लोकसभा सीटें बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव, 33% महिला आरक्षण पर जोर, संसद में गरमाई बहस, पीएम मोदी ने मांगा सर्वदलीय समर्थन
गुरुवार को संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर जोरदार चर्चा देखने को मिली। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में अपने प्रारंभिक संबोधन में बड़ा बयान देते हुए कहा कि भविष्य में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 की जाएगी। इसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो कुल सीटों का 33 प्रतिशत है। मेघवाल ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे न तो पुरुषों को नुकसान होगा और न ही किसी राज्य के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि “महिला आरक्षण का यह सरल गणित है 815 सीटों में से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी, जिससे उन्हें संसद में बराबरी का अवसर मिल सके।”
प्रस्तावित विधेयकों के अनुसार, वर्तमान में 543 सीटों वाली लोकसभा में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। यह वृद्धि परिसीमन प्रक्रिया के तहत की जाएगी, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करती है।
मेघवाल ने यह भी बताया कि महिला आरक्षण के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा, जिससे सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 अपने मौजूदा स्वरूप में बना रहता है, तो 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू करना संभव नहीं होगा। इसका कारण यह है कि आरक्षण की प्रक्रिया जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन पर आधारित है, जो 2026 के बाद ही उपलब्ध होंगे। इसी वजह से सरकार को संविधान संशोधन विधेयक लाना पड़ा है, ताकि प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जा सके। मेघवाल ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि भारत ने महिलाओं को मतदान का अधिकार काफी पहले दे दिया था, जबकि कई विकसित देशों में यह अधिकार काफी देर से मिला। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में महिलाओं को पुरुषों के 144 साल बाद मतदान का अधिकार मिला, जबकि यूनाइटेड किंगडम में 1918 में आंशिक और 1928 में पूर्ण रूप से महिलाओं को मताधिकार दिया गया।
इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में जोरदार अपील करते हुए सभी राजनीतिक दलों से इस ऐतिहासिक विधेयक का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, “राष्ट्र के जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं, जो इतिहास बन जाते हैं। आज संसद में ऐसा ही एक पल है। हमें इस अवसर को देश की धरोहर बनाना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी इस विधेयक का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि देश की महिलाएं इस फैसले को ध्यान से देख रही हैं और वे केवल निर्णय ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की नीयत को भी परखेंगी। उन्होंने कहा, “हमारी नीयत में कोई खोट नहीं है। जिनकी नीयत में खोट होगी, उन्हें देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।”
विपक्ष की चिंताएं बरकरार, परिसीमन प्रक्रिया पर उठे सवाल
हालांकि महिला आरक्षण को लेकर अधिकांश राजनीतिक दलों में सहमति दिखाई दी, लेकिन परिसीमन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन परिसीमन के जरिए सीटों के पुनर्गठन से कुछ राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व कमजोर हो सकता है। इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रावण ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ काम करेगा और इसमें सभी राजनीतिक दलों से व्यापक सलाह-मशविरा किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा। संसद में पेश किए गए प्रमुख विधेयकों में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ शामिल हैं। इन सभी विधेयकों का उद्देश्य महिला आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करना और निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलित पुनर्गठन करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया, उन्हें जनता ने समय-समय पर नकार दिया है।
उन्होंने कहा कि “जब भी महिला आरक्षण का मुद्दा उठा है, तब-तब देश की महिलाओं ने उन लोगों को जवाब दिया है, जिन्होंने इसका विरोध किया।” उन्होंने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से न देखें, बल्कि इसे देश के भविष्य और महिला सशक्तिकरण के नजरिए से समझें। उन्होंने कहा कि यह समय एकजुट होकर देशहित में निर्णय लेने का है। संसद का यह विशेष सत्र महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित रहा। जहां एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता और संतुलन को लेकर अपनी चिंताओं को सामने रख रहा है। आने वाले दिनों में इन विधेयकों पर और गहन चर्चा होने की संभावना है, जो देश की राजनीति और सामाजिक संरचना पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

