कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा गायब, असम पुलिस दिल्ली में सक्रिय, हिमंता सरमा परिवार पर आरोपों से बढ़ा सियासी घमासान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान देना भारी पड़ गया है। असम पुलिस पवन खेड़ा को लगातार दो दिनों से तलाश कर रही है। बुधवार को दिल्ली के पॉश निजामुद्दीन ईस्ट की शांत सड़कों पर अचानक सियासी हलचल तेज हो गई थी, जब डी-12 नंबर के बाहर पुलिस की मौजूदगी और नेताओं की आवाजाही ने माहौल को गर्मा दिया। यह वही पता है, जहां कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा रहते हैं। एक दिन पहले तक यहां राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। घर के बाहर सन्नाटा है, दरवाजे बंद हैं और सबसे बड़ा सवाल हवा में तैर रहा है आखिर पवन खेड़ा कहां हैं? असम पुलिस उन्हें तलाश रही है, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
असम पुलिस कथित तौर पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में पूछताछ करने के लिए दिल्ली पहुंची थी। पुलिस का कहना है कि खेड़ा से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाने थे, लेकिन जब टीम उनके आवास पर पहुंची तो वे वहां मौजूद नहीं मिले। अधिकारियों के अनुसार, परिसर की तलाशी के दौरान कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी मिलने का दावा किया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह उम्मीद जताई जा रही थी कि पवन खेड़ा उसी शाम मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे और आरोपों का जवाब देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस टल गई और समय बीतता गया। अब 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन खेड़ा का कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया। इससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।
उधर, पुलिस की कार्रवाई ने कांग्रेस के भीतर एकजुटता को बढ़ावा दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक, सभी खेड़ा के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। दिल्ली स्थित असम भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जा रही है। पार्टी का कहना है कि असम सरकार पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए कर रही है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
पवन खेड़ा अपनी पत्नी कोटा नीलिमा के साथ हैदराबाद में हो सकते हैं। इसे कांग्रेस शासित राज्य में एक अस्थायी शरणस्थल के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच, खेड़ा ने गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। उन्होंने आपराधिक याचिका दायर कर असम पुलिस की संभावित कार्रवाई से राहत की मांग की है। बताया जा रहा है कि इस याचिका पर एक-दो दिन के भीतर न्यायमूर्ति के. सुजाना की पीठ के समक्ष सुनवाई हो सकती है। पुलिस का कहना है कि 58 वर्षीय पवन खेड़ा के खिलाफ मामला उस बयान के आधार पर दर्ज किया गया है, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक से अधिक पासपोर्ट होने का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया है कि यह टिप्पणी मानहानि करने वाली है और इससे प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी आधार पर पुलिस पूछताछ करना चाहती है।
असम के मख्यमंत्री हिमंता सरमा के परिवार पर आरोपों से बढ़ा विवाद
पवन खेड़ा लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1998 से 2013 तक दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विशेष अधिकारी और राजनीतिक सचिव के रूप में काम किया। इस दौरान वे प्रशासनिक और राजनीतिक रणनीति दोनों में अहम भूमिका निभाते रहे। बाद में वे कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और जून 2022 में उन्हें पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग की कमान सौंपी गई। तीखे बयानों और आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण वे अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। 2022 में भी वे उस समय चर्चा में आए थे, जब राज्यसभा के लिए नामांकन न मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था “तपस्या में कमी रह गई।”
इस बयान पर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। हालिया विवाद तब शुरू हुआ, जब खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुयान सरमा के पास संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और एंटीगुआ व बारबुडा से जुड़े कई पासपोर्ट हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार की अमेरिका के व्योमिंग में एक लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी है, जिसकी कथित कीमत लगभग 53,000 करोड़ रुपये बताई गई। खेड़ा ने यह भी कहा कि दुबई में दो संपत्तियों से जुड़े कथित खुलासे चुनावी दस्तावेजों में नहीं किए गए। इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और असम पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया। भाजपा की ओर से इन आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है, जबकि कांग्रेस लगातार इन दावों की जांच की मांग कर रही है।
अब पूरा मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर पहुंच चुका है। एक तरफ असम पुलिस पवन खेड़ा की तलाश में जुटी है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक टकराव का मुद्दा बना रही है। सभी की नजरें अब तेलंगाना उच्च न्यायालय की सुनवाई और खेड़ा की अगली सार्वजनिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। जब तक वे सामने नहीं आते, तब तक यह सियासी रहस्य और गहराता ही जाएगा।

