दुनिया में बढ़ते युद्ध संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन यात्रा बेहद अहम, 13 मई को ट्रंप और शी जिनपिंग की होगी मुलाकात 

दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर खड़ी है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव ने तेल सप्लाई को प्रभावित किया है, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। दूसरी ओर ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका आमने-सामने हैं। ऐसे माहौल में जब दुनिया तीसरे विश्व युद्ध जैसी आशंकाओं से घिरी हुई है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा अचानक वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा पर जाएंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर होने वाली यह यात्रा करीब नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा होगी। 

चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इसकी औपचारिक घोषणा की। इस ऐलान के बाद दुनिया की निगाहें अब बीजिंग पर टिक गई हैं, क्योंकि यह यात्रा सिर्फ दो देशों की मुलाकात नहीं बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की दिशा तय करने वाली बैठक मानी जा रही है। ट्रंप ऐसे समय चीन पहुंच रहे हैं जब दोनों देशों के बीच कई मोर्चों पर तनाव चरम पर है। अमेरिका लगातार ताइवान का समर्थन कर रहा है, जबकि चीन इसे अपनी संप्रभुता का मुद्दा मानता है। दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियां बढ़ चुकी हैं। व्यापार युद्ध और टैरिफ विवाद पहले से ही दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर चुके हैं। इसके बावजूद ट्रंप का बीजिंग जाना यह संकेत दे रहा है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें टकराव के बीच संवाद का रास्ता खुला रखना चाहती हैं। 

व्हाइट हाउस की प्रिंसिपल डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली ने रविवार को कहा कि ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे। उन्होंने इस यात्रा को “बेहद प्रतीकात्मक महत्व वाली यात्रा” बताया। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में अमेरिका और चीन के बीच सीधी बातचीत बेहद जरूरी हो गई है। हांगकांग के प्रतिष्ठित अखबार ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप गुरुवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भव्य स्वागत समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी जिसमें व्यापार, ऊर्जा संकट, ताइवान, सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा ट्रंप बीजिंग स्थित ऐतिहासिक ‘टेम्पल ऑफ हेवन’ का दौरा भी करेंगे। चीन की ओर से उनके सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन किया जाएगा। शुक्रवार को दोनों नेताओं के बीच एक और विशेष बैठक होगी, जिसमें द्विपक्षीय चाय बैठक और कार्यकारी लंच रखा गया है। 

माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कुछ बड़े समझौते या साझा घोषणाएं भी सामने आ सकती हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि साल के अंत तक राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जवाबी अमेरिका यात्रा की योजना बनाई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह दोनों देशों के बीच रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत माना जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा अध्याय बनने जा रही है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाली यह मुलाकात आने वाले वर्षों की राजनीति, व्यापार और सुरक्षा रणनीति तय कर सकती है।

व्यापार युद्ध से वैश्विक राजनीति तक, ट्रंप-शी मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर

ट्रंप की चीन यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितता से गुजर रही है। अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहा टैरिफ विवाद वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर चुका है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां चीन से अपने कारोबार हटाने लगी थीं, वहीं चीन ने भी अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बढ़ाया था। अब दोनों देशों के बीच संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदें फिर से मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह वार्ता दोनों नेताओं के बीच पहले हुई फोन बातचीत और दक्षिण कोरिया में हुई चर्चाओं के आधार पर आगे बढ़ेगी। बयान में कहा गया कि बातचीत का उद्देश्य आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर “महत्वपूर्ण सहमति” बनाना है। इसी कड़ी में चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग 12 और 13 मई को दक्षिण कोरिया जाएंगे, जहां वे अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ अहम व्यापार वार्ता करेंगे। 

माना जा रहा है कि यह बैठक ट्रंप की चीन यात्रा से पहले अंतिम तैयारी होगी। अगर इन वार्ताओं में सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो दोनों देशों के बीच टैरिफ में राहत और व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील की घोषणा हो सकती है। अमेरिका और चीन दोनों इस समय आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। अमेरिका में महंगाई और ऊर्जा संकट बढ़ रहा है, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था भी धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में दोनों देशों के लिए तनाव कम करना जरूरी हो गया है। हालांकि ताइवान का मुद्दा अब भी सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। चीन लगातार कहता रहा है कि ताइवान उसका हिस्सा है और किसी भी बाहरी दखल को वह बर्दाश्त नहीं करेगा। 

वहीं अमेरिका ताइवान को सैन्य और रणनीतिक समर्थन देता रहा है। यही वजह है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दा रहने वाला है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव भी दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है। दुनिया के बड़े हिस्से को तेल सप्लाई इसी रास्ते से होती है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि ट्रंप और शी इस मुद्दे पर भी साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर सकते हैं। दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह यात्रा अमेरिका और चीन के रिश्तों में नई शुरुआत साबित होगी या फिर यह केवल औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात बनकर रह जाएगी। लेकिन इतना तय है कि बीजिंग में होने वाली यह बैठक आने वाले समय की वैश्विक राजनीति का रुख बदलने की क्षमता रखती है।

विकास की पटरी पर उत्तराखंड, अगले साल से शुरू होगा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल ट्रैक 

पहाड़ों में सफर हमेशा से चुनौती और धैर्य की परीक्षा रहा है। संकरी सड़कें, मौसम की मार और लंबा समय ये सब उत्तराखंड के लोगों और यहां आने वाले यात्रियों की रोजमर्रा की कहानी का हिस्सा रहे हैं। लेकिन अब यह तस्वीर बदलने जा रही है। वर्षों से इंतजार में रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। यह सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि पहाड़ों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। उत्तराखंड के लिए यह परियोजना विकास, सुविधा और सुरक्षा का नया अध्याय लिखने जा रही है। वर्ष 2027 की शुरुआत में इस मार्ग पर परीक्षण रेल चलाने की तैयारी है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि अब यह सपना साकार होने के बेहद करीब है। 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक का सफर, जो अभी करीब 6 घंटे लेता है, वह घटकर लगभग 2 घंटे में पूरा हो सकेगा।इस परियोजना का सीधा लाभ देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे महत्वपूर्ण जिलों को मिलेगा। 

मई 2026 से शिवपुरी और ब्यासी के बीच लगभग 13 किलोमीटर लंबे हिस्से पर पटरियां बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है। यही वह खंड होगा, जहां सबसे पहले परीक्षण रेल दौड़ाई जाएगी। अधिकारियों का अनुमान है कि दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 तक यह परीक्षण संभव हो सकेगा, जबकि पूरी परियोजना को वर्ष 2028 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रेल परियोजना की लागत भी समय के साथ बढ़ी है। शुरुआत में जहां इसकी लागत 16,216 करोड़ रुपये आंकी गई थी, वहीं अब निर्माण की चुनौतियों और तकनीकी बदलावों के कारण यह बढ़कर लगभग 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण कार्य करना अपने आप में जटिल होता है, और यही वजह है कि इस परियोजना को विशेष इंजीनियरिंग के साथ तैयार किया जा रहा है। पूरे मार्ग का करीब 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत है। कुल 16 मुख्य और 12 सहायक सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से अधिकतर का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा 19 बड़े और 31 छोटे पुल भी बनाए जा रहे हैं, जो इस रेल लाइन को मजबूत और सुरक्षित बनाएंगे।

परियोजना के तहत कुल 13 रेलवे स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। ऋषिकेश के वीरभद्र और योगनगरी स्टेशन अभी से सक्रिय हैं, जबकि अन्य स्थानों पर तेजी से काम चल रहा है। कर्णप्रयाग को इस मार्ग का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा, जहां बड़े स्तर पर रेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इस परियोजना की एक खास बात यह भी है कि परीक्षण के लिए इंजन और डिब्बे को शिवपुरी-ब्यासी खंड पर ही तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही तकनीकी परीक्षण किया जा सके। यह कदम सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यह रेल लाइन न केवल दूरी कम करेगी, बल्कि खराब मौसम और भूस्खलन के दौरान भी संपर्क बनाए रखने में मदद करेगी। इससे सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होगी और लोगों को एक भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।

चारधाम यात्रा से लेकर अर्थव्यवस्था तक, हर क्षेत्र में दिखेगा असर

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव चारधाम यात्रा पर पड़ेगा। अभी जहां यात्रियों को लंबा और थकाऊ सफर तय करना पड़ता है, वहीं रेल सुविधा आने के बाद यह यात्रा काफी हद तक आसान हो जाएगी। रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग तक तेज पहुंच होने से बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्रा का समय कई घंटों तक घट जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी और यात्रा अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। इसके अलावा सड़क मार्ग पर दबाव भी कम होगा। वर्तमान में भारी संख्या में वाहन एक ही मार्ग पर चलते हैं, जिससे जाम और दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। रेल सेवा शुरू होने के बाद यह दबाव कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित बनेगी। पर्यटन के लिहाज से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड के दूरस्थ और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। इसका सीधा असर स्थानीय व्यवसायों पर पड़ेगा। होटल, परिवहन, गाइड और छोटे व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। 

रेल लाइन का एक और बड़ा फायदा यह होगा कि यह हर मौसम में संपर्क बनाए रखने में सक्षम होगी। पहाड़ों में बारिश और भूस्खलन के कारण सड़कें अक्सर बंद हो जाती हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। रेल सेवा इन परिस्थितियों में भी एक स्थिर विकल्प प्रदान करेगी। आपदा के समय यह परियोजना जीवन रक्षक साबित हो सकती है। राहत और बचाव कार्यों को तेज करने में मदद मिलेगी और आवश्यक सामान को प्रभावित क्षेत्रों तक जल्दी पहुंचाया जा सकेगा। यह परियोजना केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। 

करीब 100 साल पहले देखे गए इस सपने को अब साकार होते देखना अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण है। 1927 में दरवान सिंह नेगी द्वारा किए गए पहले सर्वे से लेकर आज तक इस परियोजना ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी पहाड़ों में रेल को जरूरी बताया था। लंबे समय तक यह योजना ठहराव में रही, लेकिन अब यह तेजी से आगे बढ़ रही है। 2019 में केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी मिलने के बाद काम में तेजी आई और तमाम चुनौतियों के बावजूद परियोजना लगातार आगे बढ़ती रही। आज जब इसका अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है, तो यह साफ है कि आने वाले समय में यह रेल लाइन उत्तराखंड के विकास की रीढ़ बनेगी। कुल मिलाकर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना न केवल एक परिवहन सुविधा है, बल्कि यह उत्तराखंड के सामाजिक और आर्थिक जीवन को नई दिशा देने वाली पहल है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

चारधाम यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, 11वें दिन 4 लाख पार, केदारनाथ मंदिर में सबसे ज्यादा पहुंच रहे श्रद्धालु

उत्तराखंड की वादियों में एक ओर जहां मौसम ने करवट लेकर गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर आस्था का ज्वार अपने चरम पर है। चारधाम यात्रा के 11वें दिन श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड छू लिया है। अब तक 4 लाख से अधिक भक्त बाबा केदार, बद्रीविशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन कर चुके हैं। जिला प्रशासन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बार भी केदारनाथ धाम श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। यहां अब तक 2 लाख 7 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। कठिन चढ़ाई और मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है। 

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार व्यवस्थाओं को दुरुस्त बनाए रखने में जुटी हैं। वहीं बद्रीनाथ धाम में भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अब तक यहां 1 लाख 58 हजार से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं। सड़क मार्ग से सुगम पहुंच और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण बद्रीनाथ में भी भीड़ लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या 1 लाख के पार पहुंच चुकी है, जो इस बार यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।चारधाम यात्रा के दौरान इस बार प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। यात्रा मार्गों पर मेडिकल कैंप, सुरक्षा बलों की तैनाती, ट्रैफिक मैनेजमेंट और रजिस्ट्रेशन सिस्टम को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है। हेलीकॉप्टर सेवाओं के जरिए भी श्रद्धालुओं को सुविधा दी जा रही है, जिससे बुजुर्ग और अस्वस्थ यात्री भी आसानी से दर्शन कर पा रहे हैं। हालांकि, बढ़ती भीड़ के साथ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। 

खासकर केदारनाथ मार्ग पर पैदल यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण भीड़ प्रबंधन एक बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे तय नियमों का पालन करें और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें। स्थानीय कारोबारियों के लिए भी यह यात्रा आर्थिक संजीवनी लेकर आई है। होटल, ढाबे, टूर ऑपरेटर और स्थानीय दुकानदारों की आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वहीं सरकार भी इस यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

उत्तराखंड में बदला मौसम, बारिश-ओलावृष्टि और बर्फबारी का अलर्ट

भीषण गर्मी से जूझ रहे उत्तराखंड के लोगों को अब राहत मिली है। राज्य के कई जिलों में हुई बारिश ने तापमान में गिरावट ला दी है और मौसम सुहावना हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले दिनों में और भी तेज बदलाव के संकेत दिए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, नैनीताल, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश और ओलावृष्टि का ‘तीव्र दौर’ देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम और ज्यादा सख्त हो सकता है। 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की प्रबल संभावना है, जिससे तापमान में अचानक गिरावट आ सकती है। 

इसका असर चारधाम यात्रा मार्गों पर भी देखने को मिल सकता है, खासकर केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। यहां तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश और बिजली चमकने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। मंगलवार को राज्य के 9 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और देहरादून शामिल हैं। वहीं चंपावत और पौड़ी जिलों में ओलावृष्टि भी हुई, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। 

बागेश्वर जिले में आए आंधी-तूफान ने खासा नुकसान पहुंचाया है। तेज हवाओं के चलते कई पेड़ उखड़ गए और टीन की छतें उड़ गईं। इस घटना में तीन लोग घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मौसम विभाग और प्रशासन ने खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अचानक बदलते मौसम के कारण भूस्खलन और रास्तों के बाधित होने का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेना बेहद जरूरी हो गया है। जहां एक तरफ बारिश ने गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर यह बदलता मौसम सावधानी की भी मांग कर रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो चारधाम यात्रा पर निकले हुए हैं या जाने की योजना बना रहे हैं।

इरफान खान की 6वीं पुण्यतिथि : पर्दे का वो सितारा, जिसकी चमक आज भी बरकरार है, प्रशंसकों ने अपने चहेते अभिनेता को दी श्रद्धांजलि 

29 अप्रैल भारतीय सिनेमा के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक गहरी खाली जगह का एहसास भी है। आज महान अभिनेता इरफान खान की छठी पुण्यतिथि है। साल 2020 में इसी दिन उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था, लेकिन उनका काम, उनकी अदाकारी और उनका व्यक्तित्व आज भी करोड़ों दिलों में सांस ले रहा है। सोशल मीडिया पर आज सुबह से ही उनके प्रशंसक उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।इरफान खान उन कलाकारों में से थे, जिन्होंने अभिनय को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक सच्चाई की तरह जिया। उन्होंने अपने करियर में करीब 50 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और हर किरदार को इस तरह निभाया कि वह हमेशा के लिए दर्शकों के दिलों में बस गया। उनकी खासियत यह थी कि वह किसी भी भूमिका में खुद को पूरी तरह ढाल लेते थे, चाहे वह आम आदमी का किरदार हो या फिर कोई जटिल और गहरा व्यक्तित्व।

राजस्थान के टोंक में जन्मे इरफान खान का सफर आसान नहीं रहा। 

उन्होंने नेशनल स्कूल ड्रामा से अभिनय की पढ़ाई की और इसके बाद टीवी से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें छोटे-छोटे रोल मिले, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में एक अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्म पान सिंह तोमर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को इतना सराहा गया कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके अलावा The Lunchbox, Maqbool, Hindi Medium, Life of Pi और Haider जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। 

इरफान खान की अदाकारी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी और गहराई थी। वह बिना ज्यादा संवाद बोले ही अपने चेहरे के भाव और आंखों से पूरी कहानी कह देते थे। उनके अभिनय में एक सच्चाई होती थी, जो सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंचती थी। यही वजह है कि वह हर उम्र और हर वर्ग के दर्शकों के पसंदीदा बन गए। साल 2018 में इरफान खान को न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी का पता चला। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इलाज के दौरान भी अपने काम के प्रति समर्पित रहे। उनकी आखिरी फिल्म अंग्रेजी मीडियम थी, जो उनके निधन से कुछ समय पहले ही रिलीज हुई थी।

संघर्ष से शिखर तक, इरफान खान की जिंदगी और अभिनय की विरासत

इरफान खान का पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की, जहां उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में काम किया। लेकिन उनका सपना हमेशा बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बनाने का था। धीरे-धीरे उन्होंने अपने अभिनय से यह साबित कर दिया कि एक कलाकार की असली ताकत उसके हुनर में होती है, न कि उसकी पृष्ठभूमि में। इरफान खान ने सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी छाप छोड़ी। Slumdog Millionaire, Jurassic World और Inferno जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। 

वह उन चुनिंदा भारतीय कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने विश्व सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बीमारी से जूझते हुए भी उन्होंने जिस साहस और धैर्य का परिचय दिया, वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। 29 अप्रैल 2020 को मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैंस उनके डायलॉग, सीन और तस्वीरें साझा कर उन्हें याद कर रहे हैं। 

कई लोगों के लिए इरफान खान सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक भावना थे, एक ऐसा कलाकार, जिसने सिनेमा को नई ऊंचाई दी। इरफान खान की विरासत उनके काम में हमेशा जिंदा रहेगी। उन्होंने यह साबित किया कि सच्चा कलाकार वही होता है, जो अपने अभिनय से लोगों के दिलों को छू ले। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनका अभिनय हमेशा हमें उनकी याद दिलाते रहेंगे।

Ganga Expressway : यूपी का सबसे लंबा 594 किलोमीटर गंगा एक्सप्रेसवे का आज पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 12 जिलों से होकर गुजरेगा

इंतजार खत्म । आखिरकार उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे आज शुरू होने जा रहा है। यूपी आज एक ऐतिहासिक बुनियादी ढांचा उपलब्धि का साक्षी बनने जा रहा है, जब नरेंद्र मोदी हरदोई में यूपी के सबसे लंबे और आधुनिक एक्सप्रेसवे में से एक गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना सिर्फ एक सड़क नहीं बल्कि प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास की नई धुरी मानी जा रही है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी हिस्सों से जोड़ते हुए एक हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण करता है, जो प्रदेश की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखता है। कार्यक्रम को लेकर हरदोई में व्यापक तैयारियां की गई हैं और जनसभा स्थल को भव्य रूप दिया गया है।

इस एक्सप्रेसवे का 99 किलोमीटर हिस्सा हरदोई जिले से होकर गुजरता है, जिससे यह क्षेत्र सीधे विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा। 

कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं एसपीजी के साथ हजारों पुलिसकर्मी तैनात हैं। बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है, जिससे आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। इस कार्यक्रम में करीब डेढ़ लाख लोगों के जुटने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सीधे हरदोई पहुंचेंगे, जहां वे इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। यह दौरा राजनीतिक और विकासात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया गंगा एक्सप्रेसवे 6-लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे है, जिसे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। 

यह मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी – जहां पहले 10 से 12 घंटे लगते थे, अब यह दूरी लगभग 6 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे यात्रियों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। परियोजना की एक खास विशेषता शाहजहांपुर में बनी 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी है, यह देश का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है जहां जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान भी उतर सकते हैं। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। गंगा एक्सप्रेसवे को एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है । इसके किनारे करीब 2,635 हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब बनाए जाएंगे, जिससे उद्योगों को नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

गंगा एक्सप्रेसवे से प्रदेश की बदलेगी विकास की तस्वीर

गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। यह परियोजना सिर्फ यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का काम करेगी। सबसे बड़ा फायदा लॉजिस्टिक्स सेक्टर को होगा । माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे प्रदेश में निवेश आकर्षित होगा और नए उद्योग स्थापित होंगे। किसानों के लिए भी यह एक्सप्रेसवे बेहद फायदेमंद साबित होगा । उन्हें अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में कम समय लगेगा और बेहतर कीमत मिलेगी। 

इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। पर्यटन के क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा । मेरठ से प्रयागराज तक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय कारोबार को फायदा मिलेगा। रोजगार के लिहाज से भी यह परियोजना अहम है, निर्माण के दौरान हजारों लोगों को काम मिला और आगे भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बनेंगे। 

यह एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार कॉरिडोर से जुड़कर एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बनेगा। इससे उत्तर प्रदेश में पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मजबूत होगी। गंगा एक्सप्रेसवे एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है । यह न केवल आवागमन को आसान बनाएगा बल्कि औद्योगिक विकास, कृषि उन्नति और क्षेत्रीय संतुलन को भी नई दिशा देगा। आने वाले समय में यह परियोजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ साबित हो सकती है।

गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होते ही यूपी में हो जाएंगे आठ बड़े एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और मजबूत हो गया है। इस नए कॉरिडोर के जुड़ने के बाद अब प्रदेश में कुल 8 प्रमुख एक्सप्रेसवे हो गए हैं, जो राज्य को देश के सबसे बेहतर सड़क नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल करते हैं। इनमें यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (आंशिक रूप से चालू), दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और अब गंगा एक्सप्रेसवे शामिल हैं। 

इन सभी परियोजनाओं ने मिलकर उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का मजबूत जाल तैयार किया है। जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी। साथ ही यह एक्सप्रेसवे पश्चिम, मध्य और पूर्वी यूपी को एक साथ जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा। इन एक्सप्रेसवे के जरिए औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। आने वाले समय में प्रस्तावित और निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे भी जुड़ने से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे हब बनता जा रहा है।

हिमाचल में आज बजेगी पंचायत चुनाव की डुगडुगी, तारीखों के एलान के साथ ही लागू होगी आचार संहिता

पहाड़ों की ठंडी हवा के बीच आज हिमाचल की सियासत में हलचल तेज है। गांव-गांव तक लोकतंत्र का रंग चढ़ने जा रहा है। लोग चौपालों में बैठकर इसी चर्चा में जुटे हैं कि आखिर चुनाव कब होंगे। कहीं चाय की दुकानों पर बहस चल रही है तो कहीं संभावित उम्मीदवार अपने समीकरण साधने में लगे हैं। आज दोपहर बाद सब कुछ साफ हो जाएगा, जब पंचायत चुनाव का आधिकारिक एलान होगा। राज्य चुनाव आयोग ने दोपहर 3:40 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें चुनावी तारीखों की घोषणा की जाएगी। जैसे ही तारीखों का एलान होगा, पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसका मतलब साफ है कि सरकार अब कोई नई योजना, भर्ती, टेंडर या उद्घाटन-शिलान्यास नहीं कर पाएगी। 

इस बार पंचायत चुनाव कई मायनों में खास रहने वाले हैं। प्रदेश के करीब 51 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 85 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 50 हजार बुजुर्ग भी शामिल हैं, जो लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी निभाने को तैयार हैं। गांवों में चुनाव को लेकर उत्साह साफ देखा जा सकता है। पंचायती राज व्यवस्था की बात करें तो इस बार कुल 31,214 पदों पर चुनाव होना है। 

इसमें पंचायत सदस्य, प्रधान-उपप्रधान से लेकर जिला परिषद सदस्य तक शामिल हैं। यही वजह है कि यह चुनाव सिर्फ गांव की सरकार बनाने का ही नहीं, बल्कि स्थानीय विकास की दिशा तय करने का भी बड़ा मौका माना जा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मतदाता सूचियां अधिसूचित कर दी गई हैं और वार्ड स्तर पर उनकी प्रतियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने का रास्ता साफ हो गया है।

शहरी निकायों में पहले ही लग चुकी है आचार संहिता

पिछले दिनों हिमाचल में नगर निकाय चुनाव का एलान किया जा चुका है, जिसके चलते कई शहरी क्षेत्रों में पहले ही आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है। जिला शिमला के रोहड़ू नगर परिषद और नारकंडा नगर पंचायत के चुनाव कार्यक्रम भी जारी किए जा चुके हैं। इन दोनों जगहों पर 22 मई को मतदान होना तय है। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 5, 6 और 7 मई को नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 11 मई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक रखा गया है। शहरी निकायों में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रदेश के 53 नगर निकायों में आचार संहिता लागू हो चुकी है। 

अब पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद यह दायरा पूरे प्रदेश में फैल जाएगा। पंचायत चुनावों का असर सीधे तौर पर गांवों के विकास पर पड़ता है। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का जिम्मा काफी हद तक पंचायत प्रतिनिधियों पर ही होता है। ऐसे में यह चुनाव आम लोगों के लिए बेहद अहम हो जाते हैं।राजनीतिक नजरिए से भी यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 

हालांकि पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की नजर इन पर रहती है। यही वजह है कि गांव स्तर पर भी चुनावी सरगर्मी तेज हो जाती है। आने वाले दिनों में हिमाचल के गांवों में चुनावी रंग और गहरा होगा। उम्मीदवार अपने-अपने तरीके से जनता को रिझाने की कोशिश करेंगे। कहीं वादों की बारिश होगी तो कहीं विकास कार्यों का हिसाब दिया जाएगा। आज का दिन हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद अहम है। जैसे ही चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा, पूरे प्रदेश में लोकतंत्र का पर्व शुरू हो जाएगा। गांव-गांव में चुनावी शोर गूंजेगा और जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए तैयार हो जाएगी।

हिमाचल में पंचायत चुनाव का हुआ एलान, तीन चरणों में होंगे मतदान, गांव-गांव में लोकतंत्र का महापर्व शुरू

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही पूरे प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा करते हुए आचार संहिता लागू कर दी, जिससे अब शासन-प्रशासन पूरी तरह चुनावी मोड में आ गया है। मंगलवार को राज्य चुनाव आयुक्त अनिल कांची ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस बार प्रदेश की 3,754 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराए जाएंगे। मतदान तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को संपन्न होगा। 

मतदान का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक तय किया गया है, ताकि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मतदाताओं को भी सुविधा मिल सके। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आयोग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पंचायत स्तर के पदों की मतगणना मतदान समाप्त होते ही संबंधित पंचायत मुख्यालयों में की जाएगी, जिससे परिणाम जल्द सामने आ सकें। वहीं, बीडीसी और जिला परिषद सदस्यों के मतों की गिनती 31 मई को सुबह 9 बजे से ब्लॉक मुख्यालयों में होगी। चुनाव की निगरानी को सख्त बनाने के लिए हर मतगणना केंद्र पर वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है। 

इसके अलावा संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इससे चुनावी पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सबसे मजबूत आधार गांव को सशक्त करने का अवसर है। इस बार आयोग की तैयारियां और सख्ती यह संकेत देती हैं कि चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। गांव-गांव में अब चुनावी हलचल तेज होगी और आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की पूरी संभावना है।

हिमाचल में आदर्श आचार संहिता लागू, सरकारी कामकाज पर सख्ती 

हिमाचल में पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके लागू होते ही सरकार और प्रशासन के कामकाज पर कई तरह की पाबंदियां लग गई हैं। अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक कोई भी नई योजना की घोषणा, शिलान्यास या सरकारी संसाधनों का राजनीतिक उपयोग नहीं किया जा सकेगा। अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे निष्पक्षता बनाए रखें और किसी भी तरह के दबाव में न आएं। चुनाव प्रक्रिया का पूरा शेड्यूल भी विस्तार से तय कर दिया गया है। नामांकन प्रक्रिया 7, 8 और 11 मई को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगी। इसके बाद 12 मई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जिसमें उम्मीदवारों के दस्तावेजों की पड़ताल होगी। 14 और 15 मई को नाम वापसी का समय रखा गया है, जबकि 15 मई को ही अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी और चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। मतदान केंद्रों की सूची 7 मई या उससे पहले सार्वजनिक कर दी जाएगी, जिससे मतदाताओं को समय रहते जानकारी मिल सके। 

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश के 51 शहरी निकायों के चुनाव पहले ही घोषित किए जा चुके हैं और उनके लिए 17 मई को मतदान होगा।मतदाताओं की भागीदारी इस बार काफी अहम रहने वाली है। राज्य में कुल 50 लाख 79 हजार 48 मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 25 लाख 67 हजार 777 पुरुष और 25 लाख 11 हजार 249 महिलाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि इस बार करीब 52 हजार युवा पहली बार मतदान करेंगे, जिनमें लगभग 23 हजार महिलाएं हैं। यह आंकड़ा बताता है कि युवा वर्ग इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। पूरे प्रदेश में 21,678 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। लाहौल-स्पीति के काजा क्षेत्र के लांगजा स्थित कामो पाठशाला में 4,587 मीटर की ऊंचाई पर सबसे ऊंचा मतदान केंद्र बनाया गया है, जो इस चुनाव की खास पहचान बनेगा।वहीं, मतदाताओं की संख्या के लिहाज से भी काफी विविधता देखने को मिलती है। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब क्षेत्र की एक पंचायत में सबसे अधिक मतदाता हैं, जबकि किन्नौर के पूह क्षेत्र के सुमरा गांव में मात्र 178 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इन चुनावों में कुल 31,182 पदों पर मतदान होगा, जिनमें 3,754 प्रधान, 3,754 उपप्रधान, 21,654 वार्ड सदस्य, 1,769 बीडीसी सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। हर पद के लिए अलग-अलग बैलेट पेपर की व्यवस्था की गई है, जिससे मतदान प्रक्रिया स्पष्ट और व्यवस्थित रहे।

मतदाताओं को इस बार पांच अलग-अलग रंगों के मतपत्र दिए जाएंगे वार्ड सदस्य के लिए सफेद, उपप्रधान के लिए पीला, प्रधान के लिए हल्का हरा, बीडीसी सदस्य के लिए गुलाबी और जिला परिषद सदस्य के लिए हल्का नीला रंग निर्धारित किया गया है। इससे मतदाताओं को मतदान के दौरान किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होगी। डिजिटल सुविधा को बढ़ावा देते हुए आयोग ने मतदाताओं को ‘वोटर सारथी’ ऐप और निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के जरिए अपना नाम जांचने की सुविधा भी दी है। इससे मतदाता घर बैठे ही अपनी जानकारी सत्यापित कर सकते हैं और मतदान के दिन किसी परेशानी से बच सकते हैं।

प्रधानमंत्री का काशी प्रवास : चुनावी रैलियों और सिक्किम दौरे के बाद आज पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचेंगे

दो दिन के सिक्किम दौरे के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। काशी में उनके आगमन को लेकर उत्साह अपने चरम पर है। शहर की गलियों से लेकर घाटों तक हर जगह हलचल है और लोग अपने सांसद के स्वागत के लिए तैयार हैं। पिछले 11 वर्षों में पीएम मोदी का यह 54वां दौरा होगा, जो यह दिखाता है कि काशी उनके दिल के कितने करीब है। इससे पहले वह नवंबर 2025 में यहां आए थे। इस बार का दौरा खास इसलिए भी है क्योंकि यह 2026 का उनका पहला काशी प्रवास है। 

प्रधानमंत्री के आगमन से पहले ही भाजपा संगठन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन वाराणसी पहुंच चुके हैं, जहां उनका स्वागत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस दौरान डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे। काशी के चौसठी घाट पर बंगाली महिलाओं ने शंखनाद कर माहौल को और भी खास बना दिया। महिलाओं ने पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत का भरोसा जताते हुए इस आयोजन को उत्सव का रूप दिया। प्रधानमंत्री इस दौरे में काशीवासियों को 6,332.08 करोड़ रुपये की 163 परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें 1,054.69 करोड़ रुपये की 50 परियोजनाओं का लोकार्पण और 5,277.39 करोड़ रुपये की 113 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। 

इन परियोजनाओं में रेल और सड़क से जुड़े बड़े कामों के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है। खास तौर पर सिग्नेचर ब्रिज और कबीरचौरा मंडलीय चिकित्सालय में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की आधारशिला को इस दौरे की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। प्रधानमंत्री का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहने वाला है। वह शाम 4 बजे के बाद वाराणसी पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर के जरिए बरेका हेलीपैड पर उतरेंगे। इसके बाद वह बीएलडब्ल्यू ग्राउंड में आयोजित एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 40 हजार महिलाएं शामिल होंगी। इस सभा में पीएम मोदी ‘नारी शक्ति वंदन’ से जुड़े मुद्दों पर महिलाओं से संवाद करेंगे और उनकी राय भी जानेंगे। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का विकास, महिला सशक्तिकरण और पूर्वांचल पर फोकस

प्रधानमंत्री का यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि विकास और जनसंवाद दोनों का बड़ा मंच बनने जा रहा है। जिन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास होगा, उनका सीधा फायदा न सिर्फ वाराणसी बल्कि पूरे पूर्वांचल और पड़ोसी बिहार के लोगों को भी मिलेगा।

कबीरचौरा अस्पताल में बनने वाला सुपर स्पेशियलिटी सेंटर स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा। इससे गंभीर बीमारियों का इलाज अब स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा और लोगों को बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। वहीं रेल और सड़क परियोजनाओं से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। रामनगरी अयोध्या से मुम्बई के लिए अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन का शुभारंभ पीएम मोदी वाराणसी से वर्चुअल रूप से हरी झंडी दिखाकर करेंगे। 

यह ट्रेन अयोध्या धाम जंक्शन से शाम 04.45 बजे रवाना होगी। अयोध्या से मुम्बई के बीच आधुनिक सुविधाओं से युक्त अमृत भारत एक्सप्रेस का नियमित रूप से (ट्रेन संख्या- 22111/22112) के रूप में परिचालन किया जाएगा। हालांकि अभी समय सारिणी और किराया नहीं तय हुआ है। मंगलवार को पहले फेरे में ट्रेन नंबर- 02212 अयोध्या धाम- लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत इनॉगरल स्पेशल के रूप में चलेगी। इस ट्रेन में स्लीपर और जनरल कोच के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होगी। उल्लेखनीय है कि काशी पहले ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जानी जाती है, ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होगा। राजनीतिक नजरिए से भी यह दौरा अहम माना जा रहा है। 

हाल ही में प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम में चुनावी रैलियां की हैं। ऐसे में काशी का यह दौरा संगठन और कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा का काम करेगा। भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। जगह-जगह स्वागत की तैयारियां की गई हैं और शहर को सजाया गया है। दो दिन के इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और लोगों से सीधे संवाद करेंगे। यह दौरा एक बार फिर यह संदेश देगा कि काशी और उसके विकास को लेकर केंद्र सरकार कितनी गंभीर है। पीएम मोदी का यह काशी दौरा विकास, जनभागीदारी और राजनीतिक संदेश तीनों का संगम बनने जा रहा है।

यूपी के चर्चित और तेजतर्रार आईपीएस बंगाल चुनाव ड्यूटी में सुर्खियों में, सख्त कार्यशैली से भड़के विपक्ष ने भाजपा का एजेंट कहा

उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में हैं। सख्त छवि और तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले शर्मा इन दिनों पश्चिम बंगाल में चुनावी ड्यूटी पर तैनात हैं, जहां उनकी सक्रियता और बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। चुनावी हिंसा पर काबू पाने के लिए सख्ती दिखा रहे इस अधिकारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर एक उम्मीदवार का नाम लेकर चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने न सिर्फ राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत भी इससे अछूती नहीं रही। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में चुनाव आयोग ने अजय पाल शर्मा को पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया है। 

उनकी जिम्मेदारी चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की हिंसा या मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाओं को रोकना है। इसी क्रम में सामने आए एक वीडियो में वह टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर के बाहर खड़े होकर सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आते हैं। वीडियो में वह स्पष्ट कहते सुनाई देते हैं कि यदि किसी ने मतदाताओं को प्रभावित करने या डराने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। टीएमसी की ओर से इस पर आपत्ति जताई गई है और इसे सत्ता के दबाव में की गई कार्रवाई बताया जा रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर सीधे अजय पाल शर्मा और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। 

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह अधिकारी निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय भाजपा के “एजेंट” के रूप में काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, चुनाव जैसे संवेदनशील समय में किसी अधिकारी द्वारा इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। अखिलेश यादव ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जब उनकी सरकार सत्ता में आएगी, तो ऐसे अधिकारियों को “खोजकर और खोदकर निकाला जाएगा” और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल चुनाव की निष्पक्षता पर असर डालती हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की साख को भी नुकसान पहुंचाती हैं। 

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के संरक्षण में कुछ अधिकारी अपनी सीमाओं को लांघ रहे हैं और राजनीतिक एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि ऐसे “अनरजिस्टर्ड अंडरग्राउंड एलिमेंट्स” को चिन्हित कर कार्रवाई जरूरी है। अखिलेश यादव का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश सरकार की छवि से भी जोड़ा और ‘नारी वंदन’ जैसे अभियानों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह का “अभद्र वीडियो” सार्वजनिक होता है, तो इससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासन की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या ऐसे माहौल में महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती हैं।

बंगाल चुनाव में राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है। एक ओर जहां टीएमसी इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर हमला करार दे रहे हैं। भाजपा की ओर से हालांकि इस मुद्दे पर सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत ही अधिकारी काम कर रहे हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। चुनाव के दौरान इस तरह के विवाद नई बात नहीं हैं, लेकिन किसी अधिकारी का नाम लेकर चेतावनी देना और उसका वीडियो वायरल होना स्थिति को और संवेदनशील बना देता है। इससे न केवल संबंधित अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी बहस शुरू हो जाती है। 

दूसरी ओर प्रशासनिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। कुछ पूर्व अधिकारियों का कहना है कि चुनाव ड्यूटी के दौरान सख्ती जरूरी होती है, लेकिन भाषा और तरीके पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि किसी तरह की गलत व्याख्या की गुंजाइश न रहे। वहीं, कुछ लोग इसे महज कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं। फिलहाल, यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझता जा रहा है। 

सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर बहस जारी है, जहां लोग अपने-अपने नजरिए से इसे देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या किसी तरह की आधिकारिक जांच या कार्रवाई होती है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका कितनी संवेदनशील होती है और उन्हें किस तरह संतुलन बनाए रखना चाहिए। निष्पक्षता और सख्ती के बीच की यह महीन रेखा ही ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।

केंद्र सरकार ने दी पेंशनभोगियों को बड़ी राहत, अब बिना कागजी झंझट सीधे खाते में मिलेगा चिकित्सा भत्ता

देश के लाखों पेंशनभोगियों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को काफी हद तक कम कर देगा। उम्र के इस पड़ाव में जहां लोगों को आराम और सुविधा की जरूरत होती है, वहीं अब उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने या कागजी प्रक्रिया से गुजरने की मजबूरी नहीं रहेगी। सरकार ने चिकित्सा भत्ते से जुड़ी व्यवस्था को इतना आसान बना दिया है कि अब यह सुविधा लगभग स्वतः ही मिलने लगेगी। Ministry of Finance द्वारा जारी आदेश में National Pension System से जुड़े पेंशनभोगियों के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (चिकित्सा भत्ता) की प्रक्रिया को सरल और स्वचालित बना दिया गया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अब बुजुर्गों को न तो बार-बार चिकित्सा बिल जमा करने होंगे और न ही किसी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। नई व्यवस्था के तहत अब यह भत्ता सीधे पेंशनभोगियों के बैंक खाते में जमा होगा। पूरी प्रक्रिया बैंकिंग सिस्टम के जरिए संचालित की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। 

सरकार का यह कदम खासतौर पर उन बुजुर्गों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें स्वास्थ्य कारणों से बाहर जाना मुश्किल होता है। इस नई प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका Central Pension Accounting Office निभाएगा, जो पहले लाभार्थी की पात्रता की जांच करेगा। पात्र पाए जाने पर बैंक को स्पेशल सील अथॉरिटी जारी की जाएगी। इसके बाद बैंक का सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेंटर तय दर के अनुसार हर तीन महीने में चिकित्सा भत्ते की राशि सीधे खाते में जमा कर देगा। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब पेंशनभोगियों को किसी प्रकार का दावा या बिल प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरी प्रक्रिया स्वतः संचालित रहेगी, जिससे समय की बचत के साथ-साथ पारदर्शिता भी बढ़ेगी। 

यह बदलाव डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, पेंशनभोगियों को यह विकल्प भी दिया गया है कि वे चिकित्सा भत्ते के स्थान पर Central Government Health Scheme की बाह्य रोगी सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत पहले बैंक भुगतान करेंगे और बाद में सरकार उन्हें इसकी प्रतिपूर्ति करेगी। हालांकि सरकार ने प्रक्रिया को आसान जरूर बना दिया है, लेकिन कुछ आवश्यक नियम अब भी लागू रहेंगे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है हर साल नवंबर में जीवन प्रमाण पत्र जमा करना। यह प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करता है कि पेंशनभोगी जीवित है और भुगतान जारी रहना चाहिए।

नए नियमों से बदली व्यवस्था के तहत परिवार को भी मिलेगा लाभ

नई व्यवस्था के तहत न केवल पेंशनभोगियों को राहत मिली है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अगर किसी पेंशनभोगी की मृत्यु हो जाती है और परिवार के पात्र सदस्य का नाम पहले से रिकॉर्ड में दर्ज है, तो उन्हें सिर्फ मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ बैंक में आवेदन करना होगा। इसके बाद चिकित्सा भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा। यदि परिवार के सदस्य का नाम पहले से दर्ज नहीं है, तो उन्हें संबंधित विभाग के माध्यम से स्वीकृति लेनी होगी। इस प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में सरल बनाया गया है, ताकि परिवार को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। 

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई पेंशनभोगी अपना बैंक या शाखा बदलता है, तो उसकी प्रक्रिया पहले की तरह ही रहेगी और उसे निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। हालांकि, नई व्यवस्था में यह सुनिश्चित किया गया है कि इस बदलाव से भुगतान में किसी प्रकार की रुकावट न आए। सबसे महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि अब चिकित्सा भत्ता पूरी तरह से त्रैमासिक आधार पर स्वतः जमा होगा। इससे पेंशनभोगियों को नियमित रूप से आर्थिक सहायता मिलती रहेगी और उन्हें किसी भी प्रकार की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा। जीवन प्रमाण पत्र को लेकर भी सरकार ने डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराया है, जिससे बुजुर्ग घर बैठे ही अपना प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। 

इसके अलावा, बैंक जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। लेकिन अगर नवंबर में यह प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया, तो दिसंबर से भुगतान प्रभावित हो सकता है। केंद्र सरकार का यह कदम पेंशनभोगियों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। इससे न केवल उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी राहत मिलेगी। डिजिटल और सरल प्रक्रिया के माध्यम से अब पेंशन और चिकित्सा भत्ते का लाभ अधिक पारदर्शी और तेज तरीके से लोगों तक पहुंच सकेगा।