सांसद राघव चड्ढा पर उनकी ही पार्टी की सख्ती, आप ने राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल को मिलेगी जिम्मेदारी 

आम आदमी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद के खिलाफ बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है और इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेज दिया गया है। पार्टी ने पत्र में अनुरोध किया है कि चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब उन्हें सदन में पार्टी कोटे से बोलने का समय भी आवंटित न किया जाए। जानकारी के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने सांसद अशोक मित्तलको नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। पार्टी के इस फैसले को अंदरूनी रणनीतिक बदलाव और संसदीय नेतृत्व में फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है। अप्रैल 2022 से राज्यसभा सांसद रहे राघव चड्ढा संसद में सक्रिय और मुखर नेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। उन्होंने कई बार जनहित के मुद्दे उठाकर सुर्खियां भी बटोरी थीं, लेकिन हाल के महीनों में उनकी सक्रियता कम दिखाई दे रही थी। 

पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चड्ढा को पार्टी की ओर से सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। यह कदम संकेत देता है कि पार्टी संसदीय रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। वर्तमान में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य हैं, जिनमें सात पंजाब से और तीन दिल्ली से हैं। ऐसे में उपनेता पद का महत्व काफी बढ़ जाता है, क्योंकि वही सदन में पार्टी की लाइन तय करने और समन्वय का काम करता है। यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि पिछले कुछ समय से चल रहे आंतरिक मूल्यांकन के बाद यह कदम उठाया गया है। हाल ही में विधानसभा चुनाव के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची में भी राघव चड्ढा का नाम शामिल नहीं किया गया था। इसे भी नेतृत्व स्तर पर बदलाव के संकेत के रूप में देखा गया था।

स्टार प्रचारक सूची से बाहर, गतिविधियों से दूरी ने बढ़ाई चर्चा

राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक गतिविधियों से भी दूर नजर आ रहे थे। पार्टी की प्रमुख बैठकों में उनकी मौजूदगी कम रही और मीडिया ब्रीफिंग में भी वे शामिल नहीं हुए। यहां तक कि दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंदकेजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को राहत मिलने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस चुप्पी ने भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।

हालांकि, संसदीय गतिविधियों में राघव चड्ढा की भूमिका पहले काफी सक्रिय रही है। उन्होंने हाल ही में गिग वर्कर्स के मुद्दे को राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठाया था और उनके सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने का मुद्दा भी उठाया था। उनका कहना था कि बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल मां की नहीं बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनके इन बयानों को व्यापक समर्थन भी मिला था।

इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने संसदीय रणनीति में बदलाव करते हुए उन्हें उपनेता पद से हटाने का फैसला लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण का हिस्सा हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे संगठनात्मक अनुशासन और सक्रियता से जोड़कर भी देख रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्यसभा सचिवालय इस पत्र पर क्या कार्रवाई करता है और अशोक मित्तल को उपनेता की जिम्मेदारी कब तक सौंपी जाती है। यह फैसला आम आदमी पार्टी की संसदीय रणनीति और नेतृत्व संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे पार्टी की राजनीतिक दिशा और सक्रियता पर भी असर पड़ सकता है।

50 साल बाद चांद की ओर फिर बढ़े इंसानी कदम, आर्टेमिस-2 के साथ अंतरिक्ष में रवाना हुए चार यात्री

अमेरिका ने एक बार फिर मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में बड़ा अध्याय जोड़ते हुए चांद की दिशा में नई शुरुआत कर दी है। NASA के Artemis II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री बुधवार को चंद्रमा की ओर रवाना हुए। यह 50 से अधिक वर्षों बाद चंद्रमा की दिशा में भेजा गया पहला मानवयुक्त मिशन है और आने वाले वर्षों में चांद पर दोबारा मानव उतारने की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मौजूदगी बनाने की दिशा में बड़ी छलांग है। 32 मंजिला विशाल रॉकेट ने Kennedy Space Center से उड़ान भरी। लॉन्च को देखने के लिए हजारों लोग तटों, सड़कों और खुले मैदानों में जुटे। वातावरण में उत्साह और रोमांच का वही माहौल देखने को मिला, जैसा 1960 और 70 के दशक के अपोलो मिशनों के दौरान हुआ करता था। कई लोगों ने इसे मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के नए युग की शुरुआत बताया।

इस मिशन में अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। कमांडर रीड वाइजमैन के साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन उड़ान पर रवाना हुए। यह दल कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार किसी महिला, किसी गैर-श्वेत अंतरिक्ष यात्री और किसी गैर-अमेरिकी नागरिक को एक साथ चंद्र मिशन पर भेजा गया है। चारों अंतरिक्ष यात्री Orion spacecraft में सवार होकर चंद्रमा की दिशा में बढ़े। उड़ान से पहले भावुक पल भी देखने को मिले। अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने परिवारों को अलविदा कहा, हाथों से दिल का आकार बनाकर शुभकामनाएं लीं और विशेष एस्ट्रोवैन में बैठकर प्रक्षेपण स्थल तक पहुंचे। वहां उनका इंतजार कर रहा था Space Launch System, जो अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जा रहा है। यही रॉकेट ओरियन कैप्सूल को पृथ्वी की कक्षा से बाहर ले गया।

यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा

मिशन के अनुसार, यह उड़ान करीब 10 दिनों की परीक्षण यात्रा है। उड़ान के शुरुआती 25 घंटे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के पास ही रहेंगे और कैप्सूल के सभी सिस्टम की जांच करेंगे। इसके बाद मुख्य इंजन को सक्रिय किया जाएगा, जो उन्हें चंद्रमा की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ाएगा। यह चरण मिशन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है। हालांकि इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं। वे चंद्रमा के पास से गुजरेंगे और उसकी सतह से हजारों किलोमीटर दूर तक जाएंगे। इसके बाद कैप्सूल यू-टर्न लेकर पृथ्वी की ओर लौटेगा और अंत में प्रशांत महासागर में उतरेगा।

इस दौरान वे मानव इतिहास में सबसे दूर तक जाने वाले अंतरिक्ष यात्री बन जाएंगे‌ इस उड़ान की तुलना अक्सर Apollo 8 से की जा रही है, जिसने 1968 में पहली बार इंसानों को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचाया था। हालांकि आर्टेमिस-2 मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा नहीं करेंगे, लेकिन यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण डेटा जुटाएगा। नासा का लक्ष्य आने वाले वर्षों में आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर मानव को फिर से उतारना है। इसके बाद चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक शोध स्टेशन स्थापित करने और मंगल मिशन की तैयारी का रास्ता भी खुलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टेमिस-2 मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की नींव रखेगा और आने वाले दशकों में चंद्रमा वैज्ञानिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

ईरान पर अमेरिका का कड़ा रुख, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ने कहा- लक्ष्य पूरा होने तक जारी रहेगा अभियान

ईरान के खिलाफ जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने रुख को और सख्त कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सभी रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, तब तक अमेरिका की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ट्रम्प ने इसे सिर्फ मौजूदा संघर्ष नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दुश्मन को पूरी तरह तबाह कर सकता है। अपने संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना आधुनिक हथियारों के साथ लगातार कार्रवाई कर रही है और अत्याधुनिक बमवर्षक विमानों ने ईरान में प्रभावी भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल क्षमता को निशाना बनाया जा रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान बड़े पैमाने पर मिसाइलें तैयार कर रहा था और अमेरिका उसे किसी भी कीमत पर परमाणु ताकत नहीं बनने देगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वहां के शासन को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह कार्रवाई अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी थी। उन्होंने अपने फैसलों की तुलना पिछले प्रशासन से करते हुए कहा कि किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने वह नहीं किया जो उन्होंने किया है। ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान को बड़ी आर्थिक मदद दी थी, जबकि उनकी सरकार ने उस नीति को समाप्त कर दिया।

ट्रम्प ने दावा किया कि युद्ध के बाद अमेरिका को भारी निवेश मिला है। ऊर्जा संकट को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि तेल की कोई कमी नहीं होगी क्योंकि वैकल्पिक आपूर्ति के इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास सभी विकल्प मौजूद हैं और वह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े संघर्ष लंबा समय लेते हैं, लेकिन अमेरिका अपने लक्ष्य तक पहुंचकर ही रुकेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समझौते पर दो से तीन सप्ताह में फैसला

भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह दिए गए संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जाकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उनके अनुसार, संघर्ष समाप्त होने के बाद यह मार्ग खुल जाएगा और वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी और आने वाले दो से तीन सप्ताह में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और अमेरिका का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रम्प ने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में समझौते की संभावना भी है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका और आक्रामक रणनीति अपना सकता है। 

उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ अहम पुलों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान वार्ता की मेज पर आता है, तो यह बेहतर विकल्प होगा। हालांकि उन्होंने दोहराया कि अमेरिका को रोकना मुश्किल है और कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। उनके बयान के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है, खासकर ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि स्थिति पर अमेरिका की नजर बनी हुई है और जल्द राहत मिल सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो कार्रवाई और तेज होगी। ट्रम्प के इस कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी और बढ़ सकता है और आने वाले सप्ताह इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।

असम में पीएम मोदी का चुनावी शंखनाद, यूसीसी पर सियासी संदेश, कहा- राज्य की संस्कृति से समझौता नहीं होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के तहत बुधवार को असम के धेमाजी जिले के गोगामुख में जनसभा को संबोधित करते हुए तीसरी बार भाजपा सरकार बनने का दावा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा के बाद यह उनकी पहली सभा है और मैदान में उमड़ा जनसैलाब स्पष्ट संकेत दे रहा है कि राज्य में एक बार फिर जनता विकास के पक्ष में मतदान करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा में संकेत दिया कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल कानून बनाने का नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने का भी प्रयास है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज और विशेष क्षेत्रों की परंपराओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करते समय स्थानीय रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य किसी परंपरा को समाप्त करना नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे और समाज में संतुलन मजबूत होगा। उन्होंने इसे असम की पहचान बचाने और राज्य को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं का उत्साह, माताओं-बहनों का आशीर्वाद और लोगों का विश्वास इस बात की खुली घोषणा है कि इस बार भी भाजपा सरकार की हैट्रिक पक्की है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जनता के आशीर्वाद से उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार सेवा करने का अवसर मिला है और उसी तरह असम में भी लगातार तीसरी बार सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इस मैदान में तीसरी बार आए हैं और लोगों का प्रेम यह बता रहा है कि राज्य में स्थिर और मजबूत सरकार के लिए जनता ने मन बना लिया है। उनके अनुसार यह चुनाव केवल सरकार बनाने का नहीं बल्कि विकसित असम और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का चुनाव है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि असम में अब विकास की नई धारा बह रही है। उन्होंने बाढ़ की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य को बाढ़ से राहत दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर बड़े स्तर पर योजना शुरू की है। इस योजना के तहत हजारों करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ नियंत्रण के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले असम में हिंसा, उग्रवाद और असुरक्षा की खबरें आती थीं, लेकिन अब यहां से विकास, निवेश और अवसरों की चर्चा हो रही है। हजारों युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है और राज्य में शांति का माहौल बना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम को प्रकृति ने भरपूर संसाधन दिए हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्षों तक शासन करने के बावजूद राज्य में बुनियादी ढांचे पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी पर पुलों की कमी के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पिछले वर्षों में कई बड़े पुलों का निर्माण कर इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया गया है, जिससे दोनों किनारों के बीच संपर्क मजबूत हुआ है और विकास को गति मिली है।

कांग्रेस पर निशाना, विकास और पहचान बचाने का किया वादा

उत्तराखंड में रिश्वतखोरी पर विजिलेंस का वार: उपखंड शिक्षा अधिकारी एक लाख रुपए लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, शिक्षा विभाग में हड़कंप 

उत्तराखंड में एक बार फिर भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। देहरादून में विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए उपखंड शिक्षा अधिकारी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अधिकारी को नेपाली फार्म के पास घूस लेते हुए दबोचा गया, जिसके बाद उसे रायवाला कोतवाली ले जाकर पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और विभागीय कामकाज पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, उपखंड शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट पर आरोप है कि उन्होंने ऋषिकेश क्षेत्र के एक स्कूल को ग्रेड देने और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत छात्रों की प्रतिपूर्ति के बिल पास करने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना सतर्कता विभाग को दी थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप प्लान तैयार किया। विजिलेंस के अनुसार, तय योजना के तहत बुधवार को शिकायतकर्ता को आरोपी अधिकारी से संपर्क करने के लिए कहा गया। ट्रैप के मुताबिक, आरोपी अधिकारी नेपाली फार्म के पास अपनी निजी गाड़ी से रिश्वत लेने पहुंचा। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रकम सौंपी, विजिलेंस टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए धनवीर सिंह बिष्ट को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उनके साथ मौजूद पुष्पांजलि, जो ऋषिकेश स्थित उत्तरांचल मॉडर्न स्कूल की संचालिका बताई जा रही हैं, को भी हिरासत में लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम आरोपी से पूछताछ में जुटी 

शिकायतकर्ता के स्कूल ‘गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल, ऋषिकेश’ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पढ़ रहे छात्रों की प्रतिपूर्ति के बिल लंबित थे। इन बिलों के भुगतान के एवज में आरोपी अधिकारी ने कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने जब इस मांग को अनुचित बताया, तो उसने विजिलेंस विभाग से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद टीम ने सटीक योजना बनाकर आरोपी को पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम आरोपी को रायवाला कोतवाली ले गई, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी अहम जानकारी सामने आ सकती है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं। 

सतर्कता सेक्टर देहरादून ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा संख्या 7/2026 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विजिलेंस टीम अब आरोपियों के आवास और अन्य ठिकानों की भी जांच कर रही है, ताकि मामले से जुड़े और सबूत जुटाए जा सकें।

हिमाचल में वाहन चालकों को बड़ी राहत : पांच और 6-12 सीटर गाड़ियों पर बढ़ा एंट्री टैक्स वापस, सुखविंदर सरकार ने लिया यू-टर्न

हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने पांच सीटर और 6 से 12 सीटर वाहनों पर हाल ही में बढ़ाया गया एंट्री टैक्स वापस लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार, 31 मार्च को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब पहले की तरह ही पुरानी दरें लागू रहेंगी। यानी पांच सीटर वाहनों से 70 रुपये और 6 से 12 सीटर वाहनों से 110 रुपये एंट्री टैक्स ही लिया जाएगा। सरकार के इस फैसले को पर्यटन उद्योग, टैक्सी ऑपरेटरों और आम वाहन चालकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।

विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है। 

एंट्री टैक्स बढ़ाने के बाद विभिन्न संगठनों और पर्यटन से जुड़े लोगों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं। इसके बाद सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और फैसला किया कि बढ़ी हुई दरों को वापस लिया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार नहीं चाहती कि किसी भी फैसले से पर्यटकों या परिवहन व्यवसाय पर अनावश्यक बोझ पड़े।

उन्होंने कहा कि सरकार लगातार संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रही है, ताकि राजस्व भी प्रभावित न हो और लोगों को भी राहत मिलती रहे। एंट्री टैक्स को लेकर आए सुझावों और शिकायतों को गंभीरता से लिया गया और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया गया कि पुरानी दरें ही अधिक व्यावहारिक हैं। इसी के चलते बढ़ाया गया टैक्स वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

राज्य में एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद टैक्सी यूनियनों ने चिंता जताई थी

राज्य में एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद टैक्सी यूनियनों, होटल एसोसिएशन और पर्यटन कारोबारियों ने चिंता जताई थी। उनका कहना था कि बढ़े हुए टैक्स से बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है। खासकर गर्मियों के सीजन से पहले यह निर्णय पर्यटन उद्योग के लिए चुनौती बन सकता था। सरकार के नए फैसले से अब पर्यटन क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। परिवहन से जुड़े लोगों का कहना है कि पांच और 6 से 12 सीटर वाहन सबसे ज्यादा पर्यटकों को लाने-ले जाने में उपयोग होते हैं। ऐसे में टैक्स बढ़ने से किराए में बढ़ोतरी होती और इसका असर सीधे पर्यटकों पर पड़ता। अब पुरानी दरें लागू रहने से किराए स्थिर रहेंगे और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए यह फैसला सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पर्यटन ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। सड़क सुविधाओं में सुधार, पार्किंग व्यवस्था, और पर्यटक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बड़ा योगदान है, इसलिए ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं जो पर्यटन को प्रोत्साहित करें। विधानसभा में इस घोषणा के बाद सत्ता पक्ष ने इसे जनहित का फैसला बताया, जबकि विपक्ष ने कहा कि सरकार को पहले ही व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए था। हालांकि, सरकार का कहना है कि जनता और हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर समय रहते संशोधन करना ही बेहतर प्रशासन का हिस्सा है।

बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी को झटका, पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस भाजपा में शामिल, एक और नई राजनीतिक पारी 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज है। भारत के पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पेस के भाजपा में आने को बंगाल की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि वे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े रहे हैं। चुनावी माहौल में उनके इस कदम को टीएमसी के लिए झटका माना जा रहा है, वहीं भाजपा इसे खेल और युवाओं से जुड़ी अपनी रणनीति का हिस्सा बता रही है। 

भाजपा में शामिल होने के बाद लिएंडर पेस ने इसे अपने जीवन का बड़ा दिन बताया। उन्होंने कहा कि देश के लिए चार दशक तक खेलने के बाद अब वे युवाओं की सेवा करना चाहते हैं। पेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें खेल और युवाओं के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और अगले 20 से 25 वर्षों में खेल शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनके मुताबिक, खेल सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण का भी माध्यम है। पेस ने खेलों के बुनियादी ढांचे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 1986 में पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाएं सीमित थीं और आज भी कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। 

उन्होंने इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में खेल सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्य बेहतर कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए दीर्घकालिक योजना और निवेश की जरूरत है। पेस ने खेलो इंडिया अभियान और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) की सराहना करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने खिलाड़ियों को नई दिशा दी है और भविष्य में भारत के प्रदर्शन को मजबूत करेंगे।

साल 2021 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिएंडर पेस तृणमूल कांग्रेस में शामिल किया था 

लिएंडर पेस पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। वर्ष 2021 में गोवा में ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। उस समय पेस ने ममता बनर्जी को “सच्ची चैंपियन” बताया था और उनके साथ काम करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें कोई बड़ी राजनीतिक भूमिका नहीं मिली। समय के साथ पेस टीएमसी की सक्रिय राजनीति से दूर होते गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही दूरी अब उनके भाजपा में शामिल होने का कारण बनी। 

पेस का बंगाल से गहरा संबंध रहा है। उनका जन्म कोलकाता में हुआ और उनकी मां भी वहीं की थीं, जबकि उनके पिता गोवा से थे। इस वजह से उनका दोनों राज्यों से जुड़ाव रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता खेल जगत और युवा वर्ग में पार्टी को लाभ पहुंचा सकती है। खासकर शहरी मतदाताओं और खेल प्रेमियों के बीच उनकी पहचान को चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पार्टी खेल बुनियादी ढांचे और युवा विकास को चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में है। पेस ने भी महिला खिलाड़ियों के लिए समान अवसर और स्कॉलरशिप कार्यक्रम लाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि भारत में महिला खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और वित्तीय सहायता मिले। उनके मुताबिक, अगर सही दिशा में काम किया जाए तो भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बन सकता है। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो पेस का भाजपा में शामिल होना चुनावी संदेश भी देता है। 

भाजपा लगातार अलग-अलग क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को अपने साथ जोड़ रही है। इससे पार्टी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वहीं टीएमसी के लिए यह संकेत माना जा रहा है कि चुनाव से पहले पार्टी के पूर्व सहयोगी दूसरी दिशा में जा रहे हैं। कुल मिलाकर, लिएंडर पेस की नई राजनीतिक पारी ने बंगाल चुनाव से पहले माहौल को और दिलचस्प बना दिया है। खेल के मैदान में देश का नाम रोशन करने वाले पेस अब राजनीतिक मैदान में नई भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि खेल और युवाओं पर उनका फोकस भाजपा की चुनावी रणनीति को कितना मजबूत करता है।

असम विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया अपना “संकल्प पत्र”, सुरक्षित-विकसित राज्य और मूल असमिया हितों की रक्षा का किया वादा

असम विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार सुबह ही अपना बहुप्रतीक्षित ‘संकल्प पत्र’ जारी कर दिया। गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा अपने चुनावी घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ के नाम से जारी करती है और इस बार भी इसमें राज्य के विकास, सुरक्षा और असमिया पहचान की रक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ में भूमि, विरासत और मूल असमिया लोगों की गरिमा की रक्षा का वादा किया गया है। पार्टी ने कहा कि वह सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए विकास को नई गति देगी। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा निवेश को आकर्षित करने के लिए कई अहम प्रतिबद्धताएं भी शामिल की गई हैं।

संकल्प पत्र जारी करने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह दस्तावेज पिछले एक दशक में जनता की सेवा और अनुभव के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के दौरान असम में व्यापक बदलाव हुआ है और राज्य विकास के नए रास्ते पर आगे बढ़ा है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद उसने राज्य के विकास के लिए ठोस काम नहीं किया, जबकि भाजपा ने बुनियादी ढांचे, उद्योग, कनेक्टिविटी और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई पहल की हैं।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी संकल्प पत्र को राज्य के भविष्य का रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य असम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है और इसके लिए जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। सरमा ने दावा किया कि युवाओं, खासकर नई पीढ़ी का भरोसा भाजपा के साथ है और पार्टी इस चुनाव में अधिकतम सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी है। उन्होंने कहा कि राज्य को आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक रूप से मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता होगी।

जनता के सुझावों पर आधारित ‘संकल्प’, तीसरे कार्यकाल का रोडमैप

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि संकल्प पत्र तैयार करने से पहले पार्टी ने व्यापक जनसंवाद अभियान चलाया। इसके तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों से सुझाव लिए गए। उन्होंने बताया कि तीन लाख से अधिक लोगों ने अपने विचार साझा किए, जिनके आधार पर यह दस्तावेज तैयार किया गया है। सोनोवाल ने कहा कि यह संकल्प पत्र वास्तव में जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और आगामी कार्यकाल में इन्हीं प्राथमिकताओं के अनुसार काम किया जाएगा।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि 2026 का विधानसभा चुनाव असम के भविष्य के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस चुनाव को सुरक्षित और विकसित असम के लक्ष्य के साथ लड़ रही है। सैकिया ने बताया कि संकल्प पत्र तैयार करने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों से करीब 2.45 लाख सुझाव प्राप्त हुए, जिन्हें ध्यान में रखते हुए विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है।

भाजपा ने संकल्प पत्र में राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने, उद्योगों को प्रोत्साहन देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र को मजबूत करने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और पर्यटन को बढ़ावा देने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है। पार्टी का दावा है कि इन कदमों से असम की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और राज्य को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने में मदद मिलेगी।

असम में विधानसभा की 126 सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि चुनाव नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और मतदाताओं को लुभाने के लिए घोषणाओं का दौर जारी है।

भाजपा का कहना है कि उसका ‘संकल्प पत्र’ केवल चुनावी वादों का दस्तावेज नहीं बल्कि आगामी वर्षों के लिए विकास का खाका है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि पिछले कार्यकाल में किए गए कार्यों के आधार पर जनता एक बार फिर भाजपा को मौका देगी। वहीं विपक्षी दल इस संकल्प पत्र को चुनावी वादा बताते हुए इसकी व्यवहारिकता पर सवाल उठा रहे हैं।

इस तरह ‘संकल्प पत्र’ जारी होने के साथ ही असम विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है। अब सभी दलों की नजर 9 अप्रैल को होने वाले मतदान और 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी है, जो राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

आज गुजरात दौरे पर पीएम मोदी : साणंद में सेमीकंडक्टर संयंत्र का करेंगे उद्घाटन, 20 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की देंगे सौगात

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य को औद्योगिक और सांस्कृतिक विकास से जुड़ी कई बड़ी सौगातें देंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी अहमदाबाद के साणंद में सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन करेंगे और 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन भी करेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुबह लगभग 10 बजे गांधीनगर से शुरू होगा, जहां वे कोबा तीर्थ स्थित सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वे एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जिससे इस आयोजन को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी मिल गया है। संग्रहालय का उद्घाटन जैन परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर प्रधानमंत्री अहमदाबाद के साणंद क्षेत्र में स्थित केन्स सेमीकान प्लांट का उद्घाटन करेंगे। इस संयंत्र के शुरू होने के साथ ही यहां वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत हो जाएगी, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह संयंत्र उन्नत इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल (आईपीएम) के उत्पादन पर केंद्रित होगा, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और औद्योगिक उपकरणों में किया जाता है।

सरकारी बयान के मुताबिक यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस मिशन का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। साणंद संयंत्र के शुरू होने से न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

यह संयंत्र भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। इस प्लांट में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर उच्च गुणवत्ता वाले पावर मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे, जो ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होंगे। इससे भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि माइक्रोन टेक्नोलॉजी के बाद यह दूसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र होगा, जहां वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी जगह बना रहा है। इस तरह की परियोजनाएं देश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे। इनमें बुनियादी ढांचा, औद्योगिक विकास, शहरी सुविधाओं और कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से गुजरात में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ ही रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

गुजरात लंबे समय से विनिर्माण और निवेश के केंद्र के रूप में उभरता रहा है। साणंद क्षेत्र विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का महत्वपूर्ण हब बन चुका है। अब सेमीकंडक्टर संयंत्र के शुरू होने से यह क्षेत्र हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के नए केंद्र के रूप में विकसित होगा।

प्रधानमंत्री के इस दौरे को आगामी औद्योगिक विस्तार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य देश में चिप निर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है। साणंद संयंत्र का उद्घाटन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री का यह दौरा औद्योगिक विकास, सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी आत्मनिर्भरता—तीनों मोर्चों पर अहम संदेश देता है। इससे न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश में सेमीकंडक्टर निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।

जेवर में एयरपोर्ट के उद्घाटन पर विपक्ष पर बरसे पीएम मोदी, बोले-पिछली सरकारों ने रोका विकास

उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पिछली सरकारों ने वर्षों तक आगे नहीं बढ़ाया, जिसके कारण क्षेत्र के विकास में देरी हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब यह एयरपोर्ट केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्र बनेगा।

उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू समेत कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नोएडा को विकास के बजाय राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2004 से 2014 के बीच यह परियोजना फाइलों में दबकर रह गई और कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। पीएम मोदी ने कहा कि उस दौर में भ्रष्टाचार और नीतिगत सुस्ती के कारण बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट अटकते रहे। उन्होंने कहा कि 2014 में केंद्र में नई सरकार बनने के बाद भी उत्तर प्रदेश में उस समय की सरकार ने शुरुआती वर्षों में इस परियोजना को गति नहीं दी। बाद में केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार बनने के बाद जेवर एयरपोर्ट के निर्माण को तेज किया गया और जमीन पर काम शुरू हुआ। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि पहले कुछ नेता नोएडा आने से भी हिचकिचाते थे। उन्होंने एक पुराने प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय के मुख्यमंत्री को नोएडा आने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वही क्षेत्र बड़े निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे का केंद्र बन रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने नोएडा में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री की स्थापना, मेरठ मेट्रो के विस्तार और दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को प्रमुख उपलब्धियां बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी परियोजनाएं क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। यहां से कम अंतराल में उड़ानें संचालित की जा सकेंगी और यात्रियों के साथ-साथ व्यापार को भी फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना निवेश, रोजगार और पर्यटन के नए अवसर लेकर आएगी।

कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार के लिए बड़ा केंद्र बनेगा जेवर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश में हवाई अड्डों की संख्या बढ़ने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में 74 एयरपोर्ट थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उत्तर प्रदेश में भी हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार हुआ है और अब राज्य में 17 एयरपोर्ट संचालित या विकसित किए जा रहे हैं। इससे आम लोगों के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ हुई है और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला है। पीएम श ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति देगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से नोएडा के अलावा आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर और फरीदाबाद जैसे शहरों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे उद्योग, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन की सुविधाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को सहज और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी। पीएम मोदी 

ने कहा कि इस परियोजना के पहले चरण को लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। भविष्य में इसके विस्तार के साथ यात्री क्षमता और सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट न केवल हवाई सेवा देगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को भी गति देगा। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय युवाओं को नए मौके मिलेंगे। किसानों को भी अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विकास के नए दौर में ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।