नीट परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में नाराजगी, सिस्टम से गुस्साए छात्र सड़कों पर, विरोध-प्रदर्शन जारी
देशभर के लाखों मेडिकल छात्रों के सपनों पर एक बार फिर अनिश्चितता का साया छा गया है। डॉक्टर बनने की उम्मीद लेकर वर्षों तक कठिन तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए नीट स्नातक-2026 अब सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालों का प्रतीक बन गया है। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने से छात्रों में भारी गुस्सा और निराशा है। पूरे मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई है। देश के कई शहरों में पेपर लीक के विरोध में छात्र सड़कों पर हैं। 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा में करीब 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की थी, जिन्होंने वर्षों तक कोचिंग लेकर तैयारी की और परिवारों ने लाखों रुपये खर्च किए। लेकिन परीक्षा रद्द होने के फैसले ने छात्रों और अभिभावकों दोनों को मानसिक तनाव और अनिश्चितता में डाल दिया है।
दिल्ली, पटना, कोटा, जयपुर, लखनऊ, भोपाल, चंडीगढ़ और चेन्नई समेत कई शहरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए। उनका कहना है कि हर साल प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा धांधली के मामले सामने आते हैं, लेकिन जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। कई छात्रों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने और परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग उठाई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका बनी थी। इसी कारण सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।
प्रश्नपत्र लीक मामले में लगातार कार्रवाई, कई राज्यों तक पहुंची जांच
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो लगातार कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला केवल प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित परीक्षा माफिया नेटवर्क होने की आशंका है। जांच में महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैले नेटवर्क के सुराग मिले हैं। ताजा कार्रवाई में पुणे से रसायन विज्ञान के प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया है, जिसे इस पूरे मामले का मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है। आरोप है कि उसे परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीय जानकारी तक पहुंच थी और उसने कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले वही सवाल और उत्तर उपलब्ध कराए, जो बाद में असली प्रश्नपत्र में आए।
इससे पहले जयपुर से तीन, गुरुग्राम से एक, नासिक से एक तथा पुणे और अहिल्यानगर से दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पिछले 48 घंटों में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने देशभर के 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और संदिग्ध नोट्स बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के कुछ अधिकारी भी इस नेटवर्क से जुड़े थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। इस पूरे मामले ने छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
2018 से अब तक विवादों में घिरी रही देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा पर विवाद कोई नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थियों, सॉल्वर गैंग और परीक्षा धांधली के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। हर बार जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं, गिरफ्तारियां हुईं और सुधार के दावे किए गए, लेकिन इसके बावजूद परीक्षा की विश्वसनीयता बार-बार सवालों के घेरे में आती रही। साल 2018 में दिल्ली के वेस्ट पटेल नगर स्थित एक शिक्षण केंद्र पर आरोप लगा था कि वह छात्रों से मोटी रकम लेकर परीक्षा पास कराने का दावा करता था। इसके बाद 2021 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने नागपुर के एक कोचिंग नेटवर्क पर कार्रवाई की, जहां असली छात्रों की जगह दूसरे अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने का मामला सामने आया। साल 2022 में फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों के जरिए दूसरे लोगों से परीक्षा दिलाने का मामला सामने आया। वहीं 2024 में बिहार और झारखंड से प्रश्नपत्र लीक के आरोपों ने पूरे देश को हिला दिया था।
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने जांच के दौरान जली हुई प्रतियों से 68 सवाल बरामद किए थे, जो असली प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा और बाद में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपी गई। अब 2026 में स्थिति और गंभीर हो गई है। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी, जिसे अब तक का सबसे बड़ा परीक्षा संकट माना जा रहा है। लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है। बता दें कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा भारत में चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।
इसी परीक्षा के जरिए देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा स्नातक, दंत चिकित्सा स्नातक, आयुष और नर्सिंग पाठ्यक्रमों में दाखिला मिलता है। देश में एक लाख से अधिक चिकित्सा स्नातक और करीब 27 हजार दंत चिकित्सा स्नातक सीटों पर प्रवेश इसी परीक्षा के माध्यम से होता है। परीक्षा सुरक्षा प्रणाली, डिजिटल निगरानी, प्रश्नपत्र परिवहन और परीक्षा केंद्र प्रबंधन में बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है। भारतीय चिकित्सा संघ ने भी केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है। फिलहाल लाखों छात्र नई परीक्षा तारीख का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस पूरे विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

