आज खुलेगा देश का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, एनसीआर को मिलेगी नई उड़ान, पीएम मोदी करेंगे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का शुभारंभ

करीब ढाई दशक के इंतजार के बाद शनिवार को जेवर से देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब 11:30 बजे गौतम बुद्ध नगर के जेवर पहुंचकर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे और परियोजना की प्रगति की जानकारी लेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें वे एयरपोर्ट के आर्थिक, औद्योगिक और क्षेत्रीय विकास में योगदान को लेकर अपनी बात रखेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस एयरपोर्ट का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती हवाई यातायात की मांग को पूरा करना है। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ प्रतिवर्ष होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है। यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दबाव कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक विकल्प बनेगा। उद्घाटन समारोह को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे क्षेत्र को कई जोन में बांटा गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए यातायात प्रबंधन की विशेष योजना लागू की गई है। यमुना एक्सप्रेसवे और आसपास के मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी गई है, ताकि कार्यक्रम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की खासियतें, 24 घंटे उड़ान संचालन की सुविधा

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को आधुनिक तकनीक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो बड़े और आधुनिक विमानों के संचालन में सक्षम होगा। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग लगाई गई है, जिससे हर मौसम में 24 घंटे उड़ान संचालन संभव होगा। इसके अलावा टर्मिनल भवन को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। यह यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित है और भविष्य में इसे मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और आसपास के शहरों से पहुंच आसान होगी। कार्गो संचालन के लिए भी यहां विशेष सुविधा विकसित की गई है। शुरुआती चरण में 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो क्षमता होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है। इससे निर्यात-आयात गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट की डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल भवन में घाटों और पारंपरिक स्थापत्य शैली की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही, इसे शून्य-उत्सर्जन लक्ष्य के साथ विकसित किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि यह एयरपोर्ट भविष्य में दुनिया के सबसे पर्यावरण-अनुकूल हवाई अड्डों में शामिल होगा।

एनसीआर और पश्चिमी यूपी के विकास को मिलेगी रफ्तार, निवेश और रोजगार के नए अवसर

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से गेम-चेंजर माना जा रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ता दबाव कम होगा और एनसीआर में हवाई यातायात का संतुलन बनेगा। इससे खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहरों को सीधा फायदा मिलेगा। मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा और आगरा जैसे शहरों के लोगों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी। इसके अलावा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि आगरा और मथुरा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल इस एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेंगे। औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक पार्क और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र एयरोसिटी के रूप में विकसित होगा, जहां होटल, कन्वेंशन सेंटर और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के एविएशन नेटवर्क को मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक एयर ट्रांसपोर्ट मानचित्र पर नई पहचान देगा। पहले चरण में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों की शुरुआत की तैयारी है। उद्घाटन के साथ ही यह परियोजना संचालन की दिशा में बड़ा कदम रखेगी और एनसीआर को नई उड़ान देने का सपना साकार होगा।

विशाखापत्तनम-दिल्ली इंडिगो विमान की आपात लैंडिंग, इंजन में खराबी से 160 यात्रियों की सांसें थमीं

विशाखापत्तनम से दिल्ली आ रहे इंडिगो के एक यात्री विमान को शनिवार को तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारना पड़ा। विमान में सवार 160 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की कुछ देर के लिए सांसें थम गईं, लेकिन पायलट की सूझबूझ और हवाई अड्डे पर मुस्तैद टीमों की तत्परता से सभी यात्री सुरक्षित रहे। अधिकारियों के अनुसार विमान के एक इंजन में खराबी आने के बाद एहतियात के तौर पर आपात स्थिति घोषित की गई और विमान को साथ उतारा गया। विशाखापत्तनम से दिल्ली के लिए रवाना हुआ यह विमान सामान्य रूप से उड़ान भरकर आगे बढ़ रहा था। उड़ान के दौरान चालक दल को इंजन में तकनीकी गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके बाद पायलट ने तुरंत हवाई यातायात नियंत्रण से संपर्क कर स्थिति की जानकारी दी। हालात को देखते हुए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पूर्ण आपात स्थिति घोषित कर दी गई। इसके साथ ही अग्निशमन दल, चिकित्सकीय टीमें और अन्य आपात सेवाएं रनवे के पास तैनात कर दी गईं। विमान में सवार यात्रियों को भी कुछ देर बाद स्थिति की जानकारी दी गई। अचानक आई इस सूचना से यात्रियों में घबराहट का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने सीट बेल्ट कसकर पकड़ ली और प्रार्थना करने लगे। हालांकि चालक दल ने लगातार यात्रियों को आश्वस्त किया कि विमान सुरक्षित रूप से उतारा जाएगा और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पायलट ने संयम बनाए रखते हुए विमान की ऊंचाई और गति नियंत्रित की और सुरक्षित लैंडिंग की तैयारी शुरू की। बताया गया कि सुबह करीब 10 बजकर 39 मिनट पर हवाई अड्डे पर पूर्ण आपात स्थिति लागू कर दी गई थी। इसके बाद विमान को प्राथमिकता देते हुए उतरने की अनुमति दी गई। कुछ देर बाद विमान ने सुरक्षित रूप से रनवे पर लैंडिंग कर ली। जैसे ही विमान जमीन पर उतरा, यात्रियों और चालक दल ने राहत की सांस ली। विमान को एहतियात के तौर पर अलग स्थान पर ले जाया गया, जहां तकनीकी जांच शुरू की गई।

सुरक्षित लैंडिंग के बाद यात्रियों ने ली राहत की सांस

विमान के सुरक्षित उतरते ही सभी यात्रियों को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। किसी यात्री को चोट लगने या किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। हवाई अड्डे पर मौजूद चिकित्सा टीमों ने यात्रियों की सामान्य जांच भी की। अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया सावधानी के साथ की गई ताकि किसी तरह की अफरातफरी न हो।

यात्रियों ने बताया कि उड़ान के दौरान अचानक चालक दल की ओर से सतर्क रहने का संदेश मिला, जिससे सभी चिंतित हो गए थे। कुछ यात्रियों ने कहा कि उन्हें विमान में हल्का कंपन महसूस हुआ, जिसके बाद उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हुआ। हालांकि चालक दल लगातार यात्रियों को भरोसा दिलाता रहा कि विमान सुरक्षित तरीके से उतारा जाएगा। ऐसे मामलों में पायलट का अनुभव और त्वरित निर्णय बेहद अहम होता है। इंजन में खराबी की स्थिति में विमान को नजदीकी सुरक्षित हवाई अड्डे पर उतारना सबसे सही विकल्प माना जाता है। दिल्ली हवाई अड्डे पर पहले से आपात सेवाएं तैयार रहने से जोखिम काफी कम हो जाता है। इंडिगो की ओर से भी इस घटना को लेकर आवश्यक जांच शुरू कर दी गई है। तकनीकी टीम विमान के इंजन और अन्य हिस्सों की जांच कर रही है, ताकि खराबी के कारणों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसे सावधानी के तौर पर गंभीरता से लिया गया और आपात लैंडिंग का निर्णय लिया गया।

समय रहते लिया गया फैसला, टली बड़ी अनहोनी

समय रहते आपात स्थिति घोषित करना और विमान को प्राथमिकता देना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम था। इस तरह की परिस्थितियों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लेकिन इस मामले में पायलट, चालक दल और हवाई अड्डा प्रशासन ने समन्वय के साथ काम किया, जिससे संभावित खतरा टल गया।

हवाई अड्डा प्रशासन ने बताया कि आपात स्थिति के दौरान सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। रनवे को खाली कराया गया, अग्निशमन वाहन तैनात किए गए और चिकित्सा दल को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरते ही राहत कार्य शुरू कर दिए गए। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। नियमित जांच, प्रशिक्षित चालक दल और आपातकालीन तैयारी के कारण ही इस तरह की स्थितियों से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है। यात्रियों ने भी सुरक्षित लैंडिंग के बाद पायलट और चालक दल की सराहना की। फिलहाल विमान की तकनीकी जांच जारी है और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार सभी 160 यात्री सुरक्षित हैं और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। समय पर लिए गए फैसले और सावधानीपूर्ण कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई, जिससे यात्रियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।

देश में लॉकडाउन की अफवाह पर पीएम मोदी के तीन केंद्रीय मंत्रियों को संभालना पड़ा मोर्चा, कहा- घबराने की जरूरत नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच देश में संभावित लॉकडाउन की अफवाहों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि ईंधन संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण भारत में फिर से कोविड जैसे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इन अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी तरह का लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। सरकार की ओर से तीन वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने सामने आकर स्थिति साफ की और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में आवश्यक वस्तुओं, ईंधन और ऊर्जा की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है। प्रधानमंत्री स्तर से लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरें भ्रामक हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। आज संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अफवाहों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि इस तरह की गलत खबरें कौन फैला रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की घबराहट पैदा नहीं होनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हालात पर नजर रख रही हैं और जमाखोरी करने वालों को चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत सरकार के पास हर स्थिति से निपटने की तैयारी है और लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि शीर्ष स्तर से लेकर जिला स्तर तक निगरानी की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन, एलपीजी या जरूरी सामान की कमी न हो। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लॉकडाउन की अफवाहों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक हलकों में भी इस तरह की बातें कही जा रही हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान जैसे देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया था, वैसा कोई कदम उठाने की कोई योजना नहीं है। सीतारमण ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर सरकार लगातार समीक्षा कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने पर्याप्त भंडार बनाए हुए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना वजह सामान जमा न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें।

सोशल मीडिया अफवाहों पर सरकार सख्त, आपूर्ति व्यवस्था सामान्य

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि देश में लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह गलत और निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। पुरी ने कहा कि वैश्विक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चर्चा बढ़ी है, जिसे कुछ लोगों ने गलत तरीके से लॉकडाउन से जोड़ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “तैयारी” का मतलब प्रशासनिक स्तर पर सतर्क रहना है, न कि आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना। पुरी ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अफवाहें फैलाना गैर-जिम्मेदाराना है और इससे अनावश्यक दहशत पैदा होती है। उन्होंने लोगों से केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील की। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि भारत के पास ईंधन और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। तेल कंपनियों और राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था में कोई बाधा न आए। साथ ही प्रशासन को यह भी कहा गया है कि यदि कहीं जमाखोरी या कृत्रिम कमी की कोशिश होती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए। केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तैयारी मजबूत है और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें, घबराएं नहीं और सामान्य दिनचर्या बनाए रखें। तीनों केंद्रीय मंत्रियों के बयानों के बाद सरकार ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं बनने वाली है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।

ईरान-इजराइल जंग के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला : पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई, आम आदमी को राहत

ईरान-इजराइल जंग के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आज, शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस कदम से फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी टल जाएगी और आम उपभोक्ताओं को महंगाई के अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की पैनिक बाइंग देखी जा रही थी। वैश्विक हालात को देखते हुए लोगों को आशंका थी कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगी थीं और कई राज्यों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने बाजार को स्थिर करने और घबराहट को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। जानकारों के अनुसार, ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। संघर्ष से पहले कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, जो अब बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। इस तेज उछाल का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों की लागत पर पड़ रहा था। यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं करती तो कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती थीं, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ता। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर तुरंत दिखाई देता है। संघर्ष से पहले भारत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के उस महत्वपूर्ण गलियारे के माध्यम से प्राप्त करता था, जो फिलहाल तनाव के कारण अस्थिर बना हुआ है। इससे आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी है और बाजार में दबाव बना हुआ है। केंद्र सरकार के इस फैसले से तेल विपणन कंपनियों पर लागत का बोझ कम होने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यदि एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं होती तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 8 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती थी। इससे परिवहन लागत बढ़ती और उसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता। इस बीच रूस की कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है। फिलहाल केवल प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य कंपनियां भी कीमतें स्थिर रखेंगी। केंद्र सरकार ने केवल एक्साइज ड्यूटी में कटौती ही नहीं की है, बल्कि ईंधन निर्यात से जुड़े नियमों को भी सख्त कर दिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर पहले दी जा रही व्यापक उत्पाद शुल्क छूट को वापस ले लिया है। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।

निर्यात नियम सख्त, घरेलू बाजार को प्राथमिकता

संशोधित व्यवस्था के तहत अब ईंधन निर्यात से संबंधित लाभ केवल कुछ स्पष्ट रूप से परिभाषित श्रेणियों तक ही सीमित कर दिए गए हैं। इससे कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात करना पहले की तुलना में कम आकर्षक होगा और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम संतुलित नीति का संकेत देता है। एक तरफ सरकार ने कंपनियों पर लागत का दबाव कम किया है, वहीं दूसरी तरफ निर्यात पर सख्ती कर घरेलू आपूर्ति मजबूत करने की कोशिश की है। इससे कीमतों में अचानक उछाल की संभावना कम होगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। तेल कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन को सुचारू रखें और किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी न होने दें। राज्यों के साथ भी समन्वय बढ़ाया गया है ताकि वितरण व्यवस्था पर नजर रखी जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान-इजराइल तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार आगे भी ऐसे कदम उठा सकती है। फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार ने संकेत दिया है कि वह महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने को तैयार है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस फैसले से आम लोगों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी फिलहाल टल गई है, जिससे परिवहन लागत स्थिर रहेगी और महंगाई पर भी दबाव कम पड़ेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकार का यह कदम बाजार को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देश में बदला मौसम का मिजाज

देश में बदला मौसम का मिजाज : दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में ठंड की वापसी, लोगों ने फिर निकाले कंबल-रजाई

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बीते दो दिनों से जारी बारिश, तेज हवाओं और बादलों के चलते तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को एक बार फिर सर्दी का एहसास होने लगा है। सुबह-शाम की ठंडक के कारण लोगों ने फिर से कंबल और रजाई निकाल ली है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में तेज हवाएं 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं, जिससे मौसम और अधिक ठंडा हो गया है। दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में हल्की बारिश होती रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिन के अलग-अलग समय सुबह, दोपहर, शाम और रात में गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी मौसम का असर साफ देखने को मिला। खासकर अयोध्या में अचानक मौसम बिगड़ गया, जहां तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि हुई। ओले गिरने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश और ठंडी हवाओं ने तापमान में गिरावट ला दी है। इसी तरह राजस्थान के जयपुर, अलवर और भरतपुर में भी बारिश दर्ज की गई, जिससे गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन ठंड का असर वापस महसूस होने लगा है। वहीं हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों से दूर रहना चाहिए। विशेष रूप से किसानों और बाहर काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

पहाड़ों में बर्फबारी और बारिश से बढ़ी ठंड, कई राज्यों में अलर्ट–

मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी राज्यों में भी मौसम ने करवट ली है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का दौर जारी है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हो रही है। उत्तराखंड के बद्रीनाथ, केदारनाथ, औली और उत्तरकाशी जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। इससे तापमान में भारी गिरावट आई है और ठंड का असर बढ़ गया है। वहीं देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में हल्की से मध्यम बारिश ने मौसम को ठंडा बना दिया है। हिमाचल प्रदेश में शिमला, मनाली, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में बर्फबारी और बारिश का असर देखने को मिला है। यहां कई जगहों पर सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी मौसम सक्रिय है। पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों और सिक्किम में गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, इन इलाकों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भी संभावना है। मध्य भारत के राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। वहीं झारखंड में भी आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के 7 दिन के पूर्वानुमान के अनुसार, 21 और 22 मार्च को कुछ इलाकों में बादल छाए रहेंगे, जबकि 23 मार्च के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा। इसके बाद तापमान में फिर से बढ़ोतरी होगी और अधिकतम तापमान 30 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। फिलहाल, देश के बड़े हिस्से में बदले मौसम ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर अचानक लौटी ठंड ने लोगों को हैरान कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव अस्थायी है, लेकिन फिलहाल लोगों को सतर्क रहने और मौसम के अनुसार अपने दैनिक जीवन में सावधानी बरतने की जरूरत है।

हिमाचल सरकार का अनुशासनात्मक कदम

हिमाचल सरकार का अनुशासनात्मक कदम, दफ्तरों में नहीं चलेगी मनमर्जी, कर्मचारियों के लिए जींस-टीशर्ट पर लगाया बैन, सोशल मीडिया पर भी सख्ती

शिमला। सरकारी दफ्तरों में अब अनौपचारिक पहनावे और सोशल मीडिया पर खुलकर राय रखने की प्रवृत्ति पर लगाम कसने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड और ऑनलाइन व्यवहार को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य कार्यस्थल पर मर्यादा, अनुशासन और पेशेवर वातावरण को बनाए रखना है। सुखविंदर सरकार के आदेश के अनुसार, अब कोई भी सरकारी कर्मचारी कार्यालय में जींस और टी-शर्ट जैसे कैजुअल कपड़े पहनकर नहीं आ सकेगा। सभी कर्मचारियों को औपचारिक, साफ-सुथरे और शालीन रंगों के कपड़े पहनना अनिवार्य किया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई कर्मचारी कार्यालयों में अनौपचारिक या पार्टी वियर पहनकर आते हैं, जिससे सरकारी दफ्तरों की गरिमा प्रभावित होती है। नए निर्देशों में पुरुष कर्मचारियों के लिए शर्ट, पैंट या ट्राउजर के साथ जूते या सैंडल पहनना अनिवार्य किया गया है। वहीं महिला कर्मचारियों को साड़ी, सलवार सूट, चूड़ीदार-कुर्ता के साथ दुपट्टा या फॉर्मल सूट के साथ ट्राउजर पहनने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उन्हें चप्पल, सैंडल या जूते पहनने होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्यालयों में या अदालत में पेशी के दौरान किसी भी प्रकार का कैजुअल या पार्टी वियर पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए थे, जिनमें कर्मचारी अनौपचारिक कपड़ों में अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट्स का उपयोग करते हुए सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा कर रहे थे या फिर किसी उत्पाद का प्रचार कर रहे थे। इस तरह की गतिविधियों को अनुचित मानते हुए सरकार ने इसे रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया है। सोशल मीडिया को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। कर्मचारियों को यह कहा गया है कि वे अपने पर्सनल अकाउंट्स के माध्यम से सरकारी नीतियों या योजनाओं पर कोई टिप्पणी न करें। इसके अलावा, उन्हें सार्वजनिक मंचों, ब्लॉग्स या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक या धार्मिक बयान देने से भी बचने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं। अधिसूचना में यह भी साफ तौर पर कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इससे यह संकेत मिलता है कि हिमाचल सरकार इस बार अपने निर्देशों को सख्ती से लागू करने के मूड में है।

सुखविंदर सरकार का पेशेवर छवि और प्रशासनिक सख्ती पर जोर

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सरकार के इस फैसले को केवल ड्रेस कोड तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे एक व्यापक प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों का व्यवहार, पहनावा और सार्वजनिक छवि सीधे तौर पर सरकार की साख को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि कर्मचारी हर स्थिति में मर्यादा और पेशेवर आचरण का पालन करें। सरकार ने अपने आदेश में 3 अगस्त 2017 के उस पुराने निर्देश का भी जिक्र किया है, जिसमें पहले भी ड्रेस कोड और आचरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि, समय के साथ यह देखा गया कि कई कर्मचारी इन नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। यही कारण है कि अब सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। सोशल मीडिया के इस दौर में यह कदम और भी अहम हो जाता है। आज के समय में किसी भी कर्मचारी की एक पोस्ट या टिप्पणी तेजी से वायरल हो सकती है, जिससे सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे अपने व्यक्तिगत विचारों को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने में संयम बरतें। इस फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह कर्मचारियों के निजी और पेशेवर जीवन के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने की कोशिश करता है। सरकार चाहती है कि कर्मचारी अपने आधिकारिक दायित्वों को प्राथमिकता दें और ऐसी किसी भी गतिविधि से बचें, जिससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठे। हालांकि, इस फैसले को लेकर कुछ हलकों में यह भी चर्चा है कि इससे कर्मचारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। लेकिन सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक सेवा में कार्यरत लोगों के लिए कुछ मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य होता है, ताकि प्रशासन की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे। हिमाचल प्रदेश सरकार का यह निर्णय एक अनुशासित, पेशेवर और जिम्मेदार प्रशासनिक ढांचा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इन नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या इससे सरकारी कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।

चैत्र नवरात्रि: आस्था, साधना और आत्मजागरण का दिव्य महापर्व

चैत्र नवरात्रि: आस्था, साधना और आत्मजागरण का दिव्य महापर्व

जब जीवन की भागदौड़ में मन थकने लगता है, जब भीतर कहीं शांति और शक्ति की तलाश गहराने लगती है, तभी चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व एक नई रोशनी बनकर सामने आता है। यह केवल पूजा का समय नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने, मन को निर्मल बनाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने का अद्भुत अवसर है। इन नौ दिनों में हर हृदय “जय माता दी” की गूंज से भर उठता है और श्रद्धा दीपक की तरह जलकर अंधकार को दूर करने लगती है।

प्रकृति के नवजीवन संग आरंभ होता नवरात्रि का उत्सव

जब ठंड की विदाई के साथ वसंत अपनी कोमलता बिखेरता है, जब पेड़ों पर नई कोंपलें मुस्कुराने लगती हैं और वातावरण सुगंध से भर जाता है, तब प्रकृति स्वयं उत्सव का रूप ले लेती है। इसी नवजीवन के साथ चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होता है। यह समय केवल मौसम के बदलाव का नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत और आत्मिक परिवर्तन का संकेत भी है।

सनातन परंपरा में शक्ति का आध्यात्मिक महत्व

भारतीय सनातन संस्कृति में शक्ति को सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। शिव और शक्ति का संबंध इस ब्रह्मांड की गति और संतुलन का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान इसी शक्ति की आराधना की जाती है, जो जीवन को दिशा, ऊर्जा और उद्देश्य प्रदान करती है। यह साधना बाहरी नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है, जहां व्यक्ति स्वयं से जुड़ता है।

देवी के नौ स्वरूपों में निहित है जीवन का संदेश

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक। प्रत्येक रूप जीवन के एक विशेष गुण और शक्ति का प्रतीक है। इनकी आराधना के माध्यम से साधक अपने भीतर साहस, ज्ञान, धैर्य और आत्मविश्वास का संचार करता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि असली शक्ति हमारे भीतर ही छिपी होती है।

साधना के नौ दिन: आत्मपरिवर्तन की यात्रा

नवरात्रि केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि की एक गहरी प्रक्रिया है। यह नौ दिनों की साधना व्यक्ति को भीतर से बदल देती है। शुरुआत होती है मन और शरीर की शुद्धि से फिर आता है विचारों की स्थिरता का चरण इसके बाद साधना और ध्यान के माध्यम से आत्मा का विस्तार होता है। अंततः जागरण का अनुभव होता है, जहां व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानता है यह पूरी प्रक्रिया आत्मविकास की एक आध्यात्मिक यात्रा है।

भक्ति, श्रद्धा और आस्था का सुरम्य संगम

नवरात्रि को यदि एक संगीत माना जाए, तो इसका हर दिन एक मधुर स्वर है। दीपक का प्रकाश अज्ञान को दूर करने का प्रतीक बन जाता है और हर प्रार्थना मन की गहराइयों से निकली एक सच्ची पुकार होती है। इस दौरान भजन, कीर्तन और पूजा का वातावरण पूरे समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।

पूजा विधि में छिपा है आत्मसंयम का रहस्य

नवरात्रि की पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन और संयम का अभ्यास भी है। सुबह जल्दी उठना, स्वच्छता रखना, कलश स्थापना करना और उपवास रखना, ये सभी क्रियाएं मन और शरीर को संतुलित करने में सहायक होती हैं। उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और आत्मबल को मजबूत करने का माध्यम है।

जेवर में इतिहास रचने को तैयार

जेवर में इतिहास रचने को तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अगले सप्ताह पीएम मोदी करेंगे भव्य उद्घाटन, सीएम योगी रहेंगे मौजूद

उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब पूरी तरह तैयार है और 28 मार्च 2026 को इसका भव्य उद्घाटन होने जा रहा है। यह सिर्फ एक एयरपोर्ट का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक क्षण होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे प्रदेश के लिए “गर्व का दिन” बताया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। अब पूरे प्रदेश की नजरें इस भव्य आयोजन पर टिकी हैं। जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट न केवल भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने जा रहा है, बल्कि एशिया के प्रमुख एविएशन हब के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा। इसकी परिकल्पना केवल एक हवाई अड्डे के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में की गई है। यही कारण है कि इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। पहले चरण में एयरपोर्ट एक रनवे और आधुनिक टर्मिनल के साथ शुरू होगा, जिसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 1.2 करोड़ होगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह टर्मिनल यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करेगा। डिजिटल सिस्टम, स्मार्ट सिक्योरिटी और ग्रीन टेक्नोलॉजी के उपयोग से इसे पर्यावरण के अनुकूल भी बनाया गया है। आने वाले वर्षों में इस एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार किया जाएगा। योजना के अनुसार इसे पांच रनवे तक विकसित किया जाएगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। हाल ही में इसे एयरोड्रम लाइसेंस भी प्राप्त हो चुका है, जो इसके संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा। अभी तक इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों और उड़ानों का भारी दबाव रहता है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से यह दबाव काफी हद तक कम होगा और हवाई यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि विकास का इंजन भी साबित होगा। इसके जरिए ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद और बुलंदशहर जैसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सड़क, रेल और मेट्रो नेटवर्क को भी इससे जोड़ा जा रहा है, जिससे यात्रियों को निर्बाध यात्रा का अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही इस परियोजना से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। निर्माण से लेकर संचालन तक लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर बनकर सामने आएगा। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस एयरपोर्ट से आने वाले समय में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न हो सकता है। यह निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। देश-विदेश की कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं, जिससे उत्तर प्रदेश एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभर सकता है। शुरुआत में यहां से रोजाना करीब 150 उड़ानों का संचालन होने की संभावना है, जो धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। यह एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह की उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

रोजगार, निवेश और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बनेगा जेवर एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रभाव केवल हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की आर्थिक संरचना को बदलने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को एक नए विकास मॉडल की ओर ले जाएगी। एयरपोर्ट के आसपास तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो रहा है। नई सड़कों, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स हब और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इससे माल ढुलाई और व्यापार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह क्षेत्र जल्द ही एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित हो सकता है। पर्यटन के लिहाज से भी यह एयरपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। बड़े संस्थान और अस्पताल इस क्षेत्र में स्थापित होने की योजना बना रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। सरकार की कोशिश है कि यह एयरपोर्ट केवल एक ट्रांसपोर्ट हब न होकर एक “एरो सिटी” के रूप में विकसित हो। यहां होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बिजनेस सेंटर और एंटरटेनमेंट जोन भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र एक आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में उभरेगा। जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि लाखों लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाएगा। 28 मार्च 2026 को होने वाला इसका उद्घाटन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक होगा, एक ऐसे भविष्य की शुरुआत, जहां उत्तर प्रदेश विकास, आधुनिकता और वैश्विक पहचान की नई उड़ान भरेगा।

नवरात्र के शुभ मुहूर्त में सत्ता का बड़ा संदेश

उत्तराखंड में नवरात्र के शुभ मुहूर्त में सत्ता का बड़ा संदेश : धामी कैबिनेट में अचानक हुए मंत्रिमंडल विस्तार ने बदले राजनीतिक समीकरण, जानिए किन चेहरों को मिली मंत्रिपरिषद में एंट्री और क्या हैं इसके मायने

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार का दिन कई मायनों में बेहद अहम साबित हुआ। नवरात्र के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए एक ऐसा राजनीतिक संदेश दिया, जिसने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी। सुबह करीब 10 बजे देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पांच नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गरिमामय वातावरण में हुई, जहां राज्यपाल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने नवनियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सबसे पहले राजपुर से विधायक खजान दास ने शपथ ली, जिसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ लेकर समारोह को एक अलग ही आयाम दिया। यह क्षण वहां मौजूद सभी लोगों के लिए खास बन गया और पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।
इसके बाद वरिष्ठ नेता मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने भी मंत्रिपद की शपथ ग्रहण की। समारोह में मुख्यमंत्री धामी के अलावा कई वरिष्ठ मंत्री, विधायक, पार्टी पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला, जो इस विस्तार को पार्टी के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देख रहे थे। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह कैबिनेट विस्तार महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। लंबे समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि धामी सरकार अपने मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकती है, और नवरात्र के शुभ अवसर पर इस निर्णय को अमलीजामा पहनाकर सरकार ने एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है। इस विस्तार के जरिए भाजपा ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को साधने का प्रयास किया है। देहरादून और हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने अपने मजबूत जनाधार को और सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खजान दास और प्रदीप बत्रा जैसे नेताओं को शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, अनुभवी नेता मदन कौशिक की एंट्री से सरकार को प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। भरत सिंह चौधरी और राम सिंह कैड़ा को शामिल कर संगठनात्मक संतुलन को भी साधने की कोशिश की गई है, जिससे पार्टी के भीतर सामंजस्य बना रहे और सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि भाजपा नेतृत्व अब चुनावी मोड में आ चुका है और हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया जा रहा है। कैबिनेट विस्तार के जरिए पार्टी ने यह संकेत भी दिया है कि वह विकास के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों को भी संतुलित करने में जुटी हुई है।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नई ऊर्जा या चुनावी रणनीति? धामी सरकार के अगले कदमों पर टिकी सबकी नजर

कैबिनेट विस्तार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह बदलाव केवल राजनीतिक संतुलन बनाने तक सीमित रहेगा या फिर इससे प्रदेश के विकास कार्यों में भी नई गति देखने को मिलेगी। जानकारों का मानना है कि धामी सरकार इस नए मंत्रिमंडल के साथ विकास योजनाओं को और तेज गति देने की दिशा में काम करेगी। प्रदेश में बुनियादी ढांचे, रोजगार, पर्यटन और निवेश जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में नए मंत्रियों को इन क्षेत्रों में जिम्मेदारी देकर सरकार अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने की कोशिश कर सकती है। खासतौर पर देहरादून और हरिद्वार जैसे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी विकास की गति बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा, यह विस्तार सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भी किया गया है। विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूहों को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार सभी वर्गों के साथ समान रूप से खड़ी है। यह रणनीति आगामी चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। नवरात्र के दौरान इस तरह का बड़ा निर्णय लेना भी अपने आप में एक प्रतीकात्मक संदेश है। इसे सकारात्मक ऊर्जा, नए आरंभ और जनविश्वास के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी इस अवसर का उपयोग जनता के बीच एक सकारात्मक माहौल बनाने के लिए भी कर सकती है। इस विस्तार के बाद अब धामी कैबिनेट अधिक संतुलित और प्रभावी नजर आ रही है। हालांकि, इसके वास्तविक परिणाम आने वाले समय में ही सामने आएंगे, जब यह देखा जाएगा कि नए मंत्री अपने-अपने विभागों में किस तरह का प्रदर्शन करते हैं।
फिलहाल इतना जरूर है कि उत्तराखंड की राजनीति में इस कदम ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब देखना होगा कि यह कैबिनेट विस्तार अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में धामी सरकार के लिए कितना कारगर साबित होगा ?

Aptus Value Housing Finance Reports 26% Profit Growth in Q3 FY26, AUM Rises to ₹12,330 Crore

Aptus Value Housing Finance India Limited has once again demonstrated strong and balanced growth in the third quarter of FY 2026. The company’s net profit rose 26% year-on-year to ₹239 crore, while profit for the first nine months stood at ₹685 crore – highlighting the strength of its strategy even in a challenging environment.

As of December 2025, Assets Under Management (AUM) grew 21% to ₹12,330 crore. During the third quarter, loan disbursements reached ₹1,030 crore, reflecting steady business momentum. Total income for the quarter increased 22% to ₹569 crore, while nine-month income surged 27% to ₹1,652 crore.

Asset quality remained firmly under control, with gross NPA at 1.6% and net NPA at 1.2%. Strong profitability ratios of 7.9% ROA and 20.2% ROE continue to place Aptus among the best performers in the housing finance industry.

Backed by a network of 335 branches, deep digital adoption, and a data-driven credit approach, Aptus is confidently progressing toward its goal of achieving sustainable growth of 22-24% in the coming years, reinforcing its reputation as a resilient and future-ready housing finance player.