डेडलाइन, धमकी और बढ़ता तनाव : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को फिर दी तबाही की चेतावनी, चार घंटे में ढांचे मिटाने का दावा
पूरी दुनिया हर सुबह सोचती है अमेरिका ईरान के बीच जारी युद्ध थम जाएगा लेकिन उसे कोई अभी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रुकने के लिए तैयार नहीं है वहीं ईरान भी अमेरिका को लगातार धमकी दे रहा है। इसी बीच सोमवार को ट्रंप ने एक बार फिर तीखा बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान मंगलवार रात तक समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका चार घंटे के भीतर ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना के पास ऐसी योजना है जिसके तहत ईरान के अहम ढांचे, पुलों, बिजली संयंत्रों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ताकत के दम पर ईरान के हर पुल को ध्वस्त किया जा सकता है और उसके बिजली संयंत्रों को पूरी तरह निष्क्रिय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “हमारे पास योजना तैयार है।
अगर हम चाहें तो मंगलवार रात 12 बजे तक ईरान के हर पुल को खत्म कर सकते हैं। बिजली संयंत्रों को बंद कर दिया जाएगा, जला दिया जाएगा और फिर कभी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यह सब चार घंटे के भीतर भी संभव है।” ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी मानी जा रही है। ट्रंप ने ईरान को पूर्वी समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे तक समझौते के लिए तैयार होने की समयसीमा भी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलता है, तो अमेरिका बातचीत के रास्ते आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते की स्थिति में अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करने को तैयार है। ट्रंप ने कहा, “अगर वे समझौता करते हैं, तो हम उनके राष्ट्र के पुनर्निर्माण में भी शामिल हो सकते हैं।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक ढांचे पर हमले की स्थिति में क्या यह युद्ध अपराध माना जाएगा, तो ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी कार्रवाई को युद्ध अपराध नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर लोग “आजादी के लिए तकलीफ सहने को तैयार हैं” और वे चाहते हैं कि अमेरिका और दबाव बनाए।
इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी ट्रंप के साथ खड़े होकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब तक जो हमले हुए हैं, वे सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले समय में हमले और तेज हो सकते हैं। हेगसेथ ने कहा, कल आज से भी ज्यादा हमले होंगे। उसके बाद ईरान के पास फैसला लेने का विकल्प होगा। उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति ढिलाई नहीं बरतते।
ईरान ने 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराया, तनाव और बढ़ा
तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने कहा कि वह अस्थायी समाधान नहीं चाहता बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दबाव और धमकियों के बीच कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस रुख ने दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया है। अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का दबाव भी बढ़ा दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने तेल की आवाजाही में रुकावट जारी रखी, तो नागरिक ठिकानों समेत बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि अब ईरान को स्पष्ट विकल्प दिया गया है या तो समझौता करे या फिर व्यापक सैन्य कार्रवाई का सामना करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीति चरणबद्ध तरीके से दबाव बढ़ाने की है।
उनके मुताबिक, “आज के हमले सिर्फ शुरुआत हैं, आगे इससे कहीं ज्यादा तीव्र कार्रवाई हो सकती है।” ट्रंप प्रशासन का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कई देशों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। इसके बावजूद दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है, जिससे हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं।

