UP cabinet meeting लोक भवन में योगी कैबिनेट के 22 फैसले : शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाया, जनहित के कई प्रस्तावों को मंजूरी 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में राज्य के विकास, सामाजिक सरोकार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इस बैठक को नीतिगत दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक के बाद मंत्रियों ने मीडिया से बातचीत में फैसलों की जानकारी दी और विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि कैबिनेट में 20 से अधिक प्रस्तावों पर विचार किया गया और सभी को मंजूरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित भारतीय संविधान के निर्माताओं की प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेश भर में स्थापित प्रतिमाओं के ऊपर छत बनाई जाएगी, चबूतरे विकसित किए जाएंगे और जहां आवश्यक होगा वहां नवीनीकरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान 14 अप्रैल से शुरू किया जाएगा, ताकि संविधान निर्माता को सम्मान देने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों का भी बेहतर विकास हो सके।

बैठक के बाद सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मुद्दों पर भी बयान सामने आए। ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा की सरकार रही, तब कानून-व्यवस्था बिगड़ी और दंगे हुए। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता उस घटना को आज भी नहीं भूली है। उनके अनुसार सपा शासन में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर रही, जबकि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।

महिला आरक्षण को लेकर भी उपमुख्यमंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक उनके अधिकारों से वंचित रखा गया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि आधी आबादी को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार का कदम ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार भी कई योजनाएं चला रही है और आगे भी इस दिशा में काम जारी रहेगा।

इसी दौरान मदरसा कानून को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मदरसा बोर्ड से संबंधित कोई नया विधेयक नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस कानून को लेकर चर्चा हो रही है, वह 2016 में सपा सरकार के दौरान पारित किया गया था और बाद में कैबिनेट से उसे मंजूरी भी मिल चुकी थी। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।

शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह हुआ

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश के करीब दो लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और कार्यरत कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।

मंत्री जयवीर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ‘जंगलराज’ को नहीं भूली है और सपा शासनकाल के दौरान हुए अत्याचार लोगों की स्मृति में अभी भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी और अपराधियों के हौसले बुलंद थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में सुरक्षा और विकास का माहौल बनाया है, जिसे जनता समर्थन दे रही है।

जनहित के मुद्दों पर फैसलों का दावा

मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि कैबिनेट ने जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य विकास को गति देना और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करना है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बिना तथ्यों के भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार सरकार ने शिक्षा, सामाजिक न्याय और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े फैसलों पर विशेष ध्यान दिया है। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों को सरकार ने विकास और सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम बताया है। प्रतिमाओं के संरक्षण अभियान से लेकर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी तक कई निर्णय सीधे तौर पर समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित करेंगे। साथ ही सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अपनी नीतियों को जनहित में बताया है। आने वाले दिनों में इन फैसलों के क्रियान्वयन पर भी सरकार की नजर रहेगी, ताकि घोषित योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सके।

निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट का अनुमान : इस साल कमजोर रहेगा मानसून, खेती और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

देश में इस साल मानसून को लेकर पहली बड़ी भविष्यवाणी सामने आ गई है और शुरुआती संकेत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपना पहला अनुमान जारी करते हुए कहा है कि इस बार देश में कुल बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। एजेंसी के मुताबिक जून से सितंबर तक चलने वाले पूरे मानसून सीजन में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के करीब 94 प्रतिशत रह सकती है, जो सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम है। स्काइमेट ने अपने पूर्वानुमान में एल नीनो के संभावित प्रभाव को भी कमजोर मानसून की बड़ी वजह बताया है। एजेंसी के अनुसार चार महीनों के दौरान देशभर में औसतन लगभग 817 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है, हालांकि इसमें पांच प्रतिशत तक ऊपर या नीचे रहने की गुंजाइश भी जताई गई है। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस साल सूखे की आशंका करीब 30 प्रतिशत तक है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत संभावना सामान्य से कम बारिश की बनी हुई है। अब सबकी नजर भारत मौसम विभाग के आधिकारिक अनुमान पर है, जो इस महीने के आखिर तक जारी किया जा सकता है। मासिक पूर्वानुमान की बात करें तो स्काइमेट ने संकेत दिए हैं कि मानसून का पैटर्न असमान रह सकता है। जून में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद जताई गई है। इस महीने में एलपीए का करीब 101 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है। जून के सामान्य रहने की संभावना 40 प्रतिशत बताई गई है, जबकि 40 प्रतिशत संभावना सामान्य से कम रहने की भी है। जून का एलपीए 165.3 मिलीमीटर है, जिससे शुरुआती राहत मिल सकती है।

जुलाई में स्थिति थोड़ी कमजोर रहने की आशंका जताई गई है। स्काइमेट के मुताबिक इस महीने बारिश एलपीए के करीब 95 प्रतिशत तक रह सकती है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आती है। जुलाई के लिए सामान्य और कम बारिश दोनों की संभावना 40-40 प्रतिशत बताई गई है। यह महीना खरीफ फसलों की बुवाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में कमजोर बारिश चिंता बढ़ा सकती है। जुलाई का एलपीए 280.5 मिलीमीटर है।

अगस्त में भी राहत के संकेत नहीं हैं। एजेंसी के अनुसार इस महीने बारिश एलपीए के करीब 92 प्रतिशत तक रह सकती है।

अगस्त में कम बारिश की संभावना करीब 60 प्रतिशत बताई गई है। यह महीना भी खेती के लिए अहम होता है और इस दौरान बारिश में कमी फसलों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। अगस्त का एलपीए 254.9 मिलीमीटर है। सितंबर में भी मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। स्काइमेट के मुताबिक इस महीने औसत बारिश एलपीए के 89 प्रतिशत तक रह सकती है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है। सितंबर में कम बारिश की संभावना सबसे ज्यादा 79 प्रतिशत बताई गई है। सितंबर का एलपीए 167.9 मिलीमीटर है। इस तरह जून को छोड़कर बाकी तीन महीनों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई गई है। 

जुलाई और अगस्त महीने खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिए सबसे अहम 

कमजोर मानसून का असर खेती पर पड़ सकता है। जुलाई और अगस्त महीने खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिए सबसे अहम होते हैं। इन महीनों में बारिश कम रहने पर धान, दालें और तिलहन जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। खासकर मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कुल बारिश ही नहीं, बल्कि उसका समय और वितरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि मानसून कम होने के बावजूद समय पर और संतुलित तरीके से बारिश होती है तो नुकसान सीमित रह सकता है। लेकिन लंबे ब्रेक या असमान बारिश से जलाशयों, भूजल स्तर और कृषि उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर ग्रामीण मांग और महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है।

क्षेत्रीय पूर्वानुमान में स्काइमेट ने बताया है कि जून में इंडो-गंगेटिक मैदान और पश्चिमी घाट के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। जुलाई में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। अगस्त में उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में कम बारिश की आशंका जताई गई है। सितंबर में दक्षिण और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर बाकी अधिकांश क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

कुल मिलाकर स्काइमेट के शुरुआती अनुमान से संकेत मिलते हैं कि 2026 का मानसून संतुलित नहीं रह सकता। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो इसका असर खेती, जल संसाधनों और देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में मौसम विभाग के आधिकारिक अनुमान और मानसून की प्रगति पर नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

सीए फाइनल परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव : अब साल में सिर्फ दो बार होगी परीक्षा, मई 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था

चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) ने CA फाइनल परीक्षा के आयोजन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस निर्णय के तहत अब चार्टर्ड अकाउंटेंट फाइनल परीक्षाएं वर्ष में तीन बार के बजाय केवल दो बार आयोजित की जाएंगी। यह बदलाव मई 2026 परीक्षा सत्र से प्रभावी होगा। संस्थान का मानना है कि इस कदम से परीक्षा प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित होगी और छात्रों को तैयारी के लिए बेहतर समय मिल सकेगा। अब तक CA फाइनल परीक्षाएं जनवरी, मई और सितंबर महीने में आयोजित होती थीं। लेकिन नए फैसले के बाद मई 2026 से परीक्षाएं केवल मई और नवंबर माह में ही आयोजित की जाएंगी। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव हितधारकों से मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर किया गया है। लंबे समय से छात्र और शिक्षाविद परीक्षा के बीच कम अंतराल होने को लेकर चिंता जता रहे थे, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

संस्थान का कहना है कि बार-बार परीक्षा आयोजित होने से छात्रों पर लगातार तैयारी का दबाव बना रहता था। कई अभ्यर्थियों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल पाता था, जिससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ता था। इसके अलावा परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता था। ऐसे में वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित करने से न केवल छात्रों को तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा बल्कि संस्थान भी परीक्षा संचालन को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा कर सकेगा।

संयुक्त सचिव (परीक्षा) आनंद कुमार चतुर्वेदी द्वारा जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया है कि यह नई व्यवस्था मई 2026 से लागू होगी और भविष्य में भी इसी पैटर्न का पालन किया जाएगा। संस्थान ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक संतुलित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी बेहतर होगी। इस बदलाव से छात्रों को अपनी तैयारी की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। पहले कम अंतराल के कारण कई छात्र जल्दबाजी में परीक्षा देने के लिए मजबूर हो जाते थे, जबकि अब उन्हें विषयों की गहराई से तैयारी करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे परीक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है और सफल अभ्यर्थियों की दक्षता भी बेहतर होगी।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू 

इसी बीच संस्थान ने नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू कर दिया है। यह कार्यक्रम नए योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। भाग लेने वाली कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए समय-सीमा आधिकारिक पोर्टल पर जारी कर दी गई है। संस्थान ने सभी केंद्रों पर एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी शुरू किया है।

इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्लेसमेंट प्रक्रिया, करियर विकल्प, नियोक्ताओं की अपेक्षाएं, साक्षात्कार की तैयारी और व्यावहारिक मार्गदर्शन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप मार्गदर्शन देना है। संस्थान का मानना है कि इससे उम्मीदवारों की सफलता दर बढ़ेगी और उन्हें बेहतर कंपनियों में अवसर मिल सकेंगे।

इस बार कैंपस प्लेसमेंट में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित कंपनियों ने भागीदारी की है। भर्ती गतिविधियां देश के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और जयपुर में आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा लगभग 20 छोटे केंद्रों पर भी प्लेसमेंट प्रक्रिया संचालित की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।

संस्थान के अनुसार, साक्षात्कार 6 अप्रैल से 17 अप्रैल तक चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जा रहे हैं। अलग-अलग शहरों में अलग तिथियों पर इंटरव्यू होंगे, जिससे उम्मीदवार अपनी सुविधा के अनुसार भाग ले सकें। इस बार कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अग्रणी भारतीय कॉरपोरेट समूहों ने भर्ती में रुचि दिखाई है, जिससे प्लेसमेंट प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उत्साह देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, CA फाइनल परीक्षा पैटर्न में बदलाव और साथ ही कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम की शुरुआत को छात्रों के लिए दोहरी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर परीक्षा के बीच पर्याप्त अंतराल से तैयारी बेहतर होगी, वहीं दूसरी ओर प्लेसमेंट कार्यक्रम के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को करियर की नई दिशा मिलने की उम्मीद है। संस्थान का मानना है कि इन दोनों कदमों से चार्टर्ड अकाउंटेंसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य को मजबूती मिलेगी।

कनाडा के नए इमिग्रेशन नियम लागू, पासपोर्ट-नागरिकता शुल्क बढ़ा, सुपर वीजा में राहत, प्रांतों को मिले ज्यादा अधिकार 

कनाडा जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकार ने इमिग्रेशन से जुड़े कई नियमों में संशोधन करते हुए पासपोर्ट शुल्क बढ़ा दिया है, नागरिकता फीस में बदलाव किया है और सुपर वीजा कार्यक्रम को आसान बना दिया है। इन नए नियमों का असर वहां जाने वाले नागरिकों, स्थायी निवास के इच्छुक आवेदकों और परिवार के सदस्यों को बुलाने की योजना बना रहे लोगों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और आवेदनों के निपटारे में तेजी लाना है। नए प्रावधानों के तहत 10 साल की वैधता वाले वयस्क पासपोर्ट की कीमत बढ़ाकर 163.50 कैनेडियन डॉलर कर दी गई है, जो पहले 160 डॉलर थी। वहीं पांच साल के वयस्क पासपोर्ट की कीमत 122.50 कैनेडियन डॉलर तय की गई है। शुल्क में यह बढ़ोतरी मामूली जरूर है, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदकों को देखते हुए इसका असर व्यापक होगा। सरकार ने इस बढ़ोतरी के साथ एक नई सुविधा भी जोड़ी है, जिसके तहत पासपोर्ट आवेदन 30 दिनों के भीतर निपटाने की गारंटी दी गई है।

अगर तय समय के भीतर आवेदन का निपटारा नहीं होता है, तो आवेदक को जमा की गई पूरी फीस स्वतः वापस कर दी जाएगी। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं आवेदनों पर लागू होगी जिनमें सभी जरूरी दस्तावेज पूरे और सही तरीके से जमा किए गए हों। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रक्रिया में देरी कम होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

नागरिकता से जुड़ी फीस में भी बदलाव किया गया है। नागरिकता के अधिकार के लिए अब 123 कैनेडियन डॉलर की फीस तय की गई है। यह बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन इसे व्यापक प्रशासनिक सुधारों का हिस्सा बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकता प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए संसाधनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

सरकार ने परिवार आधारित यात्रा को आसान बनाने के उद्देश्य से सुपर वीजा कार्यक्रम में भी ढील दी है। नए नियमों के अनुसार, प्रायोजक अब पिछले दो कर वर्षों में से किसी एक वर्ष में आय की शर्त पूरी करके पात्र माने जाएंगे। इसके अलावा माता-पिता या दादा-दादी की आय को भी कुल आय में जोड़कर पात्रता पूरी की जा सकेगी। इससे परिवारों के लिए अपने बुजुर्ग सदस्यों को बुलाना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा। सुपर वीजा के तहत माता-पिता और दादा-दादी हर बार यात्रा पर कनाडा में पांच साल तक रह सकते हैं। यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए राहत मानी जा रही है जो लंबे समय तक अपने परिजनों के साथ रहना चाहते हैं। सरकार का कहना है कि इससे परिवारों का पुनर्मिलन आसान होगा और अस्थायी यात्राओं का दबाव भी कम होगा।

प्रांतों को अधिक अधिकार, विदेशी कर्मचारियों के नियम भी बदले

नए बदलावों के तहत प्रांतों और क्षेत्रों को इमिग्रेशन से जुड़े फैसलों में अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब प्रांतीय प्रशासन यह तय कर सकेंगे कि आवेदक वास्तव में स्थानीय स्तर पर बसने का इरादा रखते हैं या नहीं और क्या वे आर्थिक रूप से खुद को स्थापित कर सकते हैं। पहले इस तरह के आकलन में संघीय अधिकारियों की बड़ी भूमिका होती थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी काफी हद तक प्रांतों को सौंप दी गई है। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे क्योंकि प्रांत अपने श्रम बाजार और आर्थिक जरूरतों को बेहतर समझते हैं। इससे रोजगार आधारित इमिग्रेशन में भी संतुलन आने की उम्मीद जताई जा रही है।

आर्थिक आधार पर आने वाले प्रवासियों के लिए भी एक अहम बदलाव किया गया है। अब स्थायी निवास मिलने के बाद छह साल तक संघीय सहायता से मिलने वाली बसावट सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा। हालांकि अप्रैल 2027 से इस समय सीमा को घटाकर पांच साल कर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि शुरुआती वर्षों में सहायता देकर प्रवासियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कामगारों की कमी को देखते हुए विदेशी कर्मचारि

डेडलाइन, धमकी और बढ़ता तनाव : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को फिर दी तबाही की चेतावनी, चार घंटे में ढांचे मिटाने का दावा

पूरी दुनिया हर सुबह सोचती है अमेरिका ईरान के बीच जारी युद्ध थम जाएगा लेकिन उसे कोई अभी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रुकने के लिए तैयार नहीं है वहीं ईरान भी अमेरिका को लगातार धमकी दे रहा है। इसी बीच सोमवार को ट्रंप ने एक बार फिर तीखा बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान मंगलवार रात तक समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका चार घंटे के भीतर ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना के पास ऐसी योजना है जिसके तहत ईरान के अहम ढांचे, पुलों, बिजली संयंत्रों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ताकत के दम पर ईरान के हर पुल को ध्वस्त किया जा सकता है और उसके बिजली संयंत्रों को पूरी तरह निष्क्रिय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “हमारे पास योजना तैयार है। 

अगर हम चाहें तो मंगलवार रात 12 बजे तक ईरान के हर पुल को खत्म कर सकते हैं। बिजली संयंत्रों को बंद कर दिया जाएगा, जला दिया जाएगा और फिर कभी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यह सब चार घंटे के भीतर भी संभव है।” ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी मानी जा रही है। ट्रंप ने ईरान को पूर्वी समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे तक समझौते के लिए तैयार होने की समयसीमा भी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलता है, तो अमेरिका बातचीत के रास्ते आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते की स्थिति में अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करने को तैयार है। ट्रंप ने कहा, “अगर वे समझौता करते हैं, तो हम उनके राष्ट्र के पुनर्निर्माण में भी शामिल हो सकते हैं।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक ढांचे पर हमले की स्थिति में क्या यह युद्ध अपराध माना जाएगा, तो ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी कार्रवाई को युद्ध अपराध नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर लोग “आजादी के लिए तकलीफ सहने को तैयार हैं” और वे चाहते हैं कि अमेरिका और दबाव बनाए।

इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी ट्रंप के साथ खड़े होकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब तक जो हमले हुए हैं, वे सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले समय में हमले और तेज हो सकते हैं। हेगसेथ ने कहा, कल आज से भी ज्यादा हमले होंगे। उसके बाद ईरान के पास फैसला लेने का विकल्प होगा। उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति ढिलाई नहीं बरतते।

ईरान ने 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराया, तनाव और बढ़ा

तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने कहा कि वह अस्थायी समाधान नहीं चाहता बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दबाव और धमकियों के बीच कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस रुख ने दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया है। अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का दबाव भी बढ़ा दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। 

अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने तेल की आवाजाही में रुकावट जारी रखी, तो नागरिक ठिकानों समेत बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि अब ईरान को स्पष्ट विकल्प दिया गया है या तो समझौता करे या फिर व्यापक सैन्य कार्रवाई का सामना करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीति चरणबद्ध तरीके से दबाव बढ़ाने की है। 

उनके मुताबिक, “आज के हमले सिर्फ शुरुआत हैं, आगे इससे कहीं ज्यादा तीव्र कार्रवाई हो सकती है।” ट्रंप प्रशासन का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कई देशों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। इसके बावजूद दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है, जिससे हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं।

प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आए IITian बाबा अभय सिंह ने रचाई शादी, पत्नी प्रतीका संग लिए सात फेरे

प्रयागराज महाकुंभ-2025 के दौरान चर्चा में आए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह आध्यात्म नहीं बल्कि उनका निजी जीवन है। लंबे समय तक साधु वेश में रहने और वैराग्य की बातें करने वाले अभय सिंह ने शादी कर ली है। इस बात का खुलासा खुद उन्होंने सोमवार को किया, जब वह हरियाणा के झज्जर में भगवा वस्त्र पहने पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रतीका भी मौजूद थीं। अचानक सामने आई इस खबर ने उनके अनुयायियों और स्थानीय लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। अभय सिंह को लोग IITian बाबा के नाम से जानते हैं। महाकुंभ के दौरान उनका अंदाज, शिक्षा और आध्यात्मिक विचारों का मिश्रण लोगों को आकर्षित कर गया था। बताया जाता है कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और फिर साधु जीवन की ओर मुड़ गए। महाकुंभ में उनके प्रवचन और जीवन शैली सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी। इसके बाद से ही वह लगातार चर्चा में बने रहे।

सोमवार को जब अभय सिंह हरियाणा के झज्जर पहुंचे तो उनके साथ एक महिला भी थीं, जिन्हें उन्होंने अपनी पत्नी प्रतीका बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में आध्यात्म और गृहस्थ दोनों का संतुलन जरूरी है और उन्होंने सोच-समझकर विवाह का निर्णय लिया है। भगवा वस्त्रों में ही पत्नी के साथ उनकी मौजूदगी ने लोगों को चौंका दिया। कई लोगों ने इसे आध्यात्मिक जीवन की नई परिभाषा के तौर पर देखा, तो कुछ ने इसे उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत बताया।

अभय सिंह ने बातचीत में कहा कि विवाह का निर्णय अचानक नहीं बल्कि लंबे विचार के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन भी साधना का एक रूप हो सकता है और समाज में रहकर आध्यात्मिक संदेश देना अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी प्रतीका उनके विचारों को समझती हैं और दोनों मिलकर आध्यात्मिक व सामाजिक कार्य करेंगे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, झज्जर पहुंचने के बाद कई लोग उनसे मिलने आए। लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके नए जीवन की शुरुआत को लेकर शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर भी इस खबर के सामने आने के बाद प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताया तो कुछ ने सवाल उठाए कि साधु जीवन के बाद शादी का फैसला क्यों लिया गया।

गृहस्थ जीवन और आध्यात्म का संतुलन बनाने की बात

अभय सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संन्यास नहीं लिया था, बल्कि आध्यात्मिक जीवन अपनाया था। इसलिए विवाह उनके सिद्धांतों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में कई संतों ने गृहस्थ रहते हुए भी आध्यात्मिक ऊंचाइयों को हासिल किया है। उनका मानना है कि आज के समय में लोगों को जीवन के हर पहलू में संतुलन की जरूरत है और वही संदेश वह देना चाहते हैं।

पत्नी प्रतीका भी उनके साथ शांत मुद्रा में नजर आईं। हालांकि उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन बताया जा रहा है कि वह भी आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। अभय सिंह ने कहा कि दोनों मिलकर समाज सेवा, शिक्षा और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम चलाने की योजना बना रहे हैं। 

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में वह देश के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे और लोगों से संवाद करेंगे। महाकुंभ-2025 के दौरान IITian बाबा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी थी। उनके विचार, सादगी और पढ़े-लिखे साधु की छवि ने युवाओं को खास तौर पर आकर्षित किया था। अब शादी की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर वह चर्चा में हैं। उनके इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन यह तय है कि अभय सिंह ने अपने जीवन का नया अध्याय शुरू कर दिया है।

झज्जर में उनकी मौजूदगी और पत्नी के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आना इस बात का संकेत है कि वह अपने निजी जीवन को लेकर खुलकर सामने आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आगे भी वह भगवा वस्त्रों में ही रहेंगे और आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हुए गृहस्थ जीवन निभाएंगे। इस घोषणा के साथ ही IITian बाबा अभय सिंह की कहानी ने नया मोड़ ले लिया है, जो आने वाले दिनों में और चर्चाओं का विषय बन सकती है।

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी : इसी सप्ताह शुरू होगी केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग, इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता पर खास फोकस

चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा की बुकिंग प्रक्रिया को लेकर अहम घोषणा की है। यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि इस बार हेली सेवा की ऑनलाइन बुकिंग 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू कर दी जाएगी। बुकिंग शुरू होते ही श्रद्धालु अधिकृत पोर्टल के माध्यम से टिकट आरक्षित कर सकेंगे।

अधिकारियों के अनुसार, इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई नए प्रावधान लागू किए जा रहे हैं। पिछले वर्षों में बुकिंग के दौरान तकनीकी दिक्कतें, दलालों की सक्रियता और फर्जी टिकट की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से मजबूत किया गया है। बुकिंग के दौरान यात्रियों को आधार आधारित सत्यापन और सीमित टिकट प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे एक व्यक्ति द्वारा अधिक टिकट बुक करने पर रोक लगाई जा सके। यूकाडा ने यह भी स्पष्ट किया है कि हेलीकॉप्टर सेवा केवल अधिकृत कंपनियों के माध्यम से ही संचालित की जाएगी और टिकट भी केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही उपलब्ध होंगे। 

किसी भी एजेंट या थर्ड पार्टी वेबसाइट से टिकट खरीदने पर यात्रियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक माध्यम से ही बुकिंग करें। इस बार मौसम, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए उड़ानों की संख्या भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जाएगी। शुरुआती दिनों में सीमित उड़ानें संचालित होंगी, जबकि यात्रियों की संख्या बढ़ने पर कंपनियों को अतिरिक्त स्लॉट दिए जाएंगे। हेलीकॉप्टर सेवाएं फाटा, गुप्तकाशी और सिरसी से संचालित की जाएंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए समय सारिणी भी बुकिंग के साथ ही जारी की जाएगी।

डॉ. चौहान ने बताया कि यात्रियों को समय से पहले रिपोर्टिंग करनी होगी और वजन सीमा का पालन अनिवार्य होगा। साथ ही, मौसम खराब होने की स्थिति में टिकट स्वतः अगले उपलब्ध स्लॉट में समायोजित किए जाएंगे या निर्धारित नियमों के अनुसार रिफंड दिया जाएगा। सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी ऑपरेटरों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नया सिस्टम, दलालों पर रहेगी नजर

इस बार बुकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। इससे यूकाडा मुख्यालय से ही टिकट बुकिंग, उड़ान संचालन और यात्रियों की संख्या पर नजर रखी जा सकेगी। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा बुकिंग पोर्टल पर ही यात्रियों को हेलीकॉप्टर कंपनियों का किराया, समय और सीट उपलब्धता की पूरी जानकारी मिलेगी, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी। प्राधिकरण ने यह भी बताया कि यात्रियों को बुकिंग के बाद क्यूआर कोड आधारित टिकट जारी किए जाएंगे, जिन्हें हेलीपैड पर स्कैन किया जाएगा। इससे फर्जी टिकट पर पूरी तरह रोक लगेगी। साथ ही पहचान पत्र की जांच भी अनिवार्य रहेगी। प्रशासन ने जिला स्तर पर भी निगरानी टीम गठित करने की तैयारी की है, जो बुकिंग से लेकर हेलीपैड तक व्यवस्था पर नजर रखेगी।

चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ हेली सेवा की मांग सबसे अधिक रहती है। बुजुर्ग, दिव्यांग और कम समय वाले श्रद्धालु विशेष रूप से इस सेवा का उपयोग करते हैं। इसी कारण हर साल बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही समय में टिकट फुल हो जाते हैं। इस बार मांग को देखते हुए अतिरिक्त स्लॉट और बैकअप हेलीकॉप्टर रखने की योजना भी बनाई गई है।

यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर और शिकायत निवारण तंत्र भी सक्रिय रहेगा। किसी भी तकनीकी समस्या या बुकिंग संबंधी परेशानी होने पर श्रद्धालु सीधे यूकाडा से संपर्क कर सकेंगे। प्रशासन ने यह भी कहा है कि यात्रा से पहले श्रद्धालु मौसम अपडेट जरूर देखें और निर्धारित समय पर ही हेलीपैड पहुंचे।

यूकाडा के अनुसार, यात्रा को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण को लेकर संयुक्त योजना तैयार की गई है। प्राधिकरण का दावा है कि इस बार हेली सेवा पहले से अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी होगी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बिजली बिल पर बड़ी राहत, हिमाचल में 126-300 यूनिट उपभोक्ताओं की सब्सिडी फिर से लागू, आठ लाख से अधिक लोगों को होगा फायदा

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बिजली सब्सिडी को लेकर अहम फैसला लिया है। सरकार ने 126 से 300 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की सब्सिडी बहाल कर दी है। इस निर्णय से प्रदेश के 8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। इससे पहले जारी आदेशों में इस श्रेणी के उपभोक्ताओं की सब्सिडी खत्म कर दी गई थी, जिसके बाद बिजली बिलों में बढ़ोतरी होने लगी थी और लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही थी। अब सरकार ने इस फैसले को वापस लेते हुए फिर से राहत देने का निर्णय लिया है।

सरकार के इस फैसले के बाद 126 से 300 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह रियायती दरों का लाभ मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे मध्यम वर्गीय परिवारों और सीमित आय वाले उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा। हाल के महीनों में बढ़ते बिजली बिलों को लेकर कई जिलों से शिकायतें सामने आ रही थीं। उपभोक्ताओं का कहना था कि सब्सिडी खत्म होने के बाद बिलों में अचानक बढ़ोतरी हो गई है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सब्सिडी बहाल करने का निर्णय उपभोक्ताओं की समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। सरकार का मानना है कि सीमित खपत करने वाले उपभोक्ताओं को राहत देना जरूरी है, ताकि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है।

बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली कंपनियां संशोधित बिल जारी करेंगी। जिन उपभोक्ताओं के बिल पहले बढ़े हुए आए हैं, उन्हें भी आगामी बिलों में समायोजन का लाभ दिया जा सकता है। इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं में राहत की भावना देखी जा रही है और इसे आम जनता के हित में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

बढ़ते बिलों के बाद सुखविंदर सरकार ने लिया यू-टर्न

दरअसल, पूर्व में जारी आदेशों के तहत 126 से 300 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं की सब्सिडी समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद इस श्रेणी के उपभोक्ताओं को पूरी दर से बिजली का भुगतान करना पड़ रहा था। इससे कई परिवारों के बिजली बिल में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। खासतौर पर गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ बिजली खपत बढ़ने लगी, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया।

विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया था और सरकार से सब्सिडी बहाल करने की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और अब सब्सिडी को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है और आगे भी उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

ऊर्जा विभाग का कहना है कि सब्सिडी बहाल होने से बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम होगा। इससे घरेलू खर्च संतुलित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, सरकार बिजली उपभोग को नियंत्रित रखने और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के लिए भी जागरूकता अभियान चलाने पर विचार कर रही है। यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से अहम है। इससे सरकार को आम लोगों के बीच सकारात्मक संदेश देने में मदद मिलेगी। आने वाले महीनों में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह राहत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सब्सिडी का लाभ पात्र उपभोक्ताओं को ही मिलेगा और इसके लिए पहले से लागू मानकों का पालन किया जाएगा। साथ ही विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी भी की जाएगी, ताकि योजना का लाभ सही उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

युद्ध टालने की आखिरी कोशिश, 45 दिन के सीजफायर पर बातचीत तेज, ट्रम्प की बढ़ी डेडलाइन से बढ़ी उम्मीद, समझौता हुआ तो दुनिया को मिलेगी राहत 

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अगर अमेरिका और ईरान के बीच 45 दिनों का प्रस्तावित युद्धविराम लागू हो जाता है, तो यह सिर्फ दो देशों के बीच टकराव कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी राहत का कारण बन सकता है। तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडरा रहे खतरे कम हो सकते हैं। इसी उम्मीद के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  द्वारा दी गई समयसीमा समाप्त होने से पहले अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच समझौते की आखिरी कोशिशें तेज हो गई हैं। इन मध्यस्थों में पाकिस्तान, इजिप्ट और तुर्की शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को समझौते का एक और मौका देने के लिए अपनी डेडलाइन 20 घंटे बढ़ा दी है। पहले यह समयसीमा सोमवार शाम तक थी, जिसे बढ़ाकर अब मंगलवार रात 8 बजे तक कर दिया गया है। 

यह विस्तार इसलिए किया गया है ताकि दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सके। माना जा रहा है कि यह समयसीमा तय करेगी कि तनाव कम होगा या क्षेत्र में हालात और बिगड़ेंगे। मध्यस्थ दो चरणों वाले समझौते पर काम कर रहे हैं। पहले चरण में 45 दिनों का युद्धविराम लागू किया जाएगा। इस दौरान स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत जारी रहेगी। अगर वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो युद्धविराम की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। इस प्रस्ताव को फिलहाल सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इससे तत्काल तनाव कम करने का मौका मिलेगा। दूसरे चरण में स्थायी शांति समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश होगी। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की बहाली और परमाणु गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। मध्यस्थों का मानना है कि पहले चरण में भरोसा बनाने के बाद ही स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

दो चरणों में समझौते की कोशिश, होर्मुज और यूरेनियम पर फंसा पेंच

मध्यस्थों द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुसार, दूसरे चरण में Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलने और ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर ठोस कदम उठाने पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम को या तो देश से बाहर भेजे या उसे कमजोर करने की प्रक्रिया अपनाए। इन दोनों मुद्दों को समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि ईरान ने संकेत दिया है कि वह केवल 45 दिनों के युद्धविराम के बदले अपने इन दोनों प्रमुख रणनीतिक विकल्पों को पूरी तरह छोड़ने को तैयार नहीं होगा। यही कारण है कि मध्यस्थ पहले चरण में आंशिक कदमों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे कि सीमित स्तर पर समुद्री मार्ग खोलना या यूरेनियम भंडार पर पारदर्शिता बढ़ाना। 

मध्यस्थों ने ईरानी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब बातचीत के लिए समय बहुत कम बचा है। उन्हें बताया गया है कि अगले 48 घंटे समझौते के लिए निर्णायक हो सकते हैं। अगर इस दौरान सहमति नहीं बनती, तो क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ सकती है। गौरतलब है कि ईरान को पहले 10 दिनों की समयसीमा दी गई थी, जो सोमवार को समाप्त होने वाली थी। लेकिन ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर इसे 20 घंटे के लिए बढ़ा दिया। सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार आखिरी मौका माना जा रहा है ताकि दोनों पक्ष युद्ध के बजाय बातचीत का रास्ता चुन सकें।

अगर 45 दिन का युद्धविराम लागू हो जाता है, तो इससे वैश्विक बाजारों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, समुद्री व्यापार सुरक्षित होगा और क्षेत्रीय तनाव कम होगा। यही वजह है कि दुनिया भर की नजरें इस संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच राहत रणनीतिक मार्ग से गुजरा भारतीय एलपीजी टैंकर, दो और जहाज जल्द पहुंचेंगे भारत

पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह संवेदनशील समुद्री मार्ग को सुरक्षित पार करने वाला सातवां भारतीय पोत है। इस पारगमन को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर उस समय जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, ‘ग्रीन सान्वी’ ईरान के समुद्री इलाके से तय मार्ग का उपयोग करते हुए इस संवेदनशील जलक्षेत्र से गुजरा। अनुमान है कि टैंकर में करीब 44 हजार टन एलपीजी लदा हुआ है। यह मात्रा भारत की लगभग आधे दिन की खपत के बराबर बताई जा रही है। ऐसे में टैंकर का सुरक्षित पारगमन ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की आवाजाही निर्बाध बनी रहती है तो भारत को एलपीजी आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

‘ग्रीन सान्वी’ ने तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नियंत्रित मार्ग से यात्रा की। इस दौरान जहाज ने उच्च सतर्कता के साथ नेविगेशन किया। क्षेत्र में बढ़े जोखिम को देखते हुए जहाजों की गति, मार्ग और संचार प्रणाली पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और इसमें खाड़ी क्षेत्र की भूमिका अहम है। ‘ग्रीन सान्वी’ का सफल पारगमन यह संकेत देता है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति मार्ग पूरी तरह बाधित नहीं हुए हैं। हालांकि, जोखिम अब भी बना हुआ है और हर जहाज को सतर्कता के साथ गुजरना पड़ रहा है। यही कारण है कि भारत समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

जल्द दो और टैंकर पार करेंगे रणनीतिक मार्ग

समुद्री विशेषज्ञों के मुताबिक, जल्द ही भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा और जग विक्रम भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच सकते हैं। इन जहाजों की आवाजाही पर भी करीबी नजर रखी जा रही है। यदि ये टैंकर भी सुरक्षित पार हो जाते हैं तो भारत की एलपीजी आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी। इससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसी संभावित आपूर्ति संकट की आशंका कम होगी। ‘ग्रीन सान्वी’ के गुजरने के साथ ही फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इनमें एलपीजी टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर, एलएनजी टैंकर, केमिकल टैंकर, कंटेनर जहाज और बल्क कैरियर शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जहाजों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति गतिविधियां इस क्षेत्र से कितनी जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन जहाजों की सुरक्षा भारत के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।

भारत अपने व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। ईरान के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। हालात को देखते हुए ईरान ने गैर-दुश्मन देशों के जहाजों को समन्वय के साथ इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। इस फैसले से भारत समेत कई देशों को राहत मिली है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पुष्टि की है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। इस कूटनीतिक समन्वय ने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकता है। मौजूदा हालात में ‘ग्रीन सान्वी’ का सुरक्षित पारगमन इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए कूटनीतिक और समुद्री दोनों स्तरों पर सक्रिय रणनीति अपनाए हुए है। यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच भी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।