दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी की तैयारी, नमो भारत कॉरिडोर विस्तार का प्रस्ताव
उत्तराखंड और दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए जल्द ही बड़ी राहत का रास्ता खुल सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के सामने एक अहम प्रस्ताव रखते हुए नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर को मेरठ के मोदिपुरम से आगे बढ़ाकर हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तार देने की मांग की है। इस प्रस्ताव के साथ देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच अलग मेट्रो कॉरिडोर विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। अगर यह योजना मंजूर होती है तो दिल्ली से उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन शहरों तक यात्रा समय में भारी कमी आएगी और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर इस परियोजना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश तक तेज रफ्तार रेल संपर्क बनने से चारधाम यात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और रोजाना यात्रा करने वालों को बड़ा लाभ होगा। साथ ही इससे सड़क यातायात पर दबाव भी कम होगा और सुरक्षित, तेज और पर्यावरण अनुकूल परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा।
फिलहाल नमो भारत ट्रेन दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदिपुरम तक संचालित हो रही है। प्रस्तावित योजना के तहत इस कॉरिडोर को मोदिपुरम से आगे बढ़ाकर हरिद्वार और ऋषिकेश तक ले जाने की बात कही गई है। यह विस्तार मुख्य रूप से नेशनल हाईवे-58 के समानांतर विकसित किया जा सकता है, जिससे निर्माण में सुविधा मिले और प्रमुख शहरों को सीधे जोड़ा जा सके।
प्रस्तावित रूट में कई महत्वपूर्ण शहर और कस्बे शामिल होंगे। इनमें मोदिपुरम, दौराला-सकौती, खतौली, पुरकाजी (उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा), रुड़की, ज्वालापुर (हरिद्वार) और ऋषिकेश शामिल हैं। इस कॉरिडोर से आईआईटी रुड़की जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान भी सीधे जुड़ जाएंगे। इससे छात्रों और कर्मचारियों के लिए आवागमन आसान हो जाएगा।
परियोजना के लागू होने पर दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी। अनुमान है कि यह सफर ढाई से तीन घंटे के भीतर पूरा हो सकता है। वर्तमान में सड़क मार्ग से यह यात्रा ट्रैफिक और मौसम के कारण अक्सर लंबी हो जाती है। तेज रफ्तार कॉरिडोर बनने से समय की बचत के साथ-साथ यात्रा अधिक आरामदायक होगी। इस परियोजना का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हरिद्वार और ऋषिकेश में होटल, हॉलिडे होम और सर्विस अपार्टमेंट की मांग बढ़ने की संभावना है। वहीं मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
पर्यावरणीय मंजूरी और लागत बड़ी चुनौती
हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। रुड़की से ऋषिकेश के बीच का हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क और अन्य पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए वन और पर्यावरण से जुड़ी सख्त मंजूरियां लेनी होंगी। यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है और परियोजना की लागत भी बढ़ा सकती है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। कई शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों से गुजरने के कारण भूमि की उपलब्धता और पुनर्वास की प्रक्रिया जटिल हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में ट्रैक बिछाने और स्टेशन विकसित करने की लागत भी सामान्य मैदान क्षेत्रों की तुलना में अधिक होगी। इस परियोजना को बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवहन योजना नहीं, बल्कि दिल्ली-मेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश बेल्ट के लिए एक आर्थिक कॉरिडोर साबित हो सकती है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर यातायात की समस्या कम होगी और तीनों शहरों के बीच यात्रा सुगम बनेगी। विशेष रूप से तीर्थ सीजन और पर्यटन सीजन में यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। अब इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों और एनसीआरटीसी द्वारा आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी और चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। उत्तराखंड और दिल्ली के बीच तेज रफ्तार रेल संपर्क बनने से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

