उम्र नहीं, जुनून मायने रखता है: निवेदिता बसु की नई उड़ान

उम्र अक्सर लोगों के लिए ठहराव का पड़ाव बन जाती है, लेकिन निवेदिता बसु के लिए यह नई शुरुआत का समय है। 45 की उम्र के बाद उन्होंने खुद को एक बार फिर नए सिरे से गढ़ने का साहस दिखाया है। भारतीय टेलीविज़न की दुनिया में दो दशक से अधिक समय बिताने वाली बसु निर्देशक, क्रिएटिव लीडर और कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। बालाजी टेलीफिल्म्स में कंटेंट और बिज़नेस अलायंस की वाइस प्रेसिडेंट की भूमिका निभाने के बाद उन्होंने 2015 में सुरक्षित कॉर्पोरेट दायरे से बाहर निकलकर अपनी प्रोडक्शन कंपनी हाउस ऑफ ओरिजिनल्स शुरू की।

इसके बाद ULLU, Atrangii, Hari Om और Dangal जैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करते हुए उन्होंने बदलते मनोरंजन जगत के साथ खुद को लगातार ढाला। बॉक्स क्रिकेट लीग की टीम कोलकाता बाबू मोशायेस की मालिक बनने से लेकर हॉस्पिटैलिटी और पब्लिशिंग तक उनका सफर लगातार प्रयोगों से भरा रहा।

‘Self-Made Woman’ डिजिटल मैगज़ीन शुरू करना उनके विज़न का एक और विस्तार है। लेकिन सबसे दिलचस्प अध्याय है स्क्वैश। मास्टर्स सर्किट में उतरकर वह अपनी कैटेगरी में भारत की नंबर 3 सीडेड खिलाड़ी हैं और अब प्रोफेशनल खिलाड़ी बनने की तैयारी कर रही हैं। निवेदिता बसु की कहानी यही संदेश देती है—अनुभव कभी अंत नहीं होता, वह अगली शुरुआत की सबसे मजबूत नींव बन सकता है।

बोतल फेंकने का दौर खत्म, अब कचरे से बनेगा उपयोगी सामान

पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महाराष्ट्र सरकार, ठाणे नगर निगम और हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज ने महा r-PET अभियान का विस्तार किया है। ठाणे में नए PET कलेक्शन सेंटर का उद्घाटन कर इस्तेमाल की गई प्लास्टिक बोतलों के संग्रहण, छंटाई और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की पहल की गई। कार्यक्रम में समर्पित कलेक्शन बिन्स, रिटेलर्स के लिए ग्रीन कूल दुकान स्टिकर और सहभागिता प्रमाणपत्र भी लॉन्च किए गए। इसके अलावा, संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाई गई।

महाराष्ट्र की मंत्री पंकजा मुंडे ने इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि अब समय इस्तेमाल के बाद बोतलों को फेंकने के बजाय एकत्र करने का है। उन्होंने बताया कि ठाणे के बाद इस पहल को छत्रपति संभाजीनगर, नासिक और बीड तक ले जाने की योजना है। अभियान के तहत एकत्रित PET बोतलों को अधिकृत रीसाइक्लिंग चैनलों तक पहुंचाने के लिए कलेक्शन पार्टनर्स और रिटेलर्स का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में रीसाइकिल्ड PET प्लास्टिक से बनी बेंचों का भी अनावरण किया गया, जो कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने की संभावनाओं को दर्शाती हैं। HCCB के अविनाश कांत कुमार के अनुसार, संग्रहण से लेकर प्रोसेसिंग तक पूरी व्यवस्था में सहयोग और बेहतर ट्रेसेबिलिटी जरूरी है। यह पहल प्लास्टिक रिकवरी और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शूलिनी विश्वविद्यालय ने रचा नया मुकाम

हिमालयी क्षेत्र से निकलकर वैश्विक अकादमिक मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा शूलिनी विश्वविद्यालय लगातार तीसरे वर्ष दुनिया की Top 500 यूनिवर्सिटीज में शामिल हुआ है। टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में विश्वविद्यालय को 451–500 बैंड में स्थान मिला है और भारत में वह तीसरे स्थान पर रहा। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु और साविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज के बाद Top 500 में जगह बनाने वाला शूलिनी भारत का तीसरा संस्थान है।

विश्वविद्यालय के फाउंडर चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने कहा, “हमारा उद्देश्य था कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित कोई विश्वविद्यालय भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके। हमारा लक्ष्य अगले तीन वर्षों में दुनिया की Top 200 यूनिवर्सिटीज में शामिल होना है।”

शूलिनी ने Research Quality में वैश्विक 184वां स्थान हासिल किया है, जबकि International Outlook में भारत में तीसरा स्थान मिला है। प्रो चांसलर प्रो. विशाल आनंद ने कहा, “लगातार तीन वर्षों तक Top 500 में बने रहना निरंतर प्रयास और प्रदर्शन की मांग करता है। यह उपलब्धि शूलिनी से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।”  चांसलर प्रो. विशाल आनंद ने कहा, “एक बार Top 500 में जगह बनाना निश्चित रूप से एक उपलब्धि है। लेकिन लगातार तीन वर्षों तक इस सूची में बने रहना अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इसके लिए हर वर्ष निरंतर प्रयास और प्रदर्शन की आवश्यकता होती है। यह परिणाम उन सभी लोगों के प्रयासों को दर्शाता है जो शूलिनी की प्रगति में लगातार योगदान दे रहे हैं।” 2027 की THE रैंकिंग में दुनिया के 2,297 संस्थान शामिल हैं, जिनमें भारत के 143 संस्थान हैं। यह उपलब्धि शूलिनी के शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उच्च शिक्षा में बढ़ती वैश्विक मौजूदगी को रेखांकित करती है।

प्रभास के ‘पिता’ बनेंगे बड़े स्टार, ‘सालार 2’ में खुलेगा नया राज!

प्रभास की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सालार: पार्ट 1 – सीजफायर’ की जबरदस्त सफलता के बाद अब दर्शकों की नजरें इसके बहुप्रतीक्षित सीक्वल ‘सालार: पार्ट 2 – शौर्यांग पर्वम’ पर टिकी हैं। प्रशांत नील के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। खबरों के मुताबिक, एक बड़े और जाने-माने अभिनेता फिल्म में प्रभास के किरदार देवा के पिता धरा शौर्यांग की भूमिका निभाएंगे।

यह किरदार कहानी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहले भाग के अंत में देवा की पहचान और उसकी वंशावली से जुड़े रहस्य ने आगे की कहानी के लिए कई सवाल खड़े किए थे। ऐसे में पिता के किरदार की एंट्री कहानी को नई दिशा देने के साथ-साथ खांसार की दुनिया में छिपे कई राज भी खोल सकती है। होम्बले फिल्म्स के प्रोड्यूसर विजय किरागंदूर और प्रशांत नील सीक्वल के प्री-प्रोडक्शन पर तेजी से काम कर रहे हैं। ‘सालार 2’ से अब दर्शकों को पहले से भी बड़ा एक्शन, ड्रामा और रोमांच देखने की उम्मीद है।

भारत की पहली पत्रकार डॉ. वैदेही तामण ने कश्मीर की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत पर लिखीं पाँच विशेष क्रॉनिकल्स

ऐसे समय में जब कश्मीर अक्सर राजनीति, सुरक्षा और समकालीन मुद्दों के संदर्भ में चर्चा का विषय बनता है, महाराष्ट्र की वरिष्ठ पत्रकार, लेखिका और शोधकर्ता डॉ. वैदेही तामण ने एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है। कश्मीर की आध्यात्मिक, साहित्यिक और सभ्यतागत विरासत पर पाँच विशेष क्रॉनिकल्स लिखकर वह ऐसा करने वाली भारत की पहली पत्रकार बन गई हैं।

पिछले कई वर्षों से डॉ. तामण ने कश्मीर घाटी की व्यापक यात्राएँ कर वहां की प्राचीन परंपराओं, संतों, दार्शनिकों, रहस्यवादियों, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत स्मृतियों पर गहन शोध किया है। उनका कार्य कश्मीर के उस पक्ष को सामने लाता है जो मुख्यधारा की पत्रकारिता में अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।

परंपरागत रिपोर्टिंग से अलग, डॉ. तामण की कश्मीर यात्रा वर्षों के फील्ड रिसर्च, विद्वानों, इतिहासकारों, लेखकों, सांस्कृतिक हस्तियों और स्थानीय लोगों के साथ संवाद का परिणाम है। उनका उद्देश्य केवल इतिहास का अध्ययन करना नहीं, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना भी है।

उनकी पुस्तकों में “Lal Ded – The Mother of Kashmir”, “Abhinavagupta – The Voice of Eternal Shiva” तथा नीलमत पुराण से जुड़े अध्ययन शामिल हैं। ये कृतियाँ कश्मीर की प्राचीन परंपराओं, पवित्र भूगोल, दर्शन, साहित्य और आध्यात्मिक विकास को विस्तार से प्रस्तुत करती हैं।

लाल डेड पर उनकी पुस्तक 14वीं शताब्दी की महान संत-कवयित्री के जीवन और विचारों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। वहीं अभिनवगुप्त पर उनका शोध कश्मीर शैव दर्शन, भारतीय सौंदर्यशास्त्र और आध्यात्मिक चिंतन की समृद्ध परंपरा को सामने लाता है।

डॉ. तामण का मानना है कि कश्मीर को केवल वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से नहीं समझा जा सकता, बल्कि उसकी गहरी सांस्कृतिक और बौद्धिक जड़ों को भी जानना आवश्यक है।

डॉ. वैदेही तामण कहती हैं, “कश्मीर सुर्खियों से कहीं अधिक है। उसका दिव्य इतिहास पुस्तकों में संरक्षित होना चाहिए। जो इतिहास लिखा जाता है, वह हमेशा जीवित रहता है। मेरा प्रयास उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजना है।”

उनके कार्य को जम्मू-कश्मीर के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में भी सराहना मिली है। उनकी पुस्तक “Lal Ded – The Mother of Kashmir” का लोकार्पण श्रीनगर में आयोजित लाल डेड लिटरेरी अवॉर्ड्स समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की उपस्थिति में किया गया था।

गुलशन बुक्स, कश्मीर द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तकों ने कश्मीर की साहित्यिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर नई चर्चा को जन्म दिया है।

डॉ. तामण की पाँच विशेष कश्मीर क्रॉनिकल्स केवल पुस्तकें नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास हैं। उनके लिए कश्मीर केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक इतिहास, एक दर्शन, एक आध्यात्मिक विरासत और एक सभ्यतागत धरोहर है, जिसे समझना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

लैब-ग्रोन डायमंड ज्वैलरी में नया दांव, 30 सितंबर को खुलेगा नित्यास जेम्स का आईपीओ

लैब-ग्रोन डायमंड से जड़ी सोने की ज्वैलरी के डिजाइन, निर्माण और बिक्री से जुड़ी नित्यास जेम्स एंड ज्वैलरी लिमिटेड का आईपीओ 30 सितंबर 2026 को खुलने जा रहा है। कंपनी इस इश्यू के जरिए ऊपरी मूल्य बैंड पर करीब 108.42 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। आईपीओ के लिए 70 से 75 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का मूल्य दायरा तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 200 शेयरों का है। इश्यू में कुल 1,44,56,000 इक्विटी शेयर शामिल हैं, जिनका अंकित मूल्य 5 रुपये प्रति शेयर है।

कंपनी के अनुसार, आईपीओ से प्राप्त शुद्ध राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से कार्यशील पूंजी की जरूरतों और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 29 सितंबर को होगी, जबकि आईपीओ 5 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। कंपनी के शेयरों को एनएसई और बीएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।

इश्यू में योग्य संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत, गैर-संस्थागत निवेशकों (एनआईआई) के लिए न्यूनतम 15 प्रतिशत और खुदरा निवेशकों के लिए न्यूनतम 35 प्रतिशत हिस्सेदारी निर्धारित की गई है। चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड इस इश्यू की बुक रनिंग लीड मैनेजर है, जबकि बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड रजिस्ट्रार है।वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 2,028.94 मिलियन रुपये का राजस्व, 309.74 मिलियन रुपये का ईबीआईटीडीए और 223.15 मिलियन रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, आईपीओ से मिलने वाली पूंजी कारोबार के विस्तार के साथ-साथ विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेगी। 

लाल साड़ी में छाईं मधुरिमा तुली, जन्मदिन के जश्न ने जोड़ी ग्लैमर में रिश्तों की गर्माहट

अभिनेत्री मधुरिमा तुली के हालिया दो खास मौके उनके व्यक्तित्व के दो बेहद खूबसूरत पहलुओं को सामने लाते हैं—एक तरफ उनका शानदार फैशन सेंस, तो दूसरी तरफ अपनों के साथ रिश्तों को लेकर उनकी सादगी और भावनात्मक जुड़ाव। अवॉर्ड फंक्शन में लाल साड़ी में नजर आईं माधुरिमा ने जहां अपने क्लासिक ग्लैमर से महफिल लूट ली, वहीं जन्मदिन का निजी जश्न उन्होंने दोस्तों और परिवार के बीच प्यार, हंसी और खूबसूरत यादों के साथ मनाया।

अवॉर्ड फंक्शन में माधुरिमा का लाल साड़ी वाला लुक खास आकर्षण का केंद्र रहा। खूबसूरत ड्रेपिंग, मैचिंग फिटेड ब्लाउज़ और सॉफ्ट रेडिएंट मेकअप ने उनके पूरे अंदाज़ को बेहद एलिगेंट बना दिया। उन्होंने भारी-भरकम एक्सेसरीज या जरूरत से ज्यादा सजावट के बजाय सादगी को अपनी खूबसूरती की सबसे बड़ी ताकत बनाया। लाल रंग ने उनके लुक में ग्लैमर, आत्मविश्वास और भारतीय नारीत्व का शानदार मेल पेश किया।

अगर रेड कार्पेट पर मधुरिमा का अंदाज़ ग्लैमर और आत्मविश्वास की कहानी कहता नजर आया, तो उनके जन्मदिन का जश्न उनकी जिंदगी में रिश्तों की अहमियत को सामने लाया। भव्य पार्टी के बजाय उन्होंने अपने करीबी दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना पसंद किया। केक कटिंग, हंसी-मजाक, गले मिलना और दिल से दी गई शुभकामनाओं ने इस शाम को बेहद आत्मीय बना दिया।

इस खास मौके पर मधुरिमा के चेहरे की मुस्कान और अपनों के साथ बिताए सहज पल इस बात की गवाही देते रहे कि जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादें हमेशा बड़े आयोजनों से नहीं बनतीं। कई बार परिवार और दोस्तों के साथ बिताया गया सुकून भरा समय ही सबसे अनमोल बन जाता है। मधुरिमा ने अपने जन्मदिन के जश्न को लेकर कहा कि उनके लिए जन्मदिन तब और खास हो जाता है, जब आसपास ऐसे लोग मौजूद हों जो उन्हें दिल से प्यार करते हैं और हर कदम पर साथ देते हैं। उनकी बातों में अपने रिश्तों के प्रति आभार और जिंदगी में मिले प्यार की अहमियत साफ झलकती है।

मधुरिमा तुली के ये दोनों अंदाज़ मिलकर उनकी एक ऐसी तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें ग्लैमर और सादगी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि खूबसूरत साथी नजर आते हैं। एक ओर लाल साड़ी में उनका आत्मविश्वास फैशन की दुनिया में अपनी छाप छोड़ता है, तो दूसरी ओर अपनों के बीच उनकी सहज मुस्कान बताती है कि असली खूबसूरती रिश्तों और भावनाओं से भी जुड़ी होती है।

फीफा अध्यक्ष के विशेष निमंत्रण से उर्वशी रौतेला ने रचा इतिहास

भारतीय अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो से विशेष निमंत्रण प्राप्त करने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनने का दावा उनके वैश्विक सफर में एक नया अध्याय जोड़ता है। इस खास मुलाकात के दौरान इन्फैन्टिनो ने उर्वशी को “ग्लोबल आइकन सुपरस्टार” बताते हुए उनसे मिलकर खुशी जाहिर की, जिसके बाद यह चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। 

पिछले कुछ वर्षों में उर्वशी ने फैशन, मनोरंजन और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अपनी प्रभावशाली मौजूदगी से अलग पहचान बनाई है। दुनिया के बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली उर्वशी आज वैश्विक मनोरंजन जगत में एक चर्चित भारतीय चेहरा बन चुकी हैं। फीफा अध्यक्ष से मिला यह सम्मान केवल उनकी लोकप्रियता का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय प्रतिभा की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का भी संकेत माना जा रहा है। उनके प्रशंसक इसे देश के लिए गर्व और उर्वशी के अंतरराष्ट्रीय सफर की एक और बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।

आयुष्मान खुराना की जालना यात्रा, बच्चों की सुरक्षा का संदेश

प्रसिद्ध अभिनेता और यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय एम्बेसडर आयुष्मान खुराना ने महाराष्ट्र के जालना में सीजनल माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों और परिवारों से मुलाकात कर सुरक्षित बचपन का मजबूत संदेश दिया। यूनिसेफ समर्थित किनशिप और कम्युनिटी केयर कार्यक्रम के तहत बच्चों को परिवार और समुदाय के संरक्षण में रखते हुए उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

खुराना ने कहा, “किसी भी बच्चे को अपनी परिस्थितियों के कारण अपना बचपन नहीं खोना चाहिए। किनशिप केयर केवल सुरक्षित घर नहीं देता, बल्कि रिश्तों को बनाए रखता है, आत्मविश्वास लौटाता है और बेहतर भविष्य की उम्मीद देता है।” उन्होंने युवा वालंटियरों, बालमित्रों, किशोरियों और परिवारों से संवाद कर जमीनी बदलाव को समझा। उन्होंने 18 वर्षीय शिल्पा का उदाहरण देते हुए कहा, “लड़कियों के सपने पूरे हो सकते हैं, जब बच्चे शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण में बड़े होते हैं।”

यूनिसेफ के कार्यवाहक प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने कहा, “बच्चों के खिलाफ हिंसा रोकी जा सकती है। हमें ऐसी प्रणालियों को मजबूत करना होगा, जो जोखिमों की पहचान कर परिवारों को जरूरी सेवाओं से जोड़ें।”
जालना में 2024-25 के दौरान 5,800 से अधिक बच्चे किनशिप केयर में बने रहे। यह पहल शिक्षा से जुड़े रहने के साथ बाल मजदूरी और बाल विवाह जैसे जोखिमों को कम करने में भी मदद कर रही है।

मुंह का अल्सर न करें नजरअंदाज, बच सकती है जिंदगी: हेड एंड नेक कैंसर पर विशेषज्ञ की चेतावनी

भारत में हेड एंड नेक कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच विशेषज्ञों ने इलाज के बाद भी सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया है। विश्व हेड एंड नेक कैंसर दिवस के अवसर पर एसएसओ हॉस्पिटल के हेड एंड नेक कैंसर सर्जन डॉ. अमित चक्रवर्ती ने बताया कि इलाज करा चुके मरीजों में कैंसर दोबारा होने की आशंका बनी रहती है, इसलिए नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है।

डॉ. अमित चक्रवर्ती कहते हैं, “हेड एंड नेक कैंसर का इलाज करा चुके हर 100 मरीजों में से 20 से 40 मरीजों में कैंसर दोबारा हो सकता है। लेकिन समय पर पहचान और नियमित फॉलो-अप से इसका सफल इलाज संभव है।”

43 वर्षीय मिहिर जोबनपुत्रा और 70 वर्षीय दिनकर आढाव ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय पर जांच और सर्जरी के कारण वे आज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। दोनों ने लोगों से तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहने तथा मुंह में अल्सर, सफेद दाग या किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की अपील की। विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू, गुटखा, सुपारी, शराब और एचपीवी संक्रमण हेड एंड नेक कैंसर के प्रमुख कारण हैं। एसएसओ हॉस्पिटल जल्द ही हेड एंड नेक कैंसर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने जा रहा है, जहां जांच, सर्जरी, रिकंस्ट्रक्टिव उपचार, रेडिएशन, पुनर्वास और फॉलो-अप जैसी सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।