पीएम मोदी की अपील का असर: बदला सत्ता का रंग, वीआईपी सायरन से पब्लिक ट्रांसपोर्ट तक, नेता, मंत्री और अफसर चले सादगी की राह पर
10 मई को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मंच से देशहित में ऊर्जा बचत, सोने की खरीद कम करने, विदेश यात्राएं टालने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि उसका असर कुछ ही दिनों में सत्ता के गलियारों से लेकर देश की सड़कों तक दिखाई देने लगेगा। प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह समय देशहित में अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करने का है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल बचाने, कार पूलिंग अपनाने, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के ज्यादा इस्तेमाल, खाने के तेल की खपत कम करने और एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही थी। इसके अगले ही दिन 11 मई को गुजरात के वडोदरा में भी प्रधानमंत्री ने यही संदेश दोहराया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक अगर थोड़ी जिम्मेदारी दिखाए तो देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हो सकता है। उस वक्त यह एक सामान्य अपील की तरह लगी थी, लेकिन अब इसका असर राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में साफ दिखाई देने लगा है। पीएम की सलाह के बाद कई राज्य सरकारों ने भी “वर्क को बढ़ावा देने की दिशा में कदम तेज कर दिए ।देशभर में खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, जिलाधिकारी, पुलिस अधिकारी और विश्वविद्यालयों के कुलपति तक सादगी का संदेश देते नजर आ रहे हैं।
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सरकारी तंत्र के भीतर “कम खर्च, ज्यादा संदेश” की नई संस्कृति दिखाई देने लगी है। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी विभागों को ऊर्जा बचत और अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने के निर्देश दिए हैं। कई विभागों में अधिकारियों ने साझा वाहन व्यवस्था शुरू की है। देहरादून में कई वरिष्ठ अधिकारी छोटे काफिलों में आते-जाते दिखाई दिए। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने “तेल बचाओ अभियान” भी शुरू किया है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी बैठकों में ऊर्जा संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग पर जोर दिया है। लखनऊ और नोएडा में कई मंत्री और अधिकारी मेट्रो से सफर करते दिखाई दिए। राज्य सरकार ने विभागों को अनावश्यक सरकारी वाहनों के उपयोग में कटौती के निर्देश दिए हैं। दिल्ली में भी कई केंद्रीय मंत्री और सांसद मेट्रो और इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करते दिखाई दिए। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के कई दफ्तरों में कारपूलिंग को प्रोत्साहित करने की चर्चा तेज हो गई है।
राजस्थान में भाजपा नेताओं ने जिला स्तर पर “ईंधन बचाओ” अभियान शुरू किया है। जयपुर में कुछ जनप्रतिनिधि साइकिल और ई-रिक्शा से कार्यक्रमों में पहुंचे। हरियाणा और गुजरात में भी कई मंत्रियों ने छोटे काफिलों के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहुंचकर सादगी का संदेश देने की कोशिश की। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब भोपाल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल दो गाड़ियों के छोटे काफिले के साथ दिखाई दिए। आमतौर पर प्रधानमंत्री के काफिले में बड़ी संख्या में वाहन शामिल होते हैं, लेकिन इस बार सीमित सुरक्षा व्यवस्था और छोटा काफिला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इसे प्रधानमंत्री की अपील को व्यवहार में उतारने के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कई सांसद और विधायक अब सार्वजनिक मंचों से लोगों से कार पूलिंग अपनाने, निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने की अपील कर रहे हैं। कुछ जगहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने साइकिल रैलियां भी निकाली हैं।
प्रधानमंत्री की अपील का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है।

