युवाओं का भविष्य: AI और SI के युग में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका

आज हम तकनीकी क्रांति के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (SI) यानी सामाजिक बुद्धिमत्ता का संगम हमारे भविष्य की नींव रख रहा है। जहाँ AI मशीनों को सोचने और निर्णय लेने की क्षमता दे रहा है, वहीं SI हमें यह सिखाता है कि कैसे इन तकनीकों का उपयोग मानवीय संवेदनाओं, सहानुभूति और सामूहिक कल्याण के लिए किया जाए। आज के दौर में, जब तकनीक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है, सामाजिक संस्थाओं का यह दायित्व है कि वे युवाओं को इन दोनों क्षेत्रों में सक्षम बनाएं।
AI और SI का भविष्य: एक नई आजीविका का उदय
आने वाला समय केवल डिग्री का नहीं, बल्कि कौशल का होगा। AI के कारण कई पारंपरिक नौकरियां बदल रही हैं, लेकिन साथ ही नई और बेहतर आजीविका के द्वार भी खुल रहे हैं। भविष्य में ऐसे पेशेवरों की भारी मांग होगी जो:
• AI विशेषज्ञ: जो मशीन लर्निंग, डेटा एनालिसिस और एल्गोरिदम के माध्यम से जटिल समस्याओं को हल कर सकें।
• SI रणनीतिकार: जो तकनीक को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़कर सामाजिक उद्यमिता (Social Entrepreneurship) और सामुदायिक विकास के नए मॉडल तैयार कर सकें।
• हाइब्रिड विशेषज्ञ: वे लोग जो तकनीकी रूप से कुशल हों और मानवीय व्यवहार (Social Intelligence) को समझते हों, वे स्वास्थ्य, शिक्षा, और नीति निर्माण जैसे क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह बदलाव भय का नहीं, बल्कि अपार संभावनाओं का है। जो युवा आज तकनीकी कौशल अपना रहे हैं, वे कल की अर्थव्यवस्था के निर्माता होंगे।
सामाजिक संस्थाओं और कार्यकर्ताओं से आह्वाहन
मैं सभी सामाजिक संस्थाओं और समर्पित कार्यकर्ताओं से आह्वाहन करता हूँ कि वे समय की मांग को पहचानें। आपकी पहुंच समाज के उस तबके तक है जो नई तकनीकों से अभी भी दूर है।

  1. जागरूकता का प्रसार करें: युवाओं और वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को यह समझाएं कि AI और SI कोई डरावनी चीज़ नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली उपकरण है।
  2. कौशल प्रशिक्षण केंद्र बनाएं: अपनी संस्थाओं में डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ AI-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करें। युवाओं को कोडिंग, डेटा विश्लेषण और एथिकल AI के बारे में प्रशिक्षित करें।
  3. निरंतर सीखने की संस्कृति (Reskilling) विकसित करें: जो लोग पहले से नौकरी में हैं, उन्हें प्रेरित करें कि वे अपने कार्यक्षेत्र में AI का उपयोग करना सीखें। उन्हें बताएं कि नई तकनीक उनके काम को बोझिल बनाने के बजाय अधिक प्रभावी और रचनात्मक बनाएगी।
  4. मार्गदर्शक बनें: एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में, आपकी भूमिका केवल सहायता देने की नहीं, बल्कि ‘सशक्तिकरण’ (Empowerment) की है। युवाओं को नई आजीविका प्राप्त करने और उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करें।
    निष्कर्ष: एक सामूहिक जिम्मेदारी
    सामाजिक संस्थाएं समाज की रीढ़ होती हैं। यदि आज हम अपने युवाओं को AI और SI में निपुण बनाने का बीड़ा उठाते हैं, तो हम न केवल बेरोजगारी की समस्या का समाधान करेंगे, बल्कि एक ऐसे समाज का निर्माण करेंगे जो तकनीक के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं में भी समृद्ध होगा।
    आइए, हम संकल्प लें कि हम अपने युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को हल करने वाला ‘AI और SI विशेषज्ञ’ बनाएंगे। समय की पुकार है—शिक्षित करें, प्रेरित करें और आगे बढ़ें। तकनीक और मानवता का यह संतुलन ही हमारे देश को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान दिनांक 28 जून 2026 दिन रविवार को

कलेक्टर भिण्ड के निर्देशन में आज कलेक्टर सभाकक्ष भिण्ड में आगामी राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान दिनांक 28 जून 2026 के सफल संचालन हेतु जिला टास्कफोर्स समिति की बैठक का आयोजन किया गया।
उक्त बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भिण्ड श्री वीरसिंह चौहान, डब्ल्यू.एच.ओ. प्रतिनिधि डॉ.एम.एस.राजावत, डॉ.आर.के.मिश्रा सिविल सर्जन भिण्ड, डॉ आर.एस.सेमिल डी.एच.ओ.1, डॉ आलोक शर्मा डी.एच.ओ.2, डॉ डी.के.शर्मा डी.एच.ओ.3, डॉ शिवरामसिंह कुशवाह जिला मलेरिया अधिकारी, डॉ.गौरव भटनागर जिला टीकाकरण अधिकारी तथा जिला शिक्षा अधिकारी भिण्ड, जिला आयुष अधिकारी भिण्ड, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग भिण्ड, साथ में जिला समन्वयक डब्ल्यू.एच.ओ., जिला समन्वयक यूनिसेफ, जिला समन्वयक जे.एस.आई. तथा विकासखण्ड से समस्त खण्ड चिकित्सा अधिकारी, समस्त ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर एवं समस्त ब्लॉक कम्यूनिटी मोबिलाईजर उपस्थित रहे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ जे.एस.यादव ने अपील की है कि आगामी राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में बूथ दिवस दिनांक 28 जून 2026 को जिले के समस्त अभिभावक अपने-अपने 0 से 5 वर्ष तक के समस्त बच्चों को बूथ पर लायें तथा 2 बूंद जिन्दगी की पोलियो की खुराक अवश्य पिलायें।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ गौरव भटनागर ने बताया कि किन्हीं कारणों से बूथ दिवस दिनांक 28 जून 2026 को बच्चे दवा पीने से छूट जाते हैं तो दिनांक 29 एवं 30 जून 2026 को टीम द्वारा घर घर जाकर बच्चों को दवा पिलायी जायेगी।
कलेक्टर भिण्ड द्वारा बैठक में निर्देशित किया गया कि उक्त अभियान के सफल संचालन हेतु विकासखण्ड स्तर पर एस.डी.एम. की अध्यक्षता में बी.टी.एफ. बैठक का आयेाजन करें तथा शिक्षा विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग से समन्वय स्थापित कर स्कूलवार तथा आंगनवाड़ी केन्द्र वार सूची संधारित करें, जिससे सूक्ष्म कार्ययोजना निर्माण की जाये एवं अभियान के एक दिवस पूर्व विशाल रैली का आयेाजन जिला तथा ब्लॉक मुख्यालय पर आयोजित करें, जिससे अभियान को सफल बनाया जा सके।

हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है।

प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है।

इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी ।

छबील और लंगर सेवा समाज में समानता व भाईचारे का संदेश देती है : अभिनव थापर

पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के पावन अवसर पर देहरादून के राजपुर रोड स्थित राज प्लाजा में राज प्लाजा एसोसिएशन के तत्वावधान में “छोले एवं मिट्ठे पानी के छबील लंगर” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर गुरु साहिब को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

कार्यक्रम में उपस्थित उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभिनव थापर ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी का जीवन त्याग, सेवा, मानवता और धार्मिक सहिष्णुता का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने सत्य एवं मानव कल्याण के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर पूरी मानवता को प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश दिया। आज के समय में उनके बताए मार्ग पर चलना और समाज में सद्भाव तथा सेवा की भावना को मजबूत करना हम सभी का दायित्व है।

अभिनव थापर ने कहा कि छबील एवं लंगर की परंपरा केवल सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि समानता, एकता और मानवता के मूल्यों को सशक्त करने का संदेश भी देती है। उन्होंने सभी नागरिकों से गुरु साहिब के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभिनव थापर, बलदेव सिंह जी, हरदीप सिंह जी, अशोक नारंग जी, नवीन कटारिया जी, तरुण कुमार जी, नवकरण सिंह जी सहित राज प्लाजा एसोसिएशन के अनेक सदस्य एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। अंत में संगत की सेवा करते हुए गुरु अर्जन देव जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और भाईचारे की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

राष्ट्रवाद : हिंसा नहीं, राष्ट्र निर्माण का संकल्प

आज के समय में “राष्ट्रवाद” शब्द जितना चर्चित है, उतना ही उसके अर्थ को लेकर भ्रम भी दिखाई देता है। दुर्भाग्य से कुछ लोग राष्ट्रवाद को केवल नारे लगाने, विरोधियों को अपमानित करने, वैचारिक असहमति रखने वालों को शत्रु मानने या उनसे आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित करने तक ही सीमित कर देते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि राष्ट्रवाद का मूल स्वरूप निर्माण, सहयोग, अनुशासन और उत्तरदायित्व का है, न कि हिंसा, अराजकता और वैमनस्य का।
भारत का स्वतंत्रता संग्राम इस सत्य का सबसे बड़ा प्रमाण है। आज़ादी की लड़ाई में विचारों की विविधता थी। एक ओर महात्मा गांधी के नेतृत्व में अहिंसा, सत्य और जनजागरण का मार्ग था, तो दूसरी ओर भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारी युवाओं का दल था। किंतु दोनों धाराओं का अंतिम लक्ष्य राष्ट्र का कल्याण और स्वतंत्रता था। क्रांतिकारियों ने भी हिंसा को कभी सामान्य राजनीतिक साधन नहीं माना। उनका संघर्ष उस औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध था जो स्वयं हिंसा, दमन और अन्याय पर आधारित थी।
शहीद भगत सिंह द्वारा केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने की घटना इसका उदाहरण है। उनका उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था, बल्कि बहरी सत्ता को अपनी आवाज़ सुनाना था। उन्होंने स्वयं कहा था कि “बहरों को सुनाने के लिए धमाके की आवश्यकता होती है।” इसलिए आज के लोकतांत्रिक भारत में वैचारिक मतभेद के कारण हिंसा का सहारा लेना न तो भगत सिंह के विचारों का सम्मान है और न ही राष्ट्रवाद की भावना का।
भारत आज एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संवैधानिक राष्ट्र है। संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने, असहमति व्यक्त करने और अपने विचार रखने का अधिकार देता है। लोकतंत्र में विचारों का टकराव स्वाभाविक है, किंतु इसका समाधान संवाद, तर्क और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में है, न कि धमकी, हिंसा और कानून को हाथ में लेने में। जो व्यक्ति अपने विचारों को मनवाने के लिए बल प्रयोग करता है, वह वास्तव में राष्ट्रवाद नहीं बल्कि असहिष्णुता का परिचय देता है।
सच्चा राष्ट्रवाद राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का नाम है। राष्ट्र केवल सीमाओं, झंडों और नारों से नहीं बनता; वह उन करोड़ों लोगों के परिश्रम, त्याग और जिम्मेदारी से बनता है जो अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी से योगदान देते हैं। किसान खेत में अन्न उगाकर राष्ट्र का निर्माण करता है। वैज्ञानिक शोध और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र को आगे बढ़ाता है। सैनिक सीमा पर सुरक्षा प्रदान करता है। शिक्षक नई पीढ़ी को संस्कारित करता है। पर्यावरण कार्यकर्ता प्रकृति और संसाधनों की रक्षा करता है। चिकित्सक, इंजीनियर, मजदूर, सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी—सभी अपने-अपने तरीके से राष्ट्र निर्माण के सहभागी हैं।
राष्ट्रवाद यह भी सिखाता है कि व्यक्ति अपनी आजीविका कमाए, सम्मानपूर्वक जीवन जीए, किंतु धन और भौतिक सुखों की अंधी दौड़ में नैतिकता का त्याग न करे। रिश्वत, भ्रष्टाचार, सत्ता का दुरुपयोग, कर चोरी और अनैतिक संपत्ति अर्जन राष्ट्रवाद नहीं हो सकते। जो व्यक्ति अपने निजी लाभ के लिए सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचाता है, वह चाहे जितने भी राष्ट्रवादी नारे लगा ले, उसके कर्म और ऐसे आचरण राष्ट्रहित के विरुद्ध ही माने जाएंगे।
सच्चे राष्ट्रवादी की एक और पहचान है—वह दूसरों के विचारों का सम्मान करता है। वह अपने आचरण, तर्क और सेवा के माध्यम से लोगों को प्रभावित करने का प्रयास करता है, लेकिन किसी पर अपने विचार थोपता नहीं। और चला ही उनको मानने हेतु विभिन्न प्रकार के हथकण्डों का प्रयोग करता है। उसे यह अहंकार नहीं होता कि केवल वही सत्य का स्वामी है और न ही होना भी चाहिए। लोकतंत्र में विविध विचार ही समाज को जीवंत और प्रगतिशील बनाते हैं। असहमति को देशद्रोह मान लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा राष्ट्रवाद को केवल भावनात्मक आवेग या राजनीतिक पहचान के रूप में न देखें, बल्कि उसे सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में समझें। राष्ट्रवाद का अर्थ है—कानून का सम्मान, सामाजिक सद्भाव बनाए रखना, पर्यावरण की रक्षा करना, सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना, कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील होना और अगली पीढ़ी के लिए बेहतर भारत का निर्माण करना। यदि हमारे कर्मों और आचरण से समाज में तनाव, हिंसा और अव्यवस्था पैदा होती है, तो वह राष्ट्रवाद नहीं बल्कि एक बल राष्ट्र के मार्ग में बाधा है।
युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संपत्ति होते हैं। उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और उत्साह यदि सकारात्मक दिशा में लगे तो देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन यदि वही ऊर्जा भटकाव, कट्टरता, हिंसा और तात्कालिक प्रसिद्धि की लालसा में खर्च होने लगे, तो समाज और राष्ट्र दोनों को नुकसान होता है। सोशल मीडिया के दौर में कुछ लोग विवादित हरकतों, भ्रम, नकारात्मक विचारों, अनर्गल तथ्यों और उत्तेजक बयानों के माध्यम से लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, जबकि ऐसा आचरण करके वह राष्ट्र की प्रगति में बाधा ही उत्पन्न करते हैं। किंतु सत्य यह है कि राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रचार से नहीं, बल्कि परिश्रम और चरित्र निर्माण से होकर गुजरता है।
आज आवश्यकता ऐसे राष्ट्रवाद की है जो जोड़ने का काम करे, तोड़ने का नहीं; जो निर्माण करे, ध्वंस नहीं,विनाश नहीं; जो संवाद को बढ़ावा दे, संघर्ष को नहीं; जो संविधान, कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था रखे। राष्ट्रवाद का वास्तविक अर्थ है—अपने राष्ट्र, समाज और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन।

अंततः, राष्ट्रवाद कोई प्रदर्शन नहीं, बल्कि जीवन का एक अनुशासित और नैतिक दृष्टिकोण है। राष्ट्रवादी वह नहीं जो सबसे ऊंची आवाज़ में नारा लगाए, बल्कि वह है जो अपने कर्मों से राष्ट्र को मजबूत बनाए। राष्ट्रवाद का सार यही है कि हमारी प्रत्येक सांस, प्रत्येक प्रयास और प्रत्येक उपलब्धि राष्ट्र के विकास, समाज की प्रगति और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित हो। राष्ट्रवादी वह है जो राष्ट्र के लिए निर्माण करता है, न कि व्यवधान उत्पन्न करता है। यही राष्ट्रवाद की वास्तविक और स्थायी परिभाषा है।

एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगरा में आयोजित आमसभा में की घोषणा

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) [एनयूजे (आई)] द्वारा स्थापित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन के अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय को नियुक्त किया गया है। वहीं, जनसत्ता के संवाददाता प्रियरंजन को महासचिव चुना गया है।

यह घोषणा आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की आमसभा में की गई, जहां पदाधिकारियों एवं गवर्निंग काउंसिल का गठन किया गया।

एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने आमसभा को संबोधित करते हुए स्कूल के नए संविधान की जानकारी दी तथा नवगठित पदाधिकारियों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल में भीष्म सिंह (जमशेदपुर) एवं अनीता चौधरी (दिल्ली) को उपाध्यक्ष, आलोक मोहन नायक को कोषाध्यक्ष तथा गौरव ललित (दिल्ली), विपुल कुमार (हरियाणा), भंवर सिंह (राजस्थान) और राहुल वर्मा (उत्तराखंड) को सचिव नियुक्त किया गया है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि एनयूजे स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन का नया संविधान औपचारिक रूप से अंगीकृत कर लिया गया है। यह निर्णय 13 सितंबर 2025 को आयोजित कार्यकारी बैठक में लिया गया था। नए संविधान के निर्माण में हरिद्वार में आयोजित एनयूजे (आई) अधिवेशन के दौरान गठित समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति में अनिल पांडेय, दधिबल यादव, मनोज वर्मा, राकेश थपलियाल और अमलेश राजू सहित अन्य सदस्य शामिल थे, जबकि एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पदेन सदस्य के रूप में समिति से जुड़े थे।

नए संविधान के अनुसार संस्था में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, चार संयुक्त/सह सचिव तथा 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का प्रावधान किया गया है।

गवर्निंग काउंसिल के अन्य सदस्यों में रास बिहारी, प्रदीप तिवारी, राकेश थपलियाल, उषा पहवा, दधिबल यादव, प्रतिभा शुक्ल, सचिन बुधौलिया, डॉ. उमेश पाठक, डॉ. ऋतु दुबे, प्रमोद गोस्वामी (उत्तर प्रदेश) तथा राकेश कुमार सिंह (बिहार) शामिल हैं।

गौरतलब है कि एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की स्थापना पत्रकारों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल मीडिया और मीडिया जगत में हो रहे निरंतर परिवर्तनों की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। संस्था देशभर में समय-समय पर कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों और मीडिया उन्नयन कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है। इसी क्रम में शीघ्र ही दिल्ली में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

दिल्ली में यूएनआई के कार्यालय पर दिल्ली पुलिस की कार्यवाही की निंदा

ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरिंदर सिंह सदस्य भारतीय प्रेस परिषद और फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव अशोक कुमार नवरत्न पूर्व सदस्य भारतीय प्रेस परिषद ने देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के रफी मार्ग स्थित दफ्तर पर दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई कठोर शब्दों में निंदा की है ।
इस कार्यवाही को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है । उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के दौरान पत्रकारों को घसीटा गया और उनके साथ बदसलूकी की गई, यहां तक कि महिला पत्रकारों को भी अपमानित किया गया । पत्रकारों को निजी सामान तक लेने और प्रबंधन से बात करने तक का अवसर नहीं दिया गया । पूरी कार्रवाई में कानून और लोकतांत्रिक मानकों की खुली अवहेलना की गई । उन्होंने कहा कि न्यूज रूम के अंदर पत्रकारों के साथ मारपीट की तस्वीरें इस बात का संकेत हैं कि देश में मीडिया की स्वतंत्रता कितनी कमजोर होती जा रही है । बताया जाता है कि यह कार्रवाई दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देश पर हुई और इसे दिल्ली पुलिस ने अंजाम दिया जो सीधे केंद्रीय गृह मंत्री के अधीन काम करती है । पुलिस के शक्ति के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं । उन्होंने कहा कि यह एक घटना नहीं बल्कि एक खतरनाक प्रवृत्ति है जिसमें संस्थाओं को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नतमस्तक करने का कुप्रयास है । इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की अधिनायकवादी प्रवृति पर कठोर और दोषियों की जवाबदेही बिना किसी देरी के तय की जानी चाहिए ।

अल्मोड़ा के हवालबाग में हुआ भव्य कार्यक्रम। बड़ी संख्या में पहुंचे किसान।

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि और किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से हवालबाग में राज्य स्तरीय “खेत बचाओ अभियान” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए कृषि संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा किसानों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। मोटे अनाजों विशेषकर मांडुआ, झंगोरा, चौलाई एवं अन्य पारंपरिक फसलों के संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि अल्मोड़ा की धरती पर किसानों के बीच आकर उन्हें नई ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनांदोलन बन चुका है। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि देश की शक्ति और हिम्मत हैं। हमारी संस्कृति में मिट्टी केवल भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि मां के समान पूजनीय है। इसलिए मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना और खेतों को रासायनिक पदार्थों से यथासंभव मुक्त रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित कृषि व्यवस्था छोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। कहा कि किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए बजट में 200 करोड़ रुपये का प्राविधान भी किया है।

मुख्यमंत्री ने किसानों से नियमित रूप से मिट्टी का परीक्षण कराने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह और वैज्ञानिक शोध के अनुरूप खेती करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसलों का चयन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रधानमंत्री के “मन की बात” कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बागवानी क्षेत्र के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पॉलीहाउस, फलोत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क तथा सुगंधित फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मोटे अनाजों को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ सीधे डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि के मामले में देश में उत्तराखंड का नाम प्रथम श्रेणी में आना सरकार की नीतियों की सफलता का जीता जागता उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों से केवल वादे नहीं करती, बल्कि धरातल पर कार्य करने में विश्वास रखती है। उन्होंने किसानों से अपनी खेती और मिट्टी का परीक्षण कराने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

किशोर दा के गीतों से सजी महफिल

मानव सेवा क्लब के तत्वावधान में सदा बहार गायक किशोर कुमार की याद में रामपुर बाग के एक सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। गीत-संगीत की शाम किशोर कुमार के नाम महफ़िल का प्रारंभ मां शारदे की वंदना से अरुणा सिन्हा द्वारा किया गया।किशोर कुमार के गीत प्रस्तुत करने वाले बेहतरीन कलाकार अजय कुमार को किशोर कुमार स्मृति संगीत सम्मान दिया गया।यह सम्मान क्लब के अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा,महासचिव मुकेश सक्सेना तथा अजय कुमार ने प्रदान किया। गीत-संगीत की महफिल में सुरेन्द्र बीनू सिन्हा ने तेरी भीगी-भीगी सी सुनाकर लोगों की खूब वाहवाही लूटी। प्रकाश चंद्र सक्सेना का कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना,अरुणा सिन्हा का गीत मेरे दिल में आज क्या है जो कहे तो मैं बता दूं और जितेंद्र सक्सेना गीत तेरा जैसा यार तेरा कहाँ श्रोताओं ने बहुत पसंद किया।
सत्येंद्र सक्सेना का गीत चला जाता हूं किसी की धुन में ने वातावरण आनंदमय कर दिया।मुकेश सक्सेना ने पल भर के लिये कोई मुझे प्यार कर ले ,बेबी शर्मा ने कोरा कागज था यह मन मेरा और अजय कुमार ने किशोर कुमार के हिट गीत ज़िन्दगी के सफर में प्रस्तुत करके समा बांध दिया,प्रसिद्ध गायक डा. असित रंजन ने आपकी आंखों में कुछ महके हुए से राज हैं की शानदार प्रस्तुति दी। गायिका शकुन सक्सेना ने रिमझिम गिरे सावन पेश करके वातावरण गुंजायमान कर दिया। अनिल गुप्ता का गीत यह शाम मस्तानी ने खूब तालियां बटोरी। सभी का आभार महासचिव मुकेश कुमार ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में असित रंजन,गंगा राम पाल, ब्रजेश कुमार और सोनी शामिल रहे। संचालन सुरेन्द्र बीनू सिन्हा ने किया।

हिन्दू सनातन बोर्ड’ के गठन को लेकर, संतों का राष्ट्रीय आह्वान

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी प्रेस वार्ता में ‘श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास’ द्वारा 7 जून को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित होने वाली ‘अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद’ की घोषणा की गई। इस आयोजन के माध्यम से न्यास ने सनातन संस्कृति की रक्षा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत की है।

इस पूरे आयोजन और मांग पत्र का सबसे प्रमुख केंद्र ‘हिन्दू सनातन बोर्ड’ का गठन करना है। न्यास का मानना है कि सनातन धर्म की संपत्तियों, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक व्यवस्थाओं के सुचारू व सुरक्षित संचालन के लिए एक सशक्त और स्वतंत्र ‘हिन्दू सनातन बोर्ड’ का होना समय की मांग है। इसके साथ ही, हिन्दुस्तान को आधिकारिक रूप से हिन्दू राष्ट्र घोषित करने, देश में गौ माता के कत्लेआम को पूरी तरह रोकने और गौरवशाली सनातन संस्कृति के संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण मांगों को इस धर्म संसद के मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया है। न्यास का संकल्प समाज को जाति-पाति के बंधनों से मुक्त कर एक अटूट सूत्र में पिरोना है।

प्रेस वार्ता में मौजूद संगठन के सभी प्रमुख पदाधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने इस धर्म संसद के उद्देश्यों को लेकर अपनी बात रखी। न्यास के अंतरराष्ट्रीय मुख्य संरक्षक श्री रूप सिंह नागर ने कहा कि हमारा उद्देश्य देशव्यापी संपर्क अभियान और धार्मिक यात्राओं के माध्यम से संतों, अखाड़ों और धार्मिक संगठनों को राष्ट्रहित में एक मंच पर लाना है। मुख्य याचिकाकर्ता श्री दिनेश फलाहारी जी महाराज ने न्यायपालिका पर अटूट भरोसा जताते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में हमारे पक्ष ने न्यायालय में सभी पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत कर दिए हैं और कानूनी रूप से हमारी जीत सुनिश्चित है।

कार्यक्रम की सह-प्रभारी एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती सोनिया ठाकुर ने इसे संपूर्ण सनातन समाज की सामूहिक आस्था का प्रश्न बताते हुए दिल्ली, मथुरा, आगरा और वृंदावन सहित पूरे देश से लाखों लोगों को शामिल होने का आह्वान किया। वहीं, महन्त श्री हर्षिल गिरी गोस्वामी जी ने प्राचीन धार्मिक मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया, तो श्री महीपाल बिधूड़ी जी ने गौ माता की रक्षा के लिए देशव्यापी जन-जागरण फैलाने की बात कही।

राष्ट्रीय महामन्त्री डॉ. सिद्धांत भट्टाचार्य ने संगठन के ध्येय को स्पष्ट करते हुए कहा कि हिंदुओं को जात-पात के भेदों में बंटने से रोकना और समाज को जागरूक करना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है। श्री बिट्टू बजरंगी जी ने कहा कि समाज को पूरी तरह संगठित करके ही हम एक सशक्त राष्ट्र की कल्पना को साकार कर सकते हैं। मुम्बई से आईं राष्ट्रीय ब्रैंड एम्बेसडर आराधना सोलंकी ने कहा कि महानगरों के युवाओं और मातृशक्ति को इस पावन अभियान से जोड़कर इसे एक ऐतिहासिक जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने “एकजुट हिंदू – सशक्त राष्ट्र” के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह धर्म संसद देश की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को एक नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगी।