ईरान में फंसे भारतीयों के लिए नई एडवाइजरी जारी : जल्द देश छोड़ने की सलाह, दूतावास ने कहा- बिना समन्वय सीमा तक न जाएं

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए बुधवार को नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद भारतीयों से अपील की है कि वे स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित रास्तों से देश छोड़ने की तैयारी करें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोशिश बिना दूतावास से सलाह-मशविरा और समन्वय के नहीं की जाए। यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी हुई है, जब अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ईरान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी पोस्ट में कहा कि सभी भारतीय नागरिक सतर्क रहें और दूतावास द्वारा सुझाए गए मार्गों का ही इस्तेमाल करें। पोस्ट में कहा गया, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास के साथ पहले से सलाह-मशविरा और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश न की जाए।” 

दूतावास ने यह भी कहा कि स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नागरिक लगातार आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद के लिए इमरजेंसी संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। इनमें +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359 शामिल हैं। इसके अलावा cons.tehran@mea.gov.in पर ईमेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। दूतावास ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अपने लोकेशन की जानकारी साझा करते रहें ताकि जरूरत पड़ने पर निकासी की व्यवस्था की जा सके। इससे पहले मंगलवार शाम को भी भारतीय दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें ईरान में मौजूद भारतीयों को अगले 48 घंटे तक जहां हैं, वहीं रहने की सलाह दी गई थी। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और संभावित हमलों की आशंका को देखते हुए लोगों को बाहर निकलने से बचने को कहा गया था। 

हालांकि, अब संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद दूतावास ने नई सलाह जारी करते हुए नियंत्रित तरीके से देश छोड़ने का विकल्प खुला रखा है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी समाप्त करने की समयसीमा का पालन नहीं करता, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिकी समयानुसार रात 8 बजे की डेडलाइन दी गई थी, जो भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे थी। इस चेतावनी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी थी।

संघर्ष के बीच कितने भारतीय और क्या है ताजा स्थिति

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद जब संघर्ष शुरू हुआ, उस समय ईरान में छात्रों समेत करीब 9,000 भारतीय मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या मेडिकल और तकनीकी शिक्षा ले रहे छात्रों की बताई जा रही है। इसके अलावा कुछ कारोबारी, पेशेवर और धार्मिक यात्राओं पर गए लोग भी शामिल हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने चरणबद्ध तरीके से अपने नागरिकों की वापसी शुरू की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक लगभग 1,800 भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। इनमें से कई को पड़ोसी देशों के रास्ते निकाला गया, जबकि कुछ को विशेष उड़ानों के जरिए वापस लाया गया। हालांकि बड़ी संख्या में भारतीय अभी भी ईरान के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं। इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के संपर्क में है।

इसी बीच अमेरिका और ईरान ने मंगलवार को दो सप्ताह के संघर्ष-विराम पर सहमति जताई। यह समझौता अमेरिकी समयसीमा खत्म होने से करीब एक घंटे पहले हुआ। संघर्ष-विराम के बाद भी स्थिति को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में सैन्य तैयारियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यही वजह है कि भारत ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने और जल्द सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ने की सलाह दी है।

भारतीय दूतावास ने यह भी कहा है कि नागरिक अफवाहों से दूर रहें और किसी भी तरह की यात्रा से पहले आधिकारिक पुष्टि करें। साथ ही, पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज हमेशा तैयार रखें, ताकि निकासी की स्थिति में देरी न हो। दूतावास ने छात्रों को विशेष रूप से सलाह दी है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन और दूतावास दोनों के संपर्क में बने रहें।

सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त निकासी उड़ानों की भी व्यवस्था की जा सकती है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने, संपर्क में बने रहने और सुझाए गए मार्गों के जरिए जल्द देश छोड़ने की तैयारी करने को कहा है।

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