बिहार में सियासी बदलाव का अहम दिन : नीतीश कुमार आज देंगे इस्तीफा, शाम तक नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला संभव
बिहार की राजनीति आज एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। करीब दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज, 14 अप्रैल 2026 को अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। यह दिन न सिर्फ उनके लंबे राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव है, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत भी दे रहा है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर आज विराम लगने वाला है, जब नीतीश कुमार दोपहर 3 बजकर 15 मिनट पर राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपेंगे। पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि नीतीश कुमार सक्रिय राज्य राजनीति से किनारा कर सकते हैं। अब यह लगभग तय हो गया है कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका को आगे बढ़ाएंगे।
हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद से ही उनके इस कदम के संकेत मिलने लगे थे। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने 30 मार्च को राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिससे यह साफ हो गया था कि वे अब नई जिम्मेदारियों की ओर बढ़ रहे हैं। नीतीश कुमार का कार्यकाल बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा। उन्होंने विकास, सुशासन और सामाजिक संतुलन के मुद्दों पर अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि, उनके राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव भी आए, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति में खुद को प्रासंगिक बनाए रखा।
आज के घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि अगला मुख्यमंत्री उनके दल से होगा। ऐसे में राज्य की राजनीति में सत्ता संतुलन बदलना लगभग तय माना जा रहा है। दोपहर 2 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी विधायकों के साथ-साथ केंद्रीय कृषि मंत्री और पार्टी के पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में भाजपा विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जो आगे चलकर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकता है।
सीएम की रेस में कई नाम, एनडीए में तेज हुई हलचल
बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। इनमें सम्राट चौधरी और श्रेयसी सिंह प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। इसके अलावा पहले संजय झा और निशांत कुमार के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भाजपा ही नेतृत्व की कमान संभालेगी। जदयू, जो अब तक सरकार का नेतृत्व कर रही थी, अब सहयोगी की भूमिका में नजर आएगी। शाम को एनडीए विधायक दल की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें अंतिम फैसले पर मुहर लग सकती है। वहीं, जदयू ने भी अपने विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग पर बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के सभी विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।
माना जा रहा है कि जदयू अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और नई राजनीतिक स्थिति के अनुसार रणनीति तय करने पर चर्चा करेगी।राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा इस बार ऐसे चेहरे को आगे बढ़ा सकती है जो संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बना सके। साथ ही सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी की जाएगी, ताकि आगामी चुनावों में पार्टी को लाभ मिल सके। सम्राट चौधरी का नाम जहां संगठन में मजबूत पकड़ के कारण चर्चा में है, वहीं श्रेयसी सिंह को युवा और नए चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।इसके अलावा, केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में बेहद अहम मानी जा रही है। पार्टी आलाकमान की सहमति के बाद ही अंतिम नाम पर मुहर लगेगी। ऐसे में दिल्ली से आने वाले संकेत भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है। जहां एक ओर नीतीश कुमार का युग समाप्त हो रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनने की संभावना राज्य की राजनीतिक दिशा को बदल सकती है। आज का दिन बिहार के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। एक ओर जहां एक अनुभवी नेता सत्ता से विदा ले रहा है, वहीं दूसरी ओर नए नेतृत्व के उदय की तैयारी हो रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा किसे मुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ाती है और आने वाले समय में बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

