फैसले का असर तेल बाजार पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में 15 से 16 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। 

ऊर्जा बाजार में यह गिरावट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और सीजफायर की अवधि खत्म होने के बाद हालात फिर बदल सकते हैं। इस बीच इजराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि इजराइल ईरान के खिलाफ दो हफ्ते तक हमले रोकने पर सहमत है, लेकिन लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रह सकती है। 

इजराइल ने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु, मिसाइल और क्षेत्रीय गतिविधियों के मामले में संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इजराइल ने शर्त रखी है कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खोलना होगा और अमेरिका, इजराइल व अन्य देशों पर सभी हमले बंद करने होंगे। बयान में यह भी कहा गया कि फिलहाल ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन भविष्य में खतरे की आशंका को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। ऐसे में दो हफ्ते का यह सीजफायर भले ही राहत लेकर आया हो, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए आगे की बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है।

UP cabinet meeting लोक भवन में योगी कैबिनेट के 22 फैसले : शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाया, जनहित के कई प्रस्तावों को मंजूरी 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में राज्य के विकास, सामाजिक सरोकार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इस बैठक को नीतिगत दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक के बाद मंत्रियों ने मीडिया से बातचीत में फैसलों की जानकारी दी और विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि कैबिनेट में 20 से अधिक प्रस्तावों पर विचार किया गया और सभी को मंजूरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित भारतीय संविधान के निर्माताओं की प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेश भर में स्थापित प्रतिमाओं के ऊपर छत बनाई जाएगी, चबूतरे विकसित किए जाएंगे और जहां आवश्यक होगा वहां नवीनीकरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान 14 अप्रैल से शुरू किया जाएगा, ताकि संविधान निर्माता को सम्मान देने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों का भी बेहतर विकास हो सके।

बैठक के बाद सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मुद्दों पर भी बयान सामने आए। ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा की सरकार रही, तब कानून-व्यवस्था बिगड़ी और दंगे हुए। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता उस घटना को आज भी नहीं भूली है। उनके अनुसार सपा शासन में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर रही, जबकि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।

महिला आरक्षण को लेकर भी उपमुख्यमंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक उनके अधिकारों से वंचित रखा गया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि आधी आबादी को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार का कदम ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार भी कई योजनाएं चला रही है और आगे भी इस दिशा में काम जारी रहेगा।

इसी दौरान मदरसा कानून को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मदरसा बोर्ड से संबंधित कोई नया विधेयक नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस कानून को लेकर चर्चा हो रही है, वह 2016 में सपा सरकार के दौरान पारित किया गया था और बाद में कैबिनेट से उसे मंजूरी भी मिल चुकी थी। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।

शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह हुआ

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश के करीब दो लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और कार्यरत कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।

मंत्री जयवीर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ‘जंगलराज’ को नहीं भूली है और सपा शासनकाल के दौरान हुए अत्याचार लोगों की स्मृति में अभी भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी और अपराधियों के हौसले बुलंद थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में सुरक्षा और विकास का माहौल बनाया है, जिसे जनता समर्थन दे रही है।

जनहित के मुद्दों पर फैसलों का दावा

मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि कैबिनेट ने जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य विकास को गति देना और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करना है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बिना तथ्यों के भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े फैसलों पर विशेष ध्यान दिया है। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों को सरकार ने विकास और सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम बताया है। प्रतिमाओं के संरक्षण अभियान से लेकर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी तक कई निर्णय सीधे तौर पर समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित करेंगे। साथ ही सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अपनी नीतियों को जनहित में बताया है। आने वाले दिनों में इन फैसलों के क्रियान्वयन पर भी सरकार की नजर रहेगी, ताकि घोषित योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सके।

निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट का अनुमान : इस साल कमजोर रहेगा मानसून, खेती और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

देश में इस साल मानसून को लेकर पहली बड़ी भविष्यवाणी सामने आ गई है और शुरुआती संकेत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपना पहला अनुमान जारी करते हुए कहा है कि इस बार देश में कुल बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। एजेंसी के मुताबिक जून से सितंबर तक चलने वाले पूरे मानसून सीजन में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के करीब 94 प्रतिशत रह सकती है, जो सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम है। स्काइमेट ने अपने पूर्वानुमान में एल नीनो के संभावित प्रभाव को भी कमजोर मानसून की बड़ी वजह बताया है। एजेंसी के अनुसार चार महीनों के दौरान देशभर में औसतन लगभग 817 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है, हालांकि इसमें पांच प्रतिशत तक ऊपर या नीचे रहने की गुंजाइश भी जताई गई है। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस साल सूखे की आशंका करीब 30 प्रतिशत तक है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत संभावना सामान्य से कम बारिश की बनी हुई है। अब सबकी नजर भारत मौसम विभाग के आधिकारिक अनुमान पर है, जो इस महीने के आखिर तक जारी किया जा सकता है। मासिक पूर्वानुमान की बात करें तो स्काइमेट ने संकेत दिए हैं कि मानसून का पैटर्न असमान रह सकता है। जून में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद जताई गई है। इस महीने में एलपीए का करीब 101 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है। जून के सामान्य रहने की संभावना 40 प्रतिशत बताई गई है, जबकि 40 प्रतिशत संभावना सामान्य से कम रहने की भी है। जून का एलपीए 165.3 मिलीमीटर है, जिससे शुरुआती राहत मिल सकती है।

जुलाई में स्थिति थोड़ी कमजोर रहने की आशंका जताई गई है। स्काइमेट के मुताबिक इस महीने बारिश एलपीए के करीब 95 प्रतिशत तक रह सकती है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आती है। जुलाई के लिए सामान्य और कम बारिश दोनों की संभावना 40-40 प्रतिशत बताई गई है। यह महीना खरीफ फसलों की बुवाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में कमजोर बारिश चिंता बढ़ा सकती है। जुलाई का एलपीए 280.5 मिलीमीटर है।

अगस्त में भी राहत के संकेत नहीं हैं। एजेंसी के अनुसार इस महीने बारिश एलपीए के करीब 92 प्रतिशत तक रह सकती है।

अगस्त में कम बारिश की संभावना करीब 60 प्रतिशत बताई गई है। यह महीना भी खेती के लिए अहम होता है और इस दौरान बारिश में कमी फसलों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। अगस्त का एलपीए 254.9 मिलीमीटर है। सितंबर में भी मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। स्काइमेट के मुताबिक इस महीने औसत बारिश एलपीए के 89 प्रतिशत तक रह सकती है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है। सितंबर में कम बारिश की संभावना सबसे ज्यादा 79 प्रतिशत बताई गई है। सितंबर का एलपीए 167.9 मिलीमीटर है। इस तरह जून को छोड़कर बाकी तीन महीनों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई गई है। 

जुलाई और अगस्त महीने खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिए सबसे अहम 

कमजोर मानसून का असर खेती पर पड़ सकता है। जुलाई और अगस्त महीने खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिए सबसे अहम होते हैं। इन महीनों में बारिश कम रहने पर धान, दालें और तिलहन जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। खासकर मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कुल बारिश ही नहीं, बल्कि उसका समय और वितरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि मानसून कम होने के बावजूद समय पर और संतुलित तरीके से बारिश होती है तो नुकसान सीमित रह सकता है। लेकिन लंबे ब्रेक या असमान बारिश से जलाशयों, भूजल स्तर और कृषि उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर ग्रामीण मांग और महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है।

क्षेत्रीय पूर्वानुमान में स्काइमेट ने बताया है कि जून में इंडो-गंगेटिक मैदान और पश्चिमी घाट के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। जुलाई में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। अगस्त में उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में कम बारिश की आशंका जताई गई है। सितंबर में दक्षिण और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर बाकी अधिकांश क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

कुल मिलाकर स्काइमेट के शुरुआती अनुमान से संकेत मिलते हैं कि 2026 का मानसून संतुलित नहीं रह सकता। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो इसका असर खेती, जल संसाधनों और देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में मौसम विभाग के आधिकारिक अनुमान और मानसून की प्रगति पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

सीए फाइनल परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव : अब साल में सिर्फ दो बार होगी परीक्षा, मई 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था

चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) ने CA फाइनल परीक्षा के आयोजन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस निर्णय के तहत अब चार्टर्ड अकाउंटेंट फाइनल परीक्षाएं वर्ष में तीन बार के बजाय केवल दो बार आयोजित की जाएंगी। यह बदलाव मई 2026 परीक्षा सत्र से प्रभावी होगा। संस्थान का मानना है कि इस कदम से परीक्षा प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित होगी और छात्रों को तैयारी के लिए बेहतर समय मिल सकेगा। अब तक CA फाइनल परीक्षाएं जनवरी, मई और सितंबर महीने में आयोजित होती थीं। लेकिन नए फैसले के बाद मई 2026 से परीक्षाएं केवल मई और नवंबर माह में ही आयोजित की जाएंगी। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव हितधारकों से मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर किया गया है। लंबे समय से छात्र और शिक्षाविद परीक्षा के बीच कम अंतराल होने को लेकर चिंता जता रहे थे, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

संस्थान का कहना है कि बार-बार परीक्षा आयोजित होने से छात्रों पर लगातार तैयारी का दबाव बना रहता था। कई अभ्यर्थियों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल पाता था, जिससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ता था। इसके अलावा परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता था। ऐसे में वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित करने से न केवल छात्रों को तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा बल्कि संस्थान भी परीक्षा संचालन को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा कर सकेगा।

संयुक्त सचिव (परीक्षा) आनंद कुमार चतुर्वेदी द्वारा जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया है कि यह नई व्यवस्था मई 2026 से लागू होगी और भविष्य में भी इसी पैटर्न का पालन किया जाएगा। संस्थान ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक संतुलित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी बेहतर होगी। इस बदलाव से छात्रों को अपनी तैयारी की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। पहले कम अंतराल के कारण कई छात्र जल्दबाजी में परीक्षा देने के लिए मजबूर हो जाते थे, जबकि अब उन्हें विषयों की गहराई से तैयारी करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे परीक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है और सफल अभ्यर्थियों की दक्षता भी बेहतर होगी।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू 

इसी बीच संस्थान ने नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू कर दिया है। यह कार्यक्रम नए योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। भाग लेने वाली कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए समय-सीमा आधिकारिक पोर्टल पर जारी कर दी गई है। संस्थान ने सभी केंद्रों पर एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी शुरू किया है।

इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्लेसमेंट प्रक्रिया, करियर विकल्प, नियोक्ताओं की अपेक्षाएं, साक्षात्कार की तैयारी और व्यावहारिक मार्गदर्शन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप मार्गदर्शन देना है। संस्थान का मानना है कि इससे उम्मीदवारों की सफलता दर बढ़ेगी और उन्हें बेहतर कंपनियों में अवसर मिल सकेंगे।

इस बार कैंपस प्लेसमेंट में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित कंपनियों ने भागीदारी की है। भर्ती गतिविधियां देश के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और जयपुर में आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा लगभग 20 छोटे केंद्रों पर भी प्लेसमेंट प्रक्रिया संचालित की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।

संस्थान के अनुसार, साक्षात्कार 6 अप्रैल से 17 अप्रैल तक चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जा रहे हैं। अलग-अलग शहरों में अलग तिथियों पर इंटरव्यू होंगे, जिससे उम्मीदवार अपनी सुविधा के अनुसार भाग ले सकें। इस बार कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अग्रणी भारतीय कॉरपोरेट समूहों ने भर्ती में रुचि दिखाई है, जिससे प्लेसमेंट प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उत्साह देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, CA फाइनल परीक्षा पैटर्न में बदलाव और साथ ही कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम की शुरुआत को छात्रों के लिए दोहरी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर परीक्षा के बीच पर्याप्त अंतराल से तैयारी बेहतर होगी, वहीं दूसरी ओर प्लेसमेंट कार्यक्रम के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को करियर की नई दिशा मिलने की उम्मीद है। संस्थान का मानना है कि इन दोनों कदमों से चार्टर्ड अकाउंटेंसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य को मजबूती मिलेगी।

कनाडा के नए इमिग्रेशन नियम लागू, पासपोर्ट-नागरिकता शुल्क बढ़ा, सुपर वीजा में राहत, प्रांतों को मिले ज्यादा अधिकार 

कनाडा जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकार ने इमिग्रेशन से जुड़े कई नियमों में संशोधन करते हुए पासपोर्ट शुल्क बढ़ा दिया है, नागरिकता फीस में बदलाव किया है और सुपर वीजा कार्यक्रम को आसान बना दिया है। इन नए नियमों का असर वहां जाने वाले नागरिकों, स्थायी निवास के इच्छुक आवेदकों और परिवार के सदस्यों को बुलाने की योजना बना रहे लोगों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और आवेदनों के निपटारे में तेजी लाना है। नए प्रावधानों के तहत 10 साल की वैधता वाले वयस्क पासपोर्ट की कीमत बढ़ाकर 163.50 कैनेडियन डॉलर कर दी गई है, जो पहले 160 डॉलर थी। वहीं पांच साल के वयस्क पासपोर्ट की कीमत 122.50 कैनेडियन डॉलर तय की गई है। शुल्क में यह बढ़ोतरी मामूली जरूर है, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदकों को देखते हुए इसका असर व्यापक होगा। सरकार ने इस बढ़ोतरी के साथ एक नई सुविधा भी जोड़ी है, जिसके तहत पासपोर्ट आवेदन 30 दिनों के भीतर निपटाने की गारंटी दी गई है।

अगर तय समय के भीतर आवेदन का निपटारा नहीं होता है, तो आवेदक को जमा की गई पूरी फीस स्वतः वापस कर दी जाएगी। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं आवेदनों पर लागू होगी जिनमें सभी जरूरी दस्तावेज पूरे और सही तरीके से जमा किए गए हों। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रक्रिया में देरी कम होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

नागरिकता से जुड़ी फीस में भी बदलाव किया गया है। नागरिकता के अधिकार के लिए अब 123 कैनेडियन डॉलर की फीस तय की गई है। यह बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन इसे व्यापक प्रशासनिक सुधारों का हिस्सा बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकता प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए संसाधनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

सरकार ने परिवार आधारित यात्रा को आसान बनाने के उद्देश्य से सुपर वीजा कार्यक्रम में भी ढील दी है। नए नियमों के अनुसार, प्रायोजक अब पिछले दो कर वर्षों में से किसी एक वर्ष में आय की शर्त पूरी करके पात्र माने जाएंगे। इसके अलावा माता-पिता या दादा-दादी की आय को भी कुल आय में जोड़कर पात्रता पूरी की जा सकेगी। इससे परिवारों के लिए अपने बुजुर्ग सदस्यों को बुलाना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा। सुपर वीजा के तहत माता-पिता और दादा-दादी हर बार यात्रा पर कनाडा में पांच साल तक रह सकते हैं। यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए राहत मानी जा रही है जो लंबे समय तक अपने परिजनों के साथ रहना चाहते हैं। सरकार का कहना है कि इससे परिवारों का पुनर्मिलन आसान होगा और अस्थायी यात्राओं का दबाव भी कम होगा।

प्रांतों को अधिक अधिकार, विदेशी कर्मचारियों के नियम भी बदले

नए बदलावों के तहत प्रांतों और क्षेत्रों को इमिग्रेशन से जुड़े फैसलों में अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब प्रांतीय प्रशासन यह तय कर सकेंगे कि आवेदक वास्तव में स्थानीय स्तर पर बसने का इरादा रखते हैं या नहीं और क्या वे आर्थिक रूप से खुद को स्थापित कर सकते हैं। पहले इस तरह के आकलन में संघीय अधिकारियों की बड़ी भूमिका होती थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी काफी हद तक प्रांतों को सौंप दी गई है। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे क्योंकि प्रांत अपने श्रम बाजार और आर्थिक जरूरतों को बेहतर समझते हैं। इससे रोजगार आधारित इमिग्रेशन में भी संतुलन आने की उम्मीद जताई जा रही है।

आर्थिक आधार पर आने वाले प्रवासियों के लिए भी एक अहम बदलाव किया गया है। अब स्थायी निवास मिलने के बाद छह साल तक संघीय सहायता से मिलने वाली बसावट सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा। हालांकि अप्रैल 2027 से इस समय सीमा को घटाकर पांच साल कर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि शुरुआती वर्षों में सहायता देकर प्रवासियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कामगारों की कमी को देखते हुए विदेशी कर्मचारि