अब मोबाइल से मिनटों में मिलेगा लोन : RBIH ला रहा नया डिजिटल ऐप, एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे कई बैंक विकल्प

देश में लोन लेने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) एक नया डिजिटल ऐप तैयार कर रहा है, जिसके जरिए लोग सीधे अपने मोबाइल फोन से औपचारिक कर्ज के लिए आवेदन कर सकेंगे। यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) नाम का यह प्लेटफॉर्म उधार लेने वालों और कर्ज देने वाले संस्थानों को एक ही जगह पर जोड़ने का काम करेगा, जिससे लोन लेने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल हो जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, इस ऐप की शुरुआत छोटे कर्ज और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोन से की जाएगी। इसमें डिजिटल किसान क्रेडिट, खेती के लिए ऋण और ग्रामीण जरूरतों से जुड़े फाइनेंस विकल्प शामिल होंगे। आगे चलकर सोना, डेयरी, हाउसिंग, पर्सनल और वाहन लोन जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा कॉमन प्लेटफॉर्म तैयार करना है जहां उधार लेने वाले व्यक्ति को अलग-अलग बैंकों या ऐप्स पर जाने की जरूरत न पड़े। ULI के जरिए पहचान सत्यापन से लेकर लोन स्वीकृति और राशि ट्रांसफर तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल और तेज हो सकेगी। ULI एक डिजिटल इंटरफेस के रूप में काम करेगा, जो डेटा सेवा देने वाली संस्थाओं और बैंकों या अन्य लेंडर्स के बीच सेतु बनेगा। 

इससे लोन लेने की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और कागजी औपचारिकताओं में भी कमी आएगी। फिलहाल यह ऐप शुरुआती चरण में है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में इससे लोन लेने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। ULI की शुरुआत किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण से की जाएगी। इससे एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बैंकों के लोन विकल्प उपलब्ध होंगे। उधार लेने वाला व्यक्ति अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सबसे बेहतर ऑफर चुन सकेगा।

इस सिस्टम से जुड़ने के लिए सभी रेगुलेटेड संस्थानों को ULI के मुख्य ढांचे से तकनीकी रूप से कनेक्ट होना होगा। साथ ही हर बैंक या लेंडर को लोन मंजूरी से पहले अपनी तय क्रेडिट पॉलिसी का पालन करना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह परियोजना शुरुआती दौर में है और इसे पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा।

UPI मॉडल की तरह काम करेगा ULI, एक ही जगह पर मिलेगा पूरा डेटा 

ULI का ग्राहक वाला हिस्सा देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल पर आधारित होगा। इसमें मुख्य सिस्टम के साथ एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिसे रेगुलेटर का समर्थन मिलेगा। इसी तरह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने UPI सिस्टम के साथ BHIM ऐप को जोड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, ULI प्लेटफॉर्म से अब तक 89 से अधिक लेंडर और 53 से ज्यादा डेटा सर्विस देने वाली संस्थाएं जुड़ चुकी हैं। ये संस्थाएं मिलकर 141 तरह की जानकारी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे लोन प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी है। यह प्लेटफॉर्म लेंडिंग सेक्टर की कई बड़ी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखता है। अब तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अलग-अलग एपीआई से जुड़ना पड़ता था और वैकल्पिक डेटा का सही उपयोग करना मुश्किल होता था। ULI इन सभी दिक्कतों का एक साथ समाधान देता है। 

इसे एक कॉमन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां जमीन के रिकॉर्ड, क्रेडिट स्कोर, आय सत्यापन और डेयरी जैसी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी। RBIH इन डेटा सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर उनकी सेवाओं को प्लेटफॉर्म से जोड़ रहा है, जिससे लेंडर्स को अलग-अलग सिस्टम से जुड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टैंडर्ड एपीआई और रियल टाइम डेटा की सुविधा मिलने से लोन प्रोसेसिंग तेज और सस्ती हो सकेगी। अनुमान है कि इस सिस्टम से लेंडिंग लागत में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इससे छोटे उधारकर्ताओं, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

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