भारतीय नौसेना में शामिल हुआ अत्याधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’, दुश्मनों पर रखेगा नजर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे 

भारतीय नौसेना को शुक्रवार को एक बड़ी सामरिक मजबूती मिली, जब नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत ‘तारागिरी’ को विशाखापत्तनम में नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। 3 अप्रैल की दोपहर आयोजित कमीशनिंग समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अत्याधुनिक तकनीक और घातक हथियारों से लैस यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

‘तारागिरी’ सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस है, जो दुश्मन के जहाजों और ठिकानों को दूर से निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी लगाई गई है, जो हवाई खतरों से जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

जहाज में आधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली, उन्नत सेंसर और अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली भी शामिल है, जिससे यह बहु-आयामी समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘तारागिरी’ को “स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप” करार देते हुए कहा कि इसकी कमीशनिंग भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना देश के मूल्यों, प्रतिबद्धता और सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है और यह नया युद्धपोत नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा। 

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना सिर्फ युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि मानवीय संकट और आपदा राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाती रही है। आईएनएस तारागिरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उच्च-तीव्रता वाले युद्ध अभियानों के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों में भी प्रभावी रूप से काम कर सके। समुद्र में राहत सामग्री पहुंचाने, चिकित्सा सहायता देने और संकटग्रस्त क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में यह जहाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया

इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। इसे स्वदेशी तकनीक के साथ तैयार किया गया है और इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती जहाजों की तुलना में तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और कम रडार सिग्नेचर वाला है, जिससे दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता बढ़ जाती है। राजनाथ सिंह ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की सराहना करते हुए कहा कि दशकों से यह संस्थान देश के लिए आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। 

कुशल कार्यबल, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने इसे विश्वसनीय शिपबिल्डिंग संस्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने से भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि रक्षा निर्यात में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। 

इस दौरान हथियार प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, युद्धपोत निर्माण और अन्य सैन्य उपकरणों पर बड़ा निवेश किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, आधुनिक मिसाइल सिस्टम और विशेष नौसैनिक जहाजों जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। ‘तारागिरी’ की कमीशनिंग के साथ भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, रक्षा और आक्रामक क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी मानी जा रही है। जब यह युद्धपोत समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत रक्षा संकल्प का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाएगा।

राज्यसभा से उपनेता पद से हटाए गए आप सांसद राघव चड्ढा का बड़ा संदेश, कहा- ‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं’

आम आदमी पार्टी ने गुरुवार को अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया। आम आदमी पार्टी ने उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया उपनेता नियुक्त किया है। पार्टी के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वहीं, राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दे उठाने पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। राघव चड्ढा ने अपने एक्स हैंडल पर करीब 2 मिनट 45 सेकेंड का वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने कई जनहित के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि वे लगातार आम लोगों से जुड़े विषय संसद में उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास पर बढ़ते टैक्स का बोझ, बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने, मोबाइल कंपनियों के 28 दिन वाले रिचार्ज को लेकर शिकायतें, एयरपोर्ट पर महंगे खाने की समस्या, हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाला जीएसटी, एयर पॉल्यूशन, पेपर लीक जैसे मुद्दे वे लगातार उठाते रहे हैं।

उन्होंने वीडियो में कहा कि देश के मध्यम वर्ग की परेशानियां बढ़ रही हैं, लेकिन इन मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने मोबाइल सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनकमिंग कॉल चार्ज, डेटा एक्सपायरी और 28 दिन के रिचार्ज जैसे मामले लोगों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने फूड एडल्टरेशन, एयरलाइन कंपनियों द्वारा एक्सेस बैगेज चार्ज, पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्चों का भी मुद्दा उठाया।

राघव चड्ढा ने कहा कि वे संसद के अंदर और बाहर लगातार इन मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” इसके साथ ही उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष निशाने के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के इस फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से इस बदलाव को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि संगठनात्मक संतुलन और संसदीय रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया है। अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाए जाने के बाद पार्टी की संसदीय टीम में बदलाव का संकेत भी मिला है।

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर और पार्टी में भूमिका

राघव चड्ढा लंबे समय से आम आदमी पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल रहे हैं। राज्यसभा पहुंचने से पहले वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे। फरवरी 2020 से मार्च 2022 तक वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे और इस दौरान कई मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई। विधानसभा में उन्होंने वित्त, शहरी सेवाओं और प्रशासनिक मामलों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। राज्यसभा में भेजे जाने से पहले वे दिल्ली जल बोर्ड से भी जुड़े रहे और पानी से संबंधित परियोजनाओं पर काम किया। 

अप्रैल 2022 में उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया, जिसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की प्रमुख आवाज बने। उच्च सदन में वे आर्थिक मुद्दों, मिडिल क्लास की समस्याओं और उपभोक्ता हितों से जुड़े विषयों को उठाते रहे हैं। पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आने से यह मामला और चर्चा में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान आने वाले समय में पार्टी के भीतर समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, राघव चड्ढा ने अपने संदेश में साफ किया है कि वे जनता के मुद्दे उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश भले हो, लेकिन वे “आम आदमी” की लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, पार्टी द्वारा अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की रणनीति किस तरह बदलती है, इस पर भी नजर रहेगी।

हवाई यात्रियों को मुफ्त सीट चयन पर फिलहाल रोक, सरकार ने 60% सीटें बिना शुल्क देने का फैसला टाला

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत देने की दिशा में सरकार द्वारा प्रस्तावित बड़ा फैसला फिलहाल टल गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइनों को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चुनने की सुविधा देने के निर्देश को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह नियम 20 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन एयरलाइंस कंपनियों की आपत्तियों और व्यावसायिक चिंताओं को देखते हुए मंत्रालय ने इस पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है। दरअसल, हवाई टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों से पसंदीदा सीट चुनने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। विंडो सीट, आगे की सीट या अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटों के लिए यात्रियों को अलग से भुगतान करना पड़ता है। इसे लेकर लंबे समय से यात्रियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के मद्देनजर सरकार ने मार्च में यह प्रस्ताव रखा था कि एयरलाइंस को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त में चुनने की सुविधा देनी होगी, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम किया जा सके। 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 18 मार्च को इस संबंध में घोषणा करते हुए बताया था कि उसने महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (डीजीसीए) को निर्देश जारी किए हैं कि सभी एयरलाइनों को इस नियम को लागू करने के लिए कहा जाए। मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया था कि यह फैसला यात्रियों के हित में लिया जा रहा है और इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि, इस घोषणा के बाद एयरलाइंस कंपनियों की ओर से आपत्तियां सामने आईं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर सहित कुछ एयरलाइनों ने मंत्रालय को आवेदन देकर कहा कि इस फैसले का परिचालन और व्यावसायिक असर गंभीर हो सकता है। 

एयरलाइंस का कहना था कि सीट चयन शुल्क उनके राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसे हटाने से किराया संरचना प्रभावित हो सकती है। एयरलाइंस कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा अनियंत्रित किराया व्यवस्था में सीट चयन शुल्क हटाने से टिकट कीमतों में बदलाव करना पड़ेगा, जिसका असर अंततः यात्रियों पर ही पड़ सकता है। कंपनियों का कहना था कि यदि सीट चयन मुफ्त किया जाता है तो टिकट बेस फेयर बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे कम किराए में यात्रा करने वाले यात्रियों पर बोझ बढ़ जाएगा।

जांच पूरी होने तक लागू नहीं होगा नियम

एयरलाइंस से मिले इन आवेदनों के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पूरे मामले की समीक्षा की। मंत्रालय ने माना कि प्रस्तावित नियम का किराया संरचना, परिचालन लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा पर व्यापक असर पड़ सकता है। साथ ही यह भी देखा गया कि अलग-अलग एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति अलग होती है, ऐसे में एक समान नियम लागू करना व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने फैसला किया है कि 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क देने का प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया जाए। मंत्रालय ने कहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत अध्ययन और हितधारकों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तब तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी और एयरलाइंस अपनी नीतियों के अनुसार सीट चयन शुल्क लेती रहेंगी।

 सरकार यात्रियों को राहत देने और एयरलाइंस के व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। यदि भविष्य में संशोधित नियम लागू होते हैं, तो संभव है कि कुछ श्रेणी की सीटें मुफ्त हों और कुछ प्रीमियम सीटों पर शुल्क जारी रहे। फिलहाल इस फैसले के टलने से यात्रियों को मुफ्त सीट चयन की सुविधा के लिए इंतजार करना होगा। हालांकि मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि मामले की पूरी जांच के बाद संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे यात्रियों को राहत भी मिले और एयरलाइंस के कारोबार पर भी प्रतिकूल असर न पड़े।

विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों पर सख्ती, बिना अनुमति भंडारा-कथा पर लगाई गई रोक

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अब धाम क्षेत्र में किसी भी प्रकार का भंडारा, भागवत कथा, कीर्तन या अन्य विशेष धार्मिक कार्यक्रम बिना पूर्व अनुमति के आयोजित नहीं किया जा सकेगा। नगर पंचायत ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और धाम की व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद आयोजकों को कार्यक्रम से पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। नगर पंचायत के अनुसार, यात्रा सीजन के दौरान बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई स्थानों पर बिना योजना के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे यातायात, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा पर असर पड़ता है। कई बार भंडारों के कारण सड़क और पैदल मार्ग बाधित हो जाते हैं, जिससे दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नियम लागू किया गया है। 

प्रशासन का कहना है कि धाम में धार्मिक कार्यक्रमों की परंपरा बनी रहेगी, लेकिन उन्हें व्यवस्थित ढंग से आयोजित करना जरूरी है। आयोजकों को कार्यक्रम की तिथि, स्थान, अनुमानित भीड़, भोजन व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़ी जानकारी पहले से देनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही आयोजन किया जा सकेगा। 

नगर पंचायत ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्थानों पर ही कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार बिना अनुमति लगाए गए भंडारों में साफ-सफाई की कमी देखी जाती है, जिससे कूड़ा-कचरा फैल जाता है। इससे न केवल धाम की पवित्रता प्रभावित होती है बल्कि पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। नए नियमों के तहत आयोजकों को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद स्थान को साफ करना अनिवार्य होगा।

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था के लिए लिया गया है। यदि सभी कार्यक्रम अनुमति लेकर होंगे तो भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं बेहतर तरीके से संचालित की जा सकेंगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर अग्निशमन, चिकित्सा सहायता और पुलिस व्यवस्था की जरूरत होती है। बिना सूचना के कार्यक्रम होने से अचानक भीड़ बढ़ जाती है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। अब अनुमति प्रक्रिया के माध्यम से प्रशासन पहले से तैयारी कर सकेगा। 

नगर पंचायत ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति आयोजन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है और कार्यक्रम को बीच में ही बंद भी कराया जा सकता है। साथ ही, धाम क्षेत्र में पोस्टर, बैनर या अस्थायी ढांचे लगाने के लिए भी अनुमति आवश्यक होगी। इस फैसले को लेकर कई स्थानीय लोगों ने समर्थन जताया है। उनका कहना है कि इससे धाम में व्यवस्था बेहतर होगी और श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिलेगी। वहीं कुछ आयोजकों ने अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है, ताकि धार्मिक गतिविधियां बाधित न हों।

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा। निर्धारित नियमों के तहत आवेदन करने पर समय पर अनुमति दी जाएगी। यात्रा सीजन को देखते हुए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। नए नियम लागू होने के बाद अब बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और धाम की व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू बनी रहेगी। 

सांसद राघव चड्ढा पर उनकी ही पार्टी की सख्ती, आप ने राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल को मिलेगी जिम्मेदारी 

आम आदमी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद के खिलाफ बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है और इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है। पार्टी ने पत्र में अनुरोध किया है कि चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब उन्हें सदन में पार्टी कोटे से बोलने का समय भी आवंटित न किया जाए। जानकारी के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने सांसद अशोक मित्तलको नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। पार्टी के इस फैसले को अंदरूनी रणनीतिक बदलाव और संसदीय नेतृत्व में फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है। अप्रैल 2022 से राज्यसभा सांसद रहे राघव चड्ढा संसद में सक्रिय और मुखर नेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। उन्होंने कई बार जनहित के मुद्दे उठाकर सुर्खियां भी बटोरी थीं, लेकिन हाल के महीनों में उनकी सक्रियता कम दिखाई दे रही थी। 

पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चड्ढा को पार्टी की ओर से सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। यह कदम संकेत देता है कि पार्टी संसदीय रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। वर्तमान में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य हैं, जिनमें सात पंजाब से और तीन दिल्ली से हैं। ऐसे में उपनेता पद का महत्व काफी बढ़ जाता है, क्योंकि वही सदन में पार्टी की लाइन तय करने और समन्वय का काम करता है। यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि पिछले कुछ समय से चल रहे आंतरिक मूल्यांकन के बाद यह कदम उठाया गया है। हाल ही में विधानसभा चुनाव के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची में भी राघव चड्ढा का नाम शामिल नहीं किया गया था। इसे भी नेतृत्व स्तर पर बदलाव के संकेत के रूप में देखा गया था।

स्टार प्रचारक सूची से बाहर, गतिविधियों से दूरी ने बढ़ाई चर्चा

राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक गतिविधियों से भी दूर नजर आ रहे थे। पार्टी की प्रमुख बैठकों में उनकी मौजूदगी कम रही और मीडिया ब्रीफिंग में भी वे शामिल नहीं हुए। यहां तक कि दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंदकेजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को राहत मिलने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस चुप्पी ने भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।

हालांकि, संसदीय गतिविधियों में राघव चड्ढा की भूमिका पहले काफी सक्रिय रही है। उन्होंने हाल ही में गिग वर्कर्स के मुद्दे को राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठाया था और उनके सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने का मुद्दा भी उठाया था। उनका कहना था कि बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल मां की नहीं बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनके इन बयानों को व्यापक समर्थन भी मिला था।

इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने संसदीय रणनीति में बदलाव करते हुए उन्हें उपनेता पद से हटाने का फैसला लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण का हिस्सा हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे संगठनात्मक अनुशासन और सक्रियता से जोड़कर भी देख रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्यसभा सचिवालय इस पत्र पर क्या कार्रवाई करता है और अशोक मित्तल को उपनेता की जिम्मेदारी कब तक सौंपी जाती है। यह फैसला आम आदमी पार्टी की संसदीय रणनीति और नेतृत्व संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे पार्टी की राजनीतिक दिशा और सक्रियता पर भी असर पड़ सकता है।

50 साल बाद चांद की ओर फिर बढ़े इंसानी कदम, आर्टेमिस-2 के साथ अंतरिक्ष में रवाना हुए चार यात्री

अमेरिका ने एक बार फिर मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में बड़ा अध्याय जोड़ते हुए चांद की दिशा में नई शुरुआत कर दी है। NASA के Artemis II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री बुधवार को चंद्रमा की ओर रवाना हुए। यह 50 से अधिक वर्षों बाद चंद्रमा की दिशा में भेजा गया पहला मानवयुक्त मिशन है और आने वाले वर्षों में चांद पर दोबारा मानव उतारने की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मौजूदगी बनाने की दिशा में बड़ी छलांग है। 32 मंजिला विशाल रॉकेट ने Kennedy Space Center से उड़ान भरी। लॉन्च को देखने के लिए हजारों लोग तटों, सड़कों और खुले मैदानों में जुटे। वातावरण में उत्साह और रोमांच का वही माहौल देखने को मिला, जैसा 1960 और 70 के दशक के अपोलो मिशनों के दौरान हुआ करता था। कई लोगों ने इसे मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के नए युग की शुरुआत बताया।

इस मिशन में अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। कमांडर रीड वाइजमैन के साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन उड़ान पर रवाना हुए। यह दल कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार किसी महिला, किसी गैर-श्वेत अंतरिक्ष यात्री और किसी गैर-अमेरिकी नागरिक को एक साथ चंद्र मिशन पर भेजा गया है। चारों अंतरिक्ष यात्री Orion spacecraft में सवार होकर चंद्रमा की दिशा में बढ़े। उड़ान से पहले भावुक पल भी देखने को मिले। अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने परिवारों को अलविदा कहा, हाथों से दिल का आकार बनाकर शुभकामनाएं लीं और विशेष एस्ट्रोवैन में बैठकर प्रक्षेपण स्थल तक पहुंचे। वहां उनका इंतजार कर रहा था Space Launch System, जो अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जा रहा है। यही रॉकेट ओरियन कैप्सूल को पृथ्वी की कक्षा से बाहर ले गया।

यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा

मिशन के अनुसार, यह उड़ान करीब 10 दिनों की परीक्षण यात्रा है। उड़ान के शुरुआती 25 घंटे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के पास ही रहेंगे और कैप्सूल के सभी सिस्टम की जांच करेंगे। इसके बाद मुख्य इंजन को सक्रिय किया जाएगा, जो उन्हें चंद्रमा की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ाएगा। यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है। हालांकि इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं। वे चंद्रमा के पास से गुजरेंगे और उसकी सतह से हजारों किलोमीटर दूर तक जाएंगे। इसके बाद कैप्सूल यू-टर्न लेकर पृथ्वी की ओर लौटेगा और अंत में प्रशांत महासागर में उतरेगा।

इस दौरान वे मानव इतिहास में सबसे दूर तक जाने वाले अंतरिक्ष यात्री बन जाएंगे‌ इस उड़ान की तुलना अक्सर Apollo 8 से की जा रही है, जिसने 1968 में पहली बार इंसानों को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचाया था। हालांकि आर्टेमिस-2 मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा नहीं करेंगे, लेकिन यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण डेटा जुटाएगा। नासा का लक्ष्य आने वाले वर्षों में आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर मानव को फिर से उतारना है। इसके बाद चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक शोध स्टेशन स्थापित करने और मंगल मिशन की तैयारी का रास्ता भी खुलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टेमिस-2 मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की नींव रखेगा और आने वाले दशकों में चंद्रमा वैज्ञानिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

ईरान पर अमेरिका का कड़ा रुख, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ने कहा- लक्ष्य पूरा होने तक जारी रहेगा अभियान

ईरान के खिलाफ जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने रुख को और सख्त कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सभी रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, तब तक अमेरिका की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ट्रम्प ने इसे सिर्फ मौजूदा संघर्ष नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दुश्मन को पूरी तरह तबाह कर सकता है। अपने संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना आधुनिक हथियारों के साथ लगातार कार्रवाई कर रही है और अत्याधुनिक बमवर्षक विमानों ने ईरान में प्रभावी भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल क्षमता को निशाना बनाया जा रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान बड़े पैमाने पर मिसाइलें तैयार कर रहा था और अमेरिका उसे किसी भी कीमत पर परमाणु ताकत नहीं बनने देगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वहां के शासन को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह कार्रवाई अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी थी। उन्होंने अपने फैसलों की तुलना पिछले प्रशासन से करते हुए कहा कि किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने वह नहीं किया जो उन्होंने किया है। ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान को बड़ी आर्थिक मदद दी थी, जबकि उनकी सरकार ने उस नीति को समाप्त कर दिया।

ट्रम्प ने दावा किया कि युद्ध के बाद अमेरिका को भारी निवेश मिला है। ऊर्जा संकट को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि तेल की कोई कमी नहीं होगी क्योंकि वैकल्पिक आपूर्ति के इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास सभी विकल्प मौजूद हैं और वह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े संघर्ष लंबा समय लेते हैं, लेकिन अमेरिका अपने लक्ष्य तक पहुंचकर ही रुकेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समझौते पर दो से तीन सप्ताह में फैसला

भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह दिए गए संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जाकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उनके अनुसार, संघर्ष समाप्त होने के बाद यह मार्ग खुल जाएगा और वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी और आने वाले दो से तीन सप्ताह में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और अमेरिका का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रम्प ने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में समझौते की संभावना भी है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका और आक्रामक रणनीति अपना सकता है। 

उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ अहम पुलों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान वार्ता की मेज पर आता है, तो यह बेहतर विकल्प होगा। हालांकि उन्होंने दोहराया कि अमेरिका को रोकना मुश्किल है और कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। उनके बयान के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है, खासकर ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि स्थिति पर अमेरिका की नजर बनी हुई है और जल्द राहत मिल सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो कार्रवाई और तेज होगी। ट्रम्प के इस कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी और बढ़ सकता है और आने वाले सप्ताह इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।

असम में पीएम मोदी का चुनावी शंखनाद, यूसीसी पर सियासी संदेश, कहा- राज्य की संस्कृति से समझौता नहीं होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के तहत बुधवार को असम के धेमाजी जिले के गोगामुख में जनसभा को संबोधित करते हुए तीसरी बार भाजपा सरकार बनने का दावा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा के बाद यह उनकी पहली सभा है और मैदान में उमड़ा जनसैलाब स्पष्ट संकेत दे रहा है कि राज्य में एक बार फिर जनता विकास के पक्ष में मतदान करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा में संकेत दिया कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल कानून बनाने का नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने का भी प्रयास है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज और विशेष क्षेत्रों की परंपराओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करते समय स्थानीय रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य किसी परंपरा को समाप्त करना नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे और समाज में संतुलन मजबूत होगा। उन्होंने इसे असम की पहचान बचाने और राज्य को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं का उत्साह, माताओं-बहनों का आशीर्वाद और लोगों का विश्वास इस बात की खुली घोषणा है कि इस बार भी भाजपा सरकार की हैट्रिक पक्की है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जनता के आशीर्वाद से उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार सेवा करने का अवसर मिला है और उसी तरह असम में भी लगातार तीसरी बार सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इस मैदान में तीसरी बार आए हैं और लोगों का प्रेम यह बता रहा है कि राज्य में स्थिर और मजबूत सरकार के लिए जनता ने मन बना लिया है। उनके अनुसार यह चुनाव केवल सरकार बनाने का नहीं बल्कि विकसित असम और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का चुनाव है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि असम में अब विकास की नई धारा बह रही है। उन्होंने बाढ़ की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य को बाढ़ से राहत दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर बड़े स्तर पर योजना शुरू की है। इस योजना के तहत हजारों करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ नियंत्रण के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले असम में हिंसा, उग्रवाद और असुरक्षा की खबरें आती थीं, लेकिन अब यहां से विकास, निवेश और अवसरों की चर्चा हो रही है। हजारों युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है और राज्य में शांति का माहौल बना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम को प्रकृति ने भरपूर संसाधन दिए हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्षों तक शासन करने के बावजूद राज्य में बुनियादी ढांचे पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी पर पुलों की कमी के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पिछले वर्षों में कई बड़े पुलों का निर्माण कर इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया गया है, जिससे दोनों किनारों के बीच संपर्क मजबूत हुआ है और विकास को गति मिली है।

कांग्रेस पर निशाना, विकास और पहचान बचाने का किया वादा

उत्तराखंड में रिश्वतखोरी पर विजिलेंस का वार: उपखंड शिक्षा अधिकारी एक लाख रुपए लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, शिक्षा विभाग में हड़कंप 

उत्तराखंड में एक बार फिर भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। देहरादून में विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए उपखंड शिक्षा अधिकारी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अधिकारी को नेपाली फार्म के पास घूस लेते हुए दबोचा गया, जिसके बाद उसे रायवाला कोतवाली ले जाकर पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और विभागीय कामकाज पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, उपखंड शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट पर आरोप है कि उन्होंने ऋषिकेश क्षेत्र के एक स्कूल को ग्रेड देने और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत छात्रों की प्रतिपूर्ति के बिल पास करने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना सतर्कता विभाग को दी थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप प्लान तैयार किया। विजिलेंस के अनुसार, तय योजना के तहत बुधवार को शिकायतकर्ता को आरोपी अधिकारी से संपर्क करने के लिए कहा गया। ट्रैप के मुताबिक, आरोपी अधिकारी नेपाली फार्म के पास अपनी निजी गाड़ी से रिश्वत लेने पहुंचा। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रकम सौंपी, विजिलेंस टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए धनवीर सिंह बिष्ट को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उनके साथ मौजूद पुष्पांजलि, जो ऋषिकेश स्थित उत्तरांचल मॉडर्न स्कूल की संचालिका बताई जा रही हैं, को भी हिरासत में लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम आरोपी से पूछताछ में जुटी 

शिकायतकर्ता के स्कूल ‘गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल, ऋषिकेश’ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पढ़ रहे छात्रों की प्रतिपूर्ति के बिल लंबित थे। इन बिलों के भुगतान के एवज में आरोपी अधिकारी ने कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने जब इस मांग को अनुचित बताया, तो उसने विजिलेंस विभाग से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद टीम ने सटीक योजना बनाकर आरोपी को पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम आरोपी को रायवाला कोतवाली ले गई, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी अहम जानकारी सामने आ सकती है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं। 

सतर्कता सेक्टर देहरादून ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा संख्या 7/2026 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विजिलेंस टीम अब आरोपियों के आवास और अन्य ठिकानों की भी जांच कर रही है, ताकि मामले से जुड़े और सबूत जुटाए जा सकें।

हिमाचल में वाहन चालकों को बड़ी राहत : पांच और 6-12 सीटर गाड़ियों पर बढ़ा एंट्री टैक्स वापस, सुखविंदर सरकार ने लिया यू-टर्न

हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने पांच सीटर और 6 से 12 सीटर वाहनों पर हाल ही में बढ़ाया गया एंट्री टैक्स वापस लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार, 31 मार्च को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब पहले की तरह ही पुरानी दरें लागू रहेंगी। यानी पांच सीटर वाहनों से 70 रुपये और 6 से 12 सीटर वाहनों से 110 रुपये एंट्री टैक्स ही लिया जाएगा। सरकार के इस फैसले को पर्यटन उद्योग, टैक्सी ऑपरेटरों और आम वाहन चालकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।

विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है। 

एंट्री टैक्स बढ़ाने के बाद विभिन्न संगठनों और पर्यटन से जुड़े लोगों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं। इसके बाद सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और फैसला किया कि बढ़ी हुई दरों को वापस लिया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार नहीं चाहती कि किसी भी फैसले से पर्यटकों या परिवहन व्यवसाय पर अनावश्यक बोझ पड़े।

उन्होंने कहा कि सरकार लगातार संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रही है, ताकि राजस्व भी प्रभावित न हो और लोगों को भी राहत मिलती रहे। एंट्री टैक्स को लेकर आए सुझावों और शिकायतों को गंभीरता से लिया गया और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया गया कि पुरानी दरें ही अधिक व्यावहारिक हैं। इसी के चलते बढ़ाया गया टैक्स वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

राज्य में एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद टैक्सी यूनियनों ने चिंता जताई थी

राज्य में एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद टैक्सी यूनियनों, होटल एसोसिएशन और पर्यटन कारोबारियों ने चिंता जताई थी। उनका कहना था कि बढ़े हुए टैक्स से बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है। खासकर गर्मियों के सीजन से पहले यह निर्णय पर्यटन उद्योग के लिए चुनौती बन सकता था। सरकार के नए फैसले से अब पर्यटन क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। परिवहन से जुड़े लोगों का कहना है कि पांच और 6 से 12 सीटर वाहन सबसे ज्यादा पर्यटकों को लाने-ले जाने में उपयोग होते हैं। ऐसे में टैक्स बढ़ने से किराए में बढ़ोतरी होती और इसका असर सीधे पर्यटकों पर पड़ता। अब पुरानी दरें लागू रहने से किराए स्थिर रहेंगे और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए यह फैसला सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पर्यटन ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। सड़क सुविधाओं में सुधार, पार्किंग व्यवस्था, और पर्यटक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बड़ा योगदान है, इसलिए ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं जो पर्यटन को प्रोत्साहित करें। विधानसभा में इस घोषणा के बाद सत्ता पक्ष ने इसे जनहित का फैसला बताया, जबकि विपक्ष ने कहा कि सरकार को पहले ही व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए था। हालांकि, सरकार का कहना है कि जनता और हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर समय रहते संशोधन करना ही बेहतर प्रशासन का हिस्सा है।