भारत की प्राइवेट स्पेस रेस का सबसे बड़ा इम्तिहान

स्काई रूट एयरोस्पेस ने आज घोषणा की कि उसके विक्रम-1 लॉन्च वाहन की पहली परीक्षण उड़ान के लिए लॉन्च विंडो खोल दी गई है। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिट श्रेणी का रॉकेट है। टेस्ट फ्लाइट-1 का लक्ष्य 12 जुलाई से पहले नहीं रखा गया है और यह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार) में असेंबली और परीक्षण कार्यों की पूर्णता के साथ-साथ मौसम, सुरक्षा और रेंज क्लीयरेंस पर निर्भर करेगा। लॉन्च विंडो 4 अगस्त तक खुली रहेगी। स्काई रूट के विक्रम-1 के सभी चरणों का सफलतापूर्वक एकीकरण कर उन्हें लॉन्च पैड पर स्थापित कर दिया गया है। यह मिशन प्रणोदन, स्टेज पृथक्करण, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण और समग्र वाहन प्रदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करेगा, जिससे स्काई रूट को पूर्ण रूप से व्यावसायिक लॉन्च कंपनी बनने में मदद मिलेगी।

पवन कुमार चंदाना, सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्काई रूट एयरोस्पेस ने कहा,“मिशन आगमन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विक्रम-1 के प्रत्येक सिस्टम के वास्तविक उड़ान प्रदर्शन से डेटा प्राप्त करना है। हम जानना चाहते हैं कि रॉकेट उड़ान भरने से लेकर आरोहण के हर चरण में कैसा प्रदर्शन करता है। इस प्रकार के डेटा को पूरी तरह से जमीनी परीक्षणों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। इससे हमें अपने डिजाइनों को सत्यापित करने और भविष्य के रॉकेट विकास में मदद मिलेगी। जिस क्षण विक्रम-1 उड़ान भरेगा, भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग एक ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएगा, जिसे उसने पहले कभी नहीं छुआ है।”

नागा भरत डाका, सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी, स्काई रूट एयरोस्पेस ने कहा,“भारत में लॉन्च वाहन बनाने के सपने से लेकर अब ऑर्बिट उड़ान का प्रयास करने तक की यात्रा बेहद असाधारण रही है। वर्ष 2022 में विक्रम-एस के माध्यम से हमने अपनी तकनीकी क्षमताओं की नींव को स्थापित किया था। अब विक्रम-1 के साथ हम भारत में निर्मित, भारत और दुनिया के लिए विश्वसनीय तथा उच्च आवृत्ति वाले लॉन्च कार्यक्रम की दिशा में अपना सबसे बड़ा कदम उठा रहे हैं।”

विक्रम-1 सात मंजिला ऊंचाई वाला बहु-चरणीय ऑर्बिटल लॉन्च वाहन है, जिसे पूर्ण कार्बन-कंपोजिट संरचना के साथ विकसित किया गया है। इसमें कंपनी द्वारा विकसित प्रणोदन प्रणालियाँ, थ्री-डी प्रिंटेड इंजन और उच्च क्षमता वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट – एलइओ) में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। उनकी पहली उड़ान का लक्ष्य 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60 डिग्री की कक्षीय झुकाव वाली कक्षा प्राप्त करना है। इस उड़ान के लिए तैयार रॉकेट का अनावरण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में स्काई रूट के इन्फिनिटी परिसर के उद्घाटन के दौरान किया था।

आर्थिक दृष्टि से भी यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्तमान लगभग 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। स्वदेशी लॉन्च क्षमता इस वृद्धि का प्रमुख आधार बनेगी और भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगी।

कोमल जैन ने बदली गोल्ड-लुक ज्वेलरी की दुनिया

झारखंड के हज़ारीबाग से निकलकर रानी कोमल जैन ने प्रीमियम गोल्ड-लुक ज्वेलरी ब्रांड स्मार्स ज्वेलरी की स्थापना कर नई मिसाल कायम की है। ज्वेलरी डिज़ाइन और जीआईए मुंबई से जेमोलॉजी की पढ़ाई के बाद उन्होंने महसूस किया कि असली सोने के गहने महंगे होने और सुरक्षा कारणों से अक्सर बैंक लॉकर तक सीमित रह जाते हैं। इसी सोच के साथ दिसंबर 2022 में उन्होंने स्मार्स की शुरुआत की, जो प्रीमियम 22 कैरेट गोल्ड माइक्रोन प्लेटिंग वाली ब्रास ज्वेलरी किफायती कीमत पर उपलब्ध कराती है। मात्र साढ़े तीन वर्षों में कंपनी ने 100 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की है और देशभर की 3 लाख से ज्यादा महिलाओं का भरोसा जीता है। रानी का लक्ष्य हर महिला को हर दिन आत्मविश्वास और खूबसूरती का एहसास कराना है।

एमएसएमई के तहत कार्यशाला का आयोजन, उद्यमियों और बैंकर्स के बीच हुआ सीधा संवाद

कांकेर/ जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र कांकेर द्वारा आज रैम्प योजना के तहत उद्योग एवं बैंकर्स कनेक्ट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियो, महिला उद्यमियों के प्रतिनिधि, पीएमएफएमई व् पीएमईजीपी योजना और स्टार्टअप्स ने भाग लिया। जिले के प्रमुख बैंकों जैसे केनरा बैंक बैंक, बैंक ऑफ इंडिया एवं सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर उपस्थित उद्यमियों को विभिन्न वित्तीय योजनाओं, ऋण सुविधाओं, मुद्रा योजना और सीजीटीएमएसई के लाभों की जानकारी दी। प्रतिभागियों को बैंक अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला। उपस्थित उद्यमियों ने अपने व्यापार से जुड़ी समस्याओं को साझा किया, जिन पर बैंक अधिकारियों ने समाधान और मार्गदर्शन प्रदान किया। मौके पर ही कई ऋण प्रस्तावों पर कार्यवाही प्रारंभ की गई।
जिला व्यपार एवं उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक टन्केश्वर देवांगन ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम एमएसएमई सेक्टर को सशक्त करने की दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं। भविष्य में ऐसे और भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, औद्योगिक संगठन एवं स्थानीय उद्यमी उपस्थित रहे।

सीड ड्रिल मशीन के द्वारा धान की सीधी बुवाई का किया गया प्रदर्शन

कांकेर/खेत बचाओ अभियान के तहत खेती में नए तकनीक एवं कृषि में मशीनीकरण को बढ़ावा देने और वर्तमान में सूखा की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से धान की सीधी बुवाई का प्रदर्शन विकासखण्ड नरहरपुर के ग्राम बाबूसाल्हेटोला में किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र से कृषि वैज्ञानिक डॉ.नरेंद्र हरिदास तायडे ने बताया कि इस विधि से नर्सरी तैयार करने और पौधा रोपाई की आवश्यकता नहीं होती है। बीजों को सीधे खेतों में बोया जाता है यह विधि श्रम और पानी दोनों की बचत करती है, बुवाई का कार्य कम समय में पूरा हो जाता है। इस मशीन की सहायता से एक घण्टे में एक से सवा एकड़ तक की बुवाई हो जाती है। श्रमिकों की कमी और जल संकट की स्थिति में यह तकनीकी किसानों के लिए लाभ सिद्ध हो रही है। इसमें खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। सीडड्रिल मशीन प्रदर्शन के दौरान ग्राम बाबू साल्हेटोला के सरपंच, प्रदान संस्था के अधिकारीगण एवं ग्राम के कृषकगण उपस्थित थे।

चारधाम एवं हेमकुंट साहिब यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता, अफवाहों से बचें: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम एवं हेमकुंट साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की कि वे देवभूमि उत्तराखण्ड के शांत वातावरण में अपनी यात्रा का पूर्ण आनंद लें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू में सामने आई घटनाओं के संबंध में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार, प्रशासन एवं पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई है तथा सभी तथ्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा के साथ-साथ हेमकुंट साहिब यात्रा भी सुचारु रूप से संचालित हो रही है। चारधाम यात्रा में अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, हेमकुंट साहिब यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 25 हजार अधिक दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सिख गुरुओं द्वारा स्थापित तीन प्रमुख पवित्र स्थल—हेमकुंट साहिब, रीठा साहिब और नानकमत्ता साहिब—स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सभी का सम्मान करना देवभूमि उत्तराखण्ड की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के अनुरूप यहां आने वाले सभी लोगों का स्वागत एवं सत्कार किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों ने मिल-जुलकर देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक और भड़काऊ खबरें फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सभी धार्मिक स्थल आस्था, श्रद्धा और प्रेरणा के केंद्र हैं, जहां से समाज को सकारात्मक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट रुख है कि देवभूमि उत्तराखण्ड में ऐसा कोई कृत्य स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचे या किसी धर्म एवं आस्था को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि संवाद, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है।

इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नरेन्द्रजीत सिंह बिन्द्रा, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव गृह श्री शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ, सचिव श्री विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा श्री अभिनव कुमार, आईजी श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी तथा अपर सचिव श्रीमती तृप्ति भट्ट उपस्थित थे।

शिक्षक सर्वोपरि’ के मंत्र के साथ शिक्षा सुधारों को नई गति दे रही योगी सरकार, एसीएस ने रखा व्यापक रोडमैप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। बुनियादी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए सरकार शिक्षक सशक्तीकरण, छात्र नामांकन, अधिगम सुधार, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण पर एक साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से संवाद करते हुए शिक्षा विभाग की आगामी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को साझा किया।

उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण बार-बार अवकाश बढ़ाने की स्थिति से बचने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि विद्यालय खुलने पर बच्चों का आत्मीय स्वागत किया जाए तथा गर्मी को देखते हुए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए।

संवाद के दौरान पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन का केंद्र कक्षा कक्ष है और शिक्षक उसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर बनाई गई योजनाओं की सफलता अंततः शिक्षक की प्रतिबद्धता और कक्षा में उसके कार्य से तय होती है। इसलिए शिक्षा सुधारों में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है।

उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान और नामांकन पर विशेष फोकस रहेगा। आशा कार्यकर्ताओं के जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की सूचनाओं की सहायता से ऐसे बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। साथ ही कक्षा 5 से कक्षा 6 में विद्यार्थियों के निर्बाध प्रवेश को सुनिश्चित कर ड्रॉपआउट दर कम करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा। नियमित उपस्थिति और सीखने में पीछे रह गए बच्चों के लिए कैच-अप शिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि निपुण भारत मिशन का दायरा अब कक्षा 5 तक विस्तारित किया जा रहा है। भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। आगामी 6 जुलाई को आयोजित होने वाली निपुण संकल्प कार्यशाला में अकादमिक और प्रशासनिक तंत्र मिलकर निपुण जनपद बनाने का संकल्प लेगा।

उन्होंने विद्यालयों में पुस्तकालयों, प्रिंट समृद्ध सामग्री और अभिभावक सहभागिता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट को और अधिक प्रभावी बनाते हुए उसे वर्ष में दो बार अभिभावकों के साथ साझा करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही विद्यालयों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (DEAR)’ अभियान जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही गई।

शिक्षकों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी पात्र लाभार्थियों से समयबद्ध पंजीकरण कराने की अपील की। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी भी दी।

संवाद के अंत में उन्होंने शिक्षकों से अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर अध्ययन ही बेहतर शिक्षण और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की निष्ठा, प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता और समाज की सहभागिता के बल पर उत्तर प्रदेश बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल स्थापित करेगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।

अयोध्या मामले में एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी

अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

सीएम योगी के निर्देश पर कोचिंग संस्थानों की जांच का महाअभियान

लखनऊ में हुए दुखद हत्याकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर सभी जनपदों में कोचिंग संस्थानों के निरीक्षण का महाअभियान शुरू कर दिया गया। पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन विभाग, प्राधिकरण और विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने संयुक्त टीमें बनाकर कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी का निरीक्षण किया। लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, आगरा आदि महानगरों के साथ अन्य जनपदों में भी यह कार्रवाई की गई। इस दौरान अनियमितताएं मिलने पर सौ से अधिक कोचिंग संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अभी जारी रहेगी।

अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य मानकों की जांच
लखनऊ में हुई दुःखद घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सभी जिलों में जांच के सख्त निर्देश दे थे। कुछ जिलों में देर शाम में ही जांच कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। मंगलवार को यह अभियान और तेज रहा। उन कोचिंग संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई जो गैर पंजीकृत थे। टीमों ने विशेष तौर पर अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास, भवन की संरचना तथा अन्य सुरक्षा मानकों की पड़ताल की। जांच का क्रम देर रात तक जारी था। प्रयागराज के मुख्य अग्नि शमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि नगर में 97 पंजीकृत संस्थानों में केवल 15 कोचिंग संस्थानों ने से एनओसी ली है। फायर विभाग ने दस टीमों का गठन किया है, जो लगातार जांच करेंगीं। इसी क्रम में प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने सिविल लाइंस स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग को सील कर दिया।

कानपुर में पार्किंग को बना दिया बच्चों का क्लासरूम, फायर एनओसी भी वैध नहीं
कानपुर विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन दस्ते और अग्निशमन अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों में मानकों के अनुपालन की जांच का काम सोमवार शाम से ही शुरू कर दिया था। मंगलवार शाम तक यहां के सबसे बड़े शैक्षणिक हब काकादेव में 30 से अधिक संस्थानों को सील कर दिया गया। इन सभी को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। सबसे गंभीर उल्लंघन भवनों के बेसमेंट में पाया गया, जिनका आवंटन सिर्फ पार्किंग के लिए था, लेकिन वहां अवैध रूप से सैकड़ों बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम बना दिए गए थे। मीरजापुर में भी लगभग एक दर्जन संस्थान सील किए गए।

वाराणसी में भी मिली अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी, जौनपुर और चंदौली में भी जांच
वाराणसी विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने बनारस में भी सोमवार से ही कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरियों की जांच शुरू कर दी। इस दौरान कई संस्थानों को सील किया गया है। कई संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन पाया गया है। जौनपुर और चंदौली में जांच की जा रही है। वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि कई कोचिंग सेंटर बिना मानचित्र स्वीकृति एवं निर्धारित भवन मानकों के विपरीत संचालित किए जा रहे थे, उन्हें सील किया गया।

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग में प्रवेश के प्रति बढ़ रहा है युवाओं का आकर्षण

प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग: विरासत के अध्ययन के साथ सुनहरे करियर की गारंटी:
प्रवेश प्रारम्भ
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग में प्रवेश के प्रति बढ़ रहा है युवाओं का आकर्षण
नई शिक्षा नीति, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुरातत्व के बढ़ते महत्व के बीच प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विषय युवाओं के लिए तेजी से उभरता हुआ करियर विकल्प बन रहा है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग न केवल ऐतिहासिक अध्ययन और शोध के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार और शोध के अवसर भी प्रदान कर रहा है।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रिया सक्सेना ने जानकारी दी है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इच्छुक विद्यार्थी ‘समर्थ पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण सुनिश्चित करें और अपना प्रवेश फॉर्म अनिवार्य रूप से विभाग में जमा करें।
विभाग के छात्र आज विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों, पुरातत्व संस्थानों, अभिलेखागारों, पर्यटन विभागों, सांस्कृतिक संस्थाओं तथा प्रशासनिक सेवाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विषय की बहुआयामी प्रकृति के कारण इसमें रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विषय को केवल अध्यापन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं व्यापक है। आज विरासत प्रबंधन, पुरातत्व, संग्रहालय अध्ययन, संरक्षण, पर्यटन प्रबंधन, सांस्कृतिक संसाधन प्रलेखन तथा ऐतिहासिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। भारत सरकार द्वारा विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक पर्यटन और पुरातात्विक स्थलों के विकास पर दिए जा रहे विशेष बल ने इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं।
शोध एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरो से
विभाग के विद्यार्थी देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), राष्ट्रीय अभिलेखागार, संग्रहालयों तथा विभिन्न शोध संस्थानों में कार्य कर रहे हैं। शोध के क्षेत्र में भी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, कार्यशालाओं तथा फेलोशिप कार्यक्रमों में सहभागिता का अवसर मिलता है। विभाग की फैकल्टी भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शोध कार्यों, प्रकाशनों तथा अकादमिक सहभागिता के लिए पहचान रखती है।
विरासत संरक्षण से राष्ट्र निर्माण तक
प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति केवल अतीत का अध्ययन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा विषय है। यह विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक दृष्टि, शोध कौशल, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और ऐतिहासिक चेतना का विकास करता है। यही कारण है कि यह विषय आज प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध करियर तथा सांस्कृतिक प्रशासन में भी उपयोगी सिद्ध हो रहा है।
प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति: करियर के प्रमुख प्लेटफॉर्म
🔸 उच्च शिक्षा एवं अध्यापन: प्रोफेसर, शोधार्थी, अकादमिक सलाहकार
🔸 पुरातत्व एवं विरासत संरक्षण: पुरातत्वविद्, विरासत अधिकारी, संरक्षण विशेषज्ञ (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, इनटैक)
🔸 संग्रहालय एवं अभिलेखागार: क्यूरेटर, पुरालेखपाल, प्रलेखन अधिकारी
🔸 प्रतियोगी परीक्षाएं: यूपीएससी, यूपीपीएससी, प्रशासनिक
विभाग की प्रमुख उपलब्धियां

  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों व वैश्विक मंचों पर सक्रिय सहभागिता और शोध प्रस्तुतियां।
  • पुरातत्व, संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र में निरंतर शोध प्रकाशन।
  • संग्रहालय अध्ययन, अभिलेखीय शोध एवं फील्ड सर्वेक्षण का व्यावहारिक अनुभव।
  • विद्यार्थियों को नेट/जेआरएफ, शोध एवं उच्च शिक्षा हेतु विशेष मार्गदर्शन।
    प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग
    “अतीत की समझ, भविष्य की दिशा”
युवाओं का भविष्य: AI और SI के युग में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका

आज हम तकनीकी क्रांति के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (SI) यानी सामाजिक बुद्धिमत्ता का संगम हमारे भविष्य की नींव रख रहा है। जहाँ AI मशीनों को सोचने और निर्णय लेने की क्षमता दे रहा है, वहीं SI हमें यह सिखाता है कि कैसे इन तकनीकों का उपयोग मानवीय संवेदनाओं, सहानुभूति और सामूहिक कल्याण के लिए किया जाए। आज के दौर में, जब तकनीक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है, सामाजिक संस्थाओं का यह दायित्व है कि वे युवाओं को इन दोनों क्षेत्रों में सक्षम बनाएं।
AI और SI का भविष्य: एक नई आजीविका का उदय
आने वाला समय केवल डिग्री का नहीं, बल्कि कौशल का होगा। AI के कारण कई पारंपरिक नौकरियां बदल रही हैं, लेकिन साथ ही नई और बेहतर आजीविका के द्वार भी खुल रहे हैं। भविष्य में ऐसे पेशेवरों की भारी मांग होगी जो:
• AI विशेषज्ञ: जो मशीन लर्निंग, डेटा एनालिसिस और एल्गोरिदम के माध्यम से जटिल समस्याओं को हल कर सकें।
• SI रणनीतिकार: जो तकनीक को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़कर सामाजिक उद्यमिता (Social Entrepreneurship) और सामुदायिक विकास के नए मॉडल तैयार कर सकें।
• हाइब्रिड विशेषज्ञ: वे लोग जो तकनीकी रूप से कुशल हों और मानवीय व्यवहार (Social Intelligence) को समझते हों, वे स्वास्थ्य, शिक्षा, और नीति निर्माण जैसे क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह बदलाव भय का नहीं, बल्कि अपार संभावनाओं का है। जो युवा आज तकनीकी कौशल अपना रहे हैं, वे कल की अर्थव्यवस्था के निर्माता होंगे।
सामाजिक संस्थाओं और कार्यकर्ताओं से आह्वाहन
मैं सभी सामाजिक संस्थाओं और समर्पित कार्यकर्ताओं से आह्वाहन करता हूँ कि वे समय की मांग को पहचानें। आपकी पहुंच समाज के उस तबके तक है जो नई तकनीकों से अभी भी दूर है।

  1. जागरूकता का प्रसार करें: युवाओं और वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को यह समझाएं कि AI और SI कोई डरावनी चीज़ नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली उपकरण है।
  2. कौशल प्रशिक्षण केंद्र बनाएं: अपनी संस्थाओं में डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ AI-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करें। युवाओं को कोडिंग, डेटा विश्लेषण और एथिकल AI के बारे में प्रशिक्षित करें।
  3. निरंतर सीखने की संस्कृति (Reskilling) विकसित करें: जो लोग पहले से नौकरी में हैं, उन्हें प्रेरित करें कि वे अपने कार्यक्षेत्र में AI का उपयोग करना सीखें। उन्हें बताएं कि नई तकनीक उनके काम को बोझिल बनाने के बजाय अधिक प्रभावी और रचनात्मक बनाएगी।
  4. मार्गदर्शक बनें: एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में, आपकी भूमिका केवल सहायता देने की नहीं, बल्कि ‘सशक्तिकरण’ (Empowerment) की है। युवाओं को नई आजीविका प्राप्त करने और उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करें।
    निष्कर्ष: एक सामूहिक जिम्मेदारी
    सामाजिक संस्थाएं समाज की रीढ़ होती हैं। यदि आज हम अपने युवाओं को AI और SI में निपुण बनाने का बीड़ा उठाते हैं, तो हम न केवल बेरोजगारी की समस्या का समाधान करेंगे, बल्कि एक ऐसे समाज का निर्माण करेंगे जो तकनीक के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं में भी समृद्ध होगा।
    आइए, हम संकल्प लें कि हम अपने युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को हल करने वाला ‘AI और SI विशेषज्ञ’ बनाएंगे। समय की पुकार है—शिक्षित करें, प्रेरित करें और आगे बढ़ें। तकनीक और मानवता का यह संतुलन ही हमारे देश को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।