स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव के बीच केंद्र सरकार अलर्ट : एलपीजी आपूर्ति पर खास फोकस, अस्पतालों-शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता

वैश्विक हालात के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को देश में ईंधन आपूर्ति की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए भरोसा दिलाया कि पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की उपलब्धता को हर हाल में बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों के मद्देनजर सरकार ने आपूर्ति और मांग दोनों पक्षों पर संतुलन बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि जरूरी सेवाएं बिना किसी बाधा के चलती रहें। इसके अलावा फार्मा, स्टील, ऑटोमोबाइल, बीज और कृषि जैसे अहम सेक्टरों को भी वरीयता सूची में रखा गया है। 

इन कदमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्पादन और आवश्यक सेवाओं पर किसी तरह का असर न पड़े। प्रवासी श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडरों की आपूर्ति को भी बढ़ा दिया है। मंत्रालय के अनुसार, 2 और 3 मार्च 2026 की औसत दैनिक आपूर्ति के आधार पर इन सिलेंडरों की उपलब्धता को दोगुना कर दिया गया है। इससे छोटे उपभोक्ताओं और अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने राज्यों को यह भी सलाह दी है कि वे घरेलू और कमर्शियल ग्राहकों के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन को बढ़ावा दें। इससे एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और सप्लाई चेन पर दबाव घटेगा। 

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 से अब तक करीब 4.5 लाख पीएनजी कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू की जा चुकी है, जबकि लगभग 5 लाख नए उपभोक्ताओं ने कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। एलपीजी की मांग को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बुकिंग अंतराल में भी बदलाव किया है। शहरी क्षेत्रों में यह अंतराल 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में इसे 45 दिन तक किया गया है। इसके अलावा, केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है, ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। इसी क्रम में कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए राज्यों को अतिरिक्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करें।

एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती, जागरूकता अभियान तेज

केंद्र सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती बढ़ा दी है। 14 अप्रैल 2026 को देशभर में 2100 से ज्यादा छापेमारी की गई, जिसमें करीब 450 सिलेंडर जब्त किए गए। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने औचक निरीक्षण तेज कर दिए हैं। अब तक 237 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया जा चुका है, जबकि 58 वितरकों को निलंबित भी किया गया है। एलपीजी के वैकल्पिक और छोटे विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जागरूकता अभियान भी तेज कर दिए हैं। 

3 अप्रैल 2026 से अब तक 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडरों के लिए 5000 से अधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों के माध्यम से 57,800 से ज्यादा सिलेंडरों की बिक्री की गई है। सिर्फ एक दिन में 583 शिविरों के जरिए 8575 सिलेंडर बेचे जाने का आंकड़ा सरकार की सक्रियता को दर्शाता है। इसके अलावा, 23 मार्च 2026 से अब तक 14.6 लाख से अधिक 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री हो चुकी है, जो इस योजना की बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाता है।

 सरकार का मानना है कि छोटे सिलेंडरों के बढ़ते उपयोग से न केवल एलपीजी की कुल मांग संतुलित होगी, बल्कि जरूरतमंद वर्ग को भी सस्ती और सुलभ ऊर्जा मिल सकेगी। सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक स्टॉकिंग से बचें और जरूरत के अनुसार ही एलपीजी का उपयोग करें, ताकि सप्लाई चेन सुचारू बनी रहे।

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