आज से नया वित्त वर्ष शुरू : 1 अप्रैल से बदले कई नियम, FASTag महंगा, टिकट कैंसिलेशन सख्त, टैक्स सिस्टम बदला

नए महीने के साथ नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत हो गई है और 1 अप्रैल से देशभर में कई अहम नियम बदल गए हैं। ये बदलाव सीधे तौर पर आम लोगों की जेब, यात्रा, डिजिटल पेमेंट और टैक्स सिस्टम को प्रभावित करेंगे। रेलवे टिकट कैंसिलेशन से लेकर FASTag, पैन कार्ड, डिजिटल पेमेंट और आयकर व्यवस्था तक कई ऐसे फैसले लागू हुए हैं जिनका असर रोजमर्रा के खर्च और बचत पर पड़ेगा। आइए जानते हैं आज से लागू हुए प्रमुख बदलावों के बारे में।

FASTag हुआ महंगा, कैश पेमेंट खत्म

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए FASTag का वार्षिक पास महंगा हो गया है। अब इसकी कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर कैश भुगतान की सुविधा पूरी तरह खत्म कर दी गई है। अब वाहन चालकों को टोल देने के लिए FASTag, यूपीआई या क्यूआर कोड जैसे डिजिटल माध्यमों का ही इस्तेमाल करना होगा। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन नकद भुगतान करने वालों को बदलाव अपनाना पड़ेगा।

UPI से ATM निकासी भी गिनी जाएगी फ्री लिमिट में

बैंकिंग से जुड़ा एक अहम बदलाव भी आज से लागू हो गया है। अब बिना कार्ड के यूपीआई के जरिए एटीएम से कैश निकालने पर यह ट्रांजैक्शन भी आपके मासिक फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन में शामिल किया जाएगा। यानी यदि आपकी तय फ्री लिमिट खत्म हो जाती है, तो यूपीआई के माध्यम से कैश निकालने पर भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

रेलवे टिकट कैंसिलेशन नियम सख्त

रेलवे यात्रियों के लिए टिकट कैंसिलेशन नियमों में बदलाव किया गया है। अब कंफर्म टिकट पर रिफंड पाने के लिए ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना होगा। पहले यह सीमा 4 घंटे थी। इस बदलाव से यात्रियों को यात्रा योजनाएं पहले तय करनी होंगी, नहीं तो रिफंड मिलना मुश्किल हो सकता है।

बोर्डिंग स्टेशन बदलने की समय सीमा तय

रेलवे ने बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियम भी अपडेट किए हैं। अब यात्री ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से केवल 30 मिनट पहले तक ही ऑनलाइन बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा चार्ट तैयार होने तक उपलब्ध रहती थी। इस बदलाव का मकसद अंतिम समय में होने वाले बदलावों को सीमित करना है।

पैन कार्ड के लिए बढ़ी दस्तावेजों की जरूरत

पैन कार्ड बनवाने के नियम भी बदल गए हैं। अब सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड बनवाना संभव नहीं होगा। आवेदन के समय अतिरिक्त पहचान दस्तावेज जैसे वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य वैध पहचान पत्र देना पड़ सकता है। यह कदम पहचान सत्यापन को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

डिजिटल पेमेंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाया गया है। अब सभी डिजिटल पेमेंट के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। यानी ओटीपी के साथ-साथ पिन, बायोमेट्रिक या फेस आईडी जैसी अतिरिक्त सुरक्षा का इस्तेमाल करना होगा। यूपीआई में यह व्यवस्था पहले से मौजूद थी, लेकिन अब इसे अन्य डिजिटल वॉलेट और पेमेंट गेटवे पर भी लागू किया गया है।

नया आयकर सिस्टम लागू, टैक्स ईयर की नई व्यवस्था

आज से नया आयकर कानून भी प्रभावी हो गया है। इसमें पुराने फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जटिल व्यवस्था को हटाकर एक ही “टैक्स ईयर” का प्रावधान किया गया है। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है।

स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें बरकरार

वित्त मंत्रालय ने अप्रैल से जून तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स योजनाओं की ब्याज दरें जारी कर दी हैं। पब्लिक प्रोविडेंट फंड, सुकन्या समृद्धि योजना और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट जैसी योजनाओं की दरों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।1 अप्रैल से लागू ये बदलाव आम लोगों के दैनिक खर्च, यात्रा और वित्तीय लेन-देन को प्रभावित करेंगे। ऐसे में इन नए नियमों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि अनावश्यक शुल्क और असुविधा से बचा जा सके।

वेस्ट एशिया तनाव का असर : कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़े, एयर टरबाइन फ्यूल भी महंगा; होटल और हवाई यात्रा पर पड़ेगा असर

वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। राजधानी दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर 195.50 रुपये महंगा होकर 2,078.50 रुपये का हो गया है। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत में 218 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो हाल के महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 1 मार्च को भी 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 114.50 रुपये की वृद्धि की गई थी।

 लगातार हो रही बढ़ोतरी से छोटे कारोबारियों और सेवा क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ गया है। खासकर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस और बेकरी जैसे कारोबार कमर्शियल गैस पर निर्भर होते हैं, इसलिए इनकी लागत में सीधा असर पड़ेगा। कमर्शियल गैस महंगी होने से खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। चाय, नाश्ता, थाली, फास्ट फूड और होम डिलीवरी सेवाओं की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत

कमर्शियल गैस महंगी होने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ न बढ़ाने का फैसला किया है।

सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, एलपीजी की लागत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।

अगर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में घरेलू सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर ही बिक रहा है। पिछले साल मार्च में केंद्र सरकार द्वारा 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती किए जाने के बाद से ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

विमान ईंधन ATF में भी बड़ा उछाल

कमर्शियल गैस के साथ-साथ विमान ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। 1 अप्रैल से दिल्ली में ATF की कीमत बढ़कर करीब 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। पिछले महीने इसकी कीमत 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर थी। इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों की लागत में अचानक इजाफा कर दिया है।

एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में ATF का हिस्सा 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस के लिए संचालन लागत बढ़ना तय है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में हवाई किरायों पर पड़ सकता है। गर्मियों की छुट्टियों के सीजन में यात्रा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

कमर्शियल गैस और ATF दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। एक ओर होटल और रेस्टोरेंट महंगे होंगे, तो दूसरी ओर हवाई यात्रा भी महंगी हो सकती है। इससे सेवा क्षेत्र में लागत बढ़ेगी और इसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी रहने से ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

हिमाचल में वाहन चालकों को बड़ी राहत : पांच और 6-12 सीटर गाड़ियों पर बढ़ा एंट्री टैक्स वापस, सुखविंदर सरकार ने लिया यू-टर्न

हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने पांच सीटर और 6 से 12 सीटर वाहनों पर हाल ही में बढ़ाया गया एंट्री टैक्स वापस लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार, 31 मार्च को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब पहले की तरह ही पुरानी दरें लागू रहेंगी। यानी पांच सीटर वाहनों से 70 रुपये और 6 से 12 सीटर वाहनों से 110 रुपये एंट्री टैक्स ही लिया जाएगा। सरकार के इस फैसले को पर्यटन उद्योग, टैक्सी ऑपरेटरों और आम वाहन चालकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।

विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है। 

एंट्री टैक्स बढ़ाने के बाद विभिन्न संगठनों और पर्यटन से जुड़े लोगों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं। इसके बाद सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और फैसला किया कि बढ़ी हुई दरों को वापस लिया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार नहीं चाहती कि किसी भी फैसले से पर्यटकों या परिवहन व्यवसाय पर अनावश्यक बोझ पड़े।

उन्होंने कहा कि सरकार लगातार संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रही है, ताकि राजस्व भी प्रभावित न हो और लोगों को भी राहत मिलती रहे। एंट्री टैक्स को लेकर आए सुझावों और शिकायतों को गंभीरता से लिया गया और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया गया कि पुरानी दरें ही अधिक व्यावहारिक हैं। इसी के चलते बढ़ाया गया टैक्स वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

राज्य में एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद टैक्सी यूनियनों ने चिंता जताई थी

राज्य में एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद टैक्सी यूनियनों, होटल एसोसिएशन और पर्यटन कारोबारियों ने चिंता जताई थी। उनका कहना था कि बढ़े हुए टैक्स से बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है। खासकर गर्मियों के सीजन से पहले यह निर्णय पर्यटन उद्योग के लिए चुनौती बन सकता था। सरकार के नए फैसले से अब पर्यटन क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। परिवहन से जुड़े लोगों का कहना है कि पांच और 6 से 12 सीटर वाहन सबसे ज्यादा पर्यटकों को लाने-ले जाने में उपयोग होते हैं। ऐसे में टैक्स बढ़ने से किराए में बढ़ोतरी होती और इसका असर सीधे पर्यटकों पर पड़ता। अब पुरानी दरें लागू रहने से किराए स्थिर रहेंगे और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए यह फैसला सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पर्यटन ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। सड़क सुविधाओं में सुधार, पार्किंग व्यवस्था, और पर्यटक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बड़ा योगदान है, इसलिए ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं जो पर्यटन को प्रोत्साहित करें। विधानसभा में इस घोषणा के बाद सत्ता पक्ष ने इसे जनहित का फैसला बताया, जबकि विपक्ष ने कहा कि सरकार को पहले ही व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए था। हालांकि, सरकार का कहना है कि जनता और हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर समय रहते संशोधन करना ही बेहतर प्रशासन का हिस्सा है।

बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी को झटका, पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस भाजपा में शामिल, एक और नई राजनीतिक पारी 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज है। भारत के पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पेस के भाजपा में आने को बंगाल की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि वे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े रहे हैं। चुनावी माहौल में उनके इस कदम को टीएमसी के लिए झटका माना जा रहा है, वहीं भाजपा इसे खेल और युवाओं से जुड़ी अपनी रणनीति का हिस्सा बता रही है। 

भाजपा में शामिल होने के बाद लिएंडर पेस ने इसे अपने जीवन का बड़ा दिन बताया। उन्होंने कहा कि देश के लिए चार दशक तक खेलने के बाद अब वे युवाओं की सेवा करना चाहते हैं। पेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें खेल और युवाओं के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और अगले 20 से 25 वर्षों में खेल शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनके मुताबिक, खेल सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण का भी माध्यम है। पेस ने खेलों के बुनियादी ढांचे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 1986 में पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाएं सीमित थीं और आज भी कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। 

उन्होंने इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में खेल सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्य बेहतर कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए दीर्घकालिक योजना और निवेश की जरूरत है। पेस ने खेलो इंडिया अभियान और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) की सराहना करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने खिलाड़ियों को नई दिशा दी है और भविष्य में भारत के प्रदर्शन को मजबूत करेंगे।

साल 2021 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिएंडर पेस तृणमूल कांग्रेस में शामिल किया था 

लिएंडर पेस पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। वर्ष 2021 में गोवा में ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। उस समय पेस ने ममता बनर्जी को “सच्ची चैंपियन” बताया था और उनके साथ काम करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें कोई बड़ी राजनीतिक भूमिका नहीं मिली। समय के साथ पेस टीएमसी की सक्रिय राजनीति से दूर होते गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही दूरी अब उनके भाजपा में शामिल होने का कारण बनी। 

पेस का बंगाल से गहरा संबंध रहा है। उनका जन्म कोलकाता में हुआ और उनकी मां भी वहीं की थीं, जबकि उनके पिता गोवा से थे। इस वजह से उनका दोनों राज्यों से जुड़ाव रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता खेल जगत और युवा वर्ग में पार्टी को लाभ पहुंचा सकती है। खासकर शहरी मतदाताओं और खेल प्रेमियों के बीच उनकी पहचान को चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पार्टी खेल बुनियादी ढांचे और युवा विकास को चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में है। पेस ने भी महिला खिलाड़ियों के लिए समान अवसर और स्कॉलरशिप कार्यक्रम लाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि भारत में महिला खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और वित्तीय सहायता मिले। उनके मुताबिक, अगर सही दिशा में काम किया जाए तो भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बन सकता है। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो पेस का भाजपा में शामिल होना चुनावी संदेश भी देता है। 

भाजपा लगातार अलग-अलग क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को अपने साथ जोड़ रही है। इससे पार्टी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वहीं टीएमसी के लिए यह संकेत माना जा रहा है कि चुनाव से पहले पार्टी के पूर्व सहयोगी दूसरी दिशा में जा रहे हैं। कुल मिलाकर, लिएंडर पेस की नई राजनीतिक पारी ने बंगाल चुनाव से पहले माहौल को और दिलचस्प बना दिया है। खेल के मैदान में देश का नाम रोशन करने वाले पेस अब राजनीतिक मैदान में नई भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि खेल और युवाओं पर उनका फोकस भाजपा की चुनावी रणनीति को कितना मजबूत करता है।

असम विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया अपना “संकल्प पत्र”, सुरक्षित-विकसित राज्य और मूल असमिया हितों की रक्षा का किया वादा

असम विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार सुबह ही अपना बहुप्रतीक्षित ‘संकल्प पत्र’ जारी कर दिया। गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा अपने चुनावी घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ के नाम से जारी करती है और इस बार भी इसमें राज्य के विकास, सुरक्षा और असमिया पहचान की रक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ में भूमि, विरासत और मूल असमिया लोगों की गरिमा की रक्षा का वादा किया गया है। पार्टी ने कहा कि वह सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए विकास को नई गति देगी। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा निवेश को आकर्षित करने के लिए कई अहम प्रतिबद्धताएं भी शामिल की गई हैं।

संकल्प पत्र जारी करने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह दस्तावेज पिछले एक दशक में जनता की सेवा और अनुभव के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के दौरान असम में व्यापक बदलाव हुआ है और राज्य विकास के नए रास्ते पर आगे बढ़ा है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद उसने राज्य के विकास के लिए ठोस काम नहीं किया, जबकि भाजपा ने बुनियादी ढांचे, उद्योग, कनेक्टिविटी और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई पहल की हैं।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी संकल्प पत्र को राज्य के भविष्य का रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य असम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है और इसके लिए जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। सरमा ने दावा किया कि युवाओं, खासकर नई पीढ़ी का भरोसा भाजपा के साथ है और पार्टी इस चुनाव में अधिकतम सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी है। उन्होंने कहा कि राज्य को आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक रूप से मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता होगी।

जनता के सुझावों पर आधारित ‘संकल्प’, तीसरे कार्यकाल का रोडमैप

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि संकल्प पत्र तैयार करने से पहले पार्टी ने व्यापक जनसंवाद अभियान चलाया। इसके तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों से सुझाव लिए गए। उन्होंने बताया कि तीन लाख से अधिक लोगों ने अपने विचार साझा किए, जिनके आधार पर यह दस्तावेज तैयार किया गया है। सोनोवाल ने कहा कि यह संकल्प पत्र वास्तव में जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और आगामी कार्यकाल में इन्हीं प्राथमिकताओं के अनुसार काम किया जाएगा।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि 2026 का विधानसभा चुनाव असम के भविष्य के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस चुनाव को सुरक्षित और विकसित असम के लक्ष्य के साथ लड़ रही है। सैकिया ने बताया कि संकल्प पत्र तैयार करने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों से करीब 2.45 लाख सुझाव प्राप्त हुए, जिन्हें ध्यान में रखते हुए विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है।

भाजपा ने संकल्प पत्र में राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने, उद्योगों को प्रोत्साहन देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र को मजबूत करने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और पर्यटन को बढ़ावा देने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है। पार्टी का दावा है कि इन कदमों से असम की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और राज्य को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने में मदद मिलेगी।

असम में विधानसभा की 126 सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि चुनाव नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और मतदाताओं को लुभाने के लिए घोषणाओं का दौर जारी है।

भाजपा का कहना है कि उसका ‘संकल्प पत्र’ केवल चुनावी वादों का दस्तावेज नहीं बल्कि आगामी वर्षों के लिए विकास का खाका है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि पिछले कार्यकाल में किए गए कार्यों के आधार पर जनता एक बार फिर भाजपा को मौका देगी। वहीं विपक्षी दल इस संकल्प पत्र को चुनावी वादा बताते हुए इसकी व्यवहारिकता पर सवाल उठा रहे हैं।

इस तरह ‘संकल्प पत्र’ जारी होने के साथ ही असम विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है। अब सभी दलों की नजर 9 अप्रैल को होने वाले मतदान और 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी है, जो राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

आज गुजरात दौरे पर पीएम मोदी : साणंद में सेमीकंडक्टर संयंत्र का करेंगे उद्घाटन, 20 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की देंगे सौगात

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य को औद्योगिक और सांस्कृतिक विकास से जुड़ी कई बड़ी सौगातें देंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी अहमदाबाद के साणंद में सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन करेंगे और 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन भी करेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुबह लगभग 10 बजे गांधीनगर से शुरू होगा, जहां वे कोबा तीर्थ स्थित सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वे एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जिससे इस आयोजन को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी मिल गया है। संग्रहालय का उद्घाटन जैन परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर प्रधानमंत्री अहमदाबाद के साणंद क्षेत्र में स्थित केन्स सेमीकान प्लांट का उद्घाटन करेंगे। इस संयंत्र के शुरू होने के साथ ही यहां वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत हो जाएगी, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह संयंत्र उन्नत इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल (आईपीएम) के उत्पादन पर केंद्रित होगा, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और औद्योगिक उपकरणों में किया जाता है।

सरकारी बयान के मुताबिक यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस मिशन का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। साणंद संयंत्र के शुरू होने से न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

यह संयंत्र भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। इस प्लांट में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर उच्च गुणवत्ता वाले पावर मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे, जो ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होंगे। इससे भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि माइक्रोन टेक्नोलॉजी के बाद यह दूसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र होगा, जहां वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी जगह बना रहा है। इस तरह की परियोजनाएं देश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे। इनमें बुनियादी ढांचा, औद्योगिक विकास, शहरी सुविधाओं और कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से गुजरात में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ ही रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

गुजरात लंबे समय से विनिर्माण और निवेश के केंद्र के रूप में उभरता रहा है। साणंद क्षेत्र विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का महत्वपूर्ण हब बन चुका है। अब सेमीकंडक्टर संयंत्र के शुरू होने से यह क्षेत्र हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के नए केंद्र के रूप में विकसित होगा।

प्रधानमंत्री के इस दौरे को आगामी औद्योगिक विस्तार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य देश में चिप निर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है। साणंद संयंत्र का उद्घाटन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री का यह दौरा औद्योगिक विकास, सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी आत्मनिर्भरता—तीनों मोर्चों पर अहम संदेश देता है। इससे न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश में सेमीकंडक्टर निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।

“उत्तराखण्ड साहित्य भूषण” से डॉ. जितेन ठाकुर सम्मानित, मुख्यमंत्री धामी बोले- नई पीढ़ी तक पहुंचेगी सांस्कृतिक विरासत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित “उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025” में प्रतिभाग करते हुए प्रदेश के वरिष्ठ और युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया। उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “उत्तराखण्ड साहित्य भूषण सम्मान” से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का सशक्त माध्यम भी है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने “उत्तराखण्ड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” से डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं सहित विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को भी सम्मानित किया। साहित्य नारी वंदन सम्मान के अंतर्गत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य के लिए प्रो. दिनेश चमोला को सम्मानित किया गया। वहीं उत्तराखण्ड मौलिक रचना पुरस्कार के अंतर्गत डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाईं को सम्मान मिला। उत्कृष्ट कुमाऊंनी एवं गढ़वाली साहित्य के लिए तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि “उत्तराखण्ड साहित्य भूषण सम्मान” से सम्मानित डॉ. जितेन ठाकुर न केवल राज्य बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि सम्मानित साहित्यकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

साहित्यिक विरासत को संजोने के लिए ‘साहित्य ग्राम’ की पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र रही है। हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने यहां के साहित्यकारों को प्रेरणा दी है। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार विभिन्न पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित कर रही है और ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में दो “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं। इन साहित्य ग्रामों में साहित्यकारों को रचना के लिए शांत वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखण्ड की बिखरी साहित्यिक धरोहर को संकलित और संरक्षित करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है और आज के समय में यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, बोली और परंपराओं से जोड़ने में साहित्य की बड़ी भूमिका है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य के साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूत करेंगे और उत्तराखण्ड की पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करेंगे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, खजान दास, विधायक सविता कपूर सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

अच्छी खबर : हर जिले में सस्ता केरोसिन उपलब्ध कराने की तैयारी, पेट्रोल पंपों पर नई सुविधा शुरू करेगी केंद्र सरकार

देशभर में आम लोगों को राहत देने और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक अहम और सराहनीय पहल का फैसला लिया है। अब पेट्रोल पंपों पर भी केरोसिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इस योजना के तहत हर जिले में कम से कम दो पेट्रोल पंपों को केरोसिन वितरण की अनुमति दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों, दूर-दराज के इलाकों और सीमित संसाधनों वाले परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले के मुताबिक तेल कंपनियां चयनित पेट्रोल पंपों पर केरोसिन का स्टॉक रखेंगी। शुरुआती चरण में प्रत्येक अधिकृत पंप पर करीब 5 हजार लीटर केरोसिन का भंडारण किया जा सकेगा। इससे जरूरत के समय तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित होगी और लोगों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। लंबे समय से कई राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला केरोसिन कम होता जा रहा था, जिससे जरूरतमंद परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही थी। अब पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता बढ़ने से इस समस्या का समाधान हो सकता है। यह कदम खासकर उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगा जहां एलपीजी या पाइप्ड गैस की पहुंच अभी सीमित है। पहाड़ी इलाकों, ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में आज भी केरोसिन का उपयोग खाना बनाने, लैंप जलाने और छोटे व्यवसायों में किया जाता है। पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता से इन लोगों को नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।

तेल कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय मांग के आधार पर वितरण की योजना तैयार करें। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि केरोसिन की बिक्री पारदर्शी तरीके से हो और कालाबाजारी की संभावना कम हो। डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी प्रणाली के जरिए स्टॉक और बिक्री का डेटा रखा जाएगा। इससे वितरण व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनेगी। इस फैसले का बड़ा फायदा यह भी होगा कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी केरोसिन आसानी से उपलब्ध रहेगा। प्राकृतिक आपदा, बिजली संकट या अन्य आपात स्थितियों में केरोसिन एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ईंधन के रूप में काम आता है। पेट्रोल पंपों के नेटवर्क का उपयोग करके सरकार इसकी पहुंच तेजी से बढ़ा सकती है।

आम लोगों को राहत और वितरण प्रणाली मजबूत करने की दिशा में कदम

केंद्र सरकार की इस पहल को ऊर्जा पहुंच के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पेट्रोल पंपों का नेटवर्क देश के लगभग हर जिले में मौजूद है, ऐसे में इस सुविधा से वितरण प्रणाली मजबूत होगी। पहले केरोसिन लेने के लिए लोगों को सरकारी डिपो या सीमित दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर आपूर्ति बाधित रहती थी। अब पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। सरकार का उद्देश्य यह भी है कि जरूरतमंद लोगों को सुलभ और नियंत्रित दरों पर ईंधन उपलब्ध कराया जाए। तेल कंपनियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह तय करेंगी कि किन पंपों पर यह सुविधा शुरू की जाए। प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाएगी जहां केरोसिन की मांग अधिक है या जहां वैकल्पिक ईंधन के साधन कम हैं। इसके अलावा, पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। केरोसिन के भंडारण और वितरण के लिए अलग टैंक और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि ईंधन वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। इस योजना से छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। कई छोटे उद्योग, जैसे ढाबे, चाय की दुकानें, मोबाइल फूड यूनिट और ग्रामीण स्तर के व्यवसाय, केरोसिन पर निर्भर रहते हैं। उन्हें अब नियमित और आसान आपूर्ति मिलेगी, जिससे उनका काम प्रभावित नहीं होगा। केंद्र सरकार की यह पहल ऊर्जा पहुंच को बेहतर बनाने, जरूरतमंद लोगों को राहत देने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। अगर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो देश के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा और ग्रामीण तथा दूरदराज के इलाकों में ईंधन की उपलब्धता और मजबूत होगी। यह निर्णय आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक व्यावहारिक और सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।

खुशियों से भरा कपूर परिवार, बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर दूसरी बार बनीं मां, बेटे के जन्म की दी खुशखबरी

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर के घर खुशियों ने एक बार फिर दस्तक दी है। रविवार का दिन उनके परिवार के लिए बेहद खास बन गया, जब सोनम कपूर ने अपने दूसरे बेटे को जन्म दिया। इस खुशखबरी की जानकारी खुद अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस और करीबियों के साथ साझा की। जैसे ही यह खबर सामने आई, परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बधाइयों की झड़ी लगा दी। सोनम और उनके पति आनंद आहूजा अब दो बच्चों के माता-पिता बन गए हैं और चार सदस्यों का उनका परिवार पूरा हो गया है। सोनम कपूर ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने बेटे के जन्म की घोषणा की। उन्होंने लिखा कि बेहद शुक्रगुजार और प्यार से भरे दिल के साथ वह 29 मार्च 2026 को अपने बेटे के जन्म की खुशखबरी दे रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के आने से उनका परिवार और बड़ा हो गया है और घर में खुशियों का माहौल है। सोनम ने अपने संदेश में यह भी जताया कि यह नई शुरुआत उनके लिए बेहद खास है और वे इस अनमोल पल के लिए खुद को धन्य महसूस कर रही हैं। अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में अपने बड़े बेटे वायु का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वायु अपने छोटे भाई के आने से बेहद उत्साहित है और उसे लेकर काफी खुश है। सोनम ने लिखा कि उनके घर में प्यार और खुशियों की नई लहर आ गई है और पूरा परिवार इस नए सदस्य का स्वागत करने के लिए बेहद उत्साहित है। पोस्ट के अंत में सोनम और आनंद आहूजा ने लिखा कि वे चार लोगों के परिवार के रूप में इस खूबसूरत नए सफर की शुरुआत करने जा रहे हैं और इसके लिए वे बेहद आभारी हैं।

फिल्मी सितारों ने दी बधाई, परिवार में जश्न का माहौल

सोनम कपूर की इस खुशखबरी पर फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों और परिवार के सदस्यों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। अभिनेत्री करीना कपूर ने कमेंट करते हुए उन्हें बधाई दी और खुशी जाहिर की। वहीं सोनम की बहन रिया कपूर ने दिल वाले इमोजी के साथ अपनी खुशी व्यक्त की। सोनम के चाचा संजय कपूर ने भी रेड हार्ट इमोजी के जरिए परिवार में आई इस खुशी पर प्रतिक्रिया दी। इसके अलावा अभिनेत्री दीया मिर्जा और हुमा कुरैशी समेत कई अन्य सेलेब्स ने भी कमेंट सेक्शन में सोनम और आनंद को शुभकामनाएं दीं। बताया जा रहा है कि सोनम कपूर के परिवार में इस खबर के बाद जश्न का माहौल है। करीबी रिश्तेदार और दोस्त लगातार उन्हें बधाई संदेश भेज रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी फैंस ने सोनम कपूर को ढेरों शुभकामनाएं दीं और मां बनने की खुशी पर उन्हें बधाई दी। कई फैंस ने लिखा कि कपूर परिवार में फिर से नन्हीं किलकारी गूंजी है, जो बेहद खास पल है। सोनम कपूर ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा पिछले साल नवंबर में की थी। उस दौरान उन्होंने एक खूबसूरत तस्वीर साझा की थी जिसमें वह हॉट पिंक रंग के सूट में नजर आई थीं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में सिर्फ एक शब्द लिखा था “मां”। उनकी इस पोस्ट के बाद फैंस ने कयास लगाने शुरू कर दिए थे कि सोनम कपूर जल्द ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। इसके बाद से ही उनके फैंस इस खुशखबरी का इंतजार कर रहे थे। गौरतलब है कि सोनम कपूर ने साल 2018 में बिजनेसमैन आनंद आहूजा से शादी की थी। दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद शादी के बंधन में बंधे थे। शादी के बाद सोनम फिल्मों के साथ-साथ अपने निजी जीवन पर भी ध्यान देती नजर आईं। अगस्त 2022 में उन्होंने अपने पहले बेटे वायु को जन्म दिया था। वायु के जन्म के बाद सोनम ने कुछ समय तक फिल्मों से दूरी बनाई और परिवार के साथ समय बिताया। अब दूसरे बेटे के जन्म के साथ ही सोनम कपूर और आनंद आहूजा का परिवार पूरा हो गया है।

राजधानी दिल्ली में गर्मी के बीच बारिश का येलो अलर्ट, हिमाचल प्रदेश में ताजा हिमपात, कई राज्यों में बदला मौसम 

देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। राजधानी दिल्ली में जहां तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, वहीं बारिश और तेज हवाओं की संभावना ने मौसम को बदला-बदला बना दिया है। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात और मैदानी क्षेत्रों में बारिश से ठंडक लौट आई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 24 घंटों में उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम का यही मिला-जुला मिजाज बना रह सकता है। दिल्ली में सोमवार 30 मार्च को गर्मी के बीच हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। रविवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो औसत से 1.7 डिग्री ज्यादा है। मार्च के आखिरी दिनों में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, हालांकि बीच-बीच में बादल और हवाओं ने गर्मी से राहत दी है।

मौसम विभाग ने सोमवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार दोपहर और शाम के समय हल्की से बहुत हल्की बारिश हो सकती है। इसके साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। रात के समय कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। आज अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मार्च महीने के दौरान दिल्ली में मौसम का मिजाज मिला-जुला रहा है। महीने के मध्य के बाद कई दिनों तक बारिश दर्ज की गई, हालांकि कई पूर्वानुमानों के बावजूद मौसम ज्यादातर शुष्क रहा। इसी वजह से तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, लेकिन दिन का औसत तापमान फिर भी ऊपर रहा। इस दौरान औसत अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री और औसत न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि दिन में धूप निकलने से गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

खराब मौसम को देखते हुए पर्यटकों के लिए अटल टनल को अस्थायी रूप से किया गया बंद–

हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है। रोहतांग दर्रा, बारालाचा ला और शिंकुला में करीब एक फीट तक ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। वहीं अटल टनल रोहतांग के दोनों छोर पर करीब तीन इंच हिमपात हुआ है। खराब मौसम को देखते हुए पर्यटकों के लिए अटल टनल को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। चंबा, कांगड़ा, मंडी और शिमला जिलों में भी बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में गिरावट आई है। ताजा हिमपात और बारिश का असर कृषि और बागवानी पर सकारात्मक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं, जौ, चना और मटर की फसलों के लिए यह बारिश फायदेमंद है। इससे अनाज के दानों का विकास बेहतर होगा। इसके अलावा प्लम, खुबानी और सेब जैसे गुठलीदार फलों के लिए भी यह मौसम लाभदायक बताया जा रहा है। बारिश और ठंडी हवाओं की वजह से प्रदेश के कई इलाकों में दिन के तापमान में 9 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है। लाहौल-स्पीति और मनाली क्षेत्र में बर्फबारी के कारण सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। केलंग-मनाली मार्ग पर फिलहाल केवल फोर बाई फोर वाहनों को आवाजाही की अनुमति दी गई है। सीमा सड़क संगठन की ओर से सड़क बहाली का काम जारी है, लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा कांगड़ा में 19 मिलीमीटर और चंबा के जोत क्षेत्र में 16 मिलीमीटर दर्ज की गई। ताबो और सेऊबाग में 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश में हल्की बर्फबारी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट की संभावना है। वहीं दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बादल, हल्की बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है, जिससे मार्च के अंत में मौसम का मिजाज बदला-बदला बना रहेगा।