जेवर में एयरपोर्ट के उद्घाटन पर विपक्ष पर बरसे पीएम मोदी, बोले-पिछली सरकारों ने रोका विकास

उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पिछली सरकारों ने वर्षों तक आगे नहीं बढ़ाया, जिसके कारण क्षेत्र के विकास में देरी हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब यह एयरपोर्ट केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्र बनेगा।

उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू समेत कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नोएडा को विकास के बजाय राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2004 से 2014 के बीच यह परियोजना फाइलों में दबकर रह गई और कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। पीएम मोदी ने कहा कि उस दौर में भ्रष्टाचार और नीतिगत सुस्ती के कारण बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट अटकते रहे। उन्होंने कहा कि 2014 में केंद्र में नई सरकार बनने के बाद भी उत्तर प्रदेश में उस समय की सरकार ने शुरुआती वर्षों में इस परियोजना को गति नहीं दी। बाद में केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार बनने के बाद जेवर एयरपोर्ट के निर्माण को तेज किया गया और जमीन पर काम शुरू हुआ। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि पहले कुछ नेता नोएडा आने से भी हिचकिचाते थे। उन्होंने एक पुराने प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय के मुख्यमंत्री को नोएडा आने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वही क्षेत्र बड़े निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे का केंद्र बन रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने नोएडा में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री की स्थापना, मेरठ मेट्रो के विस्तार और दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को प्रमुख उपलब्धियां बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी परियोजनाएं क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। यहां से कम अंतराल में उड़ानें संचालित की जा सकेंगी और यात्रियों के साथ-साथ व्यापार को भी फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना निवेश, रोजगार और पर्यटन के नए अवसर लेकर आएगी।

कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार के लिए बड़ा केंद्र बनेगा जेवर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश में हवाई अड्डों की संख्या बढ़ने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में 74 एयरपोर्ट थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उत्तर प्रदेश में भी हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार हुआ है और अब राज्य में 17 एयरपोर्ट संचालित या विकसित किए जा रहे हैं। इससे आम लोगों के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ हुई है और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला है। पीएम श ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति देगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से नोएडा के अलावा आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर और फरीदाबाद जैसे शहरों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे उद्योग, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन की सुविधाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को सहज और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी। पीएम मोदी 

ने कहा कि इस परियोजना के पहले चरण को लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। भविष्य में इसके विस्तार के साथ यात्री क्षमता और सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट न केवल हवाई सेवा देगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को भी गति देगा। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय युवाओं को नए मौके मिलेंगे। किसानों को भी अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विकास के नए दौर में ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

संकट गहराया तो ‘टीम इंडिया’ एक्टिव, हाईलेवल की मीटिंग में पीएम मोदी ने राज्यों संग बनाई रणनीति

पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच केंद्र सरकार ने देशव्यापी तैयारियों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अहम बैठक की। बैठक में मौजूदा वैश्विक स्थिति का भारत पर संभावित असर, सप्लाई चेन की मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और नागरिकों के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत तालमेल बेहद जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि राज्यों से मिले इनपुट के आधार पर हालात का प्रभावी तरीके से सामना करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी कई वैश्विक संकटों से मजबूती के साथ निपटा है और इस बार भी “टीम इंडिया” की भावना सबसे बड़ी ताकत बनेगी।

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया था, जिससे सप्लाई चेन, उद्योग और आम जनजीवन पर असर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सका। उन्होंने कहा कि इसी तरह के समन्वय और सतर्कता की जरूरत मौजूदा परिस्थितियों में भी है।

बैठक में प्रधानमंत्री ने बताया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च से एक इंटर-मिनिस्ट्रीयल ग्रुप रोजाना हालात की समीक्षा कर रहा है और जरूरत के मुताबिक फैसले लिए जा रहे हैं। सरकार की प्राथमिकताओं में आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना, उद्योगों को समर्थन देना और नागरिकों की सुरक्षा शामिल है। प्रधानमंत्री ने राज्यों को निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आने दी जाए। उन्होंने जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा। साथ ही राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय रखने, प्रशासन को अलर्ट मोड में रखने और बाजारों में नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए भी अग्रिम योजना बनाने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण की निगरानी की जाए, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के समय में अफवाहें तेजी से फैलती हैं, इसलिए सही और विश्वसनीय जानकारी जनता तक समय पर पहुंचाना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को ऑनलाइन ठगी और फर्जी एजेंटों से भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संकट के समय लोग गलत सूचनाओं के कारण भ्रमित हो सकते हैं, इसलिए सरकार और प्रशासन को सक्रिय संचार व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए।

सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की मदद पर खास फोकस

प्रधानमंत्री ने सीमा और तटीय राज्यों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिपिंग, जरूरी सामानों की आपूर्ति और समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि किसी भी संभावित चुनौती से समय रहते निपटा जा सके। साथ ही जिन राज्यों के नागरिक पश्चिम एशिया में रह रहे हैं, उनसे संपर्क बनाए रखने के लिए हेल्पलाइन शुरू करने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया। पीएम ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, गोबरधन योजना और पाइप्ड नेचुरल गैस के विस्तार को तेज किया जाए। साथ ही तेल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए राज्यों के सहयोग की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि आयात पर निर्भरता कम करने से भविष्य में ऐसे संकटों का असर कम किया जा सकेगा। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी जैसे कदम उठाए गए हैं, ताकि आम लोगों पर बोझ कम हो सके।बैठक में शामिल मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति तंत्र पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। कई मुख्यमंत्रियों ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे राहत देने वाला कदम बताया। मुख्यमंत्रियों ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी का आवंटन बढ़ाकर प्री-क्राइसिस स्तर के 70 प्रतिशत तक कर दिया है, जो पहले 50 प्रतिशत था। इससे उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को राहत मिलेगी। उन्होंने केंद्र के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चुनौती साझा जिम्मेदारी है और सभी राज्यों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि “टीम इंडिया” के रूप में केंद्र और राज्य मिलकर इस स्थिति का सामना करेंगे और देश की अर्थव्यवस्था, नागरिकों और आवश्यक सेवाओं को सुरक्षित रखा जाएगा।

आज खुलेगा देश का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, एनसीआर को मिलेगी नई उड़ान, पीएम मोदी करेंगे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का शुभारंभ

करीब ढाई दशक के इंतजार के बाद शनिवार को जेवर से देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब 11:30 बजे गौतम बुद्ध नगर के जेवर पहुंचकर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे और परियोजना की प्रगति की जानकारी लेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें वे एयरपोर्ट के आर्थिक, औद्योगिक और क्षेत्रीय विकास में योगदान को लेकर अपनी बात रखेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस एयरपोर्ट का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती हवाई यातायात की मांग को पूरा करना है। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ प्रतिवर्ष होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है। यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दबाव कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक विकल्प बनेगा। उद्घाटन समारोह को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे क्षेत्र को कई जोन में बांटा गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए यातायात प्रबंधन की विशेष योजना लागू की गई है। यमुना एक्सप्रेसवे और आसपास के मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी गई है, ताकि कार्यक्रम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की खासियतें, 24 घंटे उड़ान संचालन की सुविधा

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को आधुनिक तकनीक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो बड़े और आधुनिक विमानों के संचालन में सक्षम होगा। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग लगाई गई है, जिससे हर मौसम में 24 घंटे उड़ान संचालन संभव होगा। इसके अलावा टर्मिनल भवन को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। यह यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित है और भविष्य में इसे मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और आसपास के शहरों से पहुंच आसान होगी। कार्गो संचालन के लिए भी यहां विशेष सुविधा विकसित की गई है। शुरुआती चरण में 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो क्षमता होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है। इससे निर्यात-आयात गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट की डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल भवन में घाटों और पारंपरिक स्थापत्य शैली की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही, इसे शून्य-उत्सर्जन लक्ष्य के साथ विकसित किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि यह एयरपोर्ट भविष्य में दुनिया के सबसे पर्यावरण-अनुकूल हवाई अड्डों में शामिल होगा।

एनसीआर और पश्चिमी यूपी के विकास को मिलेगी रफ्तार, निवेश और रोजगार के नए अवसर

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से गेम-चेंजर माना जा रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ता दबाव कम होगा और एनसीआर में हवाई यातायात का संतुलन बनेगा। इससे खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहरों को सीधा फायदा मिलेगा। मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा और आगरा जैसे शहरों के लोगों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी। इसके अलावा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि आगरा और मथुरा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल इस एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेंगे। औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक पार्क और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र एयरोसिटी के रूप में विकसित होगा, जहां होटल, कन्वेंशन सेंटर और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के एविएशन नेटवर्क को मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक एयर ट्रांसपोर्ट मानचित्र पर नई पहचान देगा। पहले चरण में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों की शुरुआत की तैयारी है। उद्घाटन के साथ ही यह परियोजना संचालन की दिशा में बड़ा कदम रखेगी और एनसीआर को नई उड़ान देने का सपना साकार होगा।

विशाखापत्तनम-दिल्ली इंडिगो विमान की आपात लैंडिंग, इंजन में खराबी से 160 यात्रियों की सांसें थमीं

विशाखापत्तनम से दिल्ली आ रहे इंडिगो के एक यात्री विमान को शनिवार को तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारना पड़ा। विमान में सवार 160 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की कुछ देर के लिए सांसें थम गईं, लेकिन पायलट की सूझबूझ और हवाई अड्डे पर मुस्तैद टीमों की तत्परता से सभी यात्री सुरक्षित रहे। अधिकारियों के अनुसार विमान के एक इंजन में खराबी आने के बाद एहतियात के तौर पर आपात स्थिति घोषित की गई और विमान को साथ उतारा गया। विशाखापत्तनम से दिल्ली के लिए रवाना हुआ यह विमान सामान्य रूप से उड़ान भरकर आगे बढ़ रहा था। उड़ान के दौरान चालक दल को इंजन में तकनीकी गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके बाद पायलट ने तुरंत हवाई यातायात नियंत्रण से संपर्क कर स्थिति की जानकारी दी। हालात को देखते हुए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पूर्ण आपात स्थिति घोषित कर दी गई। इसके साथ ही अग्निशमन दल, चिकित्सकीय टीमें और अन्य आपात सेवाएं रनवे के पास तैनात कर दी गईं। विमान में सवार यात्रियों को भी कुछ देर बाद स्थिति की जानकारी दी गई। अचानक आई इस सूचना से यात्रियों में घबराहट का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने सीट बेल्ट कसकर पकड़ ली और प्रार्थना करने लगे। हालांकि चालक दल ने लगातार यात्रियों को आश्वस्त किया कि विमान सुरक्षित रूप से उतारा जाएगा और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पायलट ने संयम बनाए रखते हुए विमान की ऊंचाई और गति नियंत्रित की और सुरक्षित लैंडिंग की तैयारी शुरू की। बताया गया कि सुबह करीब 10 बजकर 39 मिनट पर हवाई अड्डे पर पूर्ण आपात स्थिति लागू कर दी गई थी। इसके बाद विमान को प्राथमिकता देते हुए उतरने की अनुमति दी गई। कुछ देर बाद विमान ने सुरक्षित रूप से रनवे पर लैंडिंग कर ली। जैसे ही विमान जमीन पर उतरा, यात्रियों और चालक दल ने राहत की सांस ली। विमान को एहतियात के तौर पर अलग स्थान पर ले जाया गया, जहां तकनीकी जांच शुरू की गई।

सुरक्षित लैंडिंग के बाद यात्रियों ने ली राहत की सांस

विमान के सुरक्षित उतरते ही सभी यात्रियों को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। किसी यात्री को चोट लगने या किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। हवाई अड्डे पर मौजूद चिकित्सा टीमों ने यात्रियों की सामान्य जांच भी की। अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया सावधानी के साथ की गई ताकि किसी तरह की अफरातफरी न हो।

यात्रियों ने बताया कि उड़ान के दौरान अचानक चालक दल की ओर से सतर्क रहने का संदेश मिला, जिससे सभी चिंतित हो गए थे। कुछ यात्रियों ने कहा कि उन्हें विमान में हल्का कंपन महसूस हुआ, जिसके बाद उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हुआ। हालांकि चालक दल लगातार यात्रियों को भरोसा दिलाता रहा कि विमान सुरक्षित तरीके से उतारा जाएगा। ऐसे मामलों में पायलट का अनुभव और त्वरित निर्णय बेहद अहम होता है। इंजन में खराबी की स्थिति में विमान को नजदीकी सुरक्षित हवाई अड्डे पर उतारना सबसे सही विकल्प माना जाता है। दिल्ली हवाई अड्डे पर पहले से आपात सेवाएं तैयार रहने से जोखिम काफी कम हो जाता है। इंडिगो की ओर से भी इस घटना को लेकर आवश्यक जांच शुरू कर दी गई है। तकनीकी टीम विमान के इंजन और अन्य हिस्सों की जांच कर रही है, ताकि खराबी के कारणों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसे सावधानी के तौर पर गंभीरता से लिया गया और आपात लैंडिंग का निर्णय लिया गया।

समय रहते लिया गया फैसला, टली बड़ी अनहोनी

समय रहते आपात स्थिति घोषित करना और विमान को प्राथमिकता देना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम था। इस तरह की परिस्थितियों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लेकिन इस मामले में पायलट, चालक दल और हवाई अड्डा प्रशासन ने समन्वय के साथ काम किया, जिससे संभावित खतरा टल गया।

हवाई अड्डा प्रशासन ने बताया कि आपात स्थिति के दौरान सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। रनवे को खाली कराया गया, अग्निशमन वाहन तैनात किए गए और चिकित्सा दल को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरते ही राहत कार्य शुरू कर दिए गए। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। नियमित जांच, प्रशिक्षित चालक दल और आपातकालीन तैयारी के कारण ही इस तरह की स्थितियों से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है। यात्रियों ने भी सुरक्षित लैंडिंग के बाद पायलट और चालक दल की सराहना की। फिलहाल विमान की तकनीकी जांच जारी है और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार सभी 160 यात्री सुरक्षित हैं और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। समय पर लिए गए फैसले और सावधानीपूर्ण कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई, जिससे यात्रियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।

देश में लॉकडाउन की अफवाह पर पीएम मोदी के तीन केंद्रीय मंत्रियों को संभालना पड़ा मोर्चा, कहा- घबराने की जरूरत नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच देश में संभावित लॉकडाउन की अफवाहों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि ईंधन संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण भारत में फिर से कोविड जैसे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इन अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी तरह का लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। सरकार की ओर से तीन वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने सामने आकर स्थिति साफ की और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में आवश्यक वस्तुओं, ईंधन और ऊर्जा की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है। प्रधानमंत्री स्तर से लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरें भ्रामक हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। आज संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अफवाहों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि इस तरह की गलत खबरें कौन फैला रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की घबराहट पैदा नहीं होनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हालात पर नजर रख रही हैं और जमाखोरी करने वालों को चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत सरकार के पास हर स्थिति से निपटने की तैयारी है और लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि शीर्ष स्तर से लेकर जिला स्तर तक निगरानी की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन, एलपीजी या जरूरी सामान की कमी न हो। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लॉकडाउन की अफवाहों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक हलकों में भी इस तरह की बातें कही जा रही हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान जैसे देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया था, वैसा कोई कदम उठाने की कोई योजना नहीं है। सीतारमण ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर सरकार लगातार समीक्षा कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने पर्याप्त भंडार बनाए हुए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना वजह सामान जमा न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें।

सोशल मीडिया अफवाहों पर सरकार सख्त, आपूर्ति व्यवस्था सामान्य

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि देश में लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह गलत और निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। पुरी ने कहा कि वैश्विक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चर्चा बढ़ी है, जिसे कुछ लोगों ने गलत तरीके से लॉकडाउन से जोड़ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “तैयारी” का मतलब प्रशासनिक स्तर पर सतर्क रहना है, न कि आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना। पुरी ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अफवाहें फैलाना गैर-जिम्मेदाराना है और इससे अनावश्यक दहशत पैदा होती है। उन्होंने लोगों से केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील की। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि भारत के पास ईंधन और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। तेल कंपनियों और राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था में कोई बाधा न आए। साथ ही प्रशासन को यह भी कहा गया है कि यदि कहीं जमाखोरी या कृत्रिम कमी की कोशिश होती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए। केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तैयारी मजबूत है और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें, घबराएं नहीं और सामान्य दिनचर्या बनाए रखें। तीनों केंद्रीय मंत्रियों के बयानों के बाद सरकार ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं बनने वाली है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।

पीएम मोदी से सीएम धामी ने की मुलाकात, उत्तराखंड आने और चारधाम यात्रा का दिया न्योता

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को उत्तराखंड आने का औपचारिक न्योता दिया और आगामी चारधाम यात्रा में शामिल होने का आग्रह किया। मुलाकात के दौरान धामी ने प्रधानमंत्री को टिहरी जिले स्थित प्रसिद्ध मां सुरकंडा देवी मंदिर का स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। दोनों नेताओं के बीच राज्य के विकास, पर्यटन, अवसंरचना और चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और राज्य सरकार यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम कर रही है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में राज्य सरकार सड़क, स्वास्थ्य, संचार, पार्किंग, आवास और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड आकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाएं। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को राज्य में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पुनर्निर्माण परियोजनाओं सहित कई योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा मिला है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री का इन परियोजनाओं के लिए निरंतर सहयोग देने पर आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को बताया कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए तकनीक का भी व्यापक उपयोग कर रही है। इस बार पंजीकरण व्यवस्था को और सरल बनाया गया है, साथ ही यात्रियों के लिए हेल्पलाइन, कंट्रोल रूम और मेडिकल सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और आपदा प्रबंधन टीमें तैनात की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन कराए जाएं और यात्रा का अनुभव बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य में पर्यटन के नए डेस्टिनेशन विकसित करने की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर, इको और होमस्टे पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को विकसित कर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, राज्य में हेली सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को भी यात्रा में सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को सुरकंडा देवी मंदिर का स्मृति चिन्ह भेंट किया

मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को सुरकंडा देवी मंदिर का स्मृति चिन्ह भेंट किया। यह मंदिर टिहरी जनपद में स्थित एक प्रमुख शक्ति पीठ माना जाता है और हाल ही में यहां रोपवे सहित कई सुविधाओं का विकास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां के मंदिरों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व देश-विदेश में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड आकर इन धार्मिक स्थलों के दर्शन करें। प्रधानमंत्री मोदी ने भी उत्तराखंड में चल रही विकास योजनाओं और चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर संतोष जताया। उन्होंने राज्य सरकार को श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है और यहां की व्यवस्थाएं बेहतर होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। मुलाकात को चारधाम यात्रा से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर वर्ष यात्रा शुरू होने से पहले राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाने और व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर देती है। इस बार भी मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर यात्रा की तैयारियों और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। माना जा रहा है कि इससे चारधाम यात्रा को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं, जिससे होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और अन्य सेवाओं को बड़ा लाभ मिलता है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस बार यात्रा को और व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। मुख्यमंत्री धामी ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस वर्ष की चारधाम यात्रा सफल और सुव्यवस्थित होगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत है और सरकार उनकी सुविधा के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

समर वेकेशन से पहले बंपर ऑफर: होटल में तीसरी रात मुफ्त, फ्लाइट-होटल बुकिंग पर हजारों की छूट

गर्मियों की शुरुआत के साथ ही देशभर में छुट्टियों की प्लानिंग तेज हो गई है। परिवार, दोस्त और कॉरपोरेट ग्रुप आने वाले महीनों में पहाड़ों, समुद्री तटों और पर्यटन स्थलों पर घूमने की तैयारी कर रहे हैं। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए ट्रैवल कंपनियों, होटल चेन और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म ने आकर्षक ऑफर पेश करने शुरू कर दिए हैं। कहीं दो रात रुकने पर तीसरी रात मुफ्त दी जा रही है तो कहीं फ्लाइट, होटल और हॉलिडे पैकेज पर हजारों रुपये तक की छूट दी जा रही है। इन ऑफर्स का मकसद यात्रियों को पहले से बुकिंग के लिए प्रोत्साहित करना और समर सीजन की बढ़ती मांग को भुनाना है। होटल इंडस्ट्री में भी समर सीजन को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। कई होटल चेन सीमित अवधि के लिए विशेष पैकेज लेकर आई हैं। सरोवर होटल्स ने ऐसा ही एक ऑफर शुरू किया है, जिसके तहत मेहमान दो रात ठहरने पर तीसरी रात मुफ्त में बिता सकते हैं। इसके अलावा, कई प्रॉपर्टी में भोजन और पेय पदार्थों पर 15 प्रतिशत तक की छूट भी दी जा रही है। परिवारों को आकर्षित करने के लिए होटल चेन 10 साल तक के बच्चों को मुफ्त ठहरने और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध करा रही है। इस तरह के ऑफर परिवारों के लिए यात्रा को अधिक किफायती बना रहे हैं।

सरोवर होटल्स की निदेशक (मार्केटिंग-कम्युनिकेशन) नीतिका खन्ना के अनुसार, गर्मियां भारत में यात्रा का सबसे मजबूत सीजन होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ छुट्टियां मनाने निकलते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए होटल चेन आकर्षक और किफायती पैकेज लेकर आई है, ताकि मेहमान लंबी अवधि तक ठहर सकें और अलग-अलग लोकेशन पर होटल की सुविधाओं का लाभ उठा सकें। उनका कहना है कि इस तरह के ऑफर से न केवल ग्राहकों को फायदा होता है, बल्कि होटल इंडस्ट्री में बुकिंग भी पहले से बढ़ने लगती है। सिर्फ होटल ही नहीं, ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म भी इस सीजन में आक्रामक मार्केटिंग कर रहे हैं। क्लियरट्रिप ने अपने वार्षिक ‘नेशन ऑन वेकेशन’ अभियान के तहत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, होटल बुकिंग, बस टिकट और हॉलिडे पैकेज पर भारी छूट की घोषणा की है। कंपनी यात्रियों को सह-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड के जरिए अतिरिक्त लाभ भी दे रही है। इन ऑफर्स के जरिए ग्राहक पहले से यात्रा की योजना बनाकर कम कीमत पर टिकट और होटल बुक कर सकते हैं। क्लियरट्रिप की मुख्य विपणन और राजस्व अधिकारी पल्लवी सक्सेना का कहना है कि गर्मियों में यात्रा की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कंपनी ग्राहकों के लिए ऐसे ऑफर लेकर आई है, जिससे वे बिना किसी झिझक के यात्रा की योजना बना सकें। उनका मानना है कि आकर्षक छूट और आसान बुकिंग विकल्प यात्रियों में उत्साह बढ़ाते हैं और पर्यटन उद्योग को भी गति देते हैं।

इसी तरह ईजमाईट्रिप ने भी ‘सनी गेटअवे सेल’ के तहत कई ऑफर पेश किए हैं। कंपनी उड़ानों पर 5,000 रुपये तक और होटल बुकिंग पर 10,000 रुपये तक की छूट दे रही है। इसके अलावा बस, कैब और हॉलिडे पैकेज पर भी विशेष रियायत दी जा रही है। कंपनी का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मियों का सीजन करीब आ रहा है, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों के लिए मांग बढ़ रही है और ग्राहक किफायती विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में ये ऑफर यात्रियों को कम खर्च में बेहतर यात्रा अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

घूमने वाले लोगों के लिए ट्रैवल कंपनियों की यह स्कीम फायदे में हो सकती है?

ट्रैवल कंपनियों के ये ऑफर ऐसे समय में सामने आए हैं जब आने वाले दिनों में यात्रा खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण एयरलाइन कंपनियों की लागत बढ़ रही है। इससे हवाई किराए में बढ़ोतरी की आशंका है। इसके अलावा सरकार द्वारा मुफ्त सीट आवंटन से जुड़े निर्देश और किराया सीमा हटने जैसी नीतिगत बदलावों का भी टिकट कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अभी बुकिंग करने पर यात्रियों को कम कीमत का फायदा मिल सकता है। हर साल गर्मियों में घूमने वाले लोगों के लिए यह स्कीम फायदे में हो सकती है। समर सीजन में सबसे ज्यादा मांग पहाड़ी राज्यों, समुद्री तटों और धार्मिक पर्यटन स्थलों की रहती है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कश्मीर, गोवा, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। कई होटल और ट्रैवल एजेंसियां अर्ली बर्ड ऑफर के जरिए ग्राहकों को पहले से बुकिंग करने पर अतिरिक्त छूट दे रही हैं। इससे यात्रियों को न केवल कम कीमत मिलती है, बल्कि पसंदीदा होटल और फ्लाइट चुनने का विकल्प भी मिलता है। समर वेकेशन से पहले ट्रैवल कंपनियों और होटल इंडस्ट्री के बीच ग्राहकों को आकर्षित करने की होड़ तेज हो गई है। तीसरी रात मुफ्त ठहरने से लेकर हजारों रुपये की छूट तक के ऑफर यात्रा को पहले से ज्यादा किफायती बना रहे हैं। आने वाले महीनों में यात्रा खर्च बढ़ने की आशंका के बीच ये ऑफर यात्रियों के लिए बेहतर अवसर साबित हो सकते हैं। जो लोग गर्मियों में घूमने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए अभी बुकिंग करना फायदे का सौदा माना जा रहा है।

हिमाचल में सस्ती हुई बिजली, उपभोक्ताओं को नए वित्त वर्ष से मिलेगी राहत, सभी कैटेगरी के लिए दरों में कटौती

हिमाचल प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को नवरात्रि के अवसर पर बड़ी राहत मिली । हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HPERC) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित टैरिफ जारी कर दिए हैं, जिसके तहत सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 1 पैसा प्रति यूनिट की कमी की गई है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। हालांकि यह कटौती मामूली दिखाई देती है, लेकिन राज्यभर के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए यह राहत भरा कदम माना जा रहा है। कमीशन के आदेश के अनुसार घरेलू, कमर्शियल, औद्योगिक, कृषि, सरकारी संस्थान और अन्य सभी कैटेगरी के उपभोक्ताओं को इस कटौती का लाभ मिलेगा। नई दरें लागू होने के बाद उपभोक्ताओं के मासिक बिल में कमी दर्ज होगी। बताया जा रहा है कि बिजली बोर्ड ने राजस्व आवश्यकताओं, पावर परचेज कॉस्ट, ट्रांसमिशन और वितरण खर्च, लाइन लॉस और सब्सिडी जैसे कई कारकों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव भेजा था। आयोग ने इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद उपभोक्ताओं के हित में दरों में मामूली कटौती का फैसला लिया। इससे यह संकेत भी मिलता है कि राज्य में बिजली व्यवस्था को संतुलित रखते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह राहत विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गर्मियों के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने लगती है और पंखे, कूलर, फ्रिज और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग से बिल बढ़ जाता है। ऐसे में प्रति यूनिट दर में कमी से कुल बिल पर असर पड़ेगा। भले ही कटौती 1 पैसा प्रति यूनिट की है, लेकिन बड़े स्तर पर खपत करने वाले उपभोक्ताओं को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा। कमर्शियल और छोटे कारोबारियों के लिए भी यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। दुकानों, होटल, रेस्तरां और छोटे उद्योगों में बिजली खर्च प्रमुख लागत होती है। दरों में कमी से उनकी परिचालन लागत में हल्की कमी आएगी। खासतौर पर पर्यटन सीजन के दौरान होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को बिजली बिल में राहत मिल सकती है। औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी यह कदम सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उद्योगों में बिजली खपत अधिक होती है और प्रति यूनिट दर में मामूली कमी भी कुल खर्च में असर डालती है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा लागत में स्थिरता निवेश को बढ़ावा देती है और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। कृषि उपभोक्ताओं को भी इस फैसले का लाभ मिलेगा। सिंचाई के लिए बिजली का उपयोग करने वाले किसानों के लिए बिजली दरों में कमी राहत देने वाली है। राज्य में कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल और पंप सेट के जरिए सिंचाई की जाती है, ऐसे में बिजली लागत कम होने से किसानों का खर्च कुछ हद तक कम होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दरों में कटौती के बावजूद बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखा गया है। पावर परचेज कॉस्ट और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी के बावजूद उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं बढ़ाया गया। इससे संकेत मिलता है कि राज्य सरकार और नियामक आयोग उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ बिजली क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली दरों में कमी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी होता है। इससे उपभोक्ताओं को यह संदेश जाता है कि सरकार और नियामक संस्था उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख रही है। साथ ही यह कदम भविष्य में ऊर्जा दक्षता और बेहतर प्रबंधन को भी प्रोत्साहित करता है। राज्य में बिजली की उपलब्धता, उत्पादन और खरीद के संतुलन को बनाए रखने के लिए आयोग ने कई तकनीकी पहलुओं पर भी जोर दिया है। लाइन लॉस कम करने, स्मार्ट मीटरिंग, बिलिंग व्यवस्था में सुधार और वितरण प्रणाली को मजबूत करने जैसे उपायों को भी प्राथमिकता दी गई है। इन सुधारों से आने वाले समय में उपभोक्ताओं को और राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें, सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ

हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन द्वारा जारी आदेश के अनुसार संशोधित बिजली दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। अप्रैल महीने से जारी होने वाले बिलों में उपभोक्ताओं को नई दरों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। यह राहत घरेलू, कमर्शियल, औद्योगिक, कृषि और सरकारी सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को समान रूप से दी गई है। आयोग के इस फैसले को राज्य में ऊर्जा क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने की दिशा में संतुलित कदम माना जा रहा है। आमतौर पर बिजली दरों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार दरों में कमी से उपभोक्ताओं को सकारात्मक संदेश गया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब ईंधन लागत और ऊर्जा खरीद खर्च बढ़ रहे हैं, दरों में कटौती को राहत भरा कदम माना जा रहा है। उपभोक्ता संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भले ही कटौती मामूली है, लेकिन यह उपभोक्ताओं के हित में है। लंबे समय से मांग की जा रही थी कि बिजली दरों को स्थिर रखा जाए या उनमें कमी की जाए। आयोग के फैसले से यह मांग आंशिक रूप से पूरी हुई है। यदि भविष्य में बिजली उत्पादन बढ़ता है और लाइन लॉस में कमी आती है तो दरों में और राहत संभव है। हिमाचल प्रदेश में जल विद्युत उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं और राज्य को “पावर स्टेट” के रूप में विकसित करने की दिशा में काम जारी है। उत्पादन बढ़ने से बिजली खरीद पर निर्भरता कम होगी और उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सकती है। बिजली बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि वितरण व्यवस्था को मजबूत करने और तकनीकी नुकसान कम करने पर लगातार काम किया जा रहा है। स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटल बिलिंग और नेटवर्क सुधार जैसे कदमों से लागत कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इन सुधारों का लाभ भविष्य में उपभोक्ताओं को मिल सकता है। नई दरों के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को बिल में भले ही बड़ी कटौती नजर न आए, लेकिन यह संकेत महत्वपूर्ण है कि दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और उद्योगों को भी स्थिर बिजली दरों का फायदा मिलेगा।

यह फैसला आने वाले समय में राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा देगा। पर्यटन, होटल, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र में बिजली खर्च प्रमुख होता है। दरों में कमी से इन क्षेत्रों को संचालन लागत में हल्की राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में बिजली दरों में 1 पैसा प्रति यूनिट की कटौती को उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली नई दरों से राज्य के लाखों उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और बिजली बिल में मामूली ही सही, लेकिन राहत महसूस होगी। सरकार और नियामक आयोग के इस फैसले से यह भी संकेत मिला है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से बचने की कोशिश की जा रही है।

ईरान-इजराइल जंग के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला : पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई, आम आदमी को राहत

ईरान-इजराइल जंग के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आज, शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस कदम से फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी टल जाएगी और आम उपभोक्ताओं को महंगाई के अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की पैनिक बाइंग देखी जा रही थी। वैश्विक हालात को देखते हुए लोगों को आशंका थी कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगी थीं और कई राज्यों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने बाजार को स्थिर करने और घबराहट को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। जानकारों के अनुसार, ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। संघर्ष से पहले कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, जो अब बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। इस तेज उछाल का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों की लागत पर पड़ रहा था। यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं करती तो कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती थीं, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ता। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर तुरंत दिखाई देता है। संघर्ष से पहले भारत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के उस महत्वपूर्ण गलियारे के माध्यम से प्राप्त करता था, जो फिलहाल तनाव के कारण अस्थिर बना हुआ है। इससे आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी है और बाजार में दबाव बना हुआ है। केंद्र सरकार के इस फैसले से तेल विपणन कंपनियों पर लागत का बोझ कम होने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यदि एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं होती तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 8 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती थी। इससे परिवहन लागत बढ़ती और उसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता। इस बीच रूस की कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है। फिलहाल केवल प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य कंपनियां भी कीमतें स्थिर रखेंगी। केंद्र सरकार ने केवल एक्साइज ड्यूटी में कटौती ही नहीं की है, बल्कि ईंधन निर्यात से जुड़े नियमों को भी सख्त कर दिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर पहले दी जा रही व्यापक उत्पाद शुल्क छूट को वापस ले लिया है। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।

निर्यात नियम सख्त, घरेलू बाजार को प्राथमिकता

संशोधित व्यवस्था के तहत अब ईंधन निर्यात से संबंधित लाभ केवल कुछ स्पष्ट रूप से परिभाषित श्रेणियों तक ही सीमित कर दिए गए हैं। इससे कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात करना पहले की तुलना में कम आकर्षक होगा और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम संतुलित नीति का संकेत देता है। एक तरफ सरकार ने कंपनियों पर लागत का दबाव कम किया है, वहीं दूसरी तरफ निर्यात पर सख्ती कर घरेलू आपूर्ति मजबूत करने की कोशिश की है। इससे कीमतों में अचानक उछाल की संभावना कम होगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। तेल कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन को सुचारू रखें और किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी न होने दें। राज्यों के साथ भी समन्वय बढ़ाया गया है ताकि वितरण व्यवस्था पर नजर रखी जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान-इजराइल तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार आगे भी ऐसे कदम उठा सकती है। फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार ने संकेत दिया है कि वह महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने को तैयार है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस फैसले से आम लोगों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी फिलहाल टल गई है, जिससे परिवहन लागत स्थिर रहेगी और महंगाई पर भी दबाव कम पड़ेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकार का यह कदम बाजार को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।