सीए फाइनल परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव : अब साल में सिर्फ दो बार होगी परीक्षा, मई 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था

चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) ने CA फाइनल परीक्षा के आयोजन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस निर्णय के तहत अब चार्टर्ड अकाउंटेंट फाइनल परीक्षाएं वर्ष में तीन बार के बजाय केवल दो बार आयोजित की जाएंगी। यह बदलाव मई 2026 परीक्षा सत्र से प्रभावी होगा। संस्थान का मानना है कि इस कदम से परीक्षा प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित होगी और छात्रों को तैयारी के लिए बेहतर समय मिल सकेगा। अब तक CA फाइनल परीक्षाएं जनवरी, मई और सितंबर महीने में आयोजित होती थीं। लेकिन नए फैसले के बाद मई 2026 से परीक्षाएं केवल मई और नवंबर माह में ही आयोजित की जाएंगी। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव हितधारकों से मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर किया गया है। लंबे समय से छात्र और शिक्षाविद परीक्षा के बीच कम अंतराल होने को लेकर चिंता जता रहे थे, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

संस्थान का कहना है कि बार-बार परीक्षा आयोजित होने से छात्रों पर लगातार तैयारी का दबाव बना रहता था। कई अभ्यर्थियों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल पाता था, जिससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ता था। इसके अलावा परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता था। ऐसे में वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित करने से न केवल छात्रों को तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा बल्कि संस्थान भी परीक्षा संचालन को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा कर सकेगा।

संयुक्त सचिव (परीक्षा) आनंद कुमार चतुर्वेदी द्वारा जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया है कि यह नई व्यवस्था मई 2026 से लागू होगी और भविष्य में भी इसी पैटर्न का पालन किया जाएगा। संस्थान ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक संतुलित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी बेहतर होगी। इस बदलाव से छात्रों को अपनी तैयारी की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। पहले कम अंतराल के कारण कई छात्र जल्दबाजी में परीक्षा देने के लिए मजबूर हो जाते थे, जबकि अब उन्हें विषयों की गहराई से तैयारी करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे परीक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है और सफल अभ्यर्थियों की दक्षता भी बेहतर होगी।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू 

इसी बीच संस्थान ने नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 64वां कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम भी शुरू कर दिया है। यह कार्यक्रम नए योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। भाग लेने वाली कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए समय-सीमा आधिकारिक पोर्टल पर जारी कर दी गई है। संस्थान ने सभी केंद्रों पर एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी शुरू किया है।

इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्लेसमेंट प्रक्रिया, करियर विकल्प, नियोक्ताओं की अपेक्षाएं, साक्षात्कार की तैयारी और व्यावहारिक मार्गदर्शन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप मार्गदर्शन देना है। संस्थान का मानना है कि इससे उम्मीदवारों की सफलता दर बढ़ेगी और उन्हें बेहतर कंपनियों में अवसर मिल सकेंगे।

इस बार कैंपस प्लेसमेंट में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित कंपनियों ने भागीदारी की है। भर्ती गतिविधियां देश के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और जयपुर में आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा लगभग 20 छोटे केंद्रों पर भी प्लेसमेंट प्रक्रिया संचालित की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।

संस्थान के अनुसार, साक्षात्कार 6 अप्रैल से 17 अप्रैल तक चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जा रहे हैं। अलग-अलग शहरों में अलग तिथियों पर इंटरव्यू होंगे, जिससे उम्मीदवार अपनी सुविधा के अनुसार भाग ले सकें। इस बार कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अग्रणी भारतीय कॉरपोरेट समूहों ने भर्ती में रुचि दिखाई है, जिससे प्लेसमेंट प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उत्साह देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, CA फाइनल परीक्षा पैटर्न में बदलाव और साथ ही कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम की शुरुआत को छात्रों के लिए दोहरी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक ओर परीक्षा के बीच पर्याप्त अंतराल से तैयारी बेहतर होगी, वहीं दूसरी ओर प्लेसमेंट कार्यक्रम के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को करियर की नई दिशा मिलने की उम्मीद है। संस्थान का मानना है कि इन दोनों कदमों से चार्टर्ड अकाउंटेंसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य को मजबूती मिलेगी।

कनाडा के नए इमिग्रेशन नियम लागू, पासपोर्ट-नागरिकता शुल्क बढ़ा, सुपर वीजा में राहत, प्रांतों को मिले ज्यादा अधिकार 

कनाडा जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकार ने इमिग्रेशन से जुड़े कई नियमों में संशोधन करते हुए पासपोर्ट शुल्क बढ़ा दिया है, नागरिकता फीस में बदलाव किया है और सुपर वीजा कार्यक्रम को आसान बना दिया है। इन नए नियमों का असर वहां जाने वाले नागरिकों, स्थायी निवास के इच्छुक आवेदकों और परिवार के सदस्यों को बुलाने की योजना बना रहे लोगों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और आवेदनों के निपटारे में तेजी लाना है। नए प्रावधानों के तहत 10 साल की वैधता वाले वयस्क पासपोर्ट की कीमत बढ़ाकर 163.50 कैनेडियन डॉलर कर दी गई है, जो पहले 160 डॉलर थी। वहीं पांच साल के वयस्क पासपोर्ट की कीमत 122.50 कैनेडियन डॉलर तय की गई है। शुल्क में यह बढ़ोतरी मामूली जरूर है, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदकों को देखते हुए इसका असर व्यापक होगा। सरकार ने इस बढ़ोतरी के साथ एक नई सुविधा भी जोड़ी है, जिसके तहत पासपोर्ट आवेदन 30 दिनों के भीतर निपटाने की गारंटी दी गई है।

अगर तय समय के भीतर आवेदन का निपटारा नहीं होता है, तो आवेदक को जमा की गई पूरी फीस स्वतः वापस कर दी जाएगी। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं आवेदनों पर लागू होगी जिनमें सभी जरूरी दस्तावेज पूरे और सही तरीके से जमा किए गए हों। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रक्रिया में देरी कम होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

नागरिकता से जुड़ी फीस में भी बदलाव किया गया है। नागरिकता के अधिकार के लिए अब 123 कैनेडियन डॉलर की फीस तय की गई है। यह बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन इसे व्यापक प्रशासनिक सुधारों का हिस्सा बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकता प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए संसाधनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

सरकार ने परिवार आधारित यात्रा को आसान बनाने के उद्देश्य से सुपर वीजा कार्यक्रम में भी ढील दी है। नए नियमों के अनुसार, प्रायोजक अब पिछले दो कर वर्षों में से किसी एक वर्ष में आय की शर्त पूरी करके पात्र माने जाएंगे। इसके अलावा माता-पिता या दादा-दादी की आय को भी कुल आय में जोड़कर पात्रता पूरी की जा सकेगी। इससे परिवारों के लिए अपने बुजुर्ग सदस्यों को बुलाना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा। सुपर वीजा के तहत माता-पिता और दादा-दादी हर बार यात्रा पर कनाडा में पांच साल तक रह सकते हैं। यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए राहत मानी जा रही है जो लंबे समय तक अपने परिजनों के साथ रहना चाहते हैं। सरकार का कहना है कि इससे परिवारों का पुनर्मिलन आसान होगा और अस्थायी यात्राओं का दबाव भी कम होगा।

प्रांतों को अधिक अधिकार, विदेशी कर्मचारियों के नियम भी बदले

नए बदलावों के तहत प्रांतों और क्षेत्रों को इमिग्रेशन से जुड़े फैसलों में अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब प्रांतीय प्रशासन यह तय कर सकेंगे कि आवेदक वास्तव में स्थानीय स्तर पर बसने का इरादा रखते हैं या नहीं और क्या वे आर्थिक रूप से खुद को स्थापित कर सकते हैं। पहले इस तरह के आकलन में संघीय अधिकारियों की बड़ी भूमिका होती थी, लेकिन अब यह जिम्मेदारी काफी हद तक प्रांतों को सौंप दी गई है। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे क्योंकि प्रांत अपने श्रम बाजार और आर्थिक जरूरतों को बेहतर समझते हैं। इससे रोजगार आधारित इमिग्रेशन में भी संतुलन आने की उम्मीद जताई जा रही है।

आर्थिक आधार पर आने वाले प्रवासियों के लिए भी एक अहम बदलाव किया गया है। अब स्थायी निवास मिलने के बाद छह साल तक संघीय सहायता से मिलने वाली बसावट सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा। हालांकि अप्रैल 2027 से इस समय सीमा को घटाकर पांच साल कर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि शुरुआती वर्षों में सहायता देकर प्रवासियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कामगारों की कमी को देखते हुए विदेशी कर्मचारि

डेडलाइन, धमकी और बढ़ता तनाव : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को फिर दी तबाही की चेतावनी, चार घंटे में ढांचे मिटाने का दावा

पूरी दुनिया हर सुबह सोचती है अमेरिका ईरान के बीच जारी युद्ध थम जाएगा लेकिन उसे कोई अभी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रुकने के लिए तैयार नहीं है वहीं ईरान भी अमेरिका को लगातार धमकी दे रहा है। इसी बीच सोमवार को ट्रंप ने एक बार फिर तीखा बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान मंगलवार रात तक समझौते पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका चार घंटे के भीतर ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना के पास ऐसी योजना है जिसके तहत ईरान के अहम ढांचे, पुलों, बिजली संयंत्रों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य ताकत के दम पर ईरान के हर पुल को ध्वस्त किया जा सकता है और उसके बिजली संयंत्रों को पूरी तरह निष्क्रिय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “हमारे पास योजना तैयार है। 

अगर हम चाहें तो मंगलवार रात 12 बजे तक ईरान के हर पुल को खत्म कर सकते हैं। बिजली संयंत्रों को बंद कर दिया जाएगा, जला दिया जाएगा और फिर कभी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यह सब चार घंटे के भीतर भी संभव है।” ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी मानी जा रही है। ट्रंप ने ईरान को पूर्वी समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे तक समझौते के लिए तैयार होने की समयसीमा भी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलता है, तो अमेरिका बातचीत के रास्ते आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते की स्थिति में अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करने को तैयार है। ट्रंप ने कहा, “अगर वे समझौता करते हैं, तो हम उनके राष्ट्र के पुनर्निर्माण में भी शामिल हो सकते हैं।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक ढांचे पर हमले की स्थिति में क्या यह युद्ध अपराध माना जाएगा, तो ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी कार्रवाई को युद्ध अपराध नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर लोग “आजादी के लिए तकलीफ सहने को तैयार हैं” और वे चाहते हैं कि अमेरिका और दबाव बनाए।

इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी ट्रंप के साथ खड़े होकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब तक जो हमले हुए हैं, वे सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले समय में हमले और तेज हो सकते हैं। हेगसेथ ने कहा, कल आज से भी ज्यादा हमले होंगे। उसके बाद ईरान के पास फैसला लेने का विकल्प होगा। उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति ढिलाई नहीं बरतते।

ईरान ने 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराया, तनाव और बढ़ा

तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने कहा कि वह अस्थायी समाधान नहीं चाहता बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दबाव और धमकियों के बीच कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस रुख ने दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया है। अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का दबाव भी बढ़ा दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। 

अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने तेल की आवाजाही में रुकावट जारी रखी, तो नागरिक ठिकानों समेत बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि अब ईरान को स्पष्ट विकल्प दिया गया है या तो समझौता करे या फिर व्यापक सैन्य कार्रवाई का सामना करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीति चरणबद्ध तरीके से दबाव बढ़ाने की है। 

उनके मुताबिक, “आज के हमले सिर्फ शुरुआत हैं, आगे इससे कहीं ज्यादा तीव्र कार्रवाई हो सकती है।” ट्रंप प्रशासन का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कई देशों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। इसके बावजूद दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है, जिससे हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच राहत रणनीतिक मार्ग से गुजरा भारतीय एलपीजी टैंकर, दो और जहाज जल्द पहुंचेंगे भारत

पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह संवेदनशील समुद्री मार्ग को सुरक्षित पार करने वाला सातवां भारतीय पोत है। इस पारगमन को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर उस समय जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, ‘ग्रीन सान्वी’ ईरान के समुद्री इलाके से तय मार्ग का उपयोग करते हुए इस संवेदनशील जलक्षेत्र से गुजरा। अनुमान है कि टैंकर में करीब 44 हजार टन एलपीजी लदा हुआ है। यह मात्रा भारत की लगभग आधे दिन की खपत के बराबर बताई जा रही है। ऐसे में टैंकर का सुरक्षित पारगमन ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की आवाजाही निर्बाध बनी रहती है तो भारत को एलपीजी आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

‘ग्रीन सान्वी’ ने तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नियंत्रित मार्ग से यात्रा की। इस दौरान जहाज ने उच्च सतर्कता के साथ नेविगेशन किया। क्षेत्र में बढ़े जोखिम को देखते हुए जहाजों की गति, मार्ग और संचार प्रणाली पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और इसमें खाड़ी क्षेत्र की भूमिका अहम है। ‘ग्रीन सान्वी’ का सफल पारगमन यह संकेत देता है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति मार्ग पूरी तरह बाधित नहीं हुए हैं। हालांकि, जोखिम अब भी बना हुआ है और हर जहाज को सतर्कता के साथ गुजरना पड़ रहा है। यही कारण है कि भारत समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

जल्द दो और टैंकर पार करेंगे रणनीतिक मार्ग

समुद्री विशेषज्ञों के मुताबिक, जल्द ही भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा और जग विक्रम भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच सकते हैं। इन जहाजों की आवाजाही पर भी करीबी नजर रखी जा रही है। यदि ये टैंकर भी सुरक्षित पार हो जाते हैं तो भारत की एलपीजी आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी। इससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसी संभावित आपूर्ति संकट की आशंका कम होगी। ‘ग्रीन सान्वी’ के गुजरने के साथ ही फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इनमें एलपीजी टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर, एलएनजी टैंकर, केमिकल टैंकर, कंटेनर जहाज और बल्क कैरियर शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जहाजों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति गतिविधियां इस क्षेत्र से कितनी जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन जहाजों की सुरक्षा भारत के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।

भारत अपने व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। ईरान के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। हालात को देखते हुए ईरान ने गैर-दुश्मन देशों के जहाजों को समन्वय के साथ इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। इस फैसले से भारत समेत कई देशों को राहत मिली है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पुष्टि की है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। इस कूटनीतिक समन्वय ने क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकता है। मौजूदा हालात में ‘ग्रीन सान्वी’ का सुरक्षित पारगमन इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए कूटनीतिक और समुद्री दोनों स्तरों पर सक्रिय रणनीति अपनाए हुए है। यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच भी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अली अब्बास जफर की फिल्म में अहान पांडे का नया अवतार, ‘सैयारा’ के बाद एक्शन रोल में मचाने को तैयार धमाल

साल 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘सैयारा’ से डेब्यू करने वाले अहान पांडे ने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों का दिल जीत लिया था। इस मूवी में उनके साथ अनीत पड्डा नजर आई थीं और दोनों की केमिस्ट्री को खूब पसंद किया गया। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने शानदार कमाई की और इसके बाद अहान पांडे रातों-रात सुर्खियों में आ गए। अब ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस बार उनका अंदाज पूरी तरह बदला हुआ होगा। फिल्ममेकर अली अब्बास जफर की अगली फिल्म में अहान पांडे एक्शन अवतार में दिखाई देंगे, जिसकी शूटिंग भी शुरू हो चुकी है। अली अब्बास जफर ने खुद सोशल मीडिया पर फिल्म की शुरुआत का एलान किया है। उन्होंने “एंड इट बिगिन्स” लिखते हुए क्लैपबोर्ड की तस्वीर और अहान पांडे की आंखों का क्लोज-अप शेयर किया। यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। फैंस को अहान का इंटेंस लुक काफी पसंद आ रहा है और लोग उनकी नई फिल्म को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में शरवरी वाघ भी अहम भूमिका निभाती दिखाई देंगी।

बताया जा रहा है कि यह फिल्म अहान पांडे के करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें वह अपने रोमांटिक इमेज से बाहर निकलकर पूरी तरह एक्शन-ओरिएंटेड किरदार निभाते नजर आएंगे। ‘सैयारा’ में जहां उन्होंने एक संवेदनशील और रोमांटिक किरदार निभाया था, वहीं इस नई फिल्म में उनका अंदाज ज्यादा रफ-टफ और दमदार होगा। अली अब्बास जफर अपने बड़े पैमाने की फिल्मों और हाई-ऑक्टेन एक्शन के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में अहान को उनके निर्देशन में देखना फैंस के लिए खास होने वाला है।

फिल्म की शूटिंग का पहला शेड्यूल मुंबई में शुरू हो चुका है। इसके बाद टीम मई 2026 में लंदन रवाना होगी, जहां एक बड़े एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग की जाएगी। खबर है कि लंदन में पांच दिनों तक लगातार एक्शन सीन्स फिल्माए जाएंगे, जिनमें अहान पांडे खुद कई स्टंट करते नजर आएंगे। फिल्म का शेड्यूल काफी टाइट रखा गया है और मेकर्स इसे बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना बना रहे हैं।

एक्शन अवतार के साथ बदलती इमेज, फैंस को बड़ी उम्मीदें

इससे पहले फरवरी 2026 में भी अली अब्बास जफर ने शूटिंग लोकेशन से अहान पांडे की एक झलक साझा की थी। उस फोटो के साथ उन्होंने लिखा था, “पावर दी नहीं जाती… ली जाती है… रोल करने को तैयार अहान पांडे।” इस कैप्शन ने ही साफ कर दिया था कि फिल्म में अहान का किरदार दमदार और एक्शन से भरपूर होने वाला है। अब शूटिंग शुरू होने की आधिकारिक घोषणा के बाद फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है। ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान पांडे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म में उनकी और अनीत पड्डा की जोड़ी को खूब सराहा गया था। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी पसंद की गई कि ऑफ-स्क्रीन भी उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। हालांकि, दोनों कलाकारों ने हमेशा इन खबरों को अफवाह बताया और कहा कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं।

फिल्म ‘सैयारा’ ने अहान पांडे को युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग तेजी से बढ़ी और उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगे। ऐसे में अली अब्बास जफर की फिल्म को उनके करियर का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। इंडस्ट्री में भी इस फिल्म को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि अली अब्बास जफर बड़े कैनवास और दमदार कहानी के लिए जाने जाते हैं।

मेकर्स की योजना इस फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने की है। फिल्म में एक्शन, ड्रामा और इमोशन का मिश्रण देखने को मिलेगा। अहान पांडे की तैयारी भी काफी समय से चल रही थी और उन्होंने अपने किरदार के लिए फिजिकल ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया है। फैंस को उम्मीद है कि ‘सैयारा’ के बाद यह फिल्म उनके करियर को नई ऊंचाई दे सकती है। फिलहाल शूटिंग शुरू होने की खबर ने ही दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है और अब सभी को फिल्म की पहली झलक का इंतजार है।

बीसीसीआई ने आईपीएल के दूसरे चरण का कार्यक्रम जारी किया, 13 अप्रैल से होंगे मुकाबले

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दूसरे चरण के कार्यक्रम का आधिकारिक एलान कर दिया है। बोर्ड के मुताबिक लीग के बाकी बचे 50 मुकाबले 13 अप्रैल से 24 मई के बीच खेले जाएंगे। दूसरे चरण के मैच देश के 12 अलग-अलग शहरों में आयोजित किए जाएंगे, जिससे क्रिकेट प्रशंसकों को कई स्थानों पर मुकाबलों का रोमांच देखने को मिलेगा। इन वेन्यू में बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, जयपुर, धर्मशाला, रायपुर और न्यू चंडीगढ़ शामिल हैं। 

बीसीसीआई ने कार्यक्रम जारी करते हुए बताया कि टूर्नामेंट का आगाज 28 मार्च को मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबले से हुआ था। शुरुआती चरण के मुकाबलों के बाद अब दूसरे चरण में लीग और अधिक रोमांचक मोड़ लेती नजर आएगी, क्योंकि टीमें प्लेऑफ की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी। 13 अप्रैल से शुरू होने वाले मुकाबलों में कई अहम भिड़ंत देखने को मिलेंगी, जिन पर अंक तालिका की तस्वीर काफी हद तक निर्भर करेगी। दूसरे चरण में बड़े शहरों के साथ-साथ धर्मशाला, रायपुर और न्यू चंडीगढ़ जैसे वेन्यू को भी शामिल किया गया है। इससे न सिर्फ दर्शकों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि टीमों को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका भी मिलेगा। पहाड़ी इलाके धर्मशाला में होने वाले मैचों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना रहती है, जबकि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे पारंपरिक मैदानों पर स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। इस तरह दूसरे चरण में पिच और परिस्थितियों का असर भी टीमों की रणनीति पर साफ दिखाई देगा।

लीग चरण का आखिरी मुकाबला 24 मई को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जाएगा

बीसीसीआई के कार्यक्रम के अनुसार लीग चरण का आखिरी मुकाबला 24 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जाएगा। इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला प्लेऑफ की तस्वीर तय करने में बेहद अहम हो सकता है, क्योंकि लीग के अंतिम दौर में कई टीमें अंतिम चार में जगह बनाने की दौड़ में होती हैं। इसलिए आखिरी दिन तक रोमांच बरकरार रहने की उम्मीद है। इस सीजन के लीग चरण में कुल 70 मुकाबले खेले जाएंगे। पहले चरण के मैचों के बाद दूसरे चरण में बची टीमों के बीच मुकाबले और कड़े होने की संभावना है। कई फ्रेंचाइजी ने अपने संयोजन में बदलाव किए हैं और चोटिल खिलाड़ियों की वापसी भी दूसरे चरण में देखने को मिल सकती है। इससे मुकाबलों का स्तर और ऊंचा होगा। 

टीम प्रबंधन अंक तालिका में बेहतर स्थान पाने के लिए रणनीतिक बदलाव करने पर भी जोर दे रहे हैं। बीसीसीआई ने फिलहाल प्लेऑफ मुकाबलों के कार्यक्रम का एलान नहीं किया है। बोर्ड ने कहा है कि लीग चरण समाप्त होने के बाद प्लेऑफ के चार मुकाबलों की तारीख और वेन्यू की घोषणा अलग से की जाएगी। आमतौर पर प्लेऑफ में क्वालीफायर-1, एलिमिनेटर, क्वालीफायर-2 और फाइनल मुकाबला शामिल होता है। माना जा रहा है कि प्लेऑफ मुकाबले भी बड़े शहरों में आयोजित किए जा सकते हैं, हालांकि इस पर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा। दूसरे चरण के कार्यक्रम के एलान के साथ ही फ्रेंचाइजी टीमों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। खिलाड़ियों के यात्रा कार्यक्रम, अभ्यास सत्र और टीम संयोजन को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। कई टीमें घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेंगी, जबकि कुछ टीमें लगातार जीत हासिल कर अंक तालिका में छलांग लगाने पर ध्यान देंगी। प्रशंसकों को भी दूसरे चरण में रोमांचक मुकाबलों की उम्मीद है, क्योंकि हर मैच प्लेऑफ की दौड़ को प्रभावित कर सकता है। इस तरह 13 अप्रैल से शुरू होने वाला आईपीएल का दूसरा चरण टूर्नामेंट को निर्णायक दिशा देगा। 24 मई तक चलने वाले इन मुकाबलों के बाद शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में जगह बनाएंगी। 

भारतीय नौसेना में शामिल हुआ अत्याधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’, दुश्मनों पर रखेगा नजर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे 

भारतीय नौसेना को शुक्रवार को एक बड़ी सामरिक मजबूती मिली, जब नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत ‘तारागिरी’ को विशाखापत्तनम में नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। 3 अप्रैल की दोपहर आयोजित कमीशनिंग समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अत्याधुनिक तकनीक और घातक हथियारों से लैस यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

‘तारागिरी’ सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस है, जो दुश्मन के जहाजों और ठिकानों को दूर से निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी लगाई गई है, जो हवाई खतरों से जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

जहाज में आधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली, उन्नत सेंसर और अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली भी शामिल है, जिससे यह बहु-आयामी समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘तारागिरी’ को “स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप” करार देते हुए कहा कि इसकी कमीशनिंग भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना देश के मूल्यों, प्रतिबद्धता और सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है और यह नया युद्धपोत नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा। 

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना सिर्फ युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि मानवीय संकट और आपदा राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाती रही है। आईएनएस तारागिरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उच्च-तीव्रता वाले युद्ध अभियानों के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों में भी प्रभावी रूप से काम कर सके। समुद्र में राहत सामग्री पहुंचाने, चिकित्सा सहायता देने और संकटग्रस्त क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में यह जहाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया

इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। इसे स्वदेशी तकनीक के साथ तैयार किया गया है और इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती जहाजों की तुलना में तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और कम रडार सिग्नेचर वाला है, जिससे दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता बढ़ जाती है। राजनाथ सिंह ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की सराहना करते हुए कहा कि दशकों से यह संस्थान देश के लिए आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। 

कुशल कार्यबल, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने इसे विश्वसनीय शिपबिल्डिंग संस्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने से भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि रक्षा निर्यात में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। 

इस दौरान हथियार प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, युद्धपोत निर्माण और अन्य सैन्य उपकरणों पर बड़ा निवेश किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, आधुनिक मिसाइल सिस्टम और विशेष नौसैनिक जहाजों जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। ‘तारागिरी’ की कमीशनिंग के साथ भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, रक्षा और आक्रामक क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी मानी जा रही है। जब यह युद्धपोत समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत रक्षा संकल्प का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाएगा।

राज्यसभा से उपनेता पद से हटाए गए आप सांसद राघव चड्ढा का बड़ा संदेश, कहा- ‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं’

आम आदमी पार्टी ने गुरुवार को अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया। आम आदमी पार्टी ने उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया उपनेता नियुक्त किया है। पार्टी के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वहीं, राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दे उठाने पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। राघव चड्ढा ने अपने एक्स हैंडल पर करीब 2 मिनट 45 सेकेंड का वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने कई जनहित के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि वे लगातार आम लोगों से जुड़े विषय संसद में उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास पर बढ़ते टैक्स का बोझ, बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने, मोबाइल कंपनियों के 28 दिन वाले रिचार्ज को लेकर शिकायतें, एयरपोर्ट पर महंगे खाने की समस्या, हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाला जीएसटी, एयर पॉल्यूशन, पेपर लीक जैसे मुद्दे वे लगातार उठाते रहे हैं।

उन्होंने वीडियो में कहा कि देश के मध्यम वर्ग की परेशानियां बढ़ रही हैं, लेकिन इन मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने मोबाइल सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनकमिंग कॉल चार्ज, डेटा एक्सपायरी और 28 दिन के रिचार्ज जैसे मामले लोगों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने फूड एडल्टरेशन, एयरलाइन कंपनियों द्वारा एक्सेस बैगेज चार्ज, पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्चों का भी मुद्दा उठाया।

राघव चड्ढा ने कहा कि वे संसद के अंदर और बाहर लगातार इन मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” इसके साथ ही उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष निशाने के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के इस फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से इस बदलाव को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि संगठनात्मक संतुलन और संसदीय रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया है। अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाए जाने के बाद पार्टी की संसदीय टीम में बदलाव का संकेत भी मिला है।

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर और पार्टी में भूमिका

राघव चड्ढा लंबे समय से आम आदमी पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल रहे हैं। राज्यसभा पहुंचने से पहले वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे। फरवरी 2020 से मार्च 2022 तक वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे और इस दौरान कई मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई। विधानसभा में उन्होंने वित्त, शहरी सेवाओं और प्रशासनिक मामलों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। राज्यसभा में भेजे जाने से पहले वे दिल्ली जल बोर्ड से भी जुड़े रहे और पानी से संबंधित परियोजनाओं पर काम किया। 

अप्रैल 2022 में उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया, जिसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की प्रमुख आवाज बने। उच्च सदन में वे आर्थिक मुद्दों, मिडिल क्लास की समस्याओं और उपभोक्ता हितों से जुड़े विषयों को उठाते रहे हैं। पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आने से यह मामला और चर्चा में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान आने वाले समय में पार्टी के भीतर समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, राघव चड्ढा ने अपने संदेश में साफ किया है कि वे जनता के मुद्दे उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश भले हो, लेकिन वे “आम आदमी” की लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, पार्टी द्वारा अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की रणनीति किस तरह बदलती है, इस पर भी नजर रहेगी।

हवाई यात्रियों को मुफ्त सीट चयन पर फिलहाल रोक, सरकार ने 60% सीटें बिना शुल्क देने का फैसला टाला

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत देने की दिशा में सरकार द्वारा प्रस्तावित बड़ा फैसला फिलहाल टल गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइनों को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चुनने की सुविधा देने के निर्देश को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह नियम 20 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन एयरलाइंस कंपनियों की आपत्तियों और व्यावसायिक चिंताओं को देखते हुए मंत्रालय ने इस पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है। दरअसल, हवाई टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों से पसंदीदा सीट चुनने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। विंडो सीट, आगे की सीट या अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटों के लिए यात्रियों को अलग से भुगतान करना पड़ता है। इसे लेकर लंबे समय से यात्रियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के मद्देनजर सरकार ने मार्च में यह प्रस्ताव रखा था कि एयरलाइंस को कम से कम 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त में चुनने की सुविधा देनी होगी, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम किया जा सके। 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 18 मार्च को इस संबंध में घोषणा करते हुए बताया था कि उसने महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (डीजीसीए) को निर्देश जारी किए हैं कि सभी एयरलाइनों को इस नियम को लागू करने के लिए कहा जाए। मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया था कि यह फैसला यात्रियों के हित में लिया जा रहा है और इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि, इस घोषणा के बाद एयरलाइंस कंपनियों की ओर से आपत्तियां सामने आईं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर सहित कुछ एयरलाइनों ने मंत्रालय को आवेदन देकर कहा कि इस फैसले का परिचालन और व्यावसायिक असर गंभीर हो सकता है। 

एयरलाइंस का कहना था कि सीट चयन शुल्क उनके राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसे हटाने से किराया संरचना प्रभावित हो सकती है। एयरलाइंस कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा अनियंत्रित किराया व्यवस्था में सीट चयन शुल्क हटाने से टिकट कीमतों में बदलाव करना पड़ेगा, जिसका असर अंततः यात्रियों पर ही पड़ सकता है। कंपनियों का कहना था कि यदि सीट चयन मुफ्त किया जाता है तो टिकट बेस फेयर बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे कम किराए में यात्रा करने वाले यात्रियों पर बोझ बढ़ जाएगा।

जांच पूरी होने तक लागू नहीं होगा नियम

एयरलाइंस से मिले इन आवेदनों के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पूरे मामले की समीक्षा की। मंत्रालय ने माना कि प्रस्तावित नियम का किराया संरचना, परिचालन लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा पर व्यापक असर पड़ सकता है। साथ ही यह भी देखा गया कि अलग-अलग एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति अलग होती है, ऐसे में एक समान नियम लागू करना व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने फैसला किया है कि 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क देने का प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया जाए। मंत्रालय ने कहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत अध्ययन और हितधारकों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तब तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी और एयरलाइंस अपनी नीतियों के अनुसार सीट चयन शुल्क लेती रहेंगी।

 सरकार यात्रियों को राहत देने और एयरलाइंस के व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। यदि भविष्य में संशोधित नियम लागू होते हैं, तो संभव है कि कुछ श्रेणी की सीटें मुफ्त हों और कुछ प्रीमियम सीटों पर शुल्क जारी रहे। फिलहाल इस फैसले के टलने से यात्रियों को मुफ्त सीट चयन की सुविधा के लिए इंतजार करना होगा। हालांकि मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि मामले की पूरी जांच के बाद संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे यात्रियों को राहत भी मिले और एयरलाइंस के कारोबार पर भी प्रतिकूल असर न पड़े।

विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों पर सख्ती, बिना अनुमति भंडारा-कथा पर लगाई गई रोक

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अब धाम क्षेत्र में किसी भी प्रकार का भंडारा, भागवत कथा, कीर्तन या अन्य विशेष धार्मिक कार्यक्रम बिना पूर्व अनुमति के आयोजित नहीं किया जा सकेगा। नगर पंचायत ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और धाम की व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद आयोजकों को कार्यक्रम से पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। नगर पंचायत के अनुसार, यात्रा सीजन के दौरान बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई स्थानों पर बिना योजना के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे यातायात, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा पर असर पड़ता है। कई बार भंडारों के कारण सड़क और पैदल मार्ग बाधित हो जाते हैं, जिससे दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नियम लागू किया गया है। 

प्रशासन का कहना है कि धाम में धार्मिक कार्यक्रमों की परंपरा बनी रहेगी, लेकिन उन्हें व्यवस्थित ढंग से आयोजित करना जरूरी है। आयोजकों को कार्यक्रम की तिथि, स्थान, अनुमानित भीड़, भोजन व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़ी जानकारी पहले से देनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही आयोजन किया जा सकेगा। 

नगर पंचायत ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्थानों पर ही कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार बिना अनुमति लगाए गए भंडारों में साफ-सफाई की कमी देखी जाती है, जिससे कूड़ा-कचरा फैल जाता है। इससे न केवल धाम की पवित्रता प्रभावित होती है बल्कि पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। नए नियमों के तहत आयोजकों को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद स्थान को साफ करना अनिवार्य होगा।

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की

नगर पंचायत ने स्थानीय व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था के लिए लिया गया है। यदि सभी कार्यक्रम अनुमति लेकर होंगे तो भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं बेहतर तरीके से संचालित की जा सकेंगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर अग्निशमन, चिकित्सा सहायता और पुलिस व्यवस्था की जरूरत होती है। बिना सूचना के कार्यक्रम होने से अचानक भीड़ बढ़ जाती है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। अब अनुमति प्रक्रिया के माध्यम से प्रशासन पहले से तैयारी कर सकेगा। 

नगर पंचायत ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति आयोजन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है और कार्यक्रम को बीच में ही बंद भी कराया जा सकता है। साथ ही, धाम क्षेत्र में पोस्टर, बैनर या अस्थायी ढांचे लगाने के लिए भी अनुमति आवश्यक होगी। इस फैसले को लेकर कई स्थानीय लोगों ने समर्थन जताया है। उनका कहना है कि इससे धाम में व्यवस्था बेहतर होगी और श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिलेगी। वहीं कुछ आयोजकों ने अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है, ताकि धार्मिक गतिविधियां बाधित न हों।

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा। निर्धारित नियमों के तहत आवेदन करने पर समय पर अनुमति दी जाएगी। यात्रा सीजन को देखते हुए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। नए नियम लागू होने के बाद अब बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और धाम की व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू बनी रहेगी।