वेस्ट एशिया तनाव का असर : कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़े, एयर टरबाइन फ्यूल भी महंगा; होटल और हवाई यात्रा पर पड़ेगा असर

वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। राजधानी दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर 195.50 रुपये महंगा होकर 2,078.50 रुपये का हो गया है। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत में 218 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो हाल के महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 1 मार्च को भी 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 114.50 रुपये की वृद्धि की गई थी।

 लगातार हो रही बढ़ोतरी से छोटे कारोबारियों और सेवा क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ गया है। खासकर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस और बेकरी जैसे कारोबार कमर्शियल गैस पर निर्भर होते हैं, इसलिए इनकी लागत में सीधा असर पड़ेगा। कमर्शियल गैस महंगी होने से खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। चाय, नाश्ता, थाली, फास्ट फूड और होम डिलीवरी सेवाओं की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत

कमर्शियल गैस महंगी होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ न बढ़ाने का फैसला किया है।

सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, एलपीजी की लागत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।

अगर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में घरेलू सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर ही बिक रहा है। पिछले साल मार्च में केंद्र सरकार द्वारा 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती किए जाने के बाद से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

विमान ईंधन ATF में भी बड़ा उछाल

कमर्शियल गैस के साथ-साथ विमान ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। 1 अप्रैल से दिल्ली में ATF की कीमत बढ़कर करीब 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। पिछले महीने इसकी कीमत 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर थी। इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों की लागत में अचानक इजाफा कर दिया है।

एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में ATF का हिस्सा 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस के लिए संचालन लागत बढ़ना तय है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में हवाई किरायों पर पड़ सकता है। गर्मियों की छुट्टियों के सीजन में यात्रा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

कमर्शियल गैस और ATF दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। एक ओर होटल और रेस्टोरेंट महंगे होंगे, तो दूसरी ओर हवाई यात्रा भी महंगी हो सकती है। इससे सेवा क्षेत्र में लागत बढ़ेगी और इसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी रहने से ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

“उत्तराखण्ड साहित्य भूषण” से डॉ. जितेन ठाकुर सम्मानित, मुख्यमंत्री धामी बोले- नई पीढ़ी तक पहुंचेगी सांस्कृतिक विरासत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित “उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025” में प्रतिभाग करते हुए प्रदेश के वरिष्ठ और युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया। उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “उत्तराखण्ड साहित्य भूषण सम्मान” से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का सशक्त माध्यम भी है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने “उत्तराखण्ड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” से डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं सहित विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को भी सम्मानित किया। साहित्य नारी वंदन सम्मान के अंतर्गत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य के लिए प्रो. दिनेश चमोला को सम्मानित किया गया। वहीं उत्तराखण्ड मौलिक रचना पुरस्कार के अंतर्गत डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाईं को सम्मान मिला। उत्कृष्ट कुमाऊंनी एवं गढ़वाली साहित्य के लिए तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि “उत्तराखण्ड साहित्य भूषण सम्मान” से सम्मानित डॉ. जितेन ठाकुर न केवल राज्य बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि सम्मानित साहित्यकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

साहित्यिक विरासत को संजोने के लिए ‘साहित्य ग्राम’ की पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र रही है। हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने यहां के साहित्यकारों को प्रेरणा दी है। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार विभिन्न पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित कर रही है और ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में दो “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं। इन साहित्य ग्रामों में साहित्यकारों को रचना के लिए शांत वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखण्ड की बिखरी साहित्यिक धरोहर को संकलित और संरक्षित करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है और आज के समय में यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, बोली और परंपराओं से जोड़ने में साहित्य की बड़ी भूमिका है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य के साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूत करेंगे और उत्तराखण्ड की पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करेंगे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, खजान दास, विधायक सविता कपूर सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

अच्छी खबर : हर जिले में सस्ता केरोसिन उपलब्ध कराने की तैयारी, पेट्रोल पंपों पर नई सुविधा शुरू करेगी केंद्र सरकार

देशभर में आम लोगों को राहत देने और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक अहम और सराहनीय पहल का फैसला लिया है। अब पेट्रोल पंपों पर भी केरोसिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इस योजना के तहत हर जिले में कम से कम दो पेट्रोल पंपों को केरोसिन वितरण की अनुमति दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों, दूर-दराज के इलाकों और सीमित संसाधनों वाले परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले के मुताबिक तेल कंपनियां चयनित पेट्रोल पंपों पर केरोसिन का स्टॉक रखेंगी। शुरुआती चरण में प्रत्येक अधिकृत पंप पर करीब 5 हजार लीटर केरोसिन का भंडारण किया जा सकेगा। इससे जरूरत के समय तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित होगी और लोगों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। लंबे समय से कई राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला केरोसिन कम होता जा रहा था, जिससे जरूरतमंद परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही थी। अब पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता बढ़ने से इस समस्या का समाधान हो सकता है। यह कदम खासकर उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगा जहां एलपीजी या पाइप्ड गैस की पहुंच अभी सीमित है। पहाड़ी इलाकों, ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में आज भी केरोसिन का उपयोग खाना बनाने, लैंप जलाने और छोटे व्यवसायों में किया जाता है। पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता से इन लोगों को नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।

तेल कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय मांग के आधार पर वितरण की योजना तैयार करें। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि केरोसिन की बिक्री पारदर्शी तरीके से हो और कालाबाजारी की संभावना कम हो। डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी प्रणाली के जरिए स्टॉक और बिक्री का डेटा रखा जाएगा। इससे वितरण व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनेगी। इस फैसले का बड़ा फायदा यह भी होगा कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी केरोसिन आसानी से उपलब्ध रहेगा। प्राकृतिक आपदा, बिजली संकट या अन्य आपात स्थितियों में केरोसिन एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ईंधन के रूप में काम आता है। पेट्रोल पंपों के नेटवर्क का उपयोग करके सरकार इसकी पहुंच तेजी से बढ़ा सकती है।

आम लोगों को राहत और वितरण प्रणाली मजबूत करने की दिशा में कदम

केंद्र सरकार की इस पहल को ऊर्जा पहुंच के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पेट्रोल पंपों का नेटवर्क देश के लगभग हर जिले में मौजूद है, ऐसे में इस सुविधा से वितरण प्रणाली मजबूत होगी। पहले केरोसिन लेने के लिए लोगों को सरकारी डिपो या सीमित दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर आपूर्ति बाधित रहती थी। अब पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। सरकार का उद्देश्य यह भी है कि जरूरतमंद लोगों को सुलभ और नियंत्रित दरों पर ईंधन उपलब्ध कराया जाए। तेल कंपनियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह तय करेंगी कि किन पंपों पर यह सुविधा शुरू की जाए। प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाएगी जहां केरोसिन की मांग अधिक है या जहां वैकल्पिक ईंधन के साधन कम हैं। इसके अलावा, पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। केरोसिन के भंडारण और वितरण के लिए अलग टैंक और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि ईंधन वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। इस योजना से छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। कई छोटे उद्योग, जैसे ढाबे, चाय की दुकानें, मोबाइल फूड यूनिट और ग्रामीण स्तर के व्यवसाय, केरोसिन पर निर्भर रहते हैं। उन्हें अब नियमित और आसान आपूर्ति मिलेगी, जिससे उनका काम प्रभावित नहीं होगा। केंद्र सरकार की यह पहल ऊर्जा पहुंच को बेहतर बनाने, जरूरतमंद लोगों को राहत देने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। अगर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो देश के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा और ग्रामीण तथा दूरदराज के इलाकों में ईंधन की उपलब्धता और मजबूत होगी। यह निर्णय आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक व्यावहारिक और सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।

खुशियों से भरा कपूर परिवार, बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर दूसरी बार बनीं मां, बेटे के जन्म की दी खुशखबरी

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर के घर खुशियों ने एक बार फिर दस्तक दी है। रविवार का दिन उनके परिवार के लिए बेहद खास बन गया, जब सोनम कपूर ने अपने दूसरे बेटे को जन्म दिया। इस खुशखबरी की जानकारी खुद अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस और करीबियों के साथ साझा की। जैसे ही यह खबर सामने आई, परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बधाइयों की झड़ी लगा दी। सोनम और उनके पति आनंद आहूजा अब दो बच्चों के माता-पिता बन गए हैं और चार सदस्यों का उनका परिवार पूरा हो गया है। सोनम कपूर ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने बेटे के जन्म की घोषणा की। उन्होंने लिखा कि बेहद शुक्रगुजार और प्यार से भरे दिल के साथ वह 29 मार्च 2026 को अपने बेटे के जन्म की खुशखबरी दे रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के आने से उनका परिवार और बड़ा हो गया है और घर में खुशियों का माहौल है। सोनम ने अपने संदेश में यह भी जताया कि यह नई शुरुआत उनके लिए बेहद खास है और वे इस अनमोल पल के लिए खुद को धन्य महसूस कर रही हैं। अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में अपने बड़े बेटे वायु का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वायु अपने छोटे भाई के आने से बेहद उत्साहित है और उसे लेकर काफी खुश है। सोनम ने लिखा कि उनके घर में प्यार और खुशियों की नई लहर आ गई है और पूरा परिवार इस नए सदस्य का स्वागत करने के लिए बेहद उत्साहित है। पोस्ट के अंत में सोनम और आनंद आहूजा ने लिखा कि वे चार लोगों के परिवार के रूप में इस खूबसूरत नए सफर की शुरुआत करने जा रहे हैं और इसके लिए वे बेहद आभारी हैं।

फिल्मी सितारों ने दी बधाई, परिवार में जश्न का माहौल

सोनम कपूर की इस खुशखबरी पर फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों और परिवार के सदस्यों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। अभिनेत्री करीना कपूर ने कमेंट करते हुए उन्हें बधाई दी और खुशी जाहिर की। वहीं सोनम की बहन रिया कपूर ने दिल वाले इमोजी के साथ अपनी खुशी व्यक्त की। सोनम के चाचा संजय कपूर ने भी रेड हार्ट इमोजी के जरिए परिवार में आई इस खुशी पर प्रतिक्रिया दी। इसके अलावा अभिनेत्री दीया मिर्जा और हुमा कुरैशी समेत कई अन्य सेलेब्स ने भी कमेंट सेक्शन में सोनम और आनंद को शुभकामनाएं दीं। बताया जा रहा है कि सोनम कपूर के परिवार में इस खबर के बाद जश्न का माहौल है। करीबी रिश्तेदार और दोस्त लगातार उन्हें बधाई संदेश भेज रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी फैंस ने सोनम कपूर को ढेरों शुभकामनाएं दीं और मां बनने की खुशी पर उन्हें बधाई दी। कई फैंस ने लिखा कि कपूर परिवार में फिर से नन्हीं किलकारी गूंजी है, जो बेहद खास पल है। सोनम कपूर ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा पिछले साल नवंबर में की थी। उस दौरान उन्होंने एक खूबसूरत तस्वीर साझा की थी जिसमें वह हॉट पिंक रंग के सूट में नजर आई थीं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में सिर्फ एक शब्द लिखा था “मां”। उनकी इस पोस्ट के बाद फैंस ने कयास लगाने शुरू कर दिए थे कि सोनम कपूर जल्द ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। इसके बाद से ही उनके फैंस इस खुशखबरी का इंतजार कर रहे थे। गौरतलब है कि सोनम कपूर ने साल 2018 में बिजनेसमैन आनंद आहूजा से शादी की थी। दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद शादी के बंधन में बंधे थे। शादी के बाद सोनम फिल्मों के साथ-साथ अपने निजी जीवन पर भी ध्यान देती नजर आईं। अगस्त 2022 में उन्होंने अपने पहले बेटे वायु को जन्म दिया था। वायु के जन्म के बाद सोनम ने कुछ समय तक फिल्मों से दूरी बनाई और परिवार के साथ समय बिताया। अब दूसरे बेटे के जन्म के साथ ही सोनम कपूर और आनंद आहूजा का परिवार पूरा हो गया है।

राजधानी दिल्ली में गर्मी के बीच बारिश का येलो अलर्ट, हिमाचल प्रदेश में ताजा हिमपात, कई राज्यों में बदला मौसम 

देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। राजधानी दिल्ली में जहां तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, वहीं बारिश और तेज हवाओं की संभावना ने मौसम को बदला-बदला बना दिया है। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात और मैदानी क्षेत्रों में बारिश से ठंडक लौट आई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 24 घंटों में उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम का यही मिला-जुला मिजाज बना रह सकता है। दिल्ली में सोमवार 30 मार्च को गर्मी के बीच हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। रविवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो औसत से 1.7 डिग्री ज्यादा है। मार्च के आखिरी दिनों में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, हालांकि बीच-बीच में बादल और हवाओं ने गर्मी से राहत दी है।

मौसम विभाग ने सोमवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार दोपहर और शाम के समय हल्की से बहुत हल्की बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। रात के समय कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। आज अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मार्च महीने के दौरान दिल्ली में मौसम का मिजाज मिला-जुला रहा है। महीने के मध्य के बाद कई दिनों तक बारिश दर्ज की गई, हालांकि कई पूर्वानुमानों के बावजूद मौसम ज्यादातर शुष्क रहा। इसी वजह से तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, लेकिन दिन का औसत तापमान फिर भी ऊपर रहा। इस दौरान औसत अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री और औसत न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि दिन में धूप निकलने से गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

खराब मौसम को देखते हुए पर्यटकों के लिए अटल टनल को अस्थायी रूप से किया गया बंद–

हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है। रोहतांग दर्रा, बारालाचा ला और शिंकुला में करीब एक फीट तक ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। वहीं अटल टनल रोहतांग के दोनों छोर पर करीब तीन इंच हिमपात हुआ है। खराब मौसम को देखते हुए पर्यटकों के लिए अटल टनल को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। चंबा, कांगड़ा, मंडी और शिमला जिलों में भी बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में गिरावट आई है। ताजा हिमपात और बारिश का असर कृषि और बागवानी पर सकारात्मक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं, जौ, चना और मटर की फसलों के लिए यह बारिश फायदेमंद है। इससे अनाज के दानों का विकास बेहतर होगा। इसके अलावा प्लम, खुबानी और सेब जैसे गुठलीदार फलों के लिए भी यह मौसम लाभदायक बताया जा रहा है। बारिश और ठंडी हवाओं की वजह से प्रदेश के कई इलाकों में दिन के तापमान में 9 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है। लाहौल-स्पीति और मनाली क्षेत्र में बर्फबारी के कारण सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। केलंग-मनाली मार्ग पर फिलहाल केवल फोर बाई फोर वाहनों को आवाजाही की अनुमति दी गई है। सीमा सड़क संगठन की ओर से सड़क बहाली का काम जारी है, लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा कांगड़ा में 19 मिलीमीटर और चंबा के जोत क्षेत्र में 16 मिलीमीटर दर्ज की गई। ताबो और सेऊबाग में 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश में हल्की बर्फबारी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट की संभावना है। वहीं दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बादल, हल्की बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है, जिससे मार्च के अंत में मौसम का मिजाज बदला-बदला बना रहेगा।

खार्ग द्वीप पर कब्जे की धमकी ! अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उग्र तेवर, कहा- ‘हम चाहें तो अभी ले लें’, ईरान को खुली चेतावनी

अमेरिका और ईरान में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का एक बेहद तीखा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल टर्मिनल खार्ग द्वीप पर कब्जा करने पर विचार कर सकता है। इस बयान ने मध्य-पूर्व में पहले से ही सुलग रहे हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प हैं और उनमें खार्ग द्वीप को अपने नियंत्रण में लेना भी शामिल हो सकता है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “हो सकता है हम खार्ग द्वीप ले लें, हो सकता है नहीं लें। लेकिन हमारे पास विकल्प मौजूद हैं और हम हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका ऐसा कदम उठाता है तो उसे कुछ समय तक द्वीप पर मौजूद रहना पड़ेगा। ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है और वहां से देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का निर्यात होता है। ऐसे में इस द्वीप पर नियंत्रण का मतलब ईरान की आर्थिक नस पर चोट करना माना जा रहा है। ट्रंप ने ईरान की रक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि खार्ग द्वीप पर मजबूत सुरक्षा नहीं है और अमेरिका वहां आसानी से कब्जा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के पास पर्याप्त क्षमता है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है। गौरतलब है कि अमेरिका पहले भी खार्ग द्वीप के आसपास हवाई हमले कर चुका है। उस समय अमेरिकी प्रशासन ने कहा था कि हमले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे और उनका उद्देश्य ईरान की रणनीतिक क्षमता को कमजोर करना था। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर खार्ग द्वीप को लेकर कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी खाड़ी में अस्थिरता बढ़ सकती है। दुनिया के तेल बाजार पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि खार्ग द्वीप वैश्विक तेल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में ट्रंप के बयान को बेहद आक्रामक कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान ने भी इस बयान पर कड़ा रुख अपनाया है। तेहरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि अमेरिकी सेना ईरान की जमीन पर उतरती है तो जवाब बेहद सख्त होगा। ईरान ने कहा है कि वह खाड़ी क्षेत्र के अरब देशों पर जमीनी हमले कर सकता है और नए सैन्य अभियान भी शुरू किए जा सकते हैं। इस चेतावनी ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों की आवाजाही बढ़ी–

ट्रंप ने अपने बयान में स्ट्रेट ऑफ होरमुज का भी जिक्र किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ने तेल टैंकरों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। ट्रंप के मुताबिक पहले 10 पाकिस्तानी झंडे वाले टैंकरों को गुजरने दिया गया और अब करीब 20 टैंकर इस रास्ते से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये टैंकर सीधे स्ट्रेट ऑफ होरमुज के बीच से होकर जा रहे हैं, जो हाल के तनाव के बीच एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि टैंकरों को अनुमति देने का फैसला कालिबाफ की ओर से लिया गया है और इससे बातचीत की संभावना बनी है। हालांकि, दूसरी ओर कालिबाफ ने सोशल मीडिया पर अमेरिका के खिलाफ कड़े बयान दिए हैं। उन्होंने अमेरिकी दबाव को अस्वीकार करते हुए कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। इस विरोधाभास ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान किया है और इसे रणनीतिक बयानबाजी माना जा रहा है। ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने के बाद कालिबाफ की भूमिका देश की राजनीति में और मजबूत होती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि वह सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तर पर प्रभाव बढ़ा रहे हैं। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होरमुज से टैंकरों को अनुमति देना सामरिक कदम भी हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव को संतुलित किया जा सके।यदि खार्ग द्वीप को लेकर तनाव बढ़ता है और स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर असर पड़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से दुनिया भर की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव पर टिकी हुई हैं। ट्रंप के उग्र बयान और ईरान की चेतावनी के बाद हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। यदि दोनों देशों के बीच बयानबाजी से आगे बढ़कर कोई सैन्य कदम उठाया गया तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। फिलहाल, कूटनीतिक हल की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन जिस तरह से बयान सामने आ रहे हैं, उससे तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।

आज खुलेगा देश का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, एनसीआर को मिलेगी नई उड़ान, पीएम मोदी करेंगे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का शुभारंभ

करीब ढाई दशक के इंतजार के बाद शनिवार को जेवर से देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब 11:30 बजे गौतम बुद्ध नगर के जेवर पहुंचकर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे और परियोजना की प्रगति की जानकारी लेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें वे एयरपोर्ट के आर्थिक, औद्योगिक और क्षेत्रीय विकास में योगदान को लेकर अपनी बात रखेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस एयरपोर्ट का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती हवाई यातायात की मांग को पूरा करना है। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ प्रतिवर्ष होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है। यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दबाव कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक विकल्प बनेगा। उद्घाटन समारोह को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे क्षेत्र को कई जोन में बांटा गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए यातायात प्रबंधन की विशेष योजना लागू की गई है। यमुना एक्सप्रेसवे और आसपास के मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी गई है, ताकि कार्यक्रम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की खासियतें, 24 घंटे उड़ान संचालन की सुविधा

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को आधुनिक तकनीक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो बड़े और आधुनिक विमानों के संचालन में सक्षम होगा। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग लगाई गई है, जिससे हर मौसम में 24 घंटे उड़ान संचालन संभव होगा। इसके अलावा टर्मिनल भवन को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। यह यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित है और भविष्य में इसे मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और आसपास के शहरों से पहुंच आसान होगी। कार्गो संचालन के लिए भी यहां विशेष सुविधा विकसित की गई है। शुरुआती चरण में 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो क्षमता होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है। इससे निर्यात-आयात गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट की डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल भवन में घाटों और पारंपरिक स्थापत्य शैली की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही, इसे शून्य-उत्सर्जन लक्ष्य के साथ विकसित किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि यह एयरपोर्ट भविष्य में दुनिया के सबसे पर्यावरण-अनुकूल हवाई अड्डों में शामिल होगा।

एनसीआर और पश्चिमी यूपी के विकास को मिलेगी रफ्तार, निवेश और रोजगार के नए अवसर

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से गेम-चेंजर माना जा रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ता दबाव कम होगा और एनसीआर में हवाई यातायात का संतुलन बनेगा। इससे खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहरों को सीधा फायदा मिलेगा। मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा और आगरा जैसे शहरों के लोगों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी। इसके अलावा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि आगरा और मथुरा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल इस एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेंगे। औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक पार्क और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र एयरोसिटी के रूप में विकसित होगा, जहां होटल, कन्वेंशन सेंटर और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के एविएशन नेटवर्क को मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक एयर ट्रांसपोर्ट मानचित्र पर नई पहचान देगा। पहले चरण में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों की शुरुआत की तैयारी है। उद्घाटन के साथ ही यह परियोजना संचालन की दिशा में बड़ा कदम रखेगी और एनसीआर को नई उड़ान देने का सपना साकार होगा।

विशाखापत्तनम-दिल्ली इंडिगो विमान की आपात लैंडिंग, इंजन में खराबी से 160 यात्रियों की सांसें थमीं

विशाखापत्तनम से दिल्ली आ रहे इंडिगो के एक यात्री विमान को शनिवार को तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारना पड़ा। विमान में सवार 160 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की कुछ देर के लिए सांसें थम गईं, लेकिन पायलट की सूझबूझ और हवाई अड्डे पर मुस्तैद टीमों की तत्परता से सभी यात्री सुरक्षित रहे। अधिकारियों के अनुसार विमान के एक इंजन में खराबी आने के बाद एहतियात के तौर पर आपात स्थिति घोषित की गई और विमान को साथ उतारा गया। विशाखापत्तनम से दिल्ली के लिए रवाना हुआ यह विमान सामान्य रूप से उड़ान भरकर आगे बढ़ रहा था। उड़ान के दौरान चालक दल को इंजन में तकनीकी गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके बाद पायलट ने तुरंत हवाई यातायात नियंत्रण से संपर्क कर स्थिति की जानकारी दी। हालात को देखते हुए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पूर्ण आपात स्थिति घोषित कर दी गई। इसके साथ ही अग्निशमन दल, चिकित्सकीय टीमें और अन्य आपात सेवाएं रनवे के पास तैनात कर दी गईं। विमान में सवार यात्रियों को भी कुछ देर बाद स्थिति की जानकारी दी गई। अचानक आई इस सूचना से यात्रियों में घबराहट का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने सीट बेल्ट कसकर पकड़ ली और प्रार्थना करने लगे। हालांकि चालक दल ने लगातार यात्रियों को आश्वस्त किया कि विमान सुरक्षित रूप से उतारा जाएगा और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पायलट ने संयम बनाए रखते हुए विमान की ऊंचाई और गति नियंत्रित की और सुरक्षित लैंडिंग की तैयारी शुरू की। बताया गया कि सुबह करीब 10 बजकर 39 मिनट पर हवाई अड्डे पर पूर्ण आपात स्थिति लागू कर दी गई थी। इसके बाद विमान को प्राथमिकता देते हुए उतरने की अनुमति दी गई। कुछ देर बाद विमान ने सुरक्षित रूप से रनवे पर लैंडिंग कर ली। जैसे ही विमान जमीन पर उतरा, यात्रियों और चालक दल ने राहत की सांस ली। विमान को एहतियात के तौर पर अलग स्थान पर ले जाया गया, जहां तकनीकी जांच शुरू की गई।

सुरक्षित लैंडिंग के बाद यात्रियों ने ली राहत की सांस

विमान के सुरक्षित उतरते ही सभी यात्रियों को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। किसी यात्री को चोट लगने या किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। हवाई अड्डे पर मौजूद चिकित्सा टीमों ने यात्रियों की सामान्य जांच भी की। अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया सावधानी के साथ की गई ताकि किसी तरह की अफरातफरी न हो।

यात्रियों ने बताया कि उड़ान के दौरान अचानक चालक दल की ओर से सतर्क रहने का संदेश मिला, जिससे सभी चिंतित हो गए थे। कुछ यात्रियों ने कहा कि उन्हें विमान में हल्का कंपन महसूस हुआ, जिसके बाद उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हुआ। हालांकि चालक दल लगातार यात्रियों को भरोसा दिलाता रहा कि विमान सुरक्षित तरीके से उतारा जाएगा। ऐसे मामलों में पायलट का अनुभव और त्वरित निर्णय बेहद अहम होता है। इंजन में खराबी की स्थिति में विमान को नजदीकी सुरक्षित हवाई अड्डे पर उतारना सबसे सही विकल्प माना जाता है। दिल्ली हवाई अड्डे पर पहले से आपात सेवाएं तैयार रहने से जोखिम काफी कम हो जाता है। इंडिगो की ओर से भी इस घटना को लेकर आवश्यक जांच शुरू कर दी गई है। तकनीकी टीम विमान के इंजन और अन्य हिस्सों की जांच कर रही है, ताकि खराबी के कारणों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसे सावधानी के तौर पर गंभीरता से लिया गया और आपात लैंडिंग का निर्णय लिया गया।

समय रहते लिया गया फैसला, टली बड़ी अनहोनी

समय रहते आपात स्थिति घोषित करना और विमान को प्राथमिकता देना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम था। इस तरह की परिस्थितियों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लेकिन इस मामले में पायलट, चालक दल और हवाई अड्डा प्रशासन ने समन्वय के साथ काम किया, जिससे संभावित खतरा टल गया।

हवाई अड्डा प्रशासन ने बताया कि आपात स्थिति के दौरान सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। रनवे को खाली कराया गया, अग्निशमन वाहन तैनात किए गए और चिकित्सा दल को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरते ही राहत कार्य शुरू कर दिए गए। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। नियमित जांच, प्रशिक्षित चालक दल और आपातकालीन तैयारी के कारण ही इस तरह की स्थितियों से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है। यात्रियों ने भी सुरक्षित लैंडिंग के बाद पायलट और चालक दल की सराहना की। फिलहाल विमान की तकनीकी जांच जारी है और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार सभी 160 यात्री सुरक्षित हैं और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। समय पर लिए गए फैसले और सावधानीपूर्ण कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई, जिससे यात्रियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।

देश में लॉकडाउन की अफवाह पर पीएम मोदी के तीन केंद्रीय मंत्रियों को संभालना पड़ा मोर्चा, कहा- घबराने की जरूरत नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच देश में संभावित लॉकडाउन की अफवाहों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि ईंधन संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण भारत में फिर से कोविड जैसे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इन अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी तरह का लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। सरकार की ओर से तीन वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने सामने आकर स्थिति साफ की और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में आवश्यक वस्तुओं, ईंधन और ऊर्जा की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है। प्रधानमंत्री स्तर से लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरें भ्रामक हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। आज संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अफवाहों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि इस तरह की गलत खबरें कौन फैला रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की घबराहट पैदा नहीं होनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हालात पर नजर रख रही हैं और जमाखोरी करने वालों को चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत सरकार के पास हर स्थिति से निपटने की तैयारी है और लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि शीर्ष स्तर से लेकर जिला स्तर तक निगरानी की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन, एलपीजी या जरूरी सामान की कमी न हो। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लॉकडाउन की अफवाहों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक हलकों में भी इस तरह की बातें कही जा रही हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान जैसे देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया था, वैसा कोई कदम उठाने की कोई योजना नहीं है। सीतारमण ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर सरकार लगातार समीक्षा कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने पर्याप्त भंडार बनाए हुए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना वजह सामान जमा न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें।

सोशल मीडिया अफवाहों पर सरकार सख्त, आपूर्ति व्यवस्था सामान्य

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि देश में लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह गलत और निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। पुरी ने कहा कि वैश्विक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चर्चा बढ़ी है, जिसे कुछ लोगों ने गलत तरीके से लॉकडाउन से जोड़ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “तैयारी” का मतलब प्रशासनिक स्तर पर सतर्क रहना है, न कि आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना। पुरी ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अफवाहें फैलाना गैर-जिम्मेदाराना है और इससे अनावश्यक दहशत पैदा होती है। उन्होंने लोगों से केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील की। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि भारत के पास ईंधन और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। तेल कंपनियों और राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था में कोई बाधा न आए। साथ ही प्रशासन को यह भी कहा गया है कि यदि कहीं जमाखोरी या कृत्रिम कमी की कोशिश होती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए। केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तैयारी मजबूत है और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें, घबराएं नहीं और सामान्य दिनचर्या बनाए रखें। तीनों केंद्रीय मंत्रियों के बयानों के बाद सरकार ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं बनने वाली है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।

ईरान-इजराइल जंग के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला : पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई, आम आदमी को राहत

ईरान-इजराइल जंग के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आज, शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस कदम से फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी टल जाएगी और आम उपभोक्ताओं को महंगाई के अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की पैनिक बाइंग देखी जा रही थी। वैश्विक हालात को देखते हुए लोगों को आशंका थी कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगी थीं और कई राज्यों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने बाजार को स्थिर करने और घबराहट को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। जानकारों के अनुसार, ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। संघर्ष से पहले कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, जो अब बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। इस तेज उछाल का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों की लागत पर पड़ रहा था। यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं करती तो कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती थीं, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ता। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर तुरंत दिखाई देता है। संघर्ष से पहले भारत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के उस महत्वपूर्ण गलियारे के माध्यम से प्राप्त करता था, जो फिलहाल तनाव के कारण अस्थिर बना हुआ है। इससे आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी है और बाजार में दबाव बना हुआ है। केंद्र सरकार के इस फैसले से तेल विपणन कंपनियों पर लागत का बोझ कम होने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यदि एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं होती तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 8 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती थी। इससे परिवहन लागत बढ़ती और उसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता। इस बीच रूस की कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है। फिलहाल केवल प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य कंपनियां भी कीमतें स्थिर रखेंगी। केंद्र सरकार ने केवल एक्साइज ड्यूटी में कटौती ही नहीं की है, बल्कि ईंधन निर्यात से जुड़े नियमों को भी सख्त कर दिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर पहले दी जा रही व्यापक उत्पाद शुल्क छूट को वापस ले लिया है। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।

निर्यात नियम सख्त, घरेलू बाजार को प्राथमिकता

संशोधित व्यवस्था के तहत अब ईंधन निर्यात से संबंधित लाभ केवल कुछ स्पष्ट रूप से परिभाषित श्रेणियों तक ही सीमित कर दिए गए हैं। इससे कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात करना पहले की तुलना में कम आकर्षक होगा और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम संतुलित नीति का संकेत देता है। एक तरफ सरकार ने कंपनियों पर लागत का दबाव कम किया है, वहीं दूसरी तरफ निर्यात पर सख्ती कर घरेलू आपूर्ति मजबूत करने की कोशिश की है। इससे कीमतों में अचानक उछाल की संभावना कम होगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। तेल कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन को सुचारू रखें और किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी न होने दें। राज्यों के साथ भी समन्वय बढ़ाया गया है ताकि वितरण व्यवस्था पर नजर रखी जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान-इजराइल तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार आगे भी ऐसे कदम उठा सकती है। फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार ने संकेत दिया है कि वह महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने को तैयार है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस फैसले से आम लोगों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी फिलहाल टल गई है, जिससे परिवहन लागत स्थिर रहेगी और महंगाई पर भी दबाव कम पड़ेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकार का यह कदम बाजार को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।