अब मोबाइल से मिनटों में मिलेगा लोन : RBIH ला रहा नया डिजिटल ऐप, एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे कई बैंक विकल्प

देश में लोन लेने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) एक नया डिजिटल ऐप तैयार कर रहा है, जिसके जरिए लोग सीधे अपने मोबाइल फोन से औपचारिक कर्ज के लिए आवेदन कर सकेंगे। यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) नाम का यह प्लेटफॉर्म उधार लेने वालों और कर्ज देने वाले संस्थानों को एक ही जगह पर जोड़ने का काम करेगा, जिससे लोन लेने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल हो जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, इस ऐप की शुरुआत छोटे कर्ज और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोन से की जाएगी। इसमें डिजिटल किसान क्रेडिट, खेती के लिए ऋण और ग्रामीण जरूरतों से जुड़े फाइनेंस विकल्प शामिल होंगे। आगे चलकर सोना, डेयरी, हाउसिंग, पर्सनल और वाहन लोन जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा कॉमन प्लेटफॉर्म तैयार करना है जहां उधार लेने वाले व्यक्ति को अलग-अलग बैंकों या ऐप्स पर जाने की जरूरत न पड़े। ULI के जरिए पहचान सत्यापन से लेकर लोन स्वीकृति और राशि ट्रांसफर तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल और तेज हो सकेगी। ULI एक डिजिटल इंटरफेस के रूप में काम करेगा, जो डेटा सेवा देने वाली संस्थाओं और बैंकों या अन्य लेंडर्स के बीच सेतु बनेगा। 

इससे लोन लेने की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और कागजी औपचारिकताओं में भी कमी आएगी। फिलहाल यह ऐप शुरुआती चरण में है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में इससे लोन लेने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। ULI की शुरुआत किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण से की जाएगी। इससे एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बैंकों के लोन विकल्प उपलब्ध होंगे। उधार लेने वाला व्यक्ति अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सबसे बेहतर ऑफर चुन सकेगा।

इस सिस्टम से जुड़ने के लिए सभी रेगुलेटेड संस्थानों को ULI के मुख्य ढांचे से तकनीकी रूप से कनेक्ट होना होगा। साथ ही हर बैंक या लेंडर को लोन मंजूरी से पहले अपनी तय क्रेडिट पॉलिसी का पालन करना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह परियोजना शुरुआती दौर में है और इसे पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा।

UPI मॉडल की तरह काम करेगा ULI, एक ही जगह पर मिलेगा पूरा डेटा 

ULI का ग्राहक वाला हिस्सा देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल पर आधारित होगा। इसमें मुख्य सिस्टम के साथ एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिसे रेगुलेटर का समर्थन मिलेगा। इसी तरह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने UPI सिस्टम के साथ BHIM ऐप को जोड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, ULI प्लेटफॉर्म से अब तक 89 से अधिक लेंडर और 53 से ज्यादा डेटा सर्विस देने वाली संस्थाएं जुड़ चुकी हैं। ये संस्थाएं मिलकर 141 तरह की जानकारी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे लोन प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी है। यह प्लेटफॉर्म लेंडिंग सेक्टर की कई बड़ी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखता है। अब तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अलग-अलग एपीआई से जुड़ना पड़ता था और वैकल्पिक डेटा का सही उपयोग करना मुश्किल होता था। ULI इन सभी दिक्कतों का एक साथ समाधान देता है। 

इसे एक कॉमन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां जमीन के रिकॉर्ड, क्रेडिट स्कोर, आय सत्यापन और डेयरी जैसी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी। RBIH इन डेटा सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर उनकी सेवाओं को प्लेटफॉर्म से जोड़ रहा है, जिससे लेंडर्स को अलग-अलग सिस्टम से जुड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टैंडर्ड एपीआई और रियल टाइम डेटा की सुविधा मिलने से लोन प्रोसेसिंग तेज और सस्ती हो सकेगी। अनुमान है कि इस सिस्टम से लेंडिंग लागत में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इससे छोटे उधारकर्ताओं, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार का बड़ा प्लान, गैस निर्भरता घटाने को इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ेगा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सप्लाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने कुकिंग गैस पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े कुकिंग उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि एलपीजी की खपत कम की जा सके और संभावित सप्लाई संकट से निपटा जा सके। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय के महानिदेशक सहित कई शीर्ष अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे दबाव और ऊर्जा आयात से जुड़े जोखिमों का आकलन किया गया। खासतौर पर ईरान से जुड़े युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण गैस और तेल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई गई। 

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो घरेलू स्तर पर वैकल्पिक कुकिंग व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा। इसी के तहत इंडक्शन कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए उनके उत्पादन को बढ़ाने पर चर्चा की गई। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर, इलेक्ट्रिक कुकटॉप और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उत्पादों की मांग में तेजी आई है। कई उपभोक्ता गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि इन उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और इनके आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। इससे न केवल गैस की खपत कम होगी बल्कि इलेक्ट्रिक कुकिंग को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में यह भी विचार किया गया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए उद्योगों को किस तरह प्रोत्साहन दिया जाए। इसमें स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात शुल्क संरचना में बदलाव, और जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि अगर इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ता है, तो यह ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी फायदेमंद होगा और उपभोक्ताओं को विकल्प भी मिलेंगे।

पश्चिम एशिया तनाव से ऊर्जा सप्लाई पर खतरा, सरकार ने बढ़ाई तैयारी

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए आयात पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति में संभावित बाधा को लेकर चिंता जताई गई है। सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि घरेलू बाजार में सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके। सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है। ऊर्जा क्षेत्र में जोखिम बढ़ने के कारण वैकल्पिक स्रोतों और घरेलू समाधान पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में इंडक्शन कुकिंग को गैस के विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जा रही है। उधर, कतर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट को नुकसान पहुंचने की खबर के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में बताया जा रहा है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। 

इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है और भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए जोखिम भी बढ़ गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। अब भारत रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से अधिक कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं, ताकि सप्लाई में व्यवधान की स्थिति में विकल्प मौजूद रहें। इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर बेहद कड़ा प्रहार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को “स्टोन एजेज” यानी पाषाण युग में पहुंचा देगा। इसके कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था। ट्रंप की चेतावनी ऐसे समय आई है जब यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां जारी हैं। वहीं ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे एकतरफा और अव्यवहारिक बताया है। बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू विकल्पों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, जिसमें इंडक्शन कुकिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ाना अहम रणनीति के रूप में सामने आया है।

देशभर में बदला मौसम का मिजाज : 11 राज्यों में तेज बारिश का अलर्ट, कई जगह ओलावृष्टि की चेतावनी 

देशभर में गर्मी की शुरुआत होते ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। दिल्ली, पंजाब सहित करीब 11 राज्यों में शनिवार को तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में ओलावृष्टि और बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत से लेकर मध्य और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अगले दो दिनों तक मौसम अस्थिर बना रहेगा। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को मौसम ने अचानक पलटी मारी और 36 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर तेज हवाएं चलीं, जबकि कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने शनिवार को भी प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि की आशंका जताई है। किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि गेहूं और चने की कटाई का समय चल रहा है।

राजस्थान में भी मौसम का असर देखने को मिला। रेगिस्तानी जिले जैसलमेर और बीकानेर में शुक्रवार को जमकर ओले गिरे। कई जगह खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा। 

अजमेर और ब्यावर में तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गए और टीनशेड उड़ गए। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने का अनुमान जताया है। उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने परेशानी बढ़ा दी है। मथुरा के कोसीकला अनाज मंडी में बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ। यहां करीब 10 हजार बोरियों में रखा लगभग 5 हजार क्विंटल गेहूं भीग गया। मंडी में पानी भर जाने से व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। इससे पहले राज्य के अलग-अलग जिलों में बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत की खबर सामने आई है। 

प्रशासन ने लोगों से खुले स्थानों में जाने से बचने की अपील की है। हिमाचल प्रदेश में राजधानी शिमला में तेज तूफान के साथ हल्की बारिश हुई, जबकि लाहौल-स्पीति के ऊंचे पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट आई है। वहीं उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में भी शनिवार सुबह ताजा बर्फबारी हुई, जिससे ठंड फिर बढ़ गई है।

अगले दो दिन कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार 5 और 6 अप्रैल को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश की संभावना है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि हो सकती है। तमिलनाडु के कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश में शनिवार को लखनऊ और कानपुर समेत 35 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं करीब 55 जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि खराब मौसम के कारण अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाएगा।

हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अप्रैल महीने में भी बर्फबारी जारी है। बीती रात अटल टनल, दारचा, रोहतांग दर्रा, शिंकुला दर्रा और स्पीति घाटी में ताजा बर्फ गिरी। इससे पर्यटकों के लिए मार्ग फिसलन भरे हो गए हैं और प्रशासन ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। शनिवार के लिए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में ओले गिरने और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, खुले मैदानों से दूर रहने और बिजली गिरने की आशंका के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी है। किसानों को भी फसल की कटाई में सावधानी बरतने और तैयार अनाज को सुरक्षित स्थानों पर रखने को कहा गया है। अगले दो दिनों तक देश के कई हिस्सों में मौसम का यही बदला हुआ मिजाज जारी रहने की संभावना है।

आज से नया वित्त वर्ष शुरू : 1 अप्रैल से बदले कई नियम, FASTag महंगा, टिकट कैंसिलेशन सख्त, टैक्स सिस्टम बदला

नए महीने के साथ नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत हो गई है और 1 अप्रैल से देशभर में कई अहम नियम बदल गए हैं। ये बदलाव सीधे तौर पर आम लोगों की जेब, यात्रा, डिजिटल पेमेंट और टैक्स सिस्टम को प्रभावित करेंगे। रेलवे टिकट कैंसिलेशन से लेकर FASTag, पैन कार्ड, डिजिटल पेमेंट और आयकर व्यवस्था तक कई ऐसे फैसले लागू हुए हैं जिनका असर रोजमर्रा के खर्च और बचत पर पड़ेगा। आइए जानते हैं आज से लागू हुए प्रमुख बदलावों के बारे में।

FASTag हुआ महंगा, कैश पेमेंट खत्म

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए FASTag का वार्षिक पास महंगा हो गया है। अब इसकी कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर कैश भुगतान की सुविधा पूरी तरह खत्म कर दी गई है। अब वाहन चालकों को टोल देने के लिए FASTag, यूपीआई या क्यूआर कोड जैसे डिजिटल माध्यमों का ही इस्तेमाल करना होगा। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन नकद भुगतान करने वालों को बदलाव अपनाना पड़ेगा।

UPI से ATM निकासी भी गिनी जाएगी फ्री लिमिट में

बैंकिंग से जुड़ा एक अहम बदलाव भी आज से लागू हो गया है। अब बिना कार्ड के यूपीआई के जरिए एटीएम से कैश निकालने पर यह ट्रांजैक्शन भी आपके मासिक फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन में शामिल किया जाएगा। यानी यदि आपकी तय फ्री लिमिट खत्म हो जाती है, तो यूपीआई के माध्यम से कैश निकालने पर भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

रेलवे टिकट कैंसिलेशन नियम सख्त

रेलवे यात्रियों के लिए टिकट कैंसिलेशन नियमों में बदलाव किया गया है। अब कंफर्म टिकट पर रिफंड पाने के लिए ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना होगा। पहले यह सीमा 4 घंटे थी। इस बदलाव से यात्रियों को यात्रा योजनाएं पहले तय करनी होंगी, नहीं तो रिफंड मिलना मुश्किल हो सकता है।

बोर्डिंग स्टेशन बदलने की समय सीमा तय

रेलवे ने बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियम भी अपडेट किए हैं। अब यात्री ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से केवल 30 मिनट पहले तक ही ऑनलाइन बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा चार्ट तैयार होने तक उपलब्ध रहती थी। इस बदलाव का मकसद अंतिम समय में होने वाले बदलावों को सीमित करना है।

पैन कार्ड के लिए बढ़ी दस्तावेजों की जरूरत

पैन कार्ड बनवाने के नियम भी बदल गए हैं। अब सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड बनवाना संभव नहीं होगा। आवेदन के समय अतिरिक्त पहचान दस्तावेज जैसे वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य वैध पहचान पत्र देना पड़ सकता है। यह कदम पहचान सत्यापन को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

डिजिटल पेमेंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाया गया है। अब सभी डिजिटल पेमेंट के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। यानी ओटीपी के साथ-साथ पिन, बायोमेट्रिक या फेस आईडी जैसी अतिरिक्त सुरक्षा का इस्तेमाल करना होगा। यूपीआई में यह व्यवस्था पहले से मौजूद थी, लेकिन अब इसे अन्य डिजिटल वॉलेट और पेमेंट गेटवे पर भी लागू किया गया है।

नया आयकर सिस्टम लागू, टैक्स ईयर की नई व्यवस्था

आज से नया आयकर कानून भी प्रभावी हो गया है। इसमें पुराने फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जटिल व्यवस्था को हटाकर एक ही “टैक्स ईयर” का प्रावधान किया गया है। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है।

स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें बरकरार

वित्त मंत्रालय ने अप्रैल से जून तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स योजनाओं की ब्याज दरें जारी कर दी हैं। पब्लिक प्रोविडेंट फंड, सुकन्या समृद्धि योजना और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट जैसी योजनाओं की दरों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।1 अप्रैल से लागू ये बदलाव आम लोगों के दैनिक खर्च, यात्रा और वित्तीय लेन-देन को प्रभावित करेंगे। ऐसे में इन नए नियमों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि अनावश्यक शुल्क और असुविधा से बचा जा सके।

वेस्ट एशिया तनाव का असर : कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़े, एयर टरबाइन फ्यूल भी महंगा; होटल और हवाई यात्रा पर पड़ेगा असर

वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। राजधानी दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर 195.50 रुपये महंगा होकर 2,078.50 रुपये का हो गया है। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत में 218 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो हाल के महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 1 मार्च को भी 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 114.50 रुपये की वृद्धि की गई थी।

 लगातार हो रही बढ़ोतरी से छोटे कारोबारियों और सेवा क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ गया है। खासकर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस और बेकरी जैसे कारोबार कमर्शियल गैस पर निर्भर होते हैं, इसलिए इनकी लागत में सीधा असर पड़ेगा। कमर्शियल गैस महंगी होने से खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। चाय, नाश्ता, थाली, फास्ट फूड और होम डिलीवरी सेवाओं की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत

कमर्शियल गैस महंगी होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ न बढ़ाने का फैसला किया है।

सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, एलपीजी की लागत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।

अगर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में घरेलू सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर ही बिक रहा है। पिछले साल मार्च में केंद्र सरकार द्वारा 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती किए जाने के बाद से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

विमान ईंधन ATF में भी बड़ा उछाल

कमर्शियल गैस के साथ-साथ विमान ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। 1 अप्रैल से दिल्ली में ATF की कीमत बढ़कर करीब 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। पिछले महीने इसकी कीमत 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर थी। इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों की लागत में अचानक इजाफा कर दिया है।

एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में ATF का हिस्सा 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस के लिए संचालन लागत बढ़ना तय है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में हवाई किरायों पर पड़ सकता है। गर्मियों की छुट्टियों के सीजन में यात्रा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

कमर्शियल गैस और ATF दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। एक ओर होटल और रेस्टोरेंट महंगे होंगे, तो दूसरी ओर हवाई यात्रा भी महंगी हो सकती है। इससे सेवा क्षेत्र में लागत बढ़ेगी और इसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी रहने से ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

“उत्तराखण्ड साहित्य भूषण” से डॉ. जितेन ठाकुर सम्मानित, मुख्यमंत्री धामी बोले- नई पीढ़ी तक पहुंचेगी सांस्कृतिक विरासत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित “उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025” में प्रतिभाग करते हुए प्रदेश के वरिष्ठ और युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया। उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “उत्तराखण्ड साहित्य भूषण सम्मान” से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का सशक्त माध्यम भी है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने “उत्तराखण्ड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” से डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं सहित विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को भी सम्मानित किया। साहित्य नारी वंदन सम्मान के अंतर्गत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य के लिए प्रो. दिनेश चमोला को सम्मानित किया गया। वहीं उत्तराखण्ड मौलिक रचना पुरस्कार के अंतर्गत डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाईं को सम्मान मिला। उत्कृष्ट कुमाऊंनी एवं गढ़वाली साहित्य के लिए तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि “उत्तराखण्ड साहित्य भूषण सम्मान” से सम्मानित डॉ. जितेन ठाकुर न केवल राज्य बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि सम्मानित साहित्यकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

साहित्यिक विरासत को संजोने के लिए ‘साहित्य ग्राम’ की पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र रही है। हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने यहां के साहित्यकारों को प्रेरणा दी है। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार विभिन्न पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित कर रही है और ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में दो “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं। इन साहित्य ग्रामों में साहित्यकारों को रचना के लिए शांत वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखण्ड की बिखरी साहित्यिक धरोहर को संकलित और संरक्षित करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है और आज के समय में यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, बोली और परंपराओं से जोड़ने में साहित्य की बड़ी भूमिका है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य के साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूत करेंगे और उत्तराखण्ड की पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करेंगे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, खजान दास, विधायक सविता कपूर सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

अच्छी खबर : हर जिले में सस्ता केरोसिन उपलब्ध कराने की तैयारी, पेट्रोल पंपों पर नई सुविधा शुरू करेगी केंद्र सरकार

देशभर में आम लोगों को राहत देने और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक अहम और सराहनीय पहल का फैसला लिया है। अब पेट्रोल पंपों पर भी केरोसिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इस योजना के तहत हर जिले में कम से कम दो पेट्रोल पंपों को केरोसिन वितरण की अनुमति दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों, दूर-दराज के इलाकों और सीमित संसाधनों वाले परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले के मुताबिक तेल कंपनियां चयनित पेट्रोल पंपों पर केरोसिन का स्टॉक रखेंगी। शुरुआती चरण में प्रत्येक अधिकृत पंप पर करीब 5 हजार लीटर केरोसिन का भंडारण किया जा सकेगा। इससे जरूरत के समय तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित होगी और लोगों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। लंबे समय से कई राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला केरोसिन कम होता जा रहा था, जिससे जरूरतमंद परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही थी। अब पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता बढ़ने से इस समस्या का समाधान हो सकता है। यह कदम खासकर उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगा जहां एलपीजी या पाइप्ड गैस की पहुंच अभी सीमित है। पहाड़ी इलाकों, ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में आज भी केरोसिन का उपयोग खाना बनाने, लैंप जलाने और छोटे व्यवसायों में किया जाता है। पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता से इन लोगों को नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।

तेल कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय मांग के आधार पर वितरण की योजना तैयार करें। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि केरोसिन की बिक्री पारदर्शी तरीके से हो और कालाबाजारी की संभावना कम हो। डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी प्रणाली के जरिए स्टॉक और बिक्री का डेटा रखा जाएगा। इससे वितरण व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनेगी। इस फैसले का बड़ा फायदा यह भी होगा कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी केरोसिन आसानी से उपलब्ध रहेगा। प्राकृतिक आपदा, बिजली संकट या अन्य आपात स्थितियों में केरोसिन एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ईंधन के रूप में काम आता है। पेट्रोल पंपों के नेटवर्क का उपयोग करके सरकार इसकी पहुंच तेजी से बढ़ा सकती है।

आम लोगों को राहत और वितरण प्रणाली मजबूत करने की दिशा में कदम

केंद्र सरकार की इस पहल को ऊर्जा पहुंच के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पेट्रोल पंपों का नेटवर्क देश के लगभग हर जिले में मौजूद है, ऐसे में इस सुविधा से वितरण प्रणाली मजबूत होगी। पहले केरोसिन लेने के लिए लोगों को सरकारी डिपो या सीमित दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर आपूर्ति बाधित रहती थी। अब पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। सरकार का उद्देश्य यह भी है कि जरूरतमंद लोगों को सुलभ और नियंत्रित दरों पर ईंधन उपलब्ध कराया जाए। तेल कंपनियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह तय करेंगी कि किन पंपों पर यह सुविधा शुरू की जाए। प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाएगी जहां केरोसिन की मांग अधिक है या जहां वैकल्पिक ईंधन के साधन कम हैं। इसके अलावा, पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। केरोसिन के भंडारण और वितरण के लिए अलग टैंक और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि ईंधन वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। इस योजना से छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। कई छोटे उद्योग, जैसे ढाबे, चाय की दुकानें, मोबाइल फूड यूनिट और ग्रामीण स्तर के व्यवसाय, केरोसिन पर निर्भर रहते हैं। उन्हें अब नियमित और आसान आपूर्ति मिलेगी, जिससे उनका काम प्रभावित नहीं होगा। केंद्र सरकार की यह पहल ऊर्जा पहुंच को बेहतर बनाने, जरूरतमंद लोगों को राहत देने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। अगर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो देश के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा और ग्रामीण तथा दूरदराज के इलाकों में ईंधन की उपलब्धता और मजबूत होगी। यह निर्णय आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक व्यावहारिक और सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।

खुशियों से भरा कपूर परिवार, बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर दूसरी बार बनीं मां, बेटे के जन्म की दी खुशखबरी

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर के घर खुशियों ने एक बार फिर दस्तक दी है। रविवार का दिन उनके परिवार के लिए बेहद खास बन गया, जब सोनम कपूर ने अपने दूसरे बेटे को जन्म दिया। इस खुशखबरी की जानकारी खुद अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस और करीबियों के साथ साझा की। जैसे ही यह खबर सामने आई, परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बधाइयों की झड़ी लगा दी। सोनम और उनके पति आनंद आहूजा अब दो बच्चों के माता-पिता बन गए हैं और चार सदस्यों का उनका परिवार पूरा हो गया है। सोनम कपूर ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने बेटे के जन्म की घोषणा की। उन्होंने लिखा कि बेहद शुक्रगुजार और प्यार से भरे दिल के साथ वह 29 मार्च 2026 को अपने बेटे के जन्म की खुशखबरी दे रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के आने से उनका परिवार और बड़ा हो गया है और घर में खुशियों का माहौल है। सोनम ने अपने संदेश में यह भी जताया कि यह नई शुरुआत उनके लिए बेहद खास है और वे इस अनमोल पल के लिए खुद को धन्य महसूस कर रही हैं। अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में अपने बड़े बेटे वायु का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वायु अपने छोटे भाई के आने से बेहद उत्साहित है और उसे लेकर काफी खुश है। सोनम ने लिखा कि उनके घर में प्यार और खुशियों की नई लहर आ गई है और पूरा परिवार इस नए सदस्य का स्वागत करने के लिए बेहद उत्साहित है। पोस्ट के अंत में सोनम और आनंद आहूजा ने लिखा कि वे चार लोगों के परिवार के रूप में इस खूबसूरत नए सफर की शुरुआत करने जा रहे हैं और इसके लिए वे बेहद आभारी हैं।

फिल्मी सितारों ने दी बधाई, परिवार में जश्न का माहौल

सोनम कपूर की इस खुशखबरी पर फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों और परिवार के सदस्यों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। अभिनेत्री करीना कपूर ने कमेंट करते हुए उन्हें बधाई दी और खुशी जाहिर की। वहीं सोनम की बहन रिया कपूर ने दिल वाले इमोजी के साथ अपनी खुशी व्यक्त की। सोनम के चाचा संजय कपूर ने भी रेड हार्ट इमोजी के जरिए परिवार में आई इस खुशी पर प्रतिक्रिया दी। इसके अलावा अभिनेत्री दीया मिर्जा और हुमा कुरैशी समेत कई अन्य सेलेब्स ने भी कमेंट सेक्शन में सोनम और आनंद को शुभकामनाएं दीं। बताया जा रहा है कि सोनम कपूर के परिवार में इस खबर के बाद जश्न का माहौल है। करीबी रिश्तेदार और दोस्त लगातार उन्हें बधाई संदेश भेज रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी फैंस ने सोनम कपूर को ढेरों शुभकामनाएं दीं और मां बनने की खुशी पर उन्हें बधाई दी। कई फैंस ने लिखा कि कपूर परिवार में फिर से नन्हीं किलकारी गूंजी है, जो बेहद खास पल है। सोनम कपूर ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा पिछले साल नवंबर में की थी। उस दौरान उन्होंने एक खूबसूरत तस्वीर साझा की थी जिसमें वह हॉट पिंक रंग के सूट में नजर आई थीं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में सिर्फ एक शब्द लिखा था “मां”। उनकी इस पोस्ट के बाद फैंस ने कयास लगाने शुरू कर दिए थे कि सोनम कपूर जल्द ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। इसके बाद से ही उनके फैंस इस खुशखबरी का इंतजार कर रहे थे। गौरतलब है कि सोनम कपूर ने साल 2018 में बिजनेसमैन आनंद आहूजा से शादी की थी। दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद शादी के बंधन में बंधे थे। शादी के बाद सोनम फिल्मों के साथ-साथ अपने निजी जीवन पर भी ध्यान देती नजर आईं। अगस्त 2022 में उन्होंने अपने पहले बेटे वायु को जन्म दिया था। वायु के जन्म के बाद सोनम ने कुछ समय तक फिल्मों से दूरी बनाई और परिवार के साथ समय बिताया। अब दूसरे बेटे के जन्म के साथ ही सोनम कपूर और आनंद आहूजा का परिवार पूरा हो गया है।

राजधानी दिल्ली में गर्मी के बीच बारिश का येलो अलर्ट, हिमाचल प्रदेश में ताजा हिमपात, कई राज्यों में बदला मौसम 

देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। राजधानी दिल्ली में जहां तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, वहीं बारिश और तेज हवाओं की संभावना ने मौसम को बदला-बदला बना दिया है। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात और मैदानी क्षेत्रों में बारिश से ठंडक लौट आई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 24 घंटों में उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम का यही मिला-जुला मिजाज बना रह सकता है। दिल्ली में सोमवार 30 मार्च को गर्मी के बीच हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। रविवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो औसत से 1.7 डिग्री ज्यादा है। मार्च के आखिरी दिनों में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, हालांकि बीच-बीच में बादल और हवाओं ने गर्मी से राहत दी है।

मौसम विभाग ने सोमवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार दोपहर और शाम के समय हल्की से बहुत हल्की बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। रात के समय कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। आज अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मार्च महीने के दौरान दिल्ली में मौसम का मिजाज मिला-जुला रहा है। महीने के मध्य के बाद कई दिनों तक बारिश दर्ज की गई, हालांकि कई पूर्वानुमानों के बावजूद मौसम ज्यादातर शुष्क रहा। इसी वजह से तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, लेकिन दिन का औसत तापमान फिर भी ऊपर रहा। इस दौरान औसत अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री और औसत न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि दिन में धूप निकलने से गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

खराब मौसम को देखते हुए पर्यटकों के लिए अटल टनल को अस्थायी रूप से किया गया बंद–

हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है। रोहतांग दर्रा, बारालाचा ला और शिंकुला में करीब एक फीट तक ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। वहीं अटल टनल रोहतांग के दोनों छोर पर करीब तीन इंच हिमपात हुआ है। खराब मौसम को देखते हुए पर्यटकों के लिए अटल टनल को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। चंबा, कांगड़ा, मंडी और शिमला जिलों में भी बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में गिरावट आई है। ताजा हिमपात और बारिश का असर कृषि और बागवानी पर सकारात्मक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं, जौ, चना और मटर की फसलों के लिए यह बारिश फायदेमंद है। इससे अनाज के दानों का विकास बेहतर होगा। इसके अलावा प्लम, खुबानी और सेब जैसे गुठलीदार फलों के लिए भी यह मौसम लाभदायक बताया जा रहा है। बारिश और ठंडी हवाओं की वजह से प्रदेश के कई इलाकों में दिन के तापमान में 9 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है। लाहौल-स्पीति और मनाली क्षेत्र में बर्फबारी के कारण सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। केलंग-मनाली मार्ग पर फिलहाल केवल फोर बाई फोर वाहनों को आवाजाही की अनुमति दी गई है। सीमा सड़क संगठन की ओर से सड़क बहाली का काम जारी है, लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा कांगड़ा में 19 मिलीमीटर और चंबा के जोत क्षेत्र में 16 मिलीमीटर दर्ज की गई। ताबो और सेऊबाग में 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश में हल्की बर्फबारी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट की संभावना है। वहीं दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बादल, हल्की बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है, जिससे मार्च के अंत में मौसम का मिजाज बदला-बदला बना रहेगा।

खार्ग द्वीप पर कब्जे की धमकी ! अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उग्र तेवर, कहा- ‘हम चाहें तो अभी ले लें’, ईरान को खुली चेतावनी

अमेरिका और ईरान में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का एक बेहद तीखा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल टर्मिनल खार्ग द्वीप पर कब्जा करने पर विचार कर सकता है। इस बयान ने मध्य-पूर्व में पहले से ही सुलग रहे हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प हैं और उनमें खार्ग द्वीप को अपने नियंत्रण में लेना भी शामिल हो सकता है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “हो सकता है हम खार्ग द्वीप ले लें, हो सकता है नहीं लें। लेकिन हमारे पास विकल्प मौजूद हैं और हम हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका ऐसा कदम उठाता है तो उसे कुछ समय तक द्वीप पर मौजूद रहना पड़ेगा। ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है और वहां से देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का निर्यात होता है। ऐसे में इस द्वीप पर नियंत्रण का मतलब ईरान की आर्थिक नस पर चोट करना माना जा रहा है। ट्रंप ने ईरान की रक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि खार्ग द्वीप पर मजबूत सुरक्षा नहीं है और अमेरिका वहां आसानी से कब्जा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के पास पर्याप्त क्षमता है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है। गौरतलब है कि अमेरिका पहले भी खार्ग द्वीप के आसपास हवाई हमले कर चुका है। उस समय अमेरिकी प्रशासन ने कहा था कि हमले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे और उनका उद्देश्य ईरान की रणनीतिक क्षमता को कमजोर करना था। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर खार्ग द्वीप को लेकर कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी खाड़ी में अस्थिरता बढ़ सकती है। दुनिया के तेल बाजार पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि खार्ग द्वीप वैश्विक तेल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में ट्रंप के बयान को बेहद आक्रामक कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान ने भी इस बयान पर कड़ा रुख अपनाया है। तेहरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि अमेरिकी सेना ईरान की जमीन पर उतरती है तो जवाब बेहद सख्त होगा। ईरान ने कहा है कि वह खाड़ी क्षेत्र के अरब देशों पर जमीनी हमले कर सकता है और नए सैन्य अभियान भी शुरू किए जा सकते हैं। इस चेतावनी ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों की आवाजाही बढ़ी–

ट्रंप ने अपने बयान में स्ट्रेट ऑफ होरमुज का भी जिक्र किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ने तेल टैंकरों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। ट्रंप के मुताबिक पहले 10 पाकिस्तानी झंडे वाले टैंकरों को गुजरने दिया गया और अब करीब 20 टैंकर इस रास्ते से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये टैंकर सीधे स्ट्रेट ऑफ होरमुज के बीच से होकर जा रहे हैं, जो हाल के तनाव के बीच एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि टैंकरों को अनुमति देने का फैसला कालिबाफ की ओर से लिया गया है और इससे बातचीत की संभावना बनी है। हालांकि, दूसरी ओर कालिबाफ ने सोशल मीडिया पर अमेरिका के खिलाफ कड़े बयान दिए हैं। उन्होंने अमेरिकी दबाव को अस्वीकार करते हुए कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। इस विरोधाभास ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान किया है और इसे रणनीतिक बयानबाजी माना जा रहा है। ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने के बाद कालिबाफ की भूमिका देश की राजनीति में और मजबूत होती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि वह सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तर पर प्रभाव बढ़ा रहे हैं। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होरमुज से टैंकरों को अनुमति देना सामरिक कदम भी हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव को संतुलित किया जा सके।यदि खार्ग द्वीप को लेकर तनाव बढ़ता है और स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर असर पड़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से दुनिया भर की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव पर टिकी हुई हैं। ट्रंप के उग्र बयान और ईरान की चेतावनी के बाद हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। यदि दोनों देशों के बीच बयानबाजी से आगे बढ़कर कोई सैन्य कदम उठाया गया तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। फिलहाल, कूटनीतिक हल की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन जिस तरह से बयान सामने आ रहे हैं, उससे तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।