चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस पर सरकार की नई स्पष्टता : स्कूल फीस से हॉस्टल तक मिलेगा फायदा, नई शिक्षा नीति और सस्पेंशन मामलों में भी नियम साफ
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च को लेकर चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस (CEA) पर नई स्पष्टता जारी की है। ताजा FAQs में सरकार ने विस्तार से बताया है कि किन परिस्थितियों में कर्मचारियों को रीइम्बर्समेंट मिलेगा और किन मामलों में दावा स्वीकार नहीं होगा। इस स्पष्टीकरण के बाद स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और हॉस्टल जैसे खर्चों को कवर करने वाले इस भत्ते को लेकर लंबे समय से चल रही उलझन काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। खासतौर पर नई शिक्षा नीति (NEP-2020), सस्पेंशन अवधि और कोर्ट के आदेश से बहाली जैसे संवेदनशील मामलों में भी नियमों को साफ कर दिया गया है। चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिया जाने वाला एक आर्थिक लाभ है, जिसका उद्देश्य बच्चों की स्कूली शिक्षा का खर्च कम करना है।
यह सुविधा परिवार के अधिकतम दो सबसे बड़े बच्चों के लिए लागू होती है। हालांकि, यदि दूसरे बच्चे के जन्म के समय जुड़वां या एक साथ एक से अधिक बच्चे पैदा होते हैं, तो ऐसी स्थिति में सभी बच्चों को इस भत्ते का लाभ मिल सकता है। यह व्यवस्था कर्मचारियों को बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों को संभालने में राहत देती है और शिक्षा पर होने वाले वित्तीय बोझ को कम करती है। CEA के तहत कर्मचारी साल में एक बार क्लेम कर सकते हैं। फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के बाद संबंधित स्कूल या संस्थान के प्रमुख से प्रमाण पत्र लेना होता है, जिसमें यह उल्लेख होता है कि बच्चा पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान संस्थान में पढ़ रहा था। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर रीइम्बर्समेंट प्रोसेस किया जाता है। इस व्यवस्था से कर्मचारियों को हर महीने अलग-अलग बिल जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती और पूरी प्रक्रिया सरल बन जाती है। राशि की बात करें तो वर्तमान नियमों के अनुसार प्रत्येक बच्चे के लिए 2,812.5 रुपये प्रति माह की दर से CEA का लाभ दिया जाता है। वहीं, यदि बच्चा हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा है, तो 8,437.5 रुपये प्रति माह तक हॉस्टल सब्सिडी भी मिलती है। यह राशि तय है और वास्तविक खर्च पर निर्भर नहीं करती। यानी खर्च कम हो या ज्यादा, कर्मचारियों को निर्धारित रकम के आधार पर ही भुगतान किया जाता है।
गणना मासिक आधार पर होती है, लेकिन भुगतान साल में एक बार किया जाता है। इससे कर्मचारियों को वित्तीय योजना बनाने में भी आसानी होती है और दस्तावेजी प्रक्रिया भी सीमित रहती है। इस भत्ते के लिए बच्चों की पात्रता भी स्पष्ट की गई है। सामान्य तौर पर बच्चे की उम्र 21 साल से कम होनी चाहिए। नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चे इसके लिए पात्र हैं। इसके अलावा सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कोर्स के शुरुआती दो वर्षों के लिए भी यह लाभ उपलब्ध है। दिव्यांग बच्चों के मामले में अधिकतम आयु सीमा 22 वर्ष तक रखी गई है। साथ ही, बच्चे का किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, बोर्ड या संस्थान में पढ़ना जरूरी है। इसमें केंद्रीय या राज्य बोर्ड, जूनियर कॉलेज, डिप्लोमा संस्थान और अन्य अधिकृत शिक्षण संस्थान शामिल हैं। दूरस्थ शिक्षा या कॉरेस्पॉन्डेंस के माध्यम से पढ़ाई करने वाले बच्चों को भी इस भत्ते का लाभ मिल सकता है, बशर्ते संस्थान मान्यता प्राप्त हो।
NEP-2020, सस्पेंशन और कोर्ट से बहाली मामलों पर नया स्पष्टीकरण
सरकार ने अपनी नई FAQs में यह भी स्पष्ट किया है कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) लागू होने के कारण यदि किसी बच्चे को अतिरिक्त कक्षा दोहरानी पड़ती है, तो उसे एक बार की छूट दी जाएगी। यानी यदि नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी जैसे प्री-प्राइमरी चरणों में संरचना बदलने के कारण बच्चा अतिरिक्त साल पढ़ता है, तो उस वर्ष के लिए भी CEA और हॉस्टल सब्सिडी का क्लेम स्वीकार किया जा सकता है। यह छूट केवल एक बार के लिए होगी और अन्य सभी शर्तों का पालन जरूरी रहेगा। कोर्ट के आदेश से नौकरी में बहाली के मामलों को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। यदि किसी कर्मचारी को सेवा से हटाया गया हो और बाद में अदालत के आदेश से बहाल किया जाए, तो उस अवधि के दौरान CEA मिलेगा या नहीं, यह संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा। यह देखा जाएगा कि हटाए जाने और बहाली के बीच की अवधि को सेवा में माना गया है या नहीं। इसी आधार पर भुगतान का निर्णय लिया जाएगा।
सस्पेंशन के दौरान मिलने वाले भत्ते को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारी निलंबन में है, तब भी कुछ परिस्थितियों में CEA दिया जा सकता है। संबंधित नियमों के अनुसार यह भत्ता उस स्थिति में भी लागू हो सकता है जब कर्मचारी ड्यूटी पर हो, सस्पेंड हो या किसी प्रकार की छुट्टी पर हो, जिसमें असाधारण अवकाश भी शामिल है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और कर्मचारी की पारिवारिक जिम्मेदारियां बनी रहें। नई गाइडलाइन के साथ सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि CEA को लेकर प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की जा रही है। स्पष्ट नियमों से कर्मचारियों को क्लेम करने में आसानी होगी और विभागों में भी व्याख्या से जुड़ी दिक्कतें कम होंगी। इससे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्चों के लिए राहत मिलने की उम्मीद है और शिक्षा पर होने वाला आर्थिक दबाव कम होगा।

